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लोनिवि मंत्री महाराज ने परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में रखे कई सुझाव

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लोनिवि मंत्री महाराज ने परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में रखे कई सुझाव

उत्तराखंड की नदियों में होगी वैज्ञानिक ड्रेजिंग, बाढ़ सुरक्षा पर केंद्र के साथ बनी संयुक्त कार्ययोजना

देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड की प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग और बाढ़ सुरक्षा उपायों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मंथन शुरू कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड की ओर से कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

नई दिल्ली के ट्रांसपोर्ट भवन स्थित सागर मंथन हाल में परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में बैठक आयोजित की गई। इसमें व्यास, रावी, भागीरथी, अलकनंदा और तीस्ता समेत प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग तथा बाढ़ से बचाव के लिए राज्यों की संयुक्त कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

बैठक में सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तरकाशी से गंगोत्री के बीच करीब 100 किलोमीटर का क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील है। इस क्षेत्र में नदी तल में बड़ी मात्रा में बोल्डर और मलबा जमा होने से नदी का स्तर ऊंचा हो सकता है। कई स्थानों पर नदी में झील जैसी स्थिति बनने की आशंका भी रहती है। ऐसे में नदी किनारे गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।

महाराज ने हर्षिल के निकट बनी कृत्रिम झील का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि राजमार्ग-34 की सुरक्षा के लिए वहां करीब 200 मीटर लंबा बांध बनाया गया है। इसके बावजूद लगभग 600 मीटर हिस्से में सड़क को एक से डेढ़ मीटर तक ऊंचा उठाने की आवश्यकता है, ताकि संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति में राजमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रेलवे परियोजनाओं में सड़क यातायात के लिए स्केप टनल का सुझाव

बैठक के दौरान सतपाल महाराज ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक पत्र भी सौंपा। इसमें उन्होंने उत्तराखंड में प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर, बागेश्वर-कर्णप्रयाग और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल परियोजनाओं में बनने वाली स्केप टनल को दो लेन मोटर वाहन यातायात के लिए उपयोगी बनाने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि इन टनलों को रेलवे और सड़क परिवहन मंत्रालय की संयुक्त सहभागिता से इस तरह विकसित किया जाए, जिससे जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल सड़क यातायात के लिए भी किया जा सके। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा या सड़क बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।

इसके अलावा महाराज ने तिलवाड़ा-मायली-गुप्तकाशी मोटर मार्ग को दो लेन में विकसित कर सुपर मार्ग के रूप में तैयार करने का भी अनुरोध किया।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। इसमें विभिन्न राज्यों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा नदियों में ड्रेजिंग, बाढ़ सुरक्षा और संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।


कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा होगी हाईटेक, AI और आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों को लेकर बैठक आपात स्थिति में रिस्पांस टाइम घटाने पर जोर, कुंभ से पहले होंगी नियमित मॉक ड्रिल

देहरादून। कुंभ मेला-2027 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और संभावित आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को लेकर सरकार ने अभी से कवायद तेज कर दी है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि मेले से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

मुख्य सचिव ने पूरे कुंभ क्षेत्र के लिए क्षेत्रवार आपातकालीन और सेक्टरवार निकासी योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक प्लान, इवेक्यूएशन प्लान और फायर कंट्रोल मैकेनिज्म को शामिल करते हुए एक समेकित आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने को कहा। इसमें भूकंप, बाढ़ के साथ-साथ केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल एवं न्यूक्लियर (सीबीआरएन) आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट एसओपी भी तैयार की जाएगी।

उन्होंने बाढ़, भूकंप और सीबीआरएन आपदाओं से निपटने के लिए जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केवल उपकरण खरीदना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित रखरखाव, संचालन की स्थिति और संबंधित कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी जरूरी है। उपकरणों की कमी का आकलन कर एसडीआरएफ के माध्यम से कुंभ मेला-2027 के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने एटीएस को और मजबूत करने पर जोर देते हुए पर्वों और मेले के पीक टाइम को ध्यान में रखकर नियमित मॉक ड्रिल कराने को कहा। मॉक ड्रिल के दौरान वास्तविक आपात स्थिति जैसी परिस्थितियां बनाकर वैकल्पिक मार्गों और रिस्पांस मैकेनिज्म की प्रभावशीलता परखी जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी तैयारियों का मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करना होना चाहिए।

बैठक में एआई और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कुंभ मेले के दौरान विभिन्न विभागों से मिलने वाली सूचनाओं और अनुभवों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में बड़े आयोजनों की तैयारियों में इसका उपयोग किया जा सके। इसके लिए आईटीडीए, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित संस्थाओं से तकनीकी सहयोग लेने के साथ आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सेवाएं लेने को भी कहा गया।

उन्होंने मेले के दौरान कम्युनिकेशन मैनेजमेंट को मजबूत करने के निर्देश दिए। अफवाहों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करने तथा पीक टाइम में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए मोबाइल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने को कहा गया। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त मोबाइल टावर और अन्य संचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य सचिव ने कंट्रोल रूम को मजबूत करने और सभी संबंधित विभागों के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित कर तैयारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 बड़े स्तर का आयोजन है, इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें और किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, विनय शंकर पाण्डेय, आयुक्त गढ़वाल आनन्द स्वरूप और मेलाधिकारी सोनिका समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं जिलाधिकारी मौजूद रहे।


डीडीआरसी केंद्र का सचिव समाज कल्याण ने किया निरीक्षण, दिव्यांगजनों को समयबद्ध सेवाएं देने के निर्देश

दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सहायक उपकरणों की व्यवस्था का लिया जायजा

देहरादून। समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांगजनों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और पुनर्वास सेवाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्वांकी ने गुरुवार को जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) का निरीक्षण किया। उन्होंने गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय परिसर स्थित केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए अधिकारियों से विभिन्न सेवाओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने दिव्यांगजनों के पंजीकरण, मूल्यांकन, परामर्श, पुनर्वास और सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र में रखे अभिलेखों और संचालित विभिन्न गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए।

योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने पर जोर

सचिव ने कहा कि केंद्र में आने वाले दिव्यांगजनों को सरकार की योजनाओं और पुनर्वास सेवाओं का लाभ बिना अनावश्यक देरी के मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों तक विभागीय योजनाओं की पहुंच बढ़ाई जाए और सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जरूरतमंद लोगों तक सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

केंद्र को और दिव्यांगजन हितैषी बनाने के निर्देश

सचिव ने डीडीआरसी की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने के साथ इसे अधिक दिव्यांगजन हितैषी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और दिव्यांगजनों को अधिक सुविधाजनक एवं प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, एसीएमओ डॉ. चौहान, जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र के कर्मचारी तथा गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।


जिला चिकित्सालय चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लोकार्पण

चंपावत में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम- मुख्यमंत्री

चंपावत।  जिला चिकित्सालय चंपावत में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का गुरूवार को लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत को आदर्श जिला बनाने के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत उनके लिए केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलेगी। इस सुविधा के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को आवश्यक जीवनरक्षक रक्त घटक समय पर उपलब्ध हो सकेंगे। चंपावत जिले में पहली बार यह सुविधा उपलब्ध हुई है। इससे पहले कुमाऊं मंडल के जिला चिकित्सालयों में यह सुविधा रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में उपलब्ध थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला चिकित्सालय चंपावत में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही सीटी स्कैन, एमआरआई और डायलिसिस यूनिट जैसी सुविधाएं स्थापित की जा चुकी हैं। जिला चिकित्सालय में लगभग 11.71 करोड़ रुपये की लागत से लोअर ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग तथा प्रथम एवं द्वितीय तल पर डायग्नोस्टिक विंग और ऑपरेशन थिएटर का निर्माण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार ने चंपावत को आदर्श जिला बनाने का संकल्प लिया है और इस दिशा में विभिन्न क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न मोटर मार्गों के निर्माण एवं चैड़ीकरण के कार्यों के साथ ही जाम की समस्या के समाधान के लिए आधुनिक पार्किंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। चंपावत रोडवेज स्टेशन में 62 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक बहुमंजिला पार्किंग एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। मां पूर्णागिरि धाम, रीठा साहिब और पर्यटन आवास गृह में भी पार्किंग सुविधाओं का विकास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मजबूत आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। जिले में 66 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक सिटी ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है। भूमिगत विद्युत लाइनों का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही 240 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जिले की पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। साइंस सेंटर, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज और आधुनिक आईएसबीटी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी चंपावत के विकास को नई दिशा प्रदान कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपावत को विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में उत्तराखंड का आदर्श मॉडल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चंपावत के विकास का कोई भी सपना अधूरा नहीं रहने दिया जाएगा और जिले के प्रत्येक गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और जन-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। जिला चिकित्सालय चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना से गंभीर एवं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को आवश्यक रक्त घटक स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ ही उन्हें अन्य जिलों के अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।

इस अवसर पर सचिव स्वास्थ्य विनय शंकर पाण्डेय, दायित्वधारी सुभाष बगौली, विधायक प्रतिनिधि चंपावत प्रकाश चन्द्र तिवारी, भाजपा नेता सतीश पाण्डेय, वर्चुअल माध्यम से जिला पंचायत अध्यक्ष चंपावत आनन्द सिंह अधिकारी, चम्पावत के भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद चम्पावत श्रीमती प्रेमा पाण्डेय, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद लोहाघाट गोविन्द वर्मा, दायित्वधारी  श्याम नारायण पाण्डेय, मनोज कालाकोटी, मुकेश महराना, हेमा जोशी, किरन देवी, बलाॅक प्रमुख चम्पावत श्रीमती अंचला बोहरा, भाजपा के जिला महामंत्री मुकेश कलखुड़िया एवं अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद थे।


देहरादून में भागवत कथा के दौरान चेन चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा, चार गिरफ्तार

देहरादून। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर दून पुलिस ने भागवत कथा और धार्मिक आयोजनों के दौरान महिलाओं के गहने चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पंजाब के पटियाला से जुड़े समाना गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। आरोपितों के कब्जे से चोरी की तीन सोने की चेन, 10 हजार रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल होने वाला चेन कटर बरामद किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 10 अगस्त को पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र के जीएमएस रोड स्थित एक होटल में भागवत कथा का आयोजन किया गया था। इस दौरान चार महिलाओं के गले से चेन और मंगलसूत्र चोरी होने की घटनाएं सामने आई थीं। पीड़ित महिलाओं की शिकायत पर पुलिस ने तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर प्रभारी निरीक्षक पटेलनगर के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गईं। टीमों ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और पीड़ित महिलाओं समेत आयोजन में मौजूद अन्य लोगों से पूछताछ की। संदिग्धों के हुलिए के आधार पर पुलिस ने पहले इस तरह की घटनाओं में शामिल रहे अपराधियों की जानकारी भी जुटाई।

सोशल मीडिया से धार्मिक आयोजनों की तलाश

जांच के दौरान पुलिस को पंजाब के पटियाला से सक्रिय एक चेन चोर गिरोह के बारे में जानकारी मिली। पुलिस ने गिरोह की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया।

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए अलग-अलग शहरों में होने वाली भागवत कथाओं और धार्मिक आयोजनों की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य आयोजन स्थल पर पहुंचते थे। इनमें अधिकतर महिलाएं होती थीं, जो भजन-कीर्तन में शामिल होने के बहाने भीड़ में घुल-मिल जाती थीं।

मौका मिलते ही गिरोह की महिलाएं आयोजन में आई महिलाओं के गले से चेन और अन्य आभूषण चोरी कर लेती थीं। वारदात के बाद गिरोह के अन्य सदस्य आयोजन स्थल के बाहर कार में उनका इंतजार करते थे और सभी आरोपी वहां से फरार हो जाते थे।

दोबारा वारदात की फिराक में थे आरोपी

पुलिस को 19 अगस्त को सूचना मिली कि गिरोह के कुछ सदस्य दोबारा देहरादून लौटे हैं और किसी अन्य वारदात को अंजाम देने की तैयारी में हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने हरिद्वार बायपास रोड पर चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान दो महिलाओं समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान पटियाला निवासी अजय सिंह, गुरुप्रीत सिंह, हरजिन्दर कौर उर्फ रानी और पूजा कौर उर्फ लाडी के रूप में हुई है।

पुलिस ने आरोपितों के पास से तीन पीली धातु की चेन, 10 हजार रुपये नकद, चेन काटने वाला कटर और वारदात में इस्तेमाल होंडा सिटी कार बरामद की है।

पुलिस अब आरोपितों के आपराधिक रिकॉर्ड और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने देहरादून के अलावा अन्य शहरों में कितनी वारदातों को अंजाम दिया है।


डिमटा बैंड के पास NH-707A का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त, दोनों तरफ से यातायात पूरी तरह ठप

यात्रियों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच सड़कें और राजमार्ग प्रभावित होने का सिलसिला जारी है। देर रात डिमटा बैंड के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-707ए का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर टूट गया। सड़क का हिस्सा टूटने से कैम्पटी-यमुना ब्रिज मार्ग पर दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। इससे मसूरी और यमुना घाटी के बीच सफर करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

सड़क टूटने की जानकारी मिलते ही कैम्पटी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभाली। थानाध्यक्ष कैम्पटी योगेंद्र सिंह गुसाईं ने वाहन चालकों और यात्रियों से फिलहाल मसूरी से यमुना ब्रिज की ओर यात्रा न करने की अपील की है। वहीं यमुना घाटी से मसूरी की तरफ आने वाले वाहनों को भी इस मार्ग का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है।

पुलिस ने लोगों से कहा है कि जब तक प्रशासन की ओर से मार्ग खोलने को लेकर आधिकारिक सूचना जारी नहीं होती, तब तक वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। क्षतिग्रस्त सड़क के आसपास जाने से भी लोगों को बचने की सलाह दी गई है। मार्ग बंद होने से स्थानीय निवासियों के साथ पर्यटकों और अन्य यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क बहाली के लिए वैकल्पिक रास्ते पर काम की तैयारी

एनएच-707ए के अधिशासी अभियंता विपुल सैनी ने बताया कि डिमटा बैंड के समीप सड़क का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। विभागीय टीम मौके का निरीक्षण करेगी। उन्होंने बताया कि सड़क को पहाड़ की तरफ से कटिंग कर वैकल्पिक रूप से तैयार करने की संभावना पर काम किया जाएगा, ताकि यातायात को जल्द बहाल किया जा सके।

फिलहाल मार्ग की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, क्षतिग्रस्त हिस्से से दूर रहने और मार्ग बहाली से संबंधित आधिकारिक सूचना का इंतजार करने की अपील की है।


रायपुर की 16 ग्राम पंचायतों में मजबूत होगा कचरा प्रबंधन, पर्यावरण सखियों को मिला नया वाहन

देहरादून। विकासखंड रायपुर की 16 ग्राम पंचायतों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में पहल की गई है। एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से वेस्ट वॉरियर्स संस्था द्वारा संचालित ‘Waste No More in Dehradun’ परियोजना के तहत पर्यावरण सखी मॉडल के जरिए गांवों में कचरा संग्रहण और प्रबंधन का काम किया जा रहा है। इसी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पर्यावरण सखियों को नया कचरा संग्रहण वाहन सौंपा गया।

खंड विकास कार्यालय, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण सखियों को वाहन उपलब्ध कराया गया। इससे घर-घर से कचरा एकत्र करने के साथ उसे सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संग्रहण केंद्र तक पहुंचाने में सुविधा होगी। अधिकारियों के मुताबिक नए वाहन से पर्यावरण सखियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और अधिक घरों तक नियमित कचरा संग्रहण सेवा पहुंचाई जा सकेगी।

कार्यक्रम के दौरान खंड विकास अधिकारी अपर्णा बहुगुणा की अध्यक्षता में बैठक भी हुई। जिला पंचायत सदस्य वीर सिंह चौहान, ब्लॉक प्रमुख सरोजनी ज्वाड़ी, एबीडीओ मोहन लाल रतूड़ी, ग्राम प्रधान धनौला सोनिया थापा और स्वजल सामुदायिक विशेषज्ञ मंजू जोशी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पर्यावरण सखियों के प्रयासों की सराहना करते हुए नए वाहन को ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता व्यवस्था के लिए अहम कदम बताया।

10 स्थानीय महिलाएं संभाल रहीं जिम्मेदारी

पर्यावरण सखी समूह में 10 स्थानीय महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं घर-घर जाकर सूखा कचरा एकत्र करती हैं और उसे धनौला स्थित केंद्र तक पहुंचाती हैं। केंद्र में कचरे को 18 से 20 अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका व्यवस्थित प्रबंधन किया जाता है।

पहले पर्यावरण सखियां ई-लोडर के माध्यम से कचरा संग्रहण का काम कर रही थीं। नए वाहन के मिलने से संग्रहण और परिवहन की प्रक्रिया अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। इससे गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में वेस्ट वॉरियर्स की ओर से नवीन कुमार सदाना, विनोद सोलंकी और असलम खान मौजूद रहे। वहीं पर्यावरण सखियों में आरती ज्वाड़ी, बीना रावत, पूजा और शांति समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहीं।


सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर बैठक, वेतन वृद्धि और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर

सफाई कर्मचारियों के रिक्त पदों पर जल्द होगी भर्ती

देहरादून। उत्तराखंड में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार को लेकर पंचायती राज निदेशालय, आईटी पार्क में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री भगवत प्रसाद मकवाना की पहल पर हुई बैठक की अध्यक्षता सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा ने की। बैठक में प्रदेशभर के सफाई कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी, आयोग के सदस्य, नगर निकायों के आयुक्त और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में सफाई कर्मचारियों के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती, नए स्थायी पदों के सृजन और समाप्त किए गए पदों को बहाल करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। आयोग के उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और नगर निकायों के विस्तारित क्षेत्रफल को देखते हुए पर्यावरण मित्रों और पर्यवेक्षकों के पदों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

उन्होंने मोहल्ला स्वच्छता समितियों और आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों को उपनल कर्मियों के समान वेतन देने की मांग की। साथ ही दैनिक वेतन, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक और तदर्थ कर्मचारियों में से विनियमितीकरण नियमावली-2025 के तहत 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी रखी गई।

ठेकेदारी प्रथा खत्म करने और कल्याण कोष की मांग

बैठक में सफाई कार्य से ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने, मयूर विहार में वाल्मीकि छात्रावास एवं प्रशिक्षण केंद्र के लिए भूमि उपलब्ध कराने और नमस्ते योजना के तहत सीवर व सेप्टिक टैंक की सफाई में लगे कर्मचारियों का पंजीकरण कराने की मांग उठी। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों के लिए कल्याण कोष बनाने, भूमि एवं आवास की सुविधा देने, कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने तथा राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के स्थायी पदों का ढांचा स्वीकृत करने की मांग भी सामने रखी गई।

वेतन वृद्धि पर शासन स्तर से कार्रवाई का आश्वासन

सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा ने कहा कि सफाई कर्मचारी नगर निकायों की व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पद सृजन सहित शासन स्तर से जुड़े मामलों को उच्च स्तर पर रखा जाएगा। सफाई कर्मचारियों के वेतन बैंड को एक इंडेक्स से जोड़कर अन्य कर्मचारियों की तरह वेतन वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

उन्होंने सभी नगर आयुक्तों को निर्देश दिए कि आउटसोर्स कर्मचारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और जहां भी उपकरणों की कमी हो, वहां तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

ईएसआई, पीएफ और स्वास्थ्य जांच की सुविधा होगी सुनिश्चित

सचिव ने प्रत्येक सफाई कर्मचारी को ईएसआई और पीएफ का लाभ दिलाने के लिए तत्काल समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को भूमि और आवास उपलब्ध कराने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। निजी भूमि रखने वाले सफाई कर्मचारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना में प्राथमिकता देने और भवन निर्माण के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की संभावनाएं भी देखी जाएंगी।

नगर निकायों के आयुक्तों को सभी सफाई कर्मचारियों के गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अगले तीन माह में विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए। प्रत्येक कर्मचारी का साल में कम से कम एक बार संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण कराने और बीमारी सामने आने पर समयबद्ध उपचार सुनिश्चित करने को कहा गया। सचिव ने यह भी कहा कि सफाई कर्मचारियों के लिए जल्द ही कल्याण कोष स्थापित किया जाएगा।

बैठक में विभिन्न सफाई कर्मचारी संगठनों के अध्यक्ष और महामंत्रियों ने कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को अधिकारियों के सामने रखा। अधिकारियों ने सभी मुद्दों पर चर्चा करते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

बैठक में निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी, मुख्य नगर आयुक्त देहरादून आलोक पांडेय, मुख्य नगर आयुक्त हरिद्वार नंदन कुमार, निदेशक पंचायती राज निधि यादव, प्रभारी सचिव सफाई कर्मचारी आयोग विनोद कौर समेत प्रदेश के 12 सफाई कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और आयोग के सदस्य मौजूद रहे।


वन, वन्यजीव और समुदायों की रक्षा को अपने करियर की सफलता का पैमाना बनाएं- उपराष्ट्रपति

देहरादून में IFS प्रशिक्षुओं को उपराष्ट्रपति का संदेश, बोले- ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से करें सेवा

देहरादून। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2025-27 बैच के परिवीक्षार्थियों और प्रशिक्षण ले रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से पर्यावरण संरक्षण, विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाते हुए देश के सतत भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए आने वाले दशकों में इन्हीं अधिकारियों के कंधों पर देश के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि भारत की पारिस्थितिक सुरक्षा मजबूत करने और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने में भारतीय वन सेवा की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

विकास और संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं

सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। दोनों के बीच संतुलन कायम करते हुए पारिस्थितिक सुरक्षा, स्थानीय लोगों की आजीविका, वर्तमान जरूरतों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों से व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय टीम की सफलता पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही मजबूत संस्थानों और राष्ट्रों की नींव तैयार करते हैं। उपराष्ट्रपति ने जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ पीढ़ियों से सामंजस्य बनाकर रहने वाले स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भी सम्मान देने की जरूरत बताई।

‘सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं’

लोक सेवा में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सत्यनिष्ठा से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कठिन परिस्थितियों में संविधान, कानून, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यापक जनहित को निर्णय का आधार बनाने की अपील की।

उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रभावी और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।

वन प्रबंधन में तकनीक को अपनाने पर जोर

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक तकनीक वानिकी क्षेत्र को नई दिशा दे रही है। उन्होंने नई पीढ़ी के वन अधिकारियों से रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और जनसंवेदनशीलता के साथ करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत के सतत भविष्य के लिए आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और देश के पारंपरिक एवं सभ्यतागत ज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनाना होगा।

वन सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना सकारात्मक बदलाव

उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा बैच में करीब 17 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो सकारात्मक बदलाव और नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे अपने करियर की सफलता का आकलन केवल पद और जिम्मेदारियों से न करें। उनकी वास्तविक उपलब्धि इस बात से तय होनी चाहिए कि उन्होंने कितने जंगलों को पुनर्जीवित किया, कितने वन्यजीवों का संरक्षण किया, कितने समुदायों का विश्वास जीता और आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी विरासत छोड़ी।

उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ काम करना ही लोक सेवा का मूल उद्देश्य होना चाहिए।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लोंगजाम समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


एमडीडीए की ऑनलाइन मानचित्र प्रणाली होगी और अधिक पारदर्शी

ऑटो रिजेक्ट और डुप्लीकेट पत्रावलियों का होगा समाधान, समय-सीमा से पहले अधिकारियों को मिलेगा अलर्ट

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्राधिकरण में ऑनलाइन मानचित्र पत्रावलियों के निस्तारण, तकनीकी खामियों, डिजिटल डाटा की सुरक्षा और वित्तीय मॉड्यूल को लेकर आयोजित बैठक में उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि तकनीकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए और आवेदकों को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही लंबित पत्रावलियों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

399 पत्रावलियों को दोबारा प्रस्तुत कराने के निर्देश
बैठक में सामने आया कि एमडीडीए में ऑनलाइन प्राप्त मानचित्र संबंधी कुल 399 पत्रावलियां निर्धारित समय-सीमा पूरी होने के बाद सिस्टम में उत्पन्न तकनीकी त्रुटि के कारण स्वतः Auto Reject अथवा Deemed Approved हो गई थीं। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने निर्देश दिए कि ऐसी सभी पत्रावलियों को वर्तमान स्थिति में निरस्त करते हुए संबंधित आवेदकों से उन्हें दोबारा Resubmit कराया जाए। इसके बाद प्रत्येक प्रकरण की नियमानुसार ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि तकनीकी कारणों से किसी आवेदक को परेशानी नहीं होनी चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके।

डुप्लीकेट फाइलों पर लगेगी रोक
ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली में एक ही आवेदन के सापेक्ष दोहरी अथवा Duplicate Files स्वतः जनरेट होने का मामला भी बैठक में सामने आया। इस पर उपाध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को तकनीकी खामी का परीक्षण कर प्रभावित पत्रावलियों को शीघ्र Rectify करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिस्टम में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे भविष्य में एक ही आवेदन के सापेक्ष डुप्लीकेट पत्रावली तैयार न हो। इसके लिए आवश्यक तकनीकी सुधार प्राथमिकता से किए जाएं।

समय-सीमा से पहले मिलेगा अलर्ट
मानचित्र पत्रावलियों के निस्तारण की निर्धारित समय-सीमा को देखते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को समय रहते सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए। इसके तहत ऑनलाइन प्रणाली में Pop-up, Notification और Alert की सुविधा विकसित की जाएगी। इससे संबंधित अधिकारी को समय-सीमा पूरी होने से पहले लंबित पत्रावली की जानकारी मिल सकेगी और उसके निस्तारण के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा। इससे पत्रावलियों के स्वतः Auto Reject अथवा Deemed Approved होने की स्थिति को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।

एमडीडीए का होगा अपना Dedicated Server
बैठक में प्राधिकरण के डिजिटल डाटा की सुरक्षा को भी प्रमुखता से उठाया गया। उपाध्यक्ष ने एमडीडीए के महत्वपूर्ण डाटा को साइबर हमलों और तकनीकी जोखिमों से सुरक्षित रखने के लिए Dedicated Server विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही सुरक्षित बैकअप व्यवस्था तैयार करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा प्राधिकरण के लिए AI आधारित एप्लिकेशन/सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए। इसमें एमडीडीए से संबंधित आवश्यक डाटा और अभिलेख एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगे। एक ही सर्च के माध्यम से संबंधित जानकारी शीघ्र प्राप्त की जा सकेगी, जिससे अधिकारियों के कामकाज में तेजी आएगी और रिकॉर्ड प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा।

वित्तीय प्रविष्टियों का प्रतिदिन होगा Reconciliation
बैठक में एमडीडीए के Finance Module की भी समीक्षा की गई। उपाध्यक्ष ने निर्देश दिए कि प्रतिदिन की सभी वित्तीय प्रविष्टियों और पत्रावलियों का Reconciliation उसी दिन अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। किसी भी वित्तीय प्रकरण को अगले दिन के लिए लंबित न रखा जाए। इसके साथ ही प्राधिकरण की लंबित Balance Sheets को प्राथमिकता के आधार पर तैयार और अद्यतन करने के निर्देश दिए गए। उपाध्यक्ष ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के साथ वित्तीय कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

व्यवस्था होगी पारदर्शी – बंशीधर तिवारी
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि एमडीडीए में ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना प्राधिकरण की प्राथमिकता है। तकनीकी खामी के कारण किसी आवेदक को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। 399 प्रभावित पत्रावलियों को नियमानुसार दोबारा प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए गए हैं। डुप्लीकेट फाइलों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। समय-सीमा से पहले अधिकारियों को अलर्ट की सुविधा दी जाएगी। साथ ही डिजिटल डाटा की सुरक्षा के लिए Dedicated Server और AI आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा। वित्तीय कार्यों में भी प्रतिदिन Reconciliation और लंबित Balance Sheets को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।

समयबद्ध निस्तारण पर जोर- मोहन सिंह बर्निया
सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि ऑनलाइन मानचित्र प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी कमियों को चिन्हित कर उनका समाधान किया जा रहा है। अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में पत्रावलियों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डाटा सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।


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