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राखी के कारोबार से आत्मनिर्भर बन रहीं देहरादून की महिलाएं

Category Archives: उत्तराखंड

राखी के कारोबार से आत्मनिर्भर बन रहीं देहरादून की महिलाएं

मालदेवता में सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार से मचाई धूम

देहरादून। रक्षाबंधन से पहले देहरादून के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के हुनर को बाजार मिल रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इन दिनों हाथ से तैयार की गई आकर्षक राखियों को बाजार में उतार रही हैं। रायपुर, सहसपुर और डोईवाला की महिलाएं राखी निर्माण को रोजगार का माध्यम बनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।

मालदेवता की सास-बहू ने राखी कारोबार में बनाई पहचान

रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की लीला रावत और उनकी बहू अलका रावत ने मिलकर राखी कारोबार को नई पहचान दी है। दोनों आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के तहत काम कर रही हैं। इस साल उन्होंने दो हजार से ज्यादा राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें करीब 1,500 राखियां अब तक बन चुकी हैं।

पिछले साल 1200 राखियों से कमाया 25 हजार रुपये मुनाफा

लीला और अलका ने बताया कि पिछले साल प्रशासन की मदद से उन्हें राखियों के लिए बेहतर बाजार मिला। उन्होंने करीब 1,200 राखियां तैयार कर बाजार में बेचीं, जिससे लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। कारोबार से मिले प्रोत्साहन के बाद इस बार दोनों ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।

प्राइवेट नौकरी छोड़ शुरू किया खुद का काम

अलका रावत ने पिछले साल निजी नौकरी छोड़कर अपनी सास के साथ स्वरोजगार शुरू किया। दोनों ने मालदेवता में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। यहां राखियों के अलावा दूसरे हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी तैयार कर बेचे जाते हैं। अलका के मुताबिक, स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें कारोबार बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के बेहतर अवसर मिले हैं।

सोशल मीडिया से भी मिल रहे ऑर्डर

महिलाओं ने अपने कारोबार को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ लिया है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम पेज के जरिए ग्राहकों से राखियों के ऑर्डर मिल रहे हैं। ऑनलाइन ऑर्डर मिलने से उनके उत्पादों की पहुंच स्थानीय बाजार से बाहर भी बढ़ रही है।

ऊन से क्रोशिया तक, कई डिजाइनों में राखियां

समूह की महिलाएं ऊन, क्रोशिया, मौली, रिबन समेत अलग-अलग सामग्री का इस्तेमाल कर राखियां तैयार कर रही हैं। पारंपरिक डिजाइनों के साथ भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू जैसे आकर्षक डिजाइन भी ग्राहकों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। राखियों की डिजाइनिंग से लेकर पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार तक का काम महिलाएं खुद संभाल रही हैं।

सहसपुर और डोईवाला की महिलाएं भी आगे

रायपुर के अलावा सहसपुर और डोईवाला विकासखंड में भी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बड़े स्तर पर राखियां बना रही हैं। डोईवाला की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन से जुड़े वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों की करीब 100 महिलाएं राखियां तैयार कर रही हैं। इनकी बिक्री रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है।

सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर से जुड़ी महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनके उत्पादों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ सेलाकुई, सहसपुर और विकासनगर के बाजारों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

देहरादून के प्रमुख मॉल में लगेंगे राखी स्टॉल

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि महिलाओं को उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन लगातार काम कर रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर देहरादून के तीन से चार प्रमुख मॉल में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के राखी स्टॉल लगाए जाएंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और अन्य उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को बढ़ावा दें।

24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में भी बिक्री

सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार के अनुसार मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर एनआरएलएम से जुड़ी महिलाएं राखियों के साथ पहाड़ी और अन्य स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री करेंगी।

राखी निर्माण के जरिए देहरादून की ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक हुनर को कारोबार में बदल रही हैं। मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी से लेकर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।


रुद्रप्रयाग में गैस उपभोक्ताओं को मिली राहत, ई-केवाईसी के लिए 23 अगस्त तक बढ़ी तारीख

13,551 गैस उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी बाकी

रुद्रप्रयाग। गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। रुद्रप्रयाग जिले में गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी पूरी करने की अंतिम तारीख अब 23 अगस्त कर दी गई है। जिले में करीब 95,500 गैस कनेक्शन हैं, जिनमें से अधिकांश उपभोक्ता अपना सत्यापन करा चुके हैं। हालांकि अभी भी 13,551 कनेक्शन ऐसे हैं, जिनकी ई-केवाईसी पूरी होना बाकी है। विभाग ने सभी लंबित कनेक्शनों का सत्यापन तय समय के भीतर कराने के निर्देश दिए हैं।

20 गैस एजेंसियों को शत-प्रतिशत ई-केवाईसी के निर्देश

पूर्ति अधिकारी के.एस. कोहली के मुताबिक जिले में 20 गैस एजेंसियों के जरिए उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति की जा रही है। सभी एजेंसियों को 23 अगस्त तक लंबित ई-केवाईसी पूरी कराने को कहा गया है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जरूरत पड़ने पर गांवों और अन्य स्थानों पर विशेष शिविर भी लगाए जा सकते हैं।

बाहर रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी व्यवस्था

विभाग के अनुसार जिले के कई गैस कनेक्शन ऐसे हैं, जिनके उपभोक्ता रोजगार के कारण दूसरे राज्यों या विदेशों में रह रहे हैं। ऐसे मामलों में परिवार के किसी सदस्य के नाम कनेक्शन ट्रांसफर कराया जा सकता है, ताकि आगे गैस रिफिल लेने में परेशानी न हो।

मृतक उपभोक्ताओं के कनेक्शन का भी होगा निस्तारण

विभाग ने मृतक उपभोक्ताओं के नाम दर्ज गैस कनेक्शनों का भी सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे कनेक्शनों को नियमानुसार परिवार के पात्र सदस्य के नाम स्थानांतरित करने या कनेक्शन सरेंडर करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

ई-केवाईसी नहीं कराई तो रिफिल में आ सकती है दिक्कत

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर ई-केवाईसी नहीं कराने पर भविष्य में गैस सिलेंडर की रिफिल लेने में परेशानी हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक रिफिल नहीं कराने वाले कनेक्शनों का दोबारा सत्यापन भी करना पड़ सकता है। विभाग ने सभी लंबित उपभोक्ताओं से 23 अगस्त से पहले ई-केवाईसी पूरी कराने की अपील की है।


कानून व्यवस्था मजबूत करने को जिला बदर की कार्रवाई, छह अपराधियों पर छह माह की रोक

नैनीताल:  जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की न्यायालय द्वारा गुंडा नियंत्रण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की गई है।आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए छह व्यक्तियों को छह माह के लिए जिला बदर किए जाने के आदेश पारित किए गए हैं।जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल ने जानकारी देते हुए बताया कि आसिफ पुत्र सिराजुद्दीन रहमान, निवासी मेडिकल गली, बनभूलपुरा, के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार इरफान उर्फ शक्ति पुत्र मेहंदी हसन, निवासी गफूर बस्ती, तथा अरशद अली पुत्र स्वर्गीय असगर अली, निवासी शनिबाजार गेट, थाना बनभूलपुरा, के विरुद्ध भी एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज होने के आधार पर कार्रवाई की गई।

शाहनवाज पुत्र अशरफ, निवासी इंदिरा नगर, बनभूलपुरा के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट, चोरी एवं आर्म्स एक्ट से संबंधित कई मामले दर्ज हैं। वहीं राहुल बिष्ट उर्फ राहुल थापा पुत्र वीर बहादुर, निवासी गोकुल नगर, थाना काठगोदाम, के विरुद्ध आर्म्स एक्ट, चोरी तथा जुआ अधिनियम से संबंधित आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। इन सभी को छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश पारित किए गए हैं।

जेल में निरुद्ध आरोपियों के मामले समाप्त

जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय नैनीताल ने कुछ मामलों में परिस्थितियों को देखते हुए गुंडा नियंत्रण कानून के तहत चल रही कार्रवाई समाप्त करने के भी आदेश दिए हैं। अमन गुप्ता पुत्र सीताराम, निवासी लालकुआं, तथा शेखर आर्य उर्फ चंद्रशेखर पुत्र आनंद प्रसाद, निवासी गोलापार, काठगोदाम, वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं। इसी प्रकार मिराज पुत्र मोहम्मद हनीफ, निवासी बनभूलपुरा, भी अन्य मामले में जेल में निरुद्ध है। इन परिस्थितियों को देखते हुए इनके विरुद्ध चल रही गुंडा एक्ट की न्यायालयीन कार्रवाई समाप्त कर दी गई।

पर्याप्त आधार न मिलने पर दो मामलों में नोटिस निरस्त

महेंद्र पुत्र विपिन चंद्र, निवासी गोलापार, थाना काठगोदाम, के विरुद्ध केवल आबकारी अधिनियम का एक मामला दर्ज होने के आधार पर पुलिस द्वारा गुंडा एक्ट की कार्रवाई प्रारंभ की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई से असहमति व्यक्त करते हुए नोटिस निरस्त कर दिया और कार्रवाई समाप्त कर दी।

इसी प्रकार चंदन लोदियाल पुत्र हरेंद्र सिंह, निवासी नथुआखान, पूर्व में ही किसी अन्य मामले में जिला बदर किया जा चुका है। वर्तमान में उसके विरुद्ध पुनः चल रही कार्रवाई का औचित्य नहीं पाए जाने पर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने नोटिस निरस्त करते हुए कार्रवाई समाप्त कर दी।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, ऐसे मामलों में जहां पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं है अथवा कार्रवाई की पुनरावृत्ति का औचित्य नहीं बनता, वहां न्यायालय द्वारा तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर नोटिस निरस्त कर कार्रवाई समाप्त की गई है। इससे एक ओर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का संदेश गया है, वहीं दूसरी ओर विधिसम्मत प्रक्रिया और पर्याप्त आधार के सिद्धांत का भी पालन सुनिश्चित हुआ है।


प्रेमनगर में PG-हॉस्टलों पर दून पुलिस का शिकंजा, 4 संचालकों को नोटिस

देर रात पुलिस टीमों ने चलाया आकस्मिक चेकिंग अभियान, 4 संदिग्ध युवकों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया

देहरादून। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पढ़ाई की आड़ में हुड़दंग और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त छात्र-छात्राओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के उद्देश्य से दून पुलिस ने प्रेमनगर क्षेत्र में स्थित PG एवं हॉस्टलों में आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया।

दिनांक 20 अगस्त की देर रात पुलिस अधीक्षक नगर के नेतृत्व में गठित अलग-अलग पुलिस टीमों ने क्षेत्र के PG एवं हॉस्टलों की सघन जांच की। इस दौरान संचालकों से वहां रहने वाले छात्र-छात्राओं की जानकारी ली गई तथा सभी का शत-प्रतिशत पुलिस सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए।

पुलिस ने हॉस्टल एवं PG संचालकों को परिसर में अनिवार्य रूप से CCTV कैमरे लगवाने, रात्रि 10 बजे के बाद छात्र-छात्राओं के प्रवेश पर नियंत्रण रखने, बाहरी व्यक्तियों को सत्यापन के बाद ही प्रवेश देने तथा आने-जाने वाले व्यक्तियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।

पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई छात्र या छात्रा आपराधिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है अथवा नशीले पदार्थों के सेवन से संबंधित शिकायत मिलती है, तो संबंधित छात्र के साथ-साथ प्रतिष्ठान संचालक के विरुद्ध भी नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

चेकिंग अभियान के दौरान 4 हॉस्टलों में अनियमितताएं पाए जाने पर संबंधित संचालकों को नोटिस जारी किए गए। उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए।

वहीं, देर रात अनावश्यक रूप से घूमते पाए गए 4 संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने लाया गया।

दून पुलिस ने PG एवं हॉस्टल संचालकों को नियमों का कड़ाई से पालन करने तथा अपने प्रतिष्ठानों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी अथवा किसी आपराधिक गतिविधि में संलिप्तता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


नैनीताल में नशीले इंजेक्शन और प्रतिबंधित दवाइयों का भंडाफोड़, मेडिकल स्टोर सील

देहरादून। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एसटीएफ उत्तराखंड और औषधि प्रशासन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुखानी रोड स्थित एक मेडिकल स्टोर पर छापेमारी की। जांच के दौरान मेडिकल स्टोर से व्यवसायिक मात्रा में नशीले इंजेक्शन और नशे में इस्तेमाल होने वाली प्रतिबंधित दवाइयां बरामद की गईं। कार्रवाई के बाद औषधि प्रशासन विभाग ने मेडिकल स्टोर को अग्रिम कार्रवाई तक सील कर दिया।

यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखंड के निर्देशन में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) कुमाऊं यूनिट और औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने जय श्री श्याम मेडिकल स्टोर पर की। टीम ने स्टोर में दवाइयों की जांच की, जिसमें बड़ी मात्रा में ऐसी दवाइयां और इंजेक्शन मिले, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है।

छापेमारी के समय मेडिकल स्टोर संचालक कपिल सिंह, निवासी जवाहरनगर, नगला, पंतनगर और मेडिकल स्टोर स्वामी के पति राहुल वार्ष्णेय, निवासी सावित्री कॉलोनी, हल्द्वानी मौके पर मौजूद थे। दोनों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है।

संयुक्त टीम में एसटीएफ (ANTF) से निरीक्षक पावन स्वरूप, उपनिरीक्षक विनोद जोशी, उपनिरीक्षक जगदीप सिंह नेगी, हेड कांस्टेबल वीरेंद्र चौहान और हेड कांस्टेबल इसरार अहमद शामिल रहे। वहीं, औषधि प्रशासन विभाग की ओर से निरीक्षक शुभम कोटनाला और निरीक्षक अर्चना उप्पल ने कार्रवाई में हिस्सा लिया।


वंदे मातरम् के आधे-अधूरे गायन का निर्णय देश की भावनाओं और शहीदों के बलिदान का अपमान: सीएम धामी 

तुष्टीकरण की राजनीति के लिए कांग्रेस ने पहले भी वंदे मातरम् को बांटा, अब फिर उसी मानसिकता को दोहरा रही है: मुख्यमंत्री

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा वंदे मातरम् के आधे-अधूरे गायन को लेकर लिए गए निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह निर्णय देशविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। यह निर्णय करोड़ों देशवासियों की भावनाओं और उन अमर शहीदों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा और वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति के लिए पहले भी वंदे मातरम् को बांटने का कार्य कर चुकी है और अब स्वतंत्रता के दशकों बाद उसी मानसिकता को दोहराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा हुआ राष्ट्रीय भाव है।

धामी ने कहा कि संभवतः कांग्रेस को इस बात से आपत्ति है कि वंदे मातरम् के पूर्ण गायन में भारत की महान सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा तथा देवी-देवताओं का स्मरण होता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड तो स्वयं देवभूमि है। यहां मां नंदा-सुनंदा, मां धारी देवी, मां पूर्णागिरि, मां ज्वालपा देवी सहित असंख्य देवी-देवताओं के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। ऐसे में देवी-देवताओं का स्मरण और स्तुति हमारी सनातन सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि क्या उसके लिए वोट ही सब कुछ है? क्या राजनीतिक लाभ के लिए देश की भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत से समझौता किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि जब देश की संसद द्वारा कोई कानून बनाया गया है, तो उसका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का दायित्व है। कानून और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं का विरोध करना करोड़ों देशवासियों की भावनाओं का विरोध है।

धामी ने कहा कि कांग्रेस को देश की जनता को जवाब देना चाहिए कि वह वंदे मातरम् के विरोध में क्यों खड़ी है और उन अमर शहीदों के बलिदान की भावना के विपरीत क्यों जा रही है, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वंदे मातरम् उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है, जिनके बलिदान के कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं।


पिंडर घाटी के दुर्गम क्षेत्रों में डीएम अपूर्वा पाण्डे का स्थलीय निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश

बागेश्वर : जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने गुरुवार को पिंडर घाटी के दुर्गम क्षेत्रों एवं विभिन्न गांवों का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क, यातायात, आपदा प्रभावित क्षेत्रों और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

कपकोट-कर्मी मोटर मार्ग के किमी 7 स्थित भूस्खलन क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने जेसीबी एवं पोकलैंड मशीनों की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने मार्ग बाधित होने की स्थिति में तत्काल यातायात सुचारू करने के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध रखने के निर्देश दिए।

कॉजवे, सड़क एवं कलमठों की खराब स्थिति पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने तत्काल मरम्मत एवं रखरखाव के निर्देश दिए तथा कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न करने को कहा।

खाती के समीप वाछम क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़क का निरीक्षण कर पीएमजीएसवाई एवं लोनिवि अधिकारियों को सड़क को सुरक्षित एवं सुचारू बनाने के निर्देश दिए। वहीं खरकिया में ग्रामीणों से संवाद कर धकौरी पैदल ट्रेक रूट की मरम्मत कराने को कहा।

सुराग पुल एवं आपदा प्रभावित सड़क का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने दीर्घकालिक एवं स्थायी समाधान की रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से विद्युत, पेयजल, रोजगार एवं पर्यटन की संभावनाओं पर भी संवाद किया।


मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन

सीएम धामी के विजन को धरातल पर उतार रहा एमडीडीए, सिटी फॉरेस्ट के बाद मियांवाला में एक और पर्यावरणीय तोहफा

जल-सृष्टि पार्क में जल संरक्षण के साथ आमजन के लिए आधुनिक सुविधाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का व्यापक सौंदर्यीकरण कर इसे आधुनिक एवं आकर्षक जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया है। करीब 8.63 करोड़ रुपये की लागत से किए गए इस सौंदर्यीकरण कार्य के बाद वर्षों से उपेक्षित पड़े पुराने जलस्रोत और उसके आसपास का क्षेत्र अब आमजन के लिए प्रकृति, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सुकून का नया ठिकाना बनकर तैयार है।

सिटी फॉरेस्ट के बाद एमडीडीए की यह पहल देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार शहरी विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने पर जोर देते रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप मियांवाला के पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप स्थित जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे आधुनिक पार्क का स्वरूप दिया गया है। परियोजना में जलस्रोत के संरक्षण के साथ आसपास के क्षेत्र का व्यवस्थित सौंदर्यीकरण किया गया है। जल संरक्षण और जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने जल-सृष्टि पार्क का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्क परिसर में रुद्राक्ष का पौधा भी रोपा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में एमडीडीए ऐसी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनसे विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। मियांवाला में जौहड़ की भूमि का सौंदर्यीकरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पार्क में उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी शैली में मुख्य प्रवेश द्वार, योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय और सुरक्षा रेलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। जलीय फूल, मछलियां, पक्षी और हरियाली पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं।

यह पार्क परिवारों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने के साथ शहर में एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के रूप में भी विकसित हुआ है। एमडीडीए की यह परियोजना मुख्यमंत्री धामी के उस विजन को मजबूती देती है, जिसमें शहरों का विकास आधुनिक सुविधाओं के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को ध्यान में रखकर करने पर जोर दिया जा रहा है। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का उदाहरण है, जहां जौहड़ की भूमि और पुराने जलस्रोत को संरक्षित करते हुए उसे जनसुविधा, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया है।

जीर्ण तालाब से खूबसूरत जल-सृष्टि पार्क तक
पंचायत घर गन्ना सेंटर के समीप लंबे समय से उपेक्षित पड़े जौहड़ और तालाब क्षेत्र का कायाकल्प कर एमडीडीए ने इसे आकर्षक पार्क का स्वरूप दिया है। 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि पर किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत तालाब के संरक्षण के साथ आसपास हरित क्षेत्र और जनसुविधाएं विकसित की गई हैं।

नौकायन जैसी गतिविधियों के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं, जबकि जलीय जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। मियांवाला की यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चला जा सकता है।

पारंपरिक पहाड़ी शैली में प्रवेश द्वार, योग डेक और वॉकिंग ट्रैक
जल-सृष्टि पार्क को आधुनिक सुविधाओं के साथ उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति से भी जोड़ा गया है। पार्क का मुख्य प्रवेश द्वार पारंपरिक पहाड़ी शैली में तैयार किया गया है। यहां योग डेक, योग से संबंधित मूर्तिकला, आकर्षक गजीबो, वॉकिंग ट्रैक, गार्डन बेंच, कैंटीन और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। तालाब के आसपास सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है। हरियाली से भरपूर खुले क्षेत्र पार्क की खूबसूरती बढ़ाते हैं। ऐसे में यह पार्क बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और परिवारों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित हुआ है।

सिटी फॉरेस्ट के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम
एमडीडीए की ओर से विकसित जल-सृष्टि पार्क को सिटी फॉरेस्ट के बाद आमजन के लिए एक और पर्यावरणीय तोहफा माना जा रहा है। सिटी फॉरेस्ट की तर्ज पर यह परियोजना भी देहरादून में हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने की सोच को आगे बढ़ाती है। जौहड़ और पुराने जलस्रोत के पुनर्जीवन से जहां क्षेत्र की सुंदरता बढ़ी है, वहीं जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी मजबूती मिलेगी। नौकायन जैसी गतिविधियों के जरिए लोगों को जलस्रोतों से जोड़ने और प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी किया गया है।

विकास में हरियाली और जल संरक्षण को प्राथमिकता
एमडीडीए का जोर अब ऐसी परियोजनाओं पर है, जिनमें विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे। पुराने तालाब, जौहड़, जलस्रोत और हरित क्षेत्रों को संरक्षित कर उन्हें जनोपयोगी स्वरूप देने से शहर को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलने के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव होगा। मियांवाला का जल-सृष्टि पार्क इसी सोच का परिणाम है। यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि 8.63 करोड़ रुपये की लागत से जौहड़ की भूमि के सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को बचाने, प्रकृति को संवारने और आमजन को बेहतर सुविधाएं देने की एकीकृत पहल है।

बंशीधर तिवारी : पुराने जलस्रोतों को बचाना हमारी प्राथमिकता
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून के विकास में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मियांवाला का पुराना तालाब और जौहड़ क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षित था, जिसे 8.63 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ जल-सृष्टि पार्क के रूप में विकसित किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि जलस्रोत का संरक्षण, जलीय जीवों के लिए अनुकूल वातावरण और आमजन को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना है। सिटी फॉरेस्ट के बाद यह एमडीडीए की एक और महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल है। आने वाले समय में भी ऐसे प्राकृतिक जलस्रोतों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने का प्रयास जारी रहेगा।

मोहन सिंह बर्निया : विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण जरूरी
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि मियांवाला जल-सृष्टि पार्क विकास और पर्यावरण संरक्षण का बेहतर उदाहरण है। जौहड़ की भूमि और पुराने तालाब क्षेत्र को संरक्षित कर उसका 8.63 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण किया गया है और इसे जनसुविधाओं से जोड़ा गया है। पार्क में हरियाली, योग, वॉकिंग और नौकायन जैसी सुविधाएं लोगों को प्रकृति से जोड़ेंगी। एमडीडीए भविष्य में भी शहर के प्राकृतिक संसाधनों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जनहित से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा।


चमोली में पीआईबी का ‘वार्तालाप’ एवं क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला कार्यक्रम आयोजित

केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर

स्थानीय मीडिया को सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए तथ्यपरक एवं सकारात्मक पत्रकारिता का आह्वान

स्वास्थ्य, कृषि, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास, नशामुक्ति, स्वरोजगार, जीआई टैग एवं स्थानीय उत्पादों से जुड़ी योजनाओं पर हुई चर्चा

अधिकारियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के बीच जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने को लेकर संवाद

देहरादून/चमोली- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी), देहरादून की ओर से सीमांत जनपद चमोली में ‘वार्तालाप’ एवं क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट, नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर संदीप रावत, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, प्रेस क्लब की संरक्षक क्रांति भट्ट तथा पीआईबी के सहायक निदेशक संजीव सुन्द्रियाल ने किया।

कार्यशाला में केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, स्थानीय उत्पादों, स्वास्थ्य, कृषि, मत्स्य पालन, महिला एवं बाल विकास, नशामुक्ति और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की जानकारी दी, वहीं लाभार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम पूरे जनपद की बेहतरी के लिए लाभदायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया ‘वार्तालाप’ कार्यक्रमों को जनपद के ब्लॉक स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

नगर पालिका अध्यक्ष श्री संदीप रावत ने कहा कि पीआईबी द्वारा मीडिया और अधिकारियों के बीच केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं को लेकर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं ऐसी हैं, जिनका पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होने के कारण लोग उनका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से मीडिया के सहयोग से योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।

कार्यक्रम में प्रेस क्लब की संरक्षक क्रांति भट्ट ने जनपद में प्रेस की चुनौतियों एवं भूमिका के बारे में जानकारी दी। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने जनपद में पत्रकारों की सकारात्मक एवं जनहितकारी पत्रकारिता की सराहना की और सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने नशामुक्त भारत अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में अभियान के तहत 140 नारकोटिक्स किट वितरित किए गए हैं। उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पत्रकारिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा पीआईबी की ओर से विश्वसनीय एवं तथ्यपरक सूचनाओं के प्रसार के लिए आभार व्यक्त किया। जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत बिष्ट ने तमक नाला, नीति घाटी और टीएचडीसी पीपलकोटी में हुई आपदाओं के दौरान जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव सिंह पाल ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले स्थानीय व्यक्ति को राहगीर योजना के तहत 25 हजार रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाती है। इसके अलावा आयुष्मान योजना, जननी सुरक्षा योजना, नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दी गई।

खाद्य पूर्ति अधिकारी अंकित पांडेय ने ई-20 पेट्रोल, किसानों को होने वाले लाभ और पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ई-20 के निर्माण में चावल, मक्का और गन्ने जैसे कृषि उत्पादों का उपयोग किया जाता है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हिमांशु बडोला ने बालिकाओं के लिए संचालित नंदा गौरा योजना की जानकारी देते हुए पात्र लाभार्थियों से समय पर पंजीकरण कराने की अपील की। सहायक निदेशक मत्स्य श्री नितेश कुमार चंद्र ने मत्स्य किसान समृद्धि योजना के तहत ट्राउट मछली उत्पादन और युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी।
जिला समाज कल्याण अधिकारी धनंजय लिंगवाल ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत संचालित कार्यक्रमों, स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक तथा नशामुक्ति केंद्र और काउंसलिंग की व्यवस्था के बारे में जानकारी दी।

जिला उद्यान अधिकारी नितेन्द्र सिंह ने चमोली के स्थानीय और विशिष्ट उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मशरूम और कीवी की खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए जनपद में संचालित फार्मों और उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी साझा की।

मीडिया के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं की जानकारी : संजीव सुन्द्रियाल
कार्यक्रम के आयोजक एवं पीआईबी के सहायक निदेशक श्री संजीव सुन्द्रियाल ने कहा कि सीमांत जनपद चमोली में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य प्रामाणिक और तथ्यपरक जानकारी के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं को मीडिया के जरिए जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि चमोली में तैयार होने वाले स्थानीय उत्पादों और यहां की संस्कृति को पहचान दिलाने के साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे लोगों को अधिक से अधिक लाभ दिलाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के हर गांव और हर घर तक केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचे, इसी मंशा के साथ पीआईबी की ओर से चमोली को इस कार्यक्रम के लिए चुना गया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मीडिया सरकार और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है। मीडिया के माध्यम से योजनाओं की सही और प्रमाणिक जानकारी दूरस्थ गांवों तक पहुंचने से पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

कार्यशाला के दौरान अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों के बीच विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार, स्थानीय मुद्दों तथा सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका को लेकर विस्तृत संवाद हुआ।


गौहरी माफी में सौंग नदी का बढ़ता कटाव बना चुनौती, स्थायी समाधान पर जोर

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मंत्री और विधायक ने किया स्थलीय निरीक्षण, अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। ऋषिकेश क्षेत्र के गौहरी माफी और रायवाला में बाढ़ एवं जलभराव से प्रभावित इलाकों का गुरुवार को आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ने स्थलीय निरीक्षण किया। दोनों ने प्रभावित क्षेत्रों में भू-कटाव, जलभराव और क्षतिग्रस्त पुलिया की स्थिति का जायजा लिया। साथ ही अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति और आगे की कार्ययोजना की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान तहसील प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन, सिंचाई और लोक निर्माण विभाग समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री और विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सुरक्षा कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल पूरा करने को कहा गया।

सौंग नदी के कटाव से गौहरी माफी में बढ़ी परेशानी

गौहरी माफी में सौंग नदी से हो रहे भू-कटाव और नदी का पानी रिहायशी इलाकों में पहुंचने की समस्या का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों से अब तक किए गए सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी लेते हुए मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।

क्षतिग्रस्त पुलिया की डीपीआर जल्द तैयार करने के निर्देश

रायवाला खेल मैदान के पास गौहरी माफी और रायवाला को जोड़ने वाली क्षतिग्रस्त पुलिया का भी निरीक्षण किया गया। सुसुवा नदी के कारण क्षतिग्रस्त हुई इस पुलिया के पुनर्निर्माण या मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग को तत्काल डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि धनराशि की स्वीकृति और आवंटन के लिए प्रस्ताव जिलाधिकारी कार्यालय या जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए।

अड़वाणी प्लॉट में जलभराव का स्थायी समाधान

रायवाला के अड़वाणी प्लॉट क्षेत्र में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की स्थिति भी देखी गई। अधिकारियों को बारिश के दौरान लगातार पंपिंग के जरिए पानी की निकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जरूरी तकनीकी और सुरक्षात्मक कार्यों के प्रस्ताव जल्द तैयार करने को कहा गया।

निरीक्षण के दौरान मदन कौशिक और प्रेमचंद्र अग्रवाल ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से राहत और सुरक्षा कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि आपदा और जलभराव से जुड़ी समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए और दीर्घकालिक समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी की जाए।


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