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उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 80 सड़कें बंद; 28 अगस्त तक मौसम खराब रहने के आसार

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उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 80 सड़कें बंद; 28 अगस्त तक मौसम खराब रहने के आसार

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 23 अगस्त को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। देहरादून, टिहरी, पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी और बागेश्वर के कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश के तेज दौर आने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी मौसम से राहत मिलने के आसार कम हैं। 28 अगस्त तक राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। राज्य में एक राज्यमार्ग और मुख्य जिला मार्ग समेत कुल 80 सड़कें बंद बताई गई हैं। इससे कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ है और स्थानीय लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

आंकड़ों के अनुसार अल्मोड़ा में एक, बागेश्वर में नौ, चमोली में 13, देहरादून में पांच, नैनीताल में 15, पौड़ी में तीन, पिथौरागढ़ में 13, रुद्रप्रयाग में 12, टिहरी में छह और उत्तरकाशी में तीन मार्ग बंद हैं।

प्रशासन और संबंधित विभाग बंद सड़कों को खोलने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। वहीं, बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


उत्तराखंड में आयुष सेतु पोर्टल की शुरुआत, अब ऑनलाइन मिलेंगी कई सुविधाएं

देहरादून। उत्तराखंड में आयुष विभाग को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है। शनिवार को आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने देहरादून स्थित निदेशालय आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं परिसर में आयुष सेतु पोर्टल का उद्घाटन किया। इस दौरान आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग की सचिव रंजना राजगुरु समेत विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

आयुष सेतु पोर्टल के शुरू होने के साथ प्रदेश में आयुष विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। विभाग के अनुसार यह पहल योग नीति-2025, आयुष नीति-2023 और वेलनेस से जुड़ी योजनाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने में मदद करेगी।

पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण और प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा योग नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहन, प्रतिपूर्ति और अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इससे संबंधित लोगों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।

वेलनेस सेंटरों के लिए पोर्टल पर स्टार रेटिंग की व्यवस्था भी की गई है। इसके जरिए केंद्रों की सेवाओं और सुविधाओं का मूल्यांकन डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा।

कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आयुष सेतु पोर्टल के जरिए प्रदेश में आयुष क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने का प्रयास किया गया है। इससे लाभार्थियों और आयुष क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को ऑनलाइन सेवाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी।

इस अवसर पर निदेशक आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं, निदेशक होम्योपैथिक सेवाएं, राज्य औषधि अनुज्ञापन अधिकारी, भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष सहित शासन और प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।

विभाग ने इच्छुक लोगों से पोर्टल पर जाकर आयुष सेतु की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लेने की अपील की है।


मसूरी में बारिश के बीच माल रोड पर गिरा पेड़, होटल की छत और रेलिंग क्षतिग्रस्त

मसूरी। लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मसूरी में रविवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। माल रोड स्थित गढ़वाल टैरेस के पास अचानक एक पेड़ सड़क पर गिर गया। पेड़ की चपेट में आने से सड़क किनारे लगी रेलिंग टूट गई, जबकि होटल सूर्य किरण की छत को भी नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी पर्यटक या अन्य व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।

होटल स्वामी अजय भार्गव के अनुसार पेड़ करीब रात ढाई बजे अचानक गिरा। पेड़ गिरने से होटल की छत और वहां खड़ी गाड़ी को नुकसान पहुंचा। तेज आवाज के साथ पेड़ के गिरने से आसपास के लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।

बताया जा रहा है कि लगातार बारिश और पेड़ के अंदर से कमजोर व खोखला होने के कारण वह अचानक जड़ से उखड़कर सड़क पर गिर गया। पेड़ का एक हिस्सा माल रोड पर आ गिरा, जबकि दूसरा हिस्सा होटल की छत पर अटक गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सड़क पर गिरे पेड़ के हिस्से को हटाया। इसके बाद माल रोड पर यातायात व्यवस्था सामान्य हो सकी। हालांकि पेड़ का एक बड़ा हिस्सा अभी भी होटल की छत पर लटका हुआ है, जिसे हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय लोगों ने बारिश के मौसम को देखते हुए शहर में कमजोर और सूखे पेड़ों की पहचान कर उन्हें समय रहते हटाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण कई पेड़ कमजोर हो चुके हैं और ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से संभावित खतरे वाले पेड़ों का सर्वे कराने की मांग की गई है।


एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय तैयार करेंगे समयबद्ध रोडमैप

देहरादून:  नई शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालय ठोस और समयबद्ध रोडमैप तैयार करेंगे। उच्च शिक्षा को रोजगारपरक, नवाचार आधारित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ ही पाठ्यक्रमों में उद्योग जगत की जरूरतों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल किया जाएगा।

आईआईटी रूड़की में आयोजित ‘उत्तराखंड एनईपी कॉन्क्लेव-2026’ में विद्यालयी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि एनईपी-2020 के शत-प्रतिशत प्रावधानों को धरातल पर उतारने के लिए विश्वविद्यालयों को स्पष्ट कार्ययोजना बनानी होगी। उन्होंने आधुनिक लैब, इनोवेशन सेंटर, स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित करने पर जोर दिया।

डॉ. रावत ने विश्वविद्यालयों से स्थानीय एवं राष्ट्रीय उद्योगों के साथ एमओयू कर विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, इंडस्ट्री विजिट, प्रोजेक्ट वर्क, प्रशिक्षण तथा रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने को कहा। उन्होंने उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रमों को अपडेट करने और छात्रों में उद्यमिता की भावना विकसित करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्यटन, कृषि, बागवानी, आयुष, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, हिमालयी पारिस्थितिकी और स्थानीय उत्पादों से जुड़े शोध एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि इसका सीधा लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और युवाओं को मिल सके।

मंत्री ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की राज्य स्तरीय रैंकिंग शुरू करने, शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर के रिक्त पदों को भरने, पुरातन छात्रों का डाटा तैयार करने, छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराने तथा पेपर लीक और छात्रों के डेटा की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों से निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी जोर दिया।

कॉन्क्लेव में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं शिक्षाविदों ने एनईपी-2020 के क्रियान्वयन, गुणवत्ता, इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग, रिसर्च एवं इनोवेशन, नए इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल, इन्क्यूबेशन सेंटर, डिजिटल प्लेटफॉर्म, विदेशी संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग, कौशल आधारित शिक्षा और टेक-रेडी वर्कफोर्स जैसे विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिए।

आईआईएम लखनऊ के एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर के एचओडी बिजनेस डेवलपमेंट आदित्य प्रसाद ने उत्तराखंड में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और नए स्टार्टअप स्थापित करने को लेकर प्रस्तुति दी।

कार्यशाला में उच्च शिक्षा सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम, आईआईटी रूड़की के निदेशक प्रो. केके पंत, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं अन्य शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन आईआईटी रूड़की के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एनके नवानी ने किया।


दो आरोपियों को जिला बदर करने के आदेश, दो के नोटिस निरस्त

नैनीताल: जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल ललित मोहन रयाल की न्यायालय में गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत हुई सुनवाई में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त दो आरोपियों को जिला बदर करने के आदेश पारित किए गए हैं। वहीं, दो अन्य मामलों में परिस्थितियों को देखते हुए आरोपियों के विरुद्ध जारी नोटिस निरस्त कर दिए गए।

जिला बदर किए गए आरोपियों में पलविंदर सिंह उर्फ रवि उर्फ हैप्पी पुत्र दिलबाग सिंह, निवासी हिम्मतपुर ब्लॉक, थाना रामपुर शामिल है। उसके विरुद्ध शस्त्र अधिनियम, एनडीपीएस एक्ट तथा धारा 307/120बी बीएनएस सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

दूसरा आरोपी प्रमोद सागर उर्फ पप्पू उर्फ पीके पुत्र पूरनचंद सागर, निवासी नाथूपुर पाडली, थाना मुखानी है। उसके विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट एवं आईपीसी की धाराओं में कई मामले दर्ज हैं। न्यायालय ने दोनों के आपराधिक रिकॉर्ड एवं गतिविधियों को देखते हुए गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत उन्हें जिला बदर करने के आदेश दिए हैं।

वहीं, नवीन सिंह पुत्र चंदन सिंह, निवासी थाना मुक्तेश्वर, को किसी अन्य प्रकरण में पूर्व में ही जिला बदर किया जा चुका है। वर्तमान मामले में पुनः कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं पाए जाने पर उसके विरुद्ध जारी नोटिस निरस्त कर दिया गया।

इसी प्रकार अमन सिद्दीकी पुत्र आफताब सिद्दीकी, निवासी गफूर बस्ती, थाना बनभूलपुरा, गैंगस्टर एक्ट के तहत पहले से जेल में निरुद्ध है। परिस्थितियों को देखते हुए उसके विरुद्ध जारी नोटिस भी न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया।


12 दिन बाद धौलीगंगा नदी किनारे मिला लापता चालक हवलदार पंकज रुधौला का शव

ज्योतिर्मठ। 10 अगस्त 2026 को ज्योतिर्मठ तहसील क्षेत्र के ग्राम लोंग सेगड़ी के समीप तमक नाले में अतिवृष्टि के कारण आए तेज पानी और मलबे की चपेट में आकर लापता हुए सीमा सड़क संगठन की 123 इकाई में तैनात चालक हवलदार पंकज रुधौला का शव 12 दिन बाद बरामद कर लिया गया।

घटना की सूचना मिलते ही चमोली पुलिस, जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सीमा सड़क संगठन एवं गढ़वाल राइफल्स की टीमों ने युद्धस्तर पर सर्च एवं रेस्क्यू अभियान शुरू किया था। तमक नाले सहित आसपास के संभावित क्षेत्रों और नदी किनारे लगातार सघन खोजबीन की गई।

सर्च अभियान में सर्च एंड रेस्क्यू डॉग स्क्वॉड, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की विशेष टीमें भी शामिल रहीं। दुर्गम क्षेत्रों में संभावित स्थानों की निगरानी और तलाश के लिए ड्रोन की मदद भी ली गई। तेज बहाव, मलबे और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीमें लगातार अभियान में जुटी रहीं।

लगातार 12 दिनों तक चले सघन सर्च अभियान के बाद शनिवार को धौलीगंगा नदी के किनारे भलागांव के समीप पंकज रुधौला का शव बरामद हुआ। शव बरामद होने के बाद पुलिस द्वारा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।


डीएम ने विकास कार्यों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

नैनीताल : जिले में विकास कार्यों की प्रगति, बजट खर्च और जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने शनिवार को विकास भवन सभागार, भीमताल में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को 31 अक्टूबर तक आवंटित धनराशि का शत-प्रतिशत सदुपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, मुख्यमंत्री घोषणाओं, जिला योजना, राज्य एवं केंद्र पोषित योजनाओं, बीस सूत्रीय कार्यक्रम, मानसून व्यवस्थाओं और सड़कों की स्थिति की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने के साथ शिकायतकर्ता से दूरभाष पर वार्ता कर उसे निस्तारण की जानकारी देने के निर्देश दिए गए। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा में सामने आया कि जिले में कुल 237 घोषणाओं में से 227 पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 16 घोषणाएं विलोपित हैं और 94 पर कार्यवाही गतिमान है। लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, पेयजल, युवा कल्याण और नलकूप विभाग में लंबित घोषणाओं पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए उन्हें शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

बारिश के बाद चलेगा सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान

मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर जिलाधिकारी ने सभी निर्माण एजेंसियों को अपने-अपने सर्विस एरिया की सड़कों का नियमित रखरखाव करने और प्राथमिकता के आधार पर गड्ढों को भरने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण सड़कों को भी गड्ढामुक्त करने की कार्ययोजना अभी से तैयार करने को कहा। मानसून के बाद विशेष अभियान चलाकर व्यस्त विलेज रोड और ओडीआर मार्गों को प्राथमिकता से दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।

कम बजट खर्च पर अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

जिला योजना की समीक्षा के दौरान समाज कल्याण, वन, उरेडा, सहकारिता, बाल विकास, प्राथमिक शिक्षा, लघु सिंचाई और राजकीय सिंचाई विभागों द्वारा अपेक्षाकृत कम धनराशि खर्च किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।

भेषज एवं रेशम विभाग के सक्षम अधिकारी बैठक में अनुपस्थित पाए गए। जिलाधिकारी ने उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करते हुए शासन को संस्तुति पत्र भेजने के निर्देश दिए।

पेयजल और सिंचाई व्यवस्थाओं पर विशेष जोर

जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को मानसून के बाद किसानों की जरूरत को देखते हुए सभी गूलों और नहरों की मरम्मत समय से पूरी करने के निर्देश दिए। जल संस्थान एवं पेयजल विभाग को प्रत्येक पेयजल स्रोत और टैंक की नियमित सफाई तथा टैंकों में क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने को कहा। क्लोरीनेशन की तिथि टैंकों पर अनिवार्य रूप से अंकित करने के निर्देश भी दिए गए।

जिला पंचायत की धीमी प्रगति और कम धनराशि खर्च होने पर अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत का स्पष्टीकरण लेने तथा नैनीताल में स्थायी अपर मुख्य अधिकारी की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिए गए।

बड़ी परियोजनाओं की भी हुई समीक्षा

जिलाधिकारी ने विधायक एवं सांसद निधि से संबंधित कार्यों की धीमी प्रगति पर ग्राम्य विकास विभाग को संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय कर तेजी लाने के निर्देश दिए। सहकारिता विभाग द्वारा पिछले तीन वर्षों में कराए गए कार्यों का फील्ड सत्यापन कराने के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में 20 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। इनमें मानसखंड मंदिर माला, कालाआगर पंपिंग योजना, इंदिरानगर नाले का ट्रीटमेंट एवं सीवरेज कार्य, हल्द्वानी-काठगोदाम पेयजल योजना, बलियानाला ट्रीटमेंट, विभिन्न स्थानों पर पार्किंग निर्माण, रोडवेज बस अड्डा तथा हल्द्वानी में यूयूएसडीए के कार्य शामिल रहे। जिलाधिकारी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, अपर जिलाधिकारी शौरभ असवाल, सचिव जिला विकास प्राधिकरण मनीष कुमार, जिला विकास अधिकारी संतोष पंत, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी मुकेश नेगी सहित जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।


सीएचसी कांडा में व्यवस्थाओं का जायजा, डीएम ने दिए सख्त सुधार के निर्देश

बागेश्वर। जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे ने शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने आपातकालीन कक्ष, पंजीकरण कक्ष, दवा वितरण कक्ष, औषधि भंडार, कोल्ड चेन कक्ष, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, प्रसव कक्ष, शौचालय और पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण किया।

प्रसव सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जिलाधिकारी ने प्रेग्नेंसी टेबल सहित आवश्यक उपकरणों की मांग तत्काल भेजने के निर्देश दिए। औषधि भंडार के निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्टॉक रजिस्टर की जांच की और दवाइयों का भौतिक सत्यापन किया। उन्होंने रजिस्टर का नियमित और सही ढंग से संधारण करने के साथ अस्पताल में किसी भी दवा के एक्सपायर न होने देने के निर्देश दिए।

मरीजों को स्वच्छ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने बेडशीट बदलने में कलर कोडिंग सिस्टम का पालन करने को कहा। अस्पताल में साफ-सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के लिए एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

आपातकालीन वार्ड में ड्यूटी रजिस्टर व्यवस्थित रखने तथा इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन और सीरिंज का निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके साथ ही अस्पताल में स्वच्छता, दवा प्रबंधन, सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।


देवभूमि की पवित्रता और मूल स्वरूप को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता- मुख्यमंत्री

संत समाज का मार्गदर्शन धर्म, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा- मुख्यमंत्री

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सप्तसरोवर रोड, भूपतवाला स्थित श्री ब्रह्म निवास आश्रम में पूज्य सतगुरु लाल दास महाराज के 51वें निर्वाण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सतगुरु लाल दास महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान को याद किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सतगुरु लाल दास महाराज ने अपने जीवन में आध्यात्मिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समाज को सेवा, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने के साथ समाज को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी वाणी में अद्भुत शक्ति और दृष्टि में असीम करुणा थी। सतगुरु ने जीवनभर सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया।

उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य और सतगुरु की कृपा मिलना सौभाग्य की बात है। भारतीय संत समाज ने हमेशा धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संतों के मार्गदर्शन से समाज को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

धार्मिक स्थलों के विकास पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सनातन धार्मिक संस्कृति के पुनर्जागरण का स्वर्णिम काल चल रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, काशी कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर जैसे कार्यों के साथ उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में 2013 की आपदा से क्षतिग्रस्त केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया गया है। इसके साथ ही मंदिर माला मिशन के तहत प्रदेश के विभिन्न मंदिरों के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है।

सीएम धामी ने बताया कि केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से दुर्गम तीर्थस्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच आसान होगी और बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को भी काफी सुविधा मिलेगी। वहीं हरिद्वार गंगा कॉरिडोर, ऋषिकेश कॉरिडोर, आस्था पथ और शारदा एवं यमुना तटों के विकास से जुड़े कार्य भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

देवभूमि की पहचान और पवित्रता सुरक्षित रखना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की देवभूमि का मूल स्वरूप, पवित्रता और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण और देवभूमि की संस्कृति एवं सामाजिक वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने देहरादून में स्थापित हिंदू अध्ययन केंद्र का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में धर्म और संस्कृति के साथ ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की धरती से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने का आह्वान किया था। इसी लक्ष्य के अनुरूप राज्य में धर्म, विकास, नवाचार और ज्ञान के क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है।

57 वर्षों से जारी है अखंड भोजन सेवा

कार्यक्रम में सतगुरु चेतनानंद भूरी वाले ने बताया कि संस्था पिछले 57 वर्षों से लगातार अखंड भोजन सेवा चला रही है और गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में लागू किए गए कई नियम और कानून देश के लिए उदाहरण बन रहे हैं तथा राज्य विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और आपदा प्रबंधन उपाध्यक्ष विनय रोहिल्ला ने भी विचार रखे।

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि महाराज, रुड़की की मेयर अनीता अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, राज्य मंत्री शोभाराम प्रजापति, ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी विकास तिवारी, आशु चौधरी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेंद्र डोभाल, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट हर गिरी, उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा, एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह समेत साधु-संत और विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे।


आईटी पार्क के लिए बनेगा वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लान, डीएम ने दिए सर्वे के निर्देश

सितंबर में पूरा होगा विस्तृत सर्वेक्षण

देहरादून। सहस्रधारा मोटर मार्ग स्थित आईटी पार्क क्षेत्र में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शनिवार को ऋषिपर्णा सभागार में उच्चस्तरीय बैठक कर अधिकारियों को क्षेत्र का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण कराने और वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में सिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और अनुसंधान एवं नियोजन खंड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से एनआईवीवी कंसल्टेंसी सर्विसेज के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून के दौरान देहरादून की सड़कों पर जलभराव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। इसका स्थायी समाधान केवल तत्काल पानी निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शहर में वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने सिंचाई विभाग के माध्यम से चयनित कंसल्टेंसी के विशेषज्ञों को आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव के वास्तविक कारणों का तकनीकी अध्ययन करने के निर्देश दिए। सर्वेक्षण के दौरान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक जल निकासी मार्ग, बारिश के पानी के प्रवाह और मौजूदा ड्रेनेज व्यवस्था का समग्र अध्ययन किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सितंबर में आईटी पार्क क्षेत्र का विस्तृत सर्वे पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। सर्वेक्षण के आधार पर कंसल्टेंसी द्वारा दिए जाने वाले सुझावों और प्रस्तावित समाधानों का तकनीकी परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद प्रभावी ड्रेनेज प्लान तैयार कर शासन स्तर पर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू कराया जा सके।

डीएम ने कहा कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होने से आईटी पार्क क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा। साथ ही स्थानीय नागरिकों, कर्मचारियों और आम लोगों को बारिश के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा, अधिशासी अभियंता भृगुनाथ द्विवेदी, एजीएम सिडकुल विनय शंकर, अधिशासी अभियंता सिंचाई ईआर पुरुषोत्तम, सहायक अभियंता पीएस रावत, नेहा सिंह समेत दिल्ली से एनआईवीवी कंसल्टेंसी सर्विसेज के पदाधिकारी मौजूद रहे।


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