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मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय बजट 2026–27 को बताया विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का रोडमैप

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मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय बजट 2026–27 को बताया विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का रोडमैप

पर्यटन, विनिर्माण, आयुष, ग्रीन एनर्जी, कौशल विकास, रोजगार और शहरी अवसंरचना से राज्य के समावेशी व सतत विकास को मिलेगी नई गति

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बलवीर रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित मीडिया प्रेस वार्ता के दौरान केंद्रीय बजट 2026–27 को विकसित भारत @2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट देश की आत्मा, आत्मविश्वास और विकासशील सोच को मजबूती प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय में की गई बढ़ोतरी से दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखी गई है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित एवं समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—दूरस्थ के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों, गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों, बच्चों और वंचित वर्गों सभी के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।

उन्होंने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा। प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावास की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण को नई मजबूती मिलेगी। ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में किए गए विविध और नीतिगत प्रावधानों से उत्तराखंड में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। आयुष, फार्मा, हथकरघा, खादी और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। ग्रीन एनर्जी पर विशेष फोकस से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय एवं वन संपदा से समृद्ध राज्य में ग्रीन इकोनॉमी को बल मिलेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप उत्तराखंड के हितों का ध्यान रखा गया है। राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर केंद्र सरकार को दिए गए प्रस्तावों और अनुरोधों को भी बजट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित किया गया है, जो राज्य-केंद्र के सहयोगात्मक संघवाद का सशक्त उदाहरण है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा और राज्य के समावेशी, संतुलित व सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।


मुख्यमंत्री ने किया श्रमिक प्रशिक्षण पोर्टल का शुभारंभ

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UKBOCW), श्रम विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा विकसित श्रमिक प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली (Training Management System – TMS) का शुभारंभ किया। यह पोर्टल पंजीकृत श्रमिकों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के कौशल विकास को पारदर्शी, प्रभावी एवं तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।  मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार श्रमिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूर्णतः ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाए जाने के उद्देश्य से इस पोर्टल का विकास किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कौशल प्रशिक्षण के उपरांत श्रमिकों के सर्वांगीण विकास से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं पर भी प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही राज्य के उद्यमियों से कौशल आवश्यकताओं के संबंध में नियमित फीडबैक लिया जाए, ताकि प्रशिक्षण को रोजगार से बेहतर रूप से जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्लम्बर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन आदि व्यवसायों में प्रशिक्षण पर विशेष बल देने के निर्देश दिए, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति स्थानीय श्रमिकों से हो सके और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने प्रशिक्षणोपरांत फॉरवर्ड लिंकेज को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए श्रम विभाग द्वारा संचालित डीबीटी योजनाओं की सराहना की तथा UKBOCW को अपनी आय बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयास करने के निर्देश भी दिए।

इस पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण व्यवस्था को बनाया जाएगा पारदर्शी व प्रभावी
श्रम विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दंकी ने बताया कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सभी योजनाओं को अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

इस दौरान श्रमायुक्त पी.सी. दुमका द्वारा पोर्टल की कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने कहा कि श्रमिक प्रशिक्षण पोर्टल (TMS) के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदाताओं, मूल्यांकनकर्ताओं, प्रशिक्षण केंद्रों एवं प्रशिक्षकों का चयन भारत सरकार में इम्पैनल्ड (Impanelled) संस्थाओं एवं प्रमाणित व्यक्तियों से पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों की उपस्थिति एवं मूल्यांकन भी डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित होंगे।

इस पोर्टल से—
– प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

– डुप्लीकेसी की प्रभावी रोकथाम होगी।
– प्रशिक्षण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा।
– प्रशिक्षित श्रमिकों का केन्द्रीयकृत डाटाबेस उपलब्ध होगा।
– प्रशिक्षण प्रदाताओं एवं संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।


तेज की जाए पदक विजेताओं को नौकरी देने की प्रक्रिया- रेखा आर्या

खेल मंत्री ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर दिया निर्देश

देहरादून। खेल मंत्री रेखा आर्या ने 38वें राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी दिए जाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस बारे में सोमवार को मुख्य सचिव को पत्र लिखा।

अपने कैंप कार्यालय पर पत्रकारों से बात करते हुए कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि नेशनल गेम्स में हमारे प्रदेश के खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा था और पहली बार उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों में पदकों का शतक लगाया।

उन्होंने कहा कि पदक विजेताओं को नगद इनाम धन राशि पहले ही दी जा चुकी है लेकिन कई तकनीकी बाधाओं के चलते आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी की प्रक्रिया में देरी हुई है।

कैबिनेट मंत्री में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न नौकरी देने के लिए 242 अधिसंख्य पदों का सृजन खेल विभाग में ही किया जाना चाहिए क्योंकि पूर्व में अन्य विभागों में खिलाड़ियों को नौकरी देने के अनुभव संतोषजनक नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा कि पदक विजेताओं को उनके अभ्यास और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अवसर व सुविधाएं मिलनी आवश्यक हैं।

पत्र में कहा गया है कि इन अधिसंख्य पदों के अतिरिक्त 23 खेल अकादमियों को संचालित करने के लिए आवश्यक 544 पदों को भी जल्द सृजित किया जाए।


मुख्यमंत्री धामी ने वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी की माताजी को दी श्रद्धांजलि

अनुपम त्रिवेदी के आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री ने बंधाया परिवार को ढांढस

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में वरिष्ठ पत्रकार अनुपम त्रिवेदी के आवास पर पहुंचकर उनकी दिवंगत माताजी स्वर्गीय गीता त्रिवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और इस दुःख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री धामी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें। उनके इस संवेदनशील कदम से पत्रकार जगत सहित शहर के गणमान्य लोगों में भी शोक की भावना व्यक्त की गई।


एम्स ऋषिकेश की महिला कर्मी की गोली मारकर हत्या, महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान

प्रेम प्रसंग के चलते महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने दिए कठोरतम कार्रवाई के निर्देश

ऋषिकेश। उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित शिवाजीनगर क्षेत्र में शनिवार देर रात एक सनसनीखेज वारदात के मामले में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्वतः संज्ञान लिया है। मामले में एम्स ऋषिकेश में संविदा पर तैनात 32 वर्षीय महिला कर्मचारी प्रीति रावत की उनके घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इस जघन्य अपराध पर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्षा कुसुम कंडवाल ने पुलिस आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और आरोपी के विरुद्ध ऐसी कठोर कार्रवाई की जाए जो समाज में नजीर बन सके।

घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रीति रावत मूल रूप से यम्केश्वर निवासी ऋषिकेश में शिवाजीनगर में एक किराए के मकान में अकेली रहती थीं, रात करीब 9:30 बजे आरोपी ने उनके घर पर पहुंचकर गोली मारी थी।

मामले में महिला आयोग की अध्यक्ष इस मामले में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश कैलाश चंद्र भट्ट ऋषिकेश से फोन पर वार्ता के क्रम में जानकारी ली, जिसमें तथ्यों के अनुसार मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग और विवाह के दबाव से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि आरोपी मृतका से शादी करने के लिए दवाब बना रहा था, जिसके चलते उसने अपनी पत्नी को भी तलाक दे दिया था। जब मृतका ने शादी से इनकार किया और उसकी बात नहीं मानी, तो उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एसओ ऋषिकेश से वार्ता कर अब तक कार्यवाही की प्रगति की रिपोर्ट ली है। उन्होंने कहा कि देवभूमि में महिलाओं के प्रति बढ़ते ऐसे अपराध कतई स्वीकार्य नहीं हैं। अध्यक्षा ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस की टीमें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश तेज करें और यह सुनिश्चित करें कि पीड़िता के परिवार को शीघ्र न्याय मिले।

प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश कैलाश चंद्र भट्ट ने जानकारी में बताया कि फिलहाल घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं और पुलिस की कई टीमें फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


राम नाम से कांग्रेस का विरोध पुराना- रेखा आर्या

वीबी जी रामजी योजना पर आयोजित जिला सम्मेलन में शामिल हुई कैबिनेट मंत्री

नानकमत्ता/उधमसिंहनगर। रविवार को उधम सिंह नगर के नानकमत्ता स्थित प्रेम पैलेस में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने वीबी जी रामजी योजना जन जागरण जिला सम्मेलन में हिस्सा लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रेखा आर्या ने कहा कि मनरेगा के मुकाबले यह योजना हर तरीके से बेहतर है और इसे 20 साल के अनुभव से मिली सीख के आधार पर तैयार किया गया है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ इसलिए इस योजना की आलोचना कर रही है क्योंकि राम के नाम से उनका विरोध बहुत पुराना है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि 100 के बजाय अब 125 दिन रोजगार की गारंटी, रोजगार न मिलने की स्थिति में भत्ता देने और साप्ताहिक डिजिटल भुगतान जैसे प्रावधान इस योजना को श्रमिकों के लिए बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि फसलों की कटाई और बुवाई के सीजन में इस योजना के तहत सार्वजनिक काम 60 दिन के लिए रोक दिए जाएंगे ताकि श्रमिक कृषि कार्य में भी काम कर सके और इस योजना के तहत भी उनके लिए रोजगार के अवसर न छूटें।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस योजना के जरिए अब सुनियोजित लक्ष्य के साथ निर्माण कार्य होंगे और यह योजना गांवों को 2047 के विकसित भारत में सहयात्री बनाएगी।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष कमल जिंदल, पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा, प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीपाल राणा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रेम सिंह दुरना, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्या, रमेश जोशी, अमित नारंग, उत्तम दत्ता, रमेश जोशी, तरुण दत्ता, विकास गुलाटी, ओम नारायण राणा, देवेंद्र सिंह, राजेश तिवारी, राजेश बजाज, रश्मि रस्तोगी, विनीत सक्सेना, बिट्टू चौहान, रवि रस्तोगी, पुष्पेंद्र राणा, विजय तोमर, रविंद्र राणा आदि उपस्थित रहे।


छरबा, खेरूवा व आरकेडिया ग्रांट में जल्द शुरू होंगे गोसदन

निराश्रित गोवंश संरक्षण के लिए नए गोसदनों को मिली मंजूरी

देहरादून। जनपद में निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण और उनकी समुचित देखभाल को लेकर जिला प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में ऋषिपर्णा सभागार में जनपद स्तरीय निराश्रित गोवंश अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले में संचालित गोसदनों की स्थिति, नए गोसदनों की स्थापना और पशुओं के भरण-पोषण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने स्वीकृत नई गौशालाओं के निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को कार्यदायी संस्थाओं द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा।

इस दौरान डोईवाला स्थित श्री हंस कालू सिद्व बाबा जी गौशाला ट्रस्ट और गुरु राम राय एजुकेशन मिशन द्वारा भण्डारीबाग एवं करनपुर में संचालित गौशालाओं को राजकीय मान्यता देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। जिलाधिकारी ने भूमि अभिलेख, पशु कल्याण बोर्ड की संस्तुति और विभागीय निरीक्षण आख्या सहित सभी आवश्यक मानकों को शीघ्र पूर्ण कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

बैठक में विकासखंड कालसी के खेरूवा में प्रस्तावित गौशाला निर्माण के लिए 49.98 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त करने के निर्देश भी जारी किए गए। इसके साथ ही सहसपुर के ग्राम छरबा तथा प्रेमनगर स्थित आरकेडिया ग्रांट क्षेत्र में गोसदन निर्माण एवं बाउंड्री वॉल के लिए स्वीकृत धनराशि जल्द जारी करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने गोसदनों में रह रहे पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बीमार और घायल गोवंश के समुचित उपचार, समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोवंश संरक्षण से जुड़े सभी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।


पवित्र धामों में गैर हिन्दू प्रवेश मुद्दे पर, आस्था एवं विश्वास अनुरूप हो निर्णय- भट्ट

कांग्रेस नेता राजनैतिक कालनेमि, देवभूमि में रहकर करते हैं हर सनातनी कार्य का विरोध!

देहरादून। भाजपा ने पवित्र धामों में गैर हिन्दू प्रवेश के मुद्दे पर धार्मिक आस्था और देवभूमि छवि अनुरूप निर्णय पर जोर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस विषय पर कांग्रेसी बयानों को कड़ी आलोचना करते हुए कहा, जिन्हें तीर्थाटन और पर्यटन का अंतर नहीं मालूम, उनके लिए चारों धामों का महत्व सिर्फ आर्थिकी तक समिति है। वहीं हैरानी जताई तमाम स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर, जो देवभूमि में राजनीति हैं और हर अच्छे सनातनी निर्णय को बाधित करने का पाप करते हैं।

उन्होंने हाल फिलहाल में हरिद्वार के बाद चार धामों में गैर सनातनी प्रवेश के विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, धार्मिक जन आस्था, विश्वास और परंपरा मान्य होनी चाहिए। संबंधित पावन धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहित, स्थानीय पुजारी एवं अन्य लोग या धर्मावलंबी यदि प्रवेश को लेकर नियम बनाना चाहते हैं इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि इस तरह का प्रतिबंध अनेकों स्थानों पर जनसहयोग से अनेकों स्थानों पर है। यहां बेहद स्पष्ट है कि जिसकी धार्मिक स्थलों के प्रति कोई भी आस्था, विश्वास या धार्मिक जुड़ाव नहीं है तो वे किस मकसद से वहां जाएंगे। दरअसल मंदिर एक सार्वजनिक सामूहिक पूजा स्थल है, लिहाजा वहां सिर्फ घूमने के नाम पर अव्यावहारिक व्यवहार सामने आने या माहौल खराब होने की अनुमति किसी को नहीं दी सकती है।

उन्होंने कांग्रेस नेताओं और विशेषकर गणेश गोदियाल के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने चार धामों को घूमने फिरने से जोड़ा। कटाक्ष करते हुए कहा, लगता है कांग्रेस का सनातन से दूर दूर तक नाता नहीं है, तभी वे तीर्थाटन और पर्यटन में अंतर महसूस नहीं करते। तभी वे चार धाम की पवित्रता और परंपरा पर आर्थिकी को तरजीह देने की बात कहते हैं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, हम भी जानते हैं कि प्रदेश की आर्थिकी में चार धाम यात्रा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन पावन स्थलों के अंदर तो सब प्रक्रिया तो सनातनी परिप्रेक्ष्य में ही होनी चाहिए। इसीलिए तो राज्य निर्माण के बाद जनभावना के अनुशार पर्यटन के साथ तीर्थाटन को भी महत्व दिया गया। निसंदेह प्रदेश में पर्यटन की असीम संभावना है, लेकिन धार्मिक स्थलों में आस्था, विश्वास एवं परंपरा के अनुसार ही पर्यटन होना चाहिए, जिसे तीर्थाटन ही कहते हैं।

वहीं उन्होंने राज्य कांग्रेस नेताओं के ऐसे तमाम मुद्दों पर अपनाए हुए रुख पर हैरानी और निराशा जताई। कहा, ये सब उत्तराखंडित के मुद्रा पर देवभूमि में राजनीति का दावा करते हैं, लेकिन वावजूद इसके प्रत्येक सनातनी निर्णय का विरोध भी करते हैं। इन्हें धार्मिक स्थलों में प्रवेश के नियमों में आपत्ति है, यूसीसी में दिक्कत है, धर्मांतरण कानून नहीं चाहिए, अवैध धार्मिक अतिक्रमण का विरोध नहीं करना चाहते हैं, धार्मिक स्थलों के विकास के उलट उनकी छवि खराब करने में आनंद आता है। इसी तरह डेमोग्राफी बनाए रखने या लव, लैंड जिहाद पर कार्रवाई की बात हो, प्रत्येक मुद्दे पर उत्तराखंडीयत का ढोंग करने वाले देवभूमि के कांग्रेस नेताओं को ही दिक्कत होती है। लेकिन प्रदेश की राष्ट्रवादी और सनातन जनता कांग्रेस और विपक्ष के नजरिए को अच्छी तरह देख रही और आने वाले समय में पूर्व की भांति ही इन राजनैतिक कालनेमियों को लोकतांत्रिक सजा देगी।


दून पुलिस ने गुमशुदा नाबालिग बालिका को तमिलनाडु से किया सकुशल बरामद

नाबालिग को सकुशल वापस पाकर परिजनों ने उत्तराखण्ड पुलिस की कार्यशैली की प्रशंसा कर दून पुलिस का किया आभार व्यक्त

घर मे मन न लगने पर घरवालों को बिना बताए घर से निकल गयी थी नाबालिग बालिका

देहरादून। थाना डालनवाला क्षेत्र से लापता हुई 17 वर्षीय नाबालिग बालिका को उत्तराखंड पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु से सकुशल बरामद कर लिया है। बालिका की सुरक्षित वापसी के बाद परिजनों ने दून पुलिस की कार्यशैली की सराहना की है।

पुलिस के अनुसार, 13 जनवरी 2026 को डालनवाला निवासी एक व्यक्ति ने थाना डालनवाला में लिखित प्रार्थना पत्र देकर अपनी नाबालिग पुत्री के बिना बताए घर से चले जाने की सूचना दी थी। परिजनों द्वारा काफी खोजबीन के बावजूद बालिका का कोई सुराग नहीं लग पाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना डालनवाला में तत्काल मुकदमा संख्या 09/2026 धारा 137(2) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया।

प्रकरण को संवेदनशील मानते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बालिका की सकुशल बरामदगी के लिए विशेष पुलिस टीम गठित कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। पुलिस टीम द्वारा जिला नियंत्रण कक्ष देहरादून के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से बालिका की तलाश तेज की गई।

लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप पुलिस को बालिका के तमिलनाडु में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग को तिरुपुर, तमिलनाडु से सकुशल बरामद कर लिया।

पूछताछ में बालिका ने बताया कि घर में मन न लगने के कारण वह परिजनों को बिना बताए घर से निकल गई थी और भटकते हुए तमिलनाडु पहुंच गई। बालिका ने अपने साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी से इनकार किया है। आवश्यक काउंसलिंग और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बालिका को सुरक्षित रूप से उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

नाबालिग की सकुशल बरामदगी पर परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस और दून पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए उनकी तत्परता और संवेदनशील कार्यशैली की प्रशंसा की।


शिक्षा व्यवस्था का सशक्त माध्यम बना विद्या समीक्षा केन्द्र

तकनीक व डेटा विश्लेषण के जरिये शिक्षा प्रणाली में हो रहा व्यापक सुधार

छात्रों व शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे चैटबॉट व ई-सृजन प्लेटफार्म

देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थापित विद्या समीक्षा केन्द्र (VSK) प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में नवाचार, पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से छात्रों की अधिगम प्रगति, शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा विभागीय योजनाओं की निगरानी को डेटा-आधारित किया गया है, जिससे शिक्षण गुणवत्ता, उपस्थिति, प्रशिक्षण एवं संसाधन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।

विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इन्हीं सुधारों के क्रम में नई शिक्षा नीति–2020 के प्रावधानों के तहत विद्या समीक्षा केन्द्र की स्थापना की गई है। इस केन्द्र के माध्यम से प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं परिणामोन्मुख बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि विद्या समीक्षा केन्द्र के माध्यम से छात्रों की साप्ताहिक अधिगम प्रगति की सतत निगरानी की जा रही है। इसके लिए सक्षम कार्यक्रम के अंतर्गत विषयवार क्विज़ एवं उपचारात्मक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं ‘मेरी उपस्थिति’ चैटबॉट के माध्यम से विद्यार्थियों की रीयल-टाइम उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसके जरिए लगातार अनुपस्थित छात्रों की पहचान कर समय पर हस्तक्षेप किया जा रहा है, जिससे ड्रॉपआउट दर में कमी लाने में मदद मिल रही है शिक्षकों के लिए ‘शिक्षक सहायक’ चैटबॉट उपयोगी सिद्ध हो रहा है, जिसके माध्यम से पाठ योजनाएं, वर्कशीट और शिक्षण वीडियो उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही ई-सृजन प्लेटफार्म पर शिक्षकों को तकनीकी एवं विषयगत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक 92 प्रतिशत शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण पूर्ण किया गया, जो राज्य में क्षमता निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त सीआरपी/बीआरपी द्वारा ऑन-साइट मेंटरिंग की निगरानी भी विद्या समीक्षा केन्द्र से की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि अभिभावकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्या समीक्षा केन्द्र के अंतर्गत ‘जिज्ञासा’ चैटबॉट प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही आईएफए एवं एनडीडी टैबलेट वितरण, एप्टीट्यूड टेस्ट अंकों का डिजिटलीकरण तथा यू-डाइस प्लस आधारित विश्लेषण जैसी पहलें भी शुरू की गई हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-आधारित निर्णय संभव हो पा रहे हैं। इसके अलावा निजी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी इस प्लेटफार्म से जोड़ा जा रहा है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नौनिहालों का सर्वांगीण विकास हो सके।

विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए भी नई पहल की गई है। इसके तहत फरवरी 2026 से ग्रेड 4 से 9 के लिए पहल डायग्नोस्टिक असेसमेंट तथा

ग्रेड 1 एवं 2 के लिए निपुण एंडलाइन असेसमेंट में ओसीआर तकनीक के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की जाएगी और शिक्षक ऑनलाइन मूल्यांकन कर सकेंगे, जिससे समय की बचत होगी और 2 से 3 दिनों के भीतर मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी।

बयान

“विद्या समीक्षा केन्द्र प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप ढालने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। तकनीक और डेटा के माध्यम से अब न केवल छात्रों की सीखने की प्रक्रिया पर सतत निगरानी संभव हो रही है, बल्कि शिक्षकों को भी आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षण समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बन रही है।”
— डॉ. धन सिंह रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड


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