Thursday, September 3rd, 2026

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नवनियुक्त कार्मिक जनसेवा की भावना से अपने दायित्वों का करें निर्वहन- मुख्यमंत्री

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नवनियुक्त कार्मिक जनसेवा की भावना से अपने दायित्वों का करें निर्वहन- मुख्यमंत्री

पशुपालन तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के 101 नवनियुक्त कार्मिकों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किए नियुक्ति पत्र

पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी- मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में पशुपालन विभाग तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग में चयनित 101 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी एवं 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं।मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना युवाओं के परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। आज से वे उत्तराखण्ड सरकार का अभिन्न हिस्सा बनने के साथ ही जनसेवा की महत्वपूर्ण यात्रा प्रारंभ कर रहे हैं। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से अपने ज्ञान, ऊर्जा और नए विचारों के माध्यम से शासकीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अपनी कार्यशैली से उदाहरण प्रस्तुत करने की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए देश का सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। आज सरकारी नौकरियां सिफारिश या पहचान से नहीं, बल्कि युवाओं की मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिल रही हैं। पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल रहे हैं। यह पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और युवाओं को उनकी प्रतिभा के आधार पर अवसर प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन तथा गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका, मातृशक्ति के आर्थिक सशक्तीकरण और गांवों की समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार है। राज्य सरकार पशुपालन को रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के माध्यम से पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। पशुपालकों को अनुदान पर गाय, बकरी, भेड़ और मुर्गी पालन की इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ ही पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गन्ना किसानों के हितों के प्रति भी प्रतिबद्ध है। गन्ना सर्वेक्षण की व्यवस्था को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को नई तकनीक, उन्नत गन्ना प्रजातियों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं। उत्तराखण्ड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में 05 रुपये प्रति कुंतल अधिक गन्ना मूल्य दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्हें किसानों और पशुपालकों से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझते हुए समाधान के लिए संवेदनशीलता से कार्य करना होगा। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि आम नागरिक को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। शासकीय कार्यप्रणाली में ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तराखण्ड भी इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण में अपना शत-प्रतिशत योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, गणेश जोशी,  खजानदास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक श्रीमती सविता कपूर, दुर्गेश्वर लाल, सचिव एस.एन पाण्डेय एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।


देहरादून में नशे के खिलाफ प्रशासन का शिकंजा, 208 केस दर्ज और 237 आरोपी जेल भेजे गए

देहरादून। राजधानी देहरादून में बढ़ते नशे के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की समीक्षा बैठक में ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने, शिक्षण संस्थानों में निगरानी बढ़ाने और अवैध रूप से संचालित नशामुक्ति केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मोथरोवाला क्षेत्र में बिना पंजीकरण संचालित नशामुक्ति केंद्र की शिकायत सामने आने पर जिलाधिकारी ने उसे तत्काल सीज करने के आदेश दिए। साथ ही सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने जिले के सभी नशामुक्ति केंद्रों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करने के निर्देश दिए। इसके जरिए केंद्रों की गतिविधियों, व्यवस्थाओं और संचालन की स्थिति पर एक क्लिक में नजर रखी जा सकेगी।

उन्होंने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में औचक निरीक्षण कर ड्रग्स से जुड़े संदिग्ध मामलों की रैंडम सैंपलिंग कराने को कहा। सभी छात्रों से ई-शपथ भरवाने और नियमित एंटी-ड्रग्स जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।

पुलिस विभाग को पुराने अपराध आंकड़ों का जीआईएस आधारित विश्लेषण कर नशे से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों और हॉटस्पॉट की पहचान करने को कहा गया है। इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए ड्रग्स की डिमांड और सप्लाई चेन को तोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

इसके अलावा मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी, दवा रजिस्टर और स्टॉक रजिस्टर की नियमित जांच के निर्देश दिए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम, गांजा और भांग के अवैध उत्पादन व बिक्री में शामिल लोगों पर भी नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया।

छात्रावासों, पीजी आवासों, कोचिंग संस्थानों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने के साथ एंटी-ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए।

पुलिस विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 208 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 237 आरोपियों को जेल भेजा गया। वहीं, ड्रग्स की सप्लाई और डिमांड चेन से जुड़े 40 आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 और चार आरोपियों के खिलाफ धारा 27ए के तहत कार्रवाई की गई है।

औषधि विभाग ने बताया कि जुलाई 2026 तक 58 औचक निरीक्षण किए गए। इनमें 15 संदिग्ध मामलों में दवाओं के नमूने लिए गए। नकली या मिलावटी दवाओं के निर्माण से जुड़े चार मामलों में एफआईआर दर्ज की गई, जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

जिले में 75 बेड के राजकीय नशामुक्ति केंद्र के निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। राजकीय वृद्ध एवं अशक्त आवास गृह, रायवाला के समीप 0.4050 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित केंद्र के लिए 775.09 लाख रुपये की डीपीआर शासन को भेजी गई है। इसके सापेक्ष भारत सरकार की ओर से पहली किस्त के रूप में 132 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि ड्रग्स की सप्लाई चेन, संवेदनशील क्षेत्रों और शिक्षण संस्थानों में इसकी पहुंच रोकने के लिए लगातार प्रभावी अभियान चलाया जाए।


बिना नक्शे निर्माण पर एमडीडीए का शिकंजा, ऋषिकेश में व्यावसायिक उपयोग के टिन शेड समेत तीन अवैध निर्माण सील

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा – नियमों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

देहरादून- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए ऋषिकेश क्षेत्र में तीन अलग-अलग मामलों में सीलिंग की कार्रवाई की है। बिना स्वीकृत मानचित्र और प्राधिकरण की अनुमति के किए जा रहे निर्माण को लेकर प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। कार्रवाई के दौरान गुमानीवाला, गंगा किनारे गली नंबर-1 और वीरपुर खुर्द क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माण को सील किया गया।

एमडीडीए के अनुसार गुमानीवाला, ऋषिकेश में चीमा राम द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के व्यावसायिक उपयोग के लिए टिन शेड का निर्माण किया जा रहा था। स्थल पर अनाधिकृत निर्माण किए जाने के कारण संबंधित के विरुद्ध उत्तराखंड नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की सुसंगत धाराओं के तहत वाद दायर किया गया था। प्राधिकरण की ओर से मामले में कार्रवाई करते हुए निर्माण को सील कर दिया गया।

इसी क्रम में ऋषिकेश के गंगा किनारे गली नंबर-1 में राम यादव द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृति के निर्माण कार्य किए जाने का मामला सामने आया। प्राधिकरण की अनुमति के बिना किए जा रहे निर्माण के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई और मौके पर सीलिंग की कार्रवाई अमल में लाई गई।

तीसरी कार्रवाई वीरपुर खुर्द, गली नंबर-4, सीमा जेन्टल कॉलेज के निकट की गई। यहां संदीप गोस्वामी आदि द्वारा प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना निर्माण कार्य किया जा रहा था। एमडीडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर अनाधिकृत निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल को सील कर दिया।

एमडीडीए की इस कार्रवाई को अवैध निर्माण और बिना अनुमति किए जा रहे व्यावसायिक एवं अन्य निर्माण कार्यों के खिलाफ प्राधिकरण की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। प्राधिकरण का कहना है कि भवन निर्माण से पहले स्वीकृत मानचित्र और आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी कर किए जाने वाले निर्माण के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में बिना स्वीकृत मानचित्र अथवा आवश्यक अनुमति के किसी भी तरह का निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुनियोजित विकास के लिए भवन निर्माण के निर्धारित नियमों का पालन बेहद जरूरी है। अवैध निर्माण से न केवल शहर की नियोजन व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य में यातायात, पार्किंग और अन्य नागरिक सुविधाओं पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध निर्माण के मामलों में नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीलिंग समेत अन्य वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण की ओर से अवैध निर्माण के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है। बिना मानचित्र स्वीकृति अथवा प्राधिकरण की अनुमति के निर्माण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि निर्माणकर्ताओं को भवन निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृत कराने और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।


उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद में आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान का किया दौरा

 उत्तराखंड के मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे स्थानीय अनाजों के पोषक तत्वों पर शोध जारी: डॉ. भारती कुलकर्णी

कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास किया जाना चाहिए: डॉ. भारती कुलकर्णी, निदेशक (आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान)

आईसीएमआर-एनआईएन ने पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा और राष्ट्रीय नीतियों में योगदान की दी जानकारी

देहरादून/हैदराबाद – बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पीआईबी देहरादून द्वारा आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आईसीएमआर-एनआईएन), हैदराबाद का दौरा किया। इस दौरे के दौरान पत्रकारों को पोषण अनुसंधान, जन स्वास्थ्य शिक्षा तथा राष्ट्रीय नीतियों एवं कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में संस्थान के योगदान की जानकारी मिली।

प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए हैदराबाद स्थित आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने खाद्य संरचना, पोषक तत्वों की आवश्यकताओं तथा आहार संबंधी दिशा-निर्देशों पर वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इंडियन फूड कंपोजिशन टेबल्स देश में उपलब्ध विभिन्न खाद्य पदार्थों में ऊर्जा, प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और खनिजों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती हैं। यह जानकारी शोधकर्ताओं, खाद्य उद्योग तथा जन स्वास्थ्य नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी है।

डॉ. कुलकर्णी ने भारतीयों के लिए पोषक तत्वों आवश्यकता और रिकमेंडेड डायटरी प्लान के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ये विभिन्न आयु वर्गों एवं शारीरिक अवस्थाओं के लिए पोषण संबंधी आवश्यकताओं का आधार निर्धारित करते हैं।

भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशा-निर्देश के प्रमुख पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास बचपन की शुरुआती अवस्था से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के आहार में अतिरिक्त चीनी के सेवन से बचने संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लेख किया।

कुपोषण के दोहरे बोझ पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. कुलकर्णी ने विशेष रूप से बच्चों में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की समस्या का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय जीवनशैली तथा वसा, चीनी और नमक की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन इस समस्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल भोजन की उपलब्धता पोषण संबंधी बेहतर स्थिति सुनिश्चित नहीं करती। इसके लिए आहार में विविधता तथा व्यवहार में सकारात्मक बदलाव भी आवश्यक हैं।

डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि उत्तराखंड के स्थानीय कृषि उत्पादों एवं मोटे अनाजों, जिनमें मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा शामिल हैं, के विशिष्ट पोषक तत्वों का अध्ययन करने के लिए शोध किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया में कमी पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए नैदानिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन भी जारी हैं।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन के पोषण सूचना, संचार एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी डॉ. सुब्बा राव द्वारा आयोजित तकनीकी सत्रों में भी भाग लिया।

डॉ. सुब्बा राव ने वर्तमान पोषण संबंधी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए अल्पपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा जीवनशैली से संबंधित चयापचय संबंधी विकारों के एक साथ मौजूद होने की स्थिति को समझाया। उन्होंने वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी और आम लोगों की दैनिक खान-पान की आदतों के बीच अंतर को पाटने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से खाद्य संबंधी भ्रांतियों को दूर करने तथा प्रमाण-आधारित आहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार पत्रकारिता करने का आह्वान किया।

प्रतिनिधिमंडल ने आईसीएमआर-एनआईएन की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया तथा शोधकर्ताओं के साथ संवाद कर खाद्य विश्लेषण एवं लिपिड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

इस दौरे पर प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद प्रेस टूर के सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत सालार जंग संग्रहालय का दौरा किया। जहां पत्रकारों ने हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत तथा संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक एवं अभिलेखीय संग्रहों के बारे में जानकारी प्राप्त की।


नशामुक्ति अभियान के तहत स्टेट नर्सिंग कॉलेज में छात्र-छात्राओं ने ली नशे से दूर रहने की शपथ

नशामुक्त उत्तराखंड के निर्माण में युवाशक्ति की भूमिका अहम- डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून। प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय नशामुक्ति अभियान को गति देने के लिए बुधवार को देहरादून स्थित स्टेट नर्सिंग कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने नशे से पूरी तरह दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ ली।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने छात्र-छात्राओं को नशे के खिलाफ संकल्प दिलाते हुए कहा कि युवा शक्ति देश और प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत है। नशामुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होते हैं।

डॉ. रावत ने कहा कि युवाओं को खुद नशे से दूर रहने के साथ अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी इसके नुकसान के बारे में जागरूक करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से नर्सिंग और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के विद्यार्थी लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

नशे के खिलाफ अभियान को जनांदोलन बनाने की अपील

कैबिनेट मंत्री ने छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को जनांदोलन का रूप देने में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि युवाओं का संकल्प, व्यवहार और जागरूकता समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

इस दौरान नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने संकल्प लिया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे और अपने परिवार, दोस्तों तथा समाज के अन्य लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे। विद्यार्थियों ने स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त उत्तराखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम में नर्सिंग काउंसिल की रजिस्ट्रार मनीषा ध्यानी, स्टेट नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य ममता कपरुवाण समेत विभागीय अधिकारी, नर्सिंग फैकल्टी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने 26 मदरसों को प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र

“ आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल”

देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। देहरादून के आईआरडीटी सभागार में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम की थीम “नई पहचान, नया सम्मान, आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य” रखी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से 26 संस्थानों को मान्यता मिलना शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक शुरुआत है। उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों के प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल बच्चों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी जरूरी है।

बच्चों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर

सीएम धामी ने कहा कि वर्तमान दौर विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। ऐसे में बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे बच्चों की प्रतिभा सामने आए और वे अपनी रुचि के अनुसार डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक, वैज्ञानिक या किसी अन्य क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।

उन्होंने कहा कि आज केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बच्चों को व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देने के साथ शोध और नई तकनीकों को समझने की क्षमता विकसित करनी होगी।

किसी वर्ग को निशाना बनाना सरकार का उद्देश्य नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसी व्यक्ति या वर्ग को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने समान नागरिक संहिता और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराने और हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की रही है। सरकार व्यक्ति की पहचान या वर्ग के बजाय उसके कार्य और योगदान को महत्व देती है।

अवैध कब्जों पर कार्रवाई का भी किया जिक्र

सीएम धामी ने सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। सरकार का उद्देश्य किसी गरीब व्यक्ति को परेशान करना नहीं है। उन्होंने कहा कि वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्वीकृत मानचित्र के साथ जमीन रखने वाले व्यक्ति को परेशान करने का कोई सवाल नहीं है।

युवाओं और बेटियों को आगे बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को हुनर और रोजगार से जोड़ने के लिए ऋण सहित विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। बेटियों को भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने का काम सरकार कर रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और विकास के माध्यम से समाज को आगे ले जाने के लिए पुरानी सोच में बदलाव जरूरी है। बच्चों के भविष्य को राजनीतिक उद्देश्य से ऊपर रखते हुए उनकी शिक्षा और प्रतिभा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शिक्षण संस्थानों से धरातल पर बदलाव की अपेक्षा

सीएम धामी ने मान्यता प्राप्त संस्थानों से कहा कि नई व्यवस्था केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका वास्तविक असर बच्चों की शिक्षा, उनके व्यक्तित्व विकास और भविष्य के अवसरों में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से गांव-गांव और घर-घर तक आधुनिक शिक्षा का संदेश पहुंचाने की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका समाज में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहयोग किया जाएगा, लेकिन संस्थानों को भी पूरी जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।

देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के संस्थान शामिल

समारोह में देहरादून जनपद के 6, हरिद्वार के 19 और ऊधमसिंहनगर के एक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इनमें मदरसा जामिया इस्लामिया, जामिया दारूल उलूम रमजानिया, जामिया सबीलुर्रशाद, जामिया सय्यिदा फातिमातुज्जाहरा, जामिया रहीमिया प्राईमरी स्कूल, मदरसा अरबिया तालीमुल कुरआन समेत अन्य संस्थान शामिल हैं।

हरिद्वार जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के कई मदरसों और शिक्षण संस्थानों को भी मान्यता दी गई। वहीं ऊधमसिंहनगर के एम.जी.एन. पब्लिक स्कूल, केलाखेड़ा को नवीन मान्यता प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड विभिन्न क्षेत्रों में नई पहल के जरिए देश के सामने उदाहरण पेश कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल भी आगे चलकर प्रदेश को नई पहचान दिलाएगी।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।


छात्राओं के उत्साह के बीच कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय तिरपालीसैंण पहुंचीं जिलाधिकारी, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

छात्राओं से आत्मीय संवाद कर जानी पढ़ाई-लिखाई व सुविधाओं की स्थिति, शौचालय मरम्मत, रंगरोगन और जल निकासी के कार्यों के प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने विकासखंड थलीसैंण के दूरस्थ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, तिरपालीसैंण का निरीक्षण कर छात्राओं के लिए उपलब्ध आवासीय एवं शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। जिलाधिकारी के विद्यालय पहुंचने पर छात्राएं उत्साह से भर उठीं और उन्होंने उनका आत्मीयता से स्वागत किया। जिलाधिकारी ने भी छात्राओं से सहज एवं आत्मीय संवाद करते हुए उनकी पढ़ाई-लिखाई, दैनिक दिनचर्या और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।

जिलाधिकारी ने छात्राओं के रहने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, भोजन, स्वच्छता सहित विद्यालय की अन्य मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं से उनके दैनिक जीवन, पढ़ाई, भोजन तथा विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए उनके सुझाव भी सुने।

जिलाधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी को विद्यालय में शौचालय की आवश्यक मरम्मत शीघ्र कराने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यालय भवन के रंगरोगन के लिए प्राक्कलन तैयार कर प्रस्ताव भेजने को कहा, ताकि आवश्यक कार्य समयबद्ध रूप से कराया जा सके।

विद्यालय परिसर में जल निकासी व्यवस्था का जायजा लेते हुए जिलाधिकारी ने नाली निर्माण एवं सुधार से संबंधित प्रस्ताव भी तैयार कर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालय में रहने वाली छात्राओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए, ताकि छात्राओं को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।

छात्राओं ने जिलाधिकारी से संवाद के दौरान उत्साहपूर्वक अपनी बातें साझा कीं और विद्यालय से जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी दी। जिलाधिकारी ने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने तथा अपनी रुचि और प्रतिभा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी, संयुक्त मजिस्ट्रेट गौरी प्रभात, खंड शिक्षा अधिकारी विवेक पंवार, विद्यालय की प्रधानाचार्या सुधा गौड़ सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


मसूरी गोलीकांड के शहीद राज्य आंदोलनकारियों का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा- मुख्यमंत्री

राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, तप, त्याग और बलिदान से साकार हुआ उत्तराखंड राज्य गठन का सपना

देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों की स्मृति में बुधवार को शहीद स्थल झूलाघर, मसूरी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके संघर्ष व बलिदान को उत्तराखंड के इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान की बदौलत उत्तराखंड राज्य गठन का सपना साकार हुआ। मसूरी की धरती राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की महत्वपूर्ण साक्षी रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में खटीमा गोलीकांड के विरोध में मसूरी में हजारों आंदोलनकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलनकारियों के मन में उत्तराखंड की आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य का सपना था।

सीएम धामी ने कहा कि शहीद आंदोलनकारियों का बलिदान हर उत्तराखंडवासी की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के संघर्ष और उसमें आंदोलनकारियों के योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य आंदोलन में मातृशक्ति की भूमिका को भी विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि माताओं और बहनों ने आंदोलन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आंदोलनकारियों के सम्मान में सरकार ने उठाए कई कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी उत्तराखंड की पहचान और गौरव के आधार हैं। सरकार ने आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान एवं कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। इसके दायरे में चिह्नित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी किए गए हैं और 98 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित किया गया है। शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये की गई है। जेल गए और घायल आंदोलनकारियों की पेंशन 6 हजार से बढ़ाकर 7 हजार रुपये तथा सक्रिय आंदोलनकारियों की पेंशन 4,500 से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह की गई है।

पूर्णतः शय्याग्रस्त दिव्यांग राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन भी 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है। इसके अलावा आंदोलनकारियों के अधिकतम दो बच्चों को स्कूल और कॉलेज में निःशुल्क शिक्षा तथा उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

अस्मिता और विकास को लेकर सरकार के फैसले गिनाए

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून और कठोर भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता और डेमोग्राफी की सुरक्षा के लिए धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून भी लागू किए गए हैं। देवभूमि की शांति, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ गतिविधियों पर सरकार सख्ती से कार्रवाई कर रही है और आगे भी किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और रोजगार पर जोर

सीएम धामी ने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। साथ ही युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का कोई युवा रोजगार के लिए मजबूरन पलायन न करे और कोई गांव विकास से अछूता न रहे। उन्होंने कहा कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना, गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार का स्पष्ट संकल्प है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, मसूरी नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, रविन्द्र जुगरान, जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया ने सीएम धामी को भावुक पत्र के साथ भेजी राखी

धराली आपदा के दौरान हुई मुलाकात को किया याद

धराली में दुपट्टे के टुकड़े से बांधी थी सीएम धामी को राखी

देहरादून। रक्षाबंधन के अवसर पर अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी भेजी है। इसके साथ उन्होंने मुख्यमंत्री को एक भावुक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने पिछले वर्ष धराली में आई आपदा के दौरान मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात को याद किया है।

धनगौरी ने बताया कि पिछले वर्ष रक्षाबंधन के समय वह उत्तराखंड आई थीं। इसी दौरान धराली में आई बाढ़ में वह फंस गई थीं। मुख्यमंत्री धामी जब आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे और वहां फंसे लोगों से मिले, तब उन्हें भी मुख्यमंत्री से मिलने का मौका मिला।

धनगौरी ने बताया कि उस समय रक्षाबंधन करीब था। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि अगर उनके पास राखी हो तो वह उन्हें राखी बांध सकती हैं। उस समय उनके पास राखी नहीं थी। उन्होंने अपने दुपट्टे का एक छोटा सा टुकड़ा फाड़कर उसे ही राखी मानकर मुख्यमंत्री की कलाई पर बांध दिया।

धनगौरी ने अपने पत्र में लिखा कि उसी दिन उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को अपना धर्म भाई मान लिया था। उनके लिए वह मुलाकात आज भी बहुत खास है और उस पल को वह कभी नहीं भूल सकतीं।

उन्होंने कहा कि धराली की उस मुश्किल घड़ी में मुख्यमंत्री धामी ने वहां फंसे लोगों का हौसला बढ़ाया और उन्हें भरोसा दिया। धनगौरी ने भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह श्रीकृष्ण द्रौपदी की मदद के लिए आगे आए थे, उसी तरह मुख्यमंत्री भी उस कठिन समय में उनके लिए सहारा बने।

धनगौरी ने कहा कि इस वर्ष वह अहमदाबाद में हैं, लेकिन रक्षाबंधन पर अपने भाई को राखी भेजना वह नहीं भूल सकतीं। इसी भाव के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के लिए राखी भेजी है।

पत्र के अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु रहने की कामना की और कहा कि वह इसी तरह उत्तराखंड और प्रदेश की जनता की सेवा करते रहें।

धराली की आपदा के दौरान दुपट्टे के टुकड़े से शुरू हुआ यह भाई-बहन का रिश्ता आज भी धनगौरी के लिए उतना ही खास है।


सेवा का अधिकार आयोग के आयुक्त बने दीपेन्द्र चौधरी, मुख्य सचिव ने दिलाई पद की शपथ

देहरादून। उत्तराखंड में आम नागरिकों को सरकारी सेवाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में सेवा का अधिकार आयोग को नई जिम्मेदारी मिली है। बुधवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दीपेन्द्र चौधरी को उत्तराखण्ड सेवा का अधिकार आयोग में आयुक्त पद की शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दीपेन्द्र चौधरी को नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि चौधरी आयोग के दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ करेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि सेवा का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य आम लोगों को तय समय-सीमा के भीतर सरकारी सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। नागरिकों को निर्धारित समय में सेवाएं उपलब्ध हों और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना चाहिए।

वहीं, शपथ लेने के बाद दीपेन्द्र चौधरी ने कहा कि वह आयोग की ओर से सौंपे गए दायित्वों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और सुगम तरीके से सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गंभीरता से कार्य किया जाएगा।

कार्यक्रम में सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय समेत शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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