Thursday, September 3rd, 2026

Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

देहरादून में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ प्रशासन का कड़ा रुख

Category Archives: उत्तराखंड

देहरादून में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ प्रशासन का कड़ा रुख

अब तक 953 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 306 पर चालान; 1.14 लाख रुपये जुर्माना वसूला, 306 किलो प्लास्टिक जब्त

देहरादून: पर्यावरण संरक्षण और शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर नगर निगम क्षेत्र के सभी 100 वार्डों में सघन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग, भंडारण और बिक्री पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।

इस अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने 50 सेक्टर अधिकारियों की तैनाती की है। इन अधिकारियों द्वारा अब तक शहर के विभिन्न वार्डों में कुल 953 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान 403 प्रतिष्ठानों में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग, भंडारण एवं वितरण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई। इनमें 306 प्रतिष्ठानों के चालान किए गए तथा कुल 1.14 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया।

प्रवर्तन अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री भी जब्त की गई। अब तक 306.12 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक जब्त कर उसे नष्ट किया गया है। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रभावी अंकुश लगाकर शहर को स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाना है।

जागरूकता के साथ कार्रवाई का संदेश

जिला प्रशासन की ओर से प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ आमजन को भी सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करने तथा पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया जा रहा है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग से बचकर और उसके स्थान पर पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाकर आमजन स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त देहरादून के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


नीति निर्माण में शोध, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए- मुख्यमंत्री

राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शोध के निष्कर्षों का नीतियों एवं योजनाओं में हो प्रभावी उपयोग

योजनाओं के नियमित मूल्यांकन और लक्ष्यों की वार्षिक मॉनिटरिंग पर दिया जाए विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का किया विमोचन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस (USCPPGG) की शासी निकाय की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माण में शोध, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाए। शोध एवं अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग राज्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में किया जाए।

मुख्यमंत्री ने राज्य की उपलब्धियों और विभिन्न क्षेत्रों में किये गये उल्लेखनीय कार्यों पर आधारित केस स्टडी तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने जनपद स्तर पर अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए उत्तराखण्ड की विशिष्ट परिस्थितियों और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजनाओं पर कार्य किया जाए। नीति निर्माण और भविष्य की कार्ययोजनाओं में डेटा एवं शोध आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रतिवर्ष 10 स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को कैपस्टोन परियोजना के लिए स्टाइपेंड प्रदान किये जाने पर सहमति दी गई। इसके माध्यम से राज्य की प्राथमिकता वाले विषयों पर शोध एवं परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार समारोह का गरिमापूर्ण आयोजन किये जाने पर जोर दिया गया। सतत विकास लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण तथा इस दिशा में किये जा रहे कार्यों पर भी चर्चा की गई।

शासी निकाय के सदस्यों ने राज्य के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये। सदस्यों ने राज्य में हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम उत्पादों को बढ़ावा देने तथा एमएसएमई पर विशेष फोकस करने पर जोर दिया। पर्वतीय क्षेत्रों में होम टूरिज्म को बढ़ावा देने का सुझाव देते हुए कहा गया कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

सदस्यों ने राज्य के भावी विकास से जुड़े आठ प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर विस्तृत शोध एवं अध्ययन कराने का सुझाव दिया, ताकि भविष्य की योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए बेहतर रणनीति तैयार की जा सके। लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए वार्षिक मॉनिटरिंग के लक्ष्य निर्धारित करने तथा योजनाओं और कार्यों का नियमित मूल्यांकन किये जाने पर भी जोर दिया गया। नीतियों का समय-समय पर परीक्षण कर उनकी प्रभावशीलता का आकलन करने का सुझाव दिया गया।

शासी निकाय के सदस्यों ने मृदा को भी प्रमुख फोकस एरिया में रखने तथा स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया। योजनाओं एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ब्लॉक स्तर तक के अधिकारियों के प्रशिक्षण और उन्हें प्रेरित करने पर जोर दिया गया। राज्य की उपलब्धियों को ओरिएंटेशन कार्यक्रमों का हिस्सा बनाने तथा प्रदेश के विश्वविद्यालयों को राज्य की प्रगति, संभावनाओं और विकास से जुड़े विषयों पर शोध एवं अध्ययन के लिए सक्रिय रूप से जोड़ने का सुझाव दिया गया। विभागों द्वारा राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान कर शोध के लिए विषय उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में विकसित उत्तराखण्ड-2047 की दिशा में राज्य की भावी विकास रणनीति पर भी चर्चा की गई। आर्थिक विकास एवं रोजगार, मानव संसाधन एवं कल्याण, वन, जैव विविधता एवं जलवायु अनुकूलन, अवस्थापना विकास, स्थानीय स्वशासन एवं क्षेत्रीय विकास तथा तकनीक आधारित सुशासन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया। राज्य की आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन, रोजगार सृजन और सतत विकास को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यूएससीपीपीजीजी और यूएनडीपी के सहयोग से सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन के लिए किये जा रहे कार्यों पर चर्चा की गई। एसडीजी के स्थानीयकरण एवं मॉनिटरिंग, नीति मूल्यांकन तथा राज्य की प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर नीतिगत अध्ययन को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों के क्षेत्र में उत्तराखण्ड हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान पर है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा को समाहित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने शासी निकाय के सदस्यों द्वारा दिये गये महत्वपूर्ण सुझावों का परीक्षण कर उपयोगी सुझावों पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास को गति देने के लिए शोध, नवाचार, प्रभावी नीति निर्माण, क्षमता विकास और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर निरंतर कार्य किया जाए।

बैठक में विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर, पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.एस. कश्यप, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह, ई-ग्रो फाउंडेशन के सीईओ डॉ. चरण सिंह, आईआईटी रुड़की के प्रो. (डॉ.) आशीष पाण्डे, दून विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) आर.पी. ममगाई, आईआईएम काशीपुर के प्रोफेसर डॉ. अतुल गुहा, उत्तराखण्ड स्टेट चैप्टर फिक्की की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, अपर सचिव नरेन्द्र भंडारी और एसीईओ सीपीपीजीजी मनोज पंत उपस्थित थे।


नौले-धारों और नदियों के पुनर्जीवन को लेकर डीएम ने दिए प्रभावी कार्ययोजना के निर्देश

सारा की जिला स्तरीय बैठक में जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर, 51 रिचार्ज शाफ्ट के कार्य पूर्ण; बांदल नदी की विस्तृत डीपीआर तैयार होगी

देहरादून। प्राकृतिक जल स्रोतों-नौले-धारों तथा नदियों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा) की जिला स्तरीय बैठक की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य निर्धारित कर एकीकृत दृष्टिकोण से प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने और कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत जल स्रोतों के संरक्षण, संवर्धन एवं सौंदर्यीकरण के लिए किए जा रहे कार्य धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए तथा उनका वास्तविक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सारा से धनराशि प्राप्त कर चुके विभागों को आवंटित धनराशि का शीघ्र उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

वन प्रभाग मसूरी की कम वित्तीय एवं भौतिक प्रगति पर डीएम ने जताई नाराजगी
वन प्रभाग मसूरी में वित्तीय एवं भौतिक प्रगति अपेक्षाकृत कम पाए जाने पर जिलाधिकारी ने पूर्ण हो चुके कार्यों का शीघ्र सत्यापन कराने तथा सत्यापन के बाद लंबित भुगतान की कार्रवाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।

बैठक में लघु सिंचाई विभाग ने बताया कि विभाग द्वारा 51 रिचार्ज शाफ्ट के कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। जिलाधिकारी ने इन कार्यों से भूजल स्तर एवं जल संरक्षण पर पड़े प्रभाव का आकलन करने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के साथ संयुक्त रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

गडूल नदी में शुरू होंगे जल संरक्षण के कार्य
‘एक जनपद, एक नदी’ योजना के अंतर्गत सोग नदी कैचमेंट की सहायक नदी गडूल नदी में कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए सारा द्वारा बजट भी अवमुक्त किया जा चुका है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य शीघ्र शुरू करने को कहा।

जनपद में ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व के चयनित पांच धारे एवं नौले की डीपीआर तैयार करने के लिए आर्किटेक्ट को स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र डिजाइन एवं रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि डीपीआर समय से सारा मुख्यालय को भेजी जा सके।

बांदल नदी की विस्तृत डीपीआर तैयार होगी
बांदल नदी के समग्र विकास एवं पुनर्जीवन के लिए विस्तृत डीपीआर तैयार करने के निर्देश लघु सिंचाई, सिंचाई, वन, जल संस्थान एवं ग्राम्य विकास विभाग को दिए गए। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को समन्वय से डीपीआर तैयार कर अगली बैठक में उसका प्रस्तुतिकरण करने को कहा।

सीरीज ऑफ चेकडैम पर जोर
वर्षा जल संरक्षण के लिए सघन वृक्षारोपण, खंती, चाल-खाल, चेकडैम सहित विभिन्न जल संचयन संरचनाओं के निर्माण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सीरीज ऑफ चेकडैम विकसित किए जाएं, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो और इसका प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय जनता को मिल सके।

बैठक में बाण गंगा, खट्टा पानी, नौका धारा, पानी वाला बैण्ड, मालदेवता, विवेकानंद बावडी, नाला पानी, केशरवाला, सौडा सरोली, आम खाला, तुरानी खाला, पंछी खाला, कैरवान आदि जल स्रोतों की संचालित संरक्षण, संवर्धन एवं सौन्दर्यीकरण कार्यो की समीक्षा की गई।

नोडल अधिकारी लघु सिंचाई के अधिशासी अभियंता ने बताया कि जल स्रोतो के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सारा के अंतर्गत कुल 2105.09 लाख बजट स्वीकृत है। जिसमें से 374.79 बजट विभागों को अवमुक्त किया गया है। इसमें से विभागों द्वारा अब तक 344.98 लाख धनराशि व्यय की गई है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई विनय कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता एवं सदस्य सचिव सारा, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. प्रशांत रॉय, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित वन प्रभाग देहरादून, मसूरी एवं चकराता, जल संस्थान, सिंचाई विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सारा के संबंधित अधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।


नैनीताल में खाद्य प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, 07 खाद्य पदार्थों के नमूने जांच को भेजे

नैनीताल: जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर जनपद में सुरक्षित एवं गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गुरुवार को खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण एवं नमूना संग्रहण अभियान चलाया।

सहायक आयुक्त/अभिहित अधिकारी, खाद्य संरक्षा नैनीताल अजब सिंह रावत के नेतृत्व में टीम ने जिले के 09 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से 07 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए, जिनमें सूजी, साबूदाना, ओट्स, सरसों का तेल, कोकोनट वाटर, स्प्राइट और थम्सअप कार्बोनेटेड पेय पदार्थ शामिल हैं।

सभी नमूनों को खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत विश्लेषण के लिए राज्य खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला भेजा गया है। प्रयोगशाला से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अभियान के दौरान 03 खाद्य कारोबारकर्ताओं के विरुद्ध वाद स्वीकृति भी प्रदान की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने प्रतिष्ठान संचालकों को परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने तथा कूड़ा रखने के लिए उचित स्थान पर बंद कूड़ेदान रखने के निर्देश दिए।

निरीक्षण अभियान में सहायक आयुक्त/अभिहित अधिकारी अजब सिंह रावत, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी रामनगर असलम खॉ तथा वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी हल्द्वानी ग्रामीण नन्दकिशोर मौजूद रहे।


ग्रामीण उत्पादों और पहाड़ी शिल्प को मिला बड़ा मंच, हल्द्वानी में ‘ग्रामीण भारत महोत्सव’ का शुभारंभ

हल्द्वानी:  नाबार्ड के सहयोग से रामलीला मैदान, शीशमहल, काठगोदाम में पांच दिवसीय ‘ग्रामीण भारत महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि नैनीताल-ऊधम सिंह नगर सांसद अजय भट्ट ने महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भीमताल ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, राज्य दर्जा मंत्री रेनू अधिकारी सहित बैंक अधिकारियों, विभागीय प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठनों और शिल्पकारों ने प्रतिभाग किया।

03 से 07 सितंबर तक चलने वाले महोत्सव में 50 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें नैनीताल के साथ ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ के स्वयं सहायता समूह, ग्रामीण उद्यमी, कृषक उत्पादक संगठन और पारंपरिक शिल्पकार अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं बिक्री कर रहे हैं।

महोत्सव में ऐपण कला, जूट बैग, हस्तनिर्मित टोकरियां, मसाले एवं जैविक मसाले, घी, अचार, जूस, स्क्वैश, वस्त्र एवं रेशम उत्पाद, पेंटिंग तथा सजावटी सामग्री समेत विभिन्न स्थानीय और पारंपरिक उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी लोगों का मन मोह लिया। महोत्सव के दौरान ऐपण कला प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और ग्रामीण उत्पादकों एवं शिल्पकारों से संवाद जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर समूह सदस्यों और ग्रामीण उद्यमियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण उद्यमिता, महिला सशक्तीकरण, स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार संपर्क को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित कर रहा है।

महोत्सव का संपूर्ण व्यय नाबार्ड द्वारा वहन किया जा रहा है, जबकि चेष्टा गैर-सरकारी संस्था इसकी कार्यान्वयन एजेंसी है। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ना है।

उद्घाटन दिवस पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया और स्थानीय उत्पादों में रुचि दिखाई। ग्रामीण भारत महोत्सव 07 सितंबर तक आमजन के लिए खुला रहेगा।


वड्यूड़ा गांव पहुंचीं मंत्री रेखा आर्या, पीड़ित परिवारजनों से की मुलाक़ात, दिया हर संभव मदद का भरोसा

अतिशीघ्र पहुंचाई जाए पीड़ित परिवार तक त्वरित एवं हर संभव शासकीय सहायता राशि-रेखा आर्या

अल्मोड़ा/सोमेश्वर। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के स्याहीदेवी मंडल स्थित वड्यूड़ा गांव में अतिवृष्टि और भीषण भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेने कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक रेखा आर्या पहुंचीं। उन्होंने आपदा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और दुख की इस घड़ी में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।

मंत्री रेखा आर्या ने प्रभावित एवं शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें इस कठिन समय में धैर्य और आत्मबल बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

इसके बाद कैबिनेट मंत्री ने भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से नुकसान की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री भी वितरित की। साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवारों तक सरकारी सहायता बिना किसी देरी के पहुंचाई जाए।

रेखा आर्या ने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को लेकर गंभीर है। आपदा प्रभावित लोगों को राहत एवं पुनर्वास के लिए जो भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जानी है, उसे प्राथमिकता के आधार पर तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार और उनका स्वयं का पूरा प्रयास रहेगा कि प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। प्रशासन को राहत कार्यों में तेजी लाने और जरूरतमंद परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अल्मोड़ा महेश नयाल, विधायक प्रतिनिधि भुवन जोशी, स्याहीदेवी मंडल अध्यक्ष गणेश जलाल, प्रधान प्रतिनिधि वड्यूड़ा भास्कर राम, बूथ अध्यक्ष सूरज कुमार, भाजपा जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह नयाल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विपिन पाठक, मंडल महामंत्री देवेंद्र मेहरा, नरेंद्र बिष्ट, युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष अशोक जलाल, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र भोज, मंडल उपाध्यक्ष अमित बिष्ट, पूर्व जिला पंचायत सदस्य योगेश बराकोटी, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष हरीश बिष्ट, किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष आनंद सिंह नेगी, स्याहीदेवी किसान मोर्चा मंडल अध्यक्ष पप्पू नेगी सहित पार्टी पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर, पात्र छात्र-छात्राओं को समय से आवेदन कराने के निर्देश

देहरादून। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर छात्रवृत्ति आवेदन की प्रक्रिया जारी है। पात्र छात्र-छात्राएं 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। समाज कल्याण विभाग ने जिले के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों को पात्र विद्यार्थियों के आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर कराने के निर्देश दिए हैं।

जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने सभी प्रधानाचार्यों और प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाए और उनके आवेदन समय रहते ऑनलाइन कराए जाएं। उन्होंने कहा कि अंतिम तिथि के बाद यदि कोई पात्र विद्यार्थी आवेदन से वंचित रहता है तो इसके लिए संबंधित शिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

विभाग के मुताबिक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और दिव्यांग वर्ग के पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्थानों को आवेदन प्राप्त करने के साथ-साथ विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं भी निर्धारित समय के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

अंतिम समय का इंतजार न करने की अपील

छात्रवृत्ति आवेदन या राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल से संबंधित तकनीकी अथवा अन्य समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षण संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए गए हैं। विद्यार्थियों और संस्थानों की सुविधा के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

जिला समाज कल्याण अधिकारी ने शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना पात्र विद्यार्थियों के आवेदन जल्द से जल्द पूर्ण कराए जाएं और उनका सत्यापन भी समय पर सुनिश्चित किया जाए। विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी पात्र विद्यार्थी को छात्रवृत्ति योजना के लाभ से वंचित न होना पड़े।


नैनीताल में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग का शिकंजा, अभिभावकों को लौटाए गए 39 लाख रुपये से अधिक

नैनीताल: जनपद नैनीताल में माह अप्रैल 2026 में निजी विद्यालयों द्वारा की गई मनमानी के विरुद्ध जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। अतिरिक्त शुल्क की वापसी प्रारंभ होने से अभिभावकों ने राहत की सांस ली है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी रंजीत सिंह नेगी ने अवगत कराया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अप्रैल माह में निजी विद्यालयों द्वारा लिए जा रहे अतिरिक्त एवं अवैध शुल्क की जांच हेतु जिलाधिकारी के निर्देशानुसार शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन की संयुक्त टीम गठित की गई थी।

जांच में जनपद के 87 निजी विद्यालयों द्वारा नियमविरुद्ध शुल्क वसूले जाने की पुष्टि हुई थी। प्रशासन द्वारा लिए गए अतिरिक्त शुल्क की वापसी अथवा आगामी माह के शुल्क में समायोजन करने के निर्देश दिए गए थे।

निर्देशों के अनुपालन में चलाए गए अभियान में नैनीताल के 46 विद्यालयों द्वारा ₹39,05,405/- (उनतालीस लाख पाँच हजार चार सौ पाँच रुपये) की धनराशि अभिभावकों को वापस कर दी गई है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में चले इस अभियान के बाद 08 विद्यालयों ने नियमविरुद्ध बढ़ाए गए शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) को कम किया है।इसके अतिरिक्त जनपद के 39 विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से लिया जा रहा परीक्षा शुल्क कम किया गया है।15 निजी विद्यालयों द्वारा लिया जा रहा पंजीकरण शुल्क कम या शून्य (Zero) कर दिया गया है।

टीसी शुल्क ₹1 किया गया

जांच में पाया गया कि विभिन्न विद्यालयों द्वारा टी.सी. (Transfer Certificate) मद में सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क ₹1 के स्थान पर ₹100 से लेकर ₹1,000 तक वसूला जा रहा था। प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद उक्त शुल्क को घटाकर ₹1 कर दिया गया है तथा अतिरिक्त वसूल की गई राशि अभिभावकों को वापस/समायोजित की गई है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल ने बताया कि जिन विद्यालयों द्वारा अब तक अतिरिक्त शुल्क वापस नहीं किया गया है, उन पर विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा कठोर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। नियमविरुद्ध फीस वसूलने वाले विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति भी शासन को प्रेषित की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अभिभावकों के शोषण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने अपील की है कि विद्यालयों से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत एवं सूचना होने पर अभिभावक मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ई मेल आईडी ceonainital11@

gmail.com पर ईमेल के माध्यम से अवगत करा सकते हैं, शिकायतकर्ता का नाम पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा, तथा प्राप्त शिकायत पर प्रभावी एवं नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।


सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रशासन की सख्ती जारी, टर्नर रोड वार्ड में 38 प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण

6 पर 9,500 रुपये जुर्माना; करीब 19 किलो प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त

देहरादून। राजधानी देहरादून को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर शहर के विभिन्न वार्डों में तैनात सेक्टर अधिकारी लगातार दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच कर रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को टर्नर रोड के वार्ड-78 में व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों पर जुर्माना लगाया गया और प्लास्टिक सामग्री जब्त की गई।

जिला सूचना अधिकारी प्रियंका जोशी और नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर राजीव कुमार सैनी के नेतृत्व में मुन्नी चौक और आईएसबीटी बस स्टैंड मार्केट क्षेत्र में अभियान चलाया गया। टीम ने वार्ड के कुल 38 प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान छह प्रतिष्ठानों में करीब 19 किलोग्राम सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री बरामद हुई।

प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुल 9,500 रुपये का अर्थदंड वसूला गया। टीम ने मौके से प्लास्टिक सामग्री जब्त करने के साथ ही व्यापारियों को भविष्य में प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की सख्त चेतावनी दी।

एक्सपायर लाइसेंस के साथ मांस बिक्री भी पकड़ी

चेकिंग के दौरान एक मांस विक्रेता भी एक्सपायर लाइसेंस के साथ मांस का विक्रय करता पाया गया। टीम ने संबंधित विक्रेता को नगर निगम से तत्काल वैध लाइसेंस प्राप्त करने के निर्देश दिए।

कार्रवाई के साथ जागरूकता पर भी जोर

प्रशासन की टीम ने अभियान के दौरान केवल जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक भी किया। अधिकारियों ने बताया कि प्लास्टिक न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि नालियों के अवरुद्ध होने और जनस्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का भी बड़ा कारण बनता है।

लोगों से खरीदारी के दौरान प्लास्टिक की जगह कपड़े या जूट के थैलों का इस्तेमाल करने की अपील की गई। अभियान में नगर निगम वार्ड-78 के सुपरवाइजर अशोक कुमार भी मौजूद रहे।

50 सेक्टर अधिकारी कर रहे लगातार निगरानी

जिलाधिकारी के निर्देश पर देहरादून नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में 50 सेक्टर अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये अधिकारी लगातार चेकिंग, कार्रवाई और जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि देहरादून को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करने तक अभियान जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


देहरादून में वृद्धावस्था पेंशन से वंचित बुजुर्गों के लिए चलेगा विशेष अभियान, 30 सितंबर तक होंगे आवेदन

डीएम ने अधिकारियों को दिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। जिले में पात्र बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने सितंबर माह में विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। अभियान के तहत ऐसे वृद्धजनों को चिन्हित किया जाएगा, जो पात्र होने के बावजूद अब तक वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में अभियान को प्राथमिकता के साथ संचालित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के पात्र बुजुर्गों को प्रतिमाह 1,500 रुपये की पेंशन दी जाती है। योजना के लिए परिवार की वार्षिक आय 48 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। पति-पत्नी दोनों के पात्र होने पर परिवार को कुल 3,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन बैंक खाते के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।

पात्र बुजुर्गों की पहचान पर जोर

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान पात्र बुजुर्गों की पहचान कर उन्हें आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने में मदद की जाए। उन्होंने कहा कि वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा पात्र व्यक्ति का अधिकार है और प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र बुजुर्ग सामाजिक सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित न रहे।

अभियान के तहत संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में बुजुर्गों से संपर्क करेंगे। पात्र लोगों को आवेदन की औपचारिकताएं पूरी कराने के साथ ऑनलाइन आवेदन में भी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

पात्र बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिए भी आवेदन कराया जा सकता है। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र व्यक्तियों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रखे जाएं।

ग्रामीण क्षेत्रों में आवेदन के लिए ग्राम सभा का प्रस्ताव और राजस्व विभाग द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र आवश्यक होगा। वहीं, शहरी क्षेत्रों में संबंधित तहसीलदार द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र सहित निर्धारित दस्तावेजों और औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।

ग्राम पंचायतों में होंगी विशेष बैठकें

पात्र वृद्धजनों को योजना से जोड़ने के लिए सितंबर में ग्राम पंचायतों की विशेष बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों के माध्यम से बुजुर्गों और उनके परिजनों को पेंशन योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी दी जाएगी।

जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों, खंड विकास अधिकारियों और नगर निकायों के अधिकारियों को अभियान की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है।

30 सितंबर तक आवेदन का लक्ष्य

जिला प्रशासन ने 30 सितंबर 2026 तक वृद्धावस्था पेंशन के सभी ऑनलाइन आवेदनों को नियमानुसार अग्रसारित करने का लक्ष्य तय किया है। वहीं, 30 सितंबर तक आवेदन करने वाले पात्र वृद्धजनों को अक्टूबर 2026 की पेंशन राशि का भुगतान नवंबर 2026 तक किए जाने की व्यवस्था की गई है।

अभियान की निगरानी के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल को नोडल अधिकारी और सभी सहायक समाज कल्याण अधिकारियों को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। विकासखंड स्तर पर तैनात अधिकारी पात्र बुजुर्गों की पहचान से लेकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने तक सहयोग करेंगे।

प्रशासन ने लोगों से की अपील

जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि उनके आसपास कोई पात्र बुजुर्ग वृद्धावस्था पेंशन से वंचित है तो उसकी पहचान कराते हुए नजदीकी सीएससी या संबंधित कार्यालय के माध्यम से आवेदन कराने में सहयोग करें। प्रशासन का लक्ष्य सितंबर में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के जरिए अधिक से अधिक पात्र बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ना है।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp