Thursday, October 1st, 2026

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शिक्षा विभाग को मिले 24 नये उप शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मंत्री डॉ रावत के अनुमोदन के उपरांत दूरस्थ क्षेत्रों दी गई प्रथम तैनाती

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शिक्षा विभाग को मिले 24 नये उप शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मंत्री डॉ रावत के अनुमोदन के उपरांत दूरस्थ क्षेत्रों दी गई प्रथम तैनाती

नये अधिकारियों के आने से विभागीय कार्यों में आयेगी तेजी

देहरादून: विद्यालयी शिक्षा विभाग को 24 नये उप शिक्षा अधिकारी मिल गये हैं। राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित इन उप शिक्षा अधिकारियों को प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्र के विकासखण्डों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। इनकी नियुक्ति से विभागीय के कार्यों में तेजी आने के साथ ही प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार हो सकेंगे।

विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से कुल 48 उप शिक्षा अधिकारियों का चयन हुआ है, जो कि विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षणरत हैं। प्रथम चरण में इनमें से 24 उप शिक्षा अधिकारियों को प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्र के विभिन्न विकासखण्डों में प्रथम तैनाती दे दी गई है। जिसमें पौड़ी जनपद में बिनीता रावत को द्वारीखाल, राज कुमार सिंह डसीला को बीरोंखाल, भावना चाहल को जयहारीखाल, कुणाल सिंह को पाबौं, शुभम गुप्ता को खिर्सू, मनीष मोहन नेगी को यमकेश्वर, राजेश परमार को थलीसैण, दीपक लखेड़ा को एकेश्वर, उमेश चंद्र सुयाल को कल्जीखाल विकासखण्ड में तैनाती दी गई है।

इसी प्रकार नैनीताल जनपद में प्रवीण दिगारी को ओखलकाण्डा, परवीन अजहर को रामगढ़ विकासखण्ड में प्रथम तैनाती दी गई। अल्मोड़ा जनपद में राविन्स को सल्ट, अमित राणा को लमगड़ा, मनोज सिंह को भिकियासैंण, चमोली जनपद में अंशिका बिष्ट को नंदानगर, रूबी नेगी को नारायणबगढ़, टिहरी जनपद में दिव्या जोशी को देवप्रयाग, आशुतोष राणा को जाखणीधार, आयुष बन्धानी को प्रतापनगर, समीक्षा उनियाल को थौलधार, पिथौरागढ़ जनपद में राहुल सिंह रैंसवाल को कनालीछीना, बलवन्त नाथ को मूनाकोट, योगेन्द्र कुमार शर्मा को मुनस्यारी, उत्तरकाशी जनपद में राजन सिंह ठाकुर को पुरोला विकासखण्ड में तैनाती दी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षणरत शेष उप शिक्षा अधिकारियों को भी शीघ्र तैनाती दी जायेगी। उन्होंने कि कहा कि नव नियुक्त उप शिक्षा अधिकारियों की तैनाती से दूरस्थ क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी साथ ही विभागीय कार्यों में भी तेजी आयेगी।


मेरा युवा भारत’ द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम् कैंप’ कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या हुई सम्मलित , कहा देश की युवा शक्ति है राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत

वंदे मातरम् जैसे आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति और देश के प्रति जिम्मेदारियों से जोड़ने के साथ एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को करते हैं मजबूत- रेखा आर्या

देहरादून: आज प्रदेश की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ‘मेरा युवा भारत’ द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम् कैंप’ कार्यक्रम में सम्मिलित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वंदे मातरम्’ गीत के साथ किया गया। इस आयोजन में देशभर के 6 राज्यों से 150 युवा प्रतिभागी शामिल हुए हैं।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस कैंप के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और नेतृत्व क्षमता की भावना मजबूत होगी, साथ ही विभिन्न राज्यों से आए युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति और जीवनशैली को जानने-समझने का अवसर भी प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि आज देश की युवा शक्ति हमारे राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं की ऊर्जा और उनकी प्रतिभा देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कहा कि वंदे मातरम जैसे आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति, मातृभूमि और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों से जोड़ने के साथ-साथ एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को भी मजबूत करते हैं।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि आप सभी युवा देश के भविष्य हैं। इस कैंप के माध्यम से आप सभी के भीतर राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ति की भावना और अधिक मजबूत होगी। साथ ही विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से देश की विविधता में एकता की भावना और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कहा कि वे यहां से राष्ट्रसेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और देश के विकास में अपना योगदान देने का संकल्प लेकर जाएं।

कार्यक्रम में राज्य निदेशक राहुल डबराल, राज्य नोडल अधिकारी (NSS) सुनैना रावत, उपनिदेशक अविनाश सिंह, सहायक निदेशक ब्रजेश कौशिक सहित विभिन्न राज्यों से आए सभी युवा प्रतिभागी उपस्थित रहे।


जिलाधिकारी ने सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी में पहुंचकर बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह

पौड़ी- जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने राइफलमैन शहीद जसवंत सिंह स्टेडियम, रांसी पहुंचकर सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी के तहत आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर रहे खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनके खेल अनुभवों और तैयारियों के बारे में संवाद किया।

जिलाधिकारी ने पिट्ठू खेल प्रतियोगिता में टॉस कर खेल का शुभारंभ किया और स्वयं खिलाड़ियों के साथ पिट्ठू खेलकर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने खिलाड़ियों एवं कोचों से संवाद करते हुए अनुशासन, नियमित अभ्यास, खेल भावना और दृढ़ संकल्प के साथ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रतिभा के साथ निरंतर मेहनत, अभ्यास और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प जरूरी है।

जिलाधिकारी ने अंडर-19 वर्ग की 100 मीटर दौड़ के फाइनल का शुभारंभ किया। साथ ही अंडर-14 वर्ग की खो-खो प्रतियोगिता के सेमीफाइनल का भी शुभारंभ कराया। इस दौरान उन्होंने लंबी कूद सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का अवलोकन कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

जिलाधिकारी ने कहा कि सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी के तहत जनपद में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर रहे खिलाड़ियों में खासा उत्साह और जोश देखने को मिल रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ प्रतिभाग करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आह्वान किया। कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिभा से न केवल जनपद, बल्कि देश का नाम भी रोशन हो सकता है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने 3000 मीटर दौड़ के विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच प्रदान करते हैं। सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही खेल भावना, अनुशासन, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि प्रतियोगिता में जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ प्रतिभाग करना है। निरंतर मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प के साथ युवा खेलों के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

इस अवसर पर जिला युवा कल्याण अधिकारी पंकज तिवारी, जिला क्रीड़ा अधिकारी प्रदीप कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।


मुख्य सचिव ने की यूआईआईडीबी के प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा

शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर के कार्यों में धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी

प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन और PERT चार्ट के साथ नियमित मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

कुम्भ क्षेत्र में कुंभ मेला शुरू होने तक प्राथमिकता वाले कार्य हर हाल में पूर्ण कराने के दिए निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को सचिवालय में उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने और उनकी नियमित एवं प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर परियोजना की धीमी प्रगति का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्य सचिव ने परियोजना की कार्यदायी संस्था यूपीडीसीसी की करीब 10 महीने में केवल 10 प्रतिशत प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने परियोजना की निगरानी के लिए डेडिकेटेड प्रोजेक्ट मैनेजर की तैनाती के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट मैनेजर की तैनाती कार्यस्थल पर ही की जाए, ताकि निर्माण कार्यों की लगातार निगरानी हो और मौके पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान किया जा सके।

मुख्य सचिव ने यूआईआईडीबी की सभी परियोजनाओं के लिए निर्धारित समयसीमा के साथ पर्ट चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक में परियोजनावार प्रगति की समीक्षा इसी चार्ट के आधार पर की जाए। जिन परियोजनाओं में अपेक्षित गति से काम नहीं हो रहा है, वहां देरी के कारणों की पहचान कर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन को भी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

रिवर राफ्टिंग परियोजनाओं के लिए बनेगी समर्पित टीम

बैठक में रिवर राफ्टिंग डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने यूपीडीसीसी को अगले पांच वर्षों के लिए संचालन एवं अनुरक्षण के लिए समर्पित टीम विकसित करने और उसे कार्यस्थल पर तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र के लिए अलग-अलग यूनिट गठित करने को कहा, ताकि परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव में किसी तरह की दिक्कत न आए।

मुख्य सचिव ने कुंभ मेला-2027 को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता वाले सभी कार्य तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। सती कुंड से संबंधित कार्यों को 15 दिसंबर तक पूरा कराने के लिए उन्होंने श्रमिकों और शिफ्ट की संख्या बढ़ाने को कहा। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने के साथ निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया।

हरिद्वार में तैनात रहेंगे कार्यदायी संस्था के महाप्रबंधक

हरिद्वार में चल रहे विकास कार्यों को लेकर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि कार्यदायी संस्था के महाप्रबंधक हरिद्वार में ही रहकर परियोजनाओं की नियमित निगरानी करेंगे। उन्हें परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इस संबंध में आवश्यक आदेश तत्काल जारी करने को भी कहा गया।

पार्किंग परियोजनाओं को लेकर भी दिए निर्देश

सरफेस, अंडरग्राउंड और मैकेनिकल पार्किंग से जुड़े नए कार्यों को लेकर भी मुख्य सचिव ने दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार क्षेत्र में कोई नया पार्किंग प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले जिलाधिकारी और मेलाधिकारी से लिखित अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अन्य विभागों की ओर से तैयार की जा रही योजनाओं के साथ पार्किंग परियोजनाओं का उचित समन्वय किया जाए। किसी क्षेत्र में सरफेस, अंडरग्राउंड या मैकेनिकल पार्किंग में से जो विकल्प व्यावहारिक और उपयुक्त हो, उसी के आधार पर निर्माण कराया जाए।

वित्तीय मामलों की निगरानी के लिए बनेगी कमेटी

यूआईआईडीबी की परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय मामलों की निगरानी के लिए मुख्य सचिव ने फाइनेंशियल एवं ऑडिट कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सी. रविशंकर, डॉ. रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते समेत संबंधित विभागों और यूआईआईडीबी के अधिकारी मौजूद रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने अंतराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री ने वन क्लिक के माध्यम से 9,93,886 पेंशनरों को ₹147.34 करोड की पेंशन का किया भुगतान

वृद्धजन परिवार के सुरक्षाकवच, उनके कारण ही घर में ईश्वर का वास होता है : मुख्यमंत्री

उत्तराखंड के प्रत्येक वरिष्ठजन के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा मेरी जिम्मेदारी

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग का शुभारंभ किया और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 23 वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया। साथ ही निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में चयनित पांच छात्र-छात्राओं को भी पुरस्कार प्रदान किए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन क्लिक के माध्यम से सितंबर माह की पेंशन राशि जारी की। इसके तहत प्रदेश के 9,93,886 पेंशनरों को कुल 147 करोड़ 34 लाख 53 हजार रुपये की पेंशन का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को वरिष्ठजनों के कल्याण के लिए कार्य करने की शपथ भी दिलाई। इसके बाद उन्होंने परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया।

मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठजनों का स्वागत करते हुए अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों के सानिध्य में परिवार खुद को सुरक्षित महसूस करता है। बच्चों को संस्कार, जीवन के आदर्श और अनुभव वरिष्ठजनों से ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धजन परिवार के सुरक्षाकवच होते हैं और उनकी मौजूदगी से घर में अनुशासन, अपनापन और आत्मीयता बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठजन अपने जीवन के अनुभवों के जरिए परिवार और समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे समाज की जीवंत विरासत और अनुभव का भंडार हैं। मुख्यमंत्री ने अपने जीवन में भी माता-पिता के संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके स्वर्गीय पिता की सीख आज भी उनका मार्गदर्शन करती है, जबकि उनकी माता का आशीर्वाद उन्हें शक्ति देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह प्रदेश के मुख्य सेवक होने के साथ उत्तराखंड के बेटे भी हैं। प्रदेश के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक का सम्मान, सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह 1,500 रुपये पेंशन दे रही है। इसमें पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 9 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को 147 करोड़ रुपये से अधिक की पेंशन उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हैं। वहीं देहरादून, अल्मोड़ा और चंपावत में नए वृद्धाश्रम भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल समेत अन्य क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा भी वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सोच है कि समाज में वृद्धाश्रमों की आवश्यकता ही नहीं होनी चाहिए। वरिष्ठजनों को वृद्धाश्रम में नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच सम्मान के साथ रहने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और समग्र विकास के लिए कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया गया है। दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना के तहत वरिष्ठजनों के लिए निशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से वरिष्ठजनों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं में किसी तरह की कमी नहीं होने देगी।

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वृद्धजनों के सम्मान में यह दूसरा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में बड़ों के सम्मान की परंपरा रही है और इसे हमेशा जीवंत रखा जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से वरिष्ठजनों का सम्मान करने और जरूरत के समय उनकी सहायता करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, दायित्वधारी राम चंद्र गौड़, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, सचिव श्रीधर बाबू अद्वांकी, निदेशक संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय सिंह टोलिया, संयुक्त निदेशक जी.आर. नौटियाल, पूजा नेगी, हेमलता पाण्डेय, गोरधन सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।


बच्चों का स्वस्थ बचपन ही है प्रदेश के मजबूत भविष्य की नींव- रेखा आर्या

नरेन्द्रनगर के ओणी गांव में आयोजित हुआ ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम

मंत्री रेखा आर्या ने किशोरियों, माताओं और नन्हे-मुन्ने बच्चों से किया संवाद, योजनाओं की दी जानकारी

नरेन्द्रनगर(टिहरी गढ़वाल)। नरेन्द्रनगर विधानसभा के ओणी गांव स्थित स्मार्ट आंगनवाड़ी केंद्र में ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने प्रतिभाग किया और आंगनवाड़ी केंद्र मे किशोरियों, माताओं एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ संवाद कर उनकी जरूरतों और समस्याओं की जानकारी लेने के साथ विभिन्न सुझाव प्राप्त किए।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र केवल बच्चों के पोषण और शुरूआती शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और परिवारों के समग्र विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।कहा की सरकार का प्रयास है कि आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला एवं बाल विकास, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वस्थ बचपन ही प्रदेश के मजबूत भविष्य की नींव है। बच्चों को बेहतर पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ किशोरियों एवं माताओं को भी सरकारी योजनाओं से जोड़ना जरुरी है। इसी संकल्प के साथ समस्त प्रदेश में आंगन का मिलन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

विभागीय मंत्री रेखा आर्या ने कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ समय बिताया और उनके साथ भोजन भी किया। इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म भी संपन्न कराई गई तथा आंगनवाड़ी केंद्र से जुड़े लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया,साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिका को सम्मानित भी किया गया।

मंत्री रेखा आर्या ने ओणी गांव के स्मार्ट आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए कहा कि यह केंद्र पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य और बच्चों के सुरक्षित वातावरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली की सराहना की।कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और लाभार्थियों को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

महालक्ष्मी किट से लाभान्वित लाभार्थी

सुषमा, गंगा, रेशमा और मनीषा

गर्भवती महिलाएं जो लाभान्वित हुई

काजल, प्रिया और पुष्पा

किशोरी बालिका योजना से लाभान्वित किशोरियां

काजल, निधि स्वेता, वैष्णवी और शिया

यह आंगनवाड़ी कार्यकत्रि और सहायिका हुई सम्मानित

आरती देवी, आंगनवाड़ी कार्यकत्रि और पूनम सहायिका

इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय गौतम, सीडीपीओ संगीता परिहार, जिला प्रोबेशन अधिकारी ज्योति पटवाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी दीपक रावत, जिला पूर्ति अधिकारी मनोज डोभाल, एसडीएम आशीष घिल्डियाल, ग्राम प्रधान दीपक, सुपरवाइजर किरण राणा, सीमा देवी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, मातृशक्ति, किशोरियां एवं नन्हे-मुन्ने बच्चे उपस्थित रहे।


देहरादून एवं लंढौर कैंट में विकास कार्यों को लेकर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने की बैठक

देहरादून। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बृहस्पतिवार को अपने कैम्प कार्यालय में छावनी परिषद देहरादून एवं लंढौर के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों को लेकर सैन्य अधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक के दौरान देहरादून एवं लंढौर छावनी क्षेत्र में प्रस्तावित एवं संचालित विकास कार्यों के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि छावनी क्षेत्रों में निवासरत नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा लंबित विकास कार्यों के समाधान के लिए संबंधित विभागों एवं छावनी परिषद के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से विकास कार्यों से संबंधित विषयों पर आपसी समन्वय के साथ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने को कहा, ताकि क्षेत्रवासियों को शीघ्र लाभ मिल सके।

बैठक में डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर आरएस थापा, मुख्य अधिशासी अधिकारी छावनी परिषद देहरादून अनंत आकाश तथा मसूरी नगरपालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी उपस्थित रहे।


राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर सुबोध उनियाल की अपील, रक्तदान को बनाएं जनआंदोलन

देहरादून- राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने उत्तराखण्ड की समस्त जनता, नियमित रक्तदाताओं, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों को शुभकामनाएं देते हुए स्वैच्छिक रक्तदान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने संदेश में कहा कि रक्तदान मानवता की सेवा का ऐसा पुनीत कार्य है, जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन मिल सकता है। रक्त का निर्माण किसी कारखाने में नहीं किया जा सकता। इसकी उपलब्धता जागरूक और संवेदनशील नागरिकों के स्वैच्छिक रक्तदान पर निर्भर करती है। दुर्घटनाओं, प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव, गंभीर बीमारियों, थैलेसीमिया और बड़ी सर्जरी जैसी परिस्थितियों में समय पर सुरक्षित रक्त की उपलब्धता किसी के जीवन की रक्षा करने में निर्णायक साबित होती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में भौगोलिक विषमताओं और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच की चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षित रक्त की समय पर उपलब्धता और सुदृढ़ ब्लड ट्रांसफ्यूजन नेटवर्क अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद मरीज को आवश्यकतानुसार सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त और रक्त अवयव समय पर उपलब्ध हो सकें।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से रक्तदान करने वाले लोग समाज के वास्तविक सेवाभावी नागरिक हैं। उनका योगदान न केवल अनमोल जीवन बचाता है, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी मजबूत करता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे रक्तदान को केवल एक दिन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं पात्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से रक्त की कमी की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में रक्तदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के साथ ही रक्त संग्रहण, परीक्षण, घटक पृथक्करण, सुरक्षित भंडारण और वितरण की व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। रक्त की उपलब्धता को अधिक सुगम बनाने में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने सरकारी एवं निजी रक्त केंद्रों, चिकित्सा संस्थानों, रेडक्रॉस, स्वयंसेवी संगठनों, एनएसएस, एनसीसी, पुलिस एवं सशस्त्र बलों सहित सभी संस्थाओं से नियमित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित करने और अधिकाधिक लोगों को इस पुनीत कार्य से जोड़ने का आह्वान किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि रक्त की कमी के कारण किसी भी जरूरतमंद को अपना जीवन न गंवाना पड़े। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर नियमित रक्तदान का संकल्प लें और स्वस्थ, संवेदनशील एवं सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण में अपना योगदान दें।

“रक्तदान महादान है। आपका कुछ मिनट का समय किसी जरूरतमंद को नया जीवन और उसके परिवार को जीवनभर की खुशियां दे सकता है।”
— सुबोध उनियाल


एमडीडीए की नई पहचान को मिली रचनात्मक उड़ान, मैस्कॉट-स्लोगन प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित

मैस्कॉट प्रतियोगिता में स्नेहा भण्डारी ने प्रथम, अनुराग रमोला को द्वितीय, अंकिता बिष्ट को तृतीय पुरस्कार, स्लोगन प्रतियोगिता में अंकित सिंह रावत को प्रथम पुरस्कार

देहरादून- किसी संस्था की पहचान सिर्फ उसके भवन, योजनाओं और कामकाज से नहीं बनती, उसके पीछे लोगों की सोच और जुड़ाव भी मायने रखता है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने पहली बार अपनी पहचान को जनता की रचनात्मकता से जोड़ने की पहल की। मैस्कॉट डिज़ाइन एवं स्लोगन प्रतियोगिता-2026 के विजेताओं को  एमडीडीए कार्यालय में आयोजित समारोह में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संयुक्त सचिव गौरव चटवाल, वित्त नियंत्रक संजीव कुमार सहित प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी और प्रतियोगिता के प्रतिभागी मौजूद रहे। विजेताओं को पुरस्कार राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर उनकी प्रतिभा को सम्मान दिया गया।

पहचान गढ़ने का मौका जनता को मिला
एमडीडीए की ओर से 3 अगस्त से 16 अगस्त तक आयोजित प्रतियोगिता का उद्देश्य महज एक प्रतीक या स्लोगन चुनना नहीं था, बल्कि प्राधिकरण की सोच और भविष्य की दिशा को रचनात्मक अभिव्यक्ति देना था। पहली बार आम लोगों, युवाओं और रचनात्मक प्रतिभाओं को यह अवसर मिला कि वे अपनी कल्पना के जरिए एमडीडीए की पहचान का हिस्सा बनें। प्रतियोगिता में मिली प्रविष्टियों ने दिखाया कि किसी संस्था से जुड़ाव केवल उसके काम को देखने तक सीमित नहीं रहता। जब लोगों को अपनी सोच रखने का अवसर मिलता है तो वही जुड़ाव एक नई पहचान का रूप ले सकता है। इसी भावना के साथ चयनित श्रेष्ठ प्रविष्टियों के रचनाकारों को सम्मानित किया गया।

स्नेहा के मैस्कॉट को पहला स्थान, अंकित का स्लोगन भी अव्वल
मैस्कॉट प्रतियोगिता में सुश्री स्नेहा भण्डारी ने प्रथम स्थान हासिल किया। उन्हें 50 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। श्री अनुराग रमोला को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 30 हजार रुपये, जबकि सुश्री अंकिता बिष्ट को तृतीय पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपये प्रदान किए गए। स्लोगन प्रतियोगिता में श्री अंकित सिंह रावत को प्रथम पुरस्कार मिला। उन्हें 10 हजार रुपये और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस पहल के जरिए एमडीडीए ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि किसी संस्था की पहचान उसके काम के साथ-साथ उसकी सोच और समाज से उसके रिश्ते से भी बनती है। मैस्कॉट और स्लोगन जैसे छोटे लेकिन प्रभावशाली प्रतीक किसी संस्था के विजन, मूल्यों और जनसरोकारों को सरल भाषा और दृश्य रूप में लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।

सोच से पहचान तक का सफर
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि प्रतियोगिता में सामने आई रचनात्मकता इस बात का प्रमाण है कि लोगों में एमडीडीए को लेकर अपनी कल्पना और विचार हैं। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की कोशिश रहेगी कि विकास के साथ-साथ जनभागीदारी और नवाचार को भी आगे बढ़ाया जाए। कार्यक्रम में प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। विजेताओं के सम्मान के साथ समारोह ने यह संदेश भी दिया कि जब किसी संस्था की पहचान बनाने की प्रक्रिया में समाज की कल्पना शामिल होती है, तो वह पहचान सिर्फ एक प्रतीक नहीं रहती, बल्कि लोगों से जुड़ी कहानी बन जाती है।


स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर जिलाधिकारी सख्तः एएनएम निलंबित, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए टास्क फोर्स के निर्देश

देहरादून में स्वास्थ्य मानकों में सुधार, लेकिन लिंगानुपात में अब भी चुनौती

डीएम ने पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने के दिए निर्देश, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

देहरादून: मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए अब अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु एवं राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना के साथ परिणाम आधारित कार्य करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों को रोकने के लिए टास्क फोर्स गठित की जाए और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच एवं गहन निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के मातृ एवं शिशु मृत्यु से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण कर जीआईएस मैपिंग के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए, जहां लगातार मृत्यु दर अधिक रही है। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्ययोजना का असर धरातल पर दिखाई देना चाहिए और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के रूप में परिणाम सामने आने चाहिए।

12 मामलों की गहन समीक्षा, चार में मांगी स्पष्ट आख्या, इस मामले में एएनएम निलंबित

वर्ष 2026 में अब तक प्रसव के दौरान अथवा प्रसव के कुछ समय बाद हुई 12 महिलाओं की मृत्यु के मामलों की केस स्टडी की जिलाधिकारी ने गहन समीक्षा की। इनमें चार मामलों में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट आख्या तलब की। प्रेमनगर निवासी रुखसाना की मृत्यु के मामले में आशा एवं एएनएम से प्राप्त स्पष्टीकरण में विरोधाभास पाए जाने, आंकडों में छेडछाड तथा साक्ष्य के लिए गलत तिथि के फोटोग्राफ प्रस्तुत किए जाने पर जिलाधिकारी ने एएनएम के विरुद्ध मौके पर ही निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने, प्रसव से पूर्व आवश्यकता के अनुसार अस्पताल में भर्ती कराने तथा समय से सभी आवश्यक जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम सामने आने पर महिला को तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाए, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने घर पर प्रसव के मामलों में आशा कार्यकत्री की जिम्मेदारी भी तय करने के निर्देश दिए।

टीबी जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनसंख्या के अनुपात में अपेक्षित जांच एवं एक्स-रे नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने टीबी की जांच का दायरा बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र को भी अभियान से जोड़कर अधिक से अधिक लोगों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर टीबी से मुक्त हो चुके लोगों तथा टीबी की रोकथाम के प्रति जनजागरूकता में योगदान देने वाले पांच टीबी चौम्पियनों को सम्मानित किया गया।

मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में देहरादून बेहतर

बैठक में प्रोग्राम ऑफिसर ने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के कई महत्वपूर्ण संकेतकों में देहरादून राज्य और राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। एचआईएमएस 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जनपद का मातृ मृत्यु अनुपात 31.0 है, जबकि उत्तराखंड में यह 99 और राष्ट्रीय स्तर पर 97 है। यह आंकड़ा वर्ष 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य 70 से भी कम है।

इसी प्रकार, देहरादून की नवजात शिशु मृत्यु दर 10.4 है, जबकि राज्य में 13 और राष्ट्रीय स्तर पर 20 है। यह वर्ष 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य 12 से भी कम है। जनपद में शिशु मृत्यु दर 13.8 है, जबकि उत्तराखंड में 19 और राष्ट्रीय स्तर पर 28 है। वहीं, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 16.0 है, जबकि राज्य में 21 और राष्ट्रीय स्तर पर 32 है। यह आंकड़ा भी वर्ष 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य 25 से नीचे है।

हालांकि, जन्म के समय लिंगानुपात 924.4 होने के कारण इस क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है। यह उत्तराखंड के 984 और राष्ट्रीय औसत 929 से कम है तथा वर्ष 2025 के राष्ट्रीय लक्ष्य 950 से भी नीचे है।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमके शर्मा, गायनी विशेषज्ञ डॉ. ज्योति शर्मा, प्रोग्राम ऑफिसर प्रखर, विभिन्न अस्पतालों के वरिष्ठ चिकित्सक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा अधिकारी, एएनएम एवं आशा कार्यकत्रियां उपस्थित रहीं।


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