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मुख्यमंत्री धामी ने कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में चयनित 12 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

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मुख्यमंत्री धामी ने कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में चयनित 12 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के अंतर्गत मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और लगन से कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद प्रदेश में अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सुशासन का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही मिलेट के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य में सेब, कीवी, बागवानी एवं औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें।

कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव एवं कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।


चारधाम यात्रा 2026- श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता, सीएम धामी ने दिए कड़े निर्देश

चारधाम यात्रा में AI निगरानी और स्लॉट सिस्टम से होगा भीड़ नियंत्रण

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की जीवनरेखा चारधाम यात्रा-2026 को लेकर सरकार ने इस बार सख्त और व्यापक तैयारी का खाका तैयार किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में सुनिश्चित की जाए।

हेली सेवाओं के संचालन में सख्ती बरतते हुए नियमित मेंटेनेंस और फिटनेस जांच अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए। ओवरलोडिंग से बचने और संचालन को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। भीड़ नियंत्रण के लिए स्लॉट सिस्टम और रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग लागू करने के साथ यात्रा मार्गों पर CCTV और AI आधारित निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा।

ग्रीन- क्लीन अभियान, ओवररेटिंग पर सख्ती और अफवाह पर FIR
मुख्यमंत्री ने ‘ग्रीन एवं क्लीन चारधाम यात्रा’ अभियान को और प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए प्लास्टिक मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यात्रा मार्गों पर कलेक्शन बॉक्स लगाए जाएंगे और प्लास्टिक के उपयोग पर सख्त नियंत्रण किया जाएगा।

यात्रा को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक खबर या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
ओवररेटिंग रोकने के लिए सभी दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य होगी। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हुए मेडिकल यूनिट, अस्थायी अस्पताल, पेयजल, शौचालय और शेल्टर की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए सख्त ट्रैफिक प्लान और वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जाएंगे। आपदा प्रबंधन के तहत SDRF और NDRF को अलर्ट मोड में रखते हुए 24×7 कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन के माध्यम से त्वरित रिस्पांस सुनिश्चित किया जाएगा।


उत्तराखण्ड के अति-दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं से सुरक्षित मातृत्व को नई गति

फील्ड से सीधे संवाद के साथ सख्त मॉनिटरिंग, होम डिलीवरी पर पूर्ण रोक के निर्देश

“हर गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी”—सचिन कुर्वे

देहरादून।  राज्य में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को और सख्त करते हुए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देहरादून और चम्पावत जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक की विशेषता यह रही कि फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए दोनों जनपदों की एएनएम ने सीधे जुड़कर जमीनी चुनौतियों और प्रगति से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक के दौरान सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि अब स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल प्रक्रिया नहीं बल्कि ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि अप्रैल माह से राज्य में किसी भी स्तर पर होम डिलीवरी स्वीकार्य नहीं होगी और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है।

EDD आधारित माइक्रो ट्रैकिंग पर जोर

समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की अपेक्षित प्रसव तिथि (EDD) के आधार पर माइक्रो ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के बीच दैनिक समन्वय के माध्यम से अंतिम मील तक फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी गर्भवती महिला की देखभाल में कोई कमी न रह जाए। इसके साथ ही चिन्हित होम डिलीवरी पॉकेट्स में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट कर समाधान आधारित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

अतिदुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग

बैठक में पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित परिवहन की चुनौती पर विशेष चर्चा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि दुर्गम क्षेत्रों में समय से पूर्व योजना बनाकर गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क या समय पर परिवहन संभव नहीं है, वहां हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में गर्भवती महिला को तत्काल स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके।

ANC जांच और हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान पर फोकस

बैठक के दौरान गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच (ANC) को मातृ मृत्यु दर में कमी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का प्रथम तिमाही में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और न्यूनतम चार ANC जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक लैब परीक्षण समय पर किए जाएं और उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की समय पर पहचान की जाए। कई क्षेत्रों में HRP की कम पहचान पर चिंता व्यक्त करते हुए सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने इसमें तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

एनीमिया नियंत्रण और सामुदायिक जागरूकता

बैठक में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित ट्रैकिंग और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से गंभीर एनीमिया के मामलों में समयबद्ध उपचार और चिकित्सकीय हस्तक्षेप को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के लिए आशा और एएनएम को “संवाद से समाधान” की रणनीति अपनाने के लिए कहा गया, ताकि परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा सके।

टीबी उन्मूलन अभियान को भी गति

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि 100-दिवसीय टीबी अभियान के अंतर्गत हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता के साथ कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य शिविरों में अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सभी चिकित्सालयों की कुल ओपीडी का न्यूनतम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर करने के निर्देश भी दिए गए।

PCPNDT अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई

बैठक में PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और सरकारी तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों का समयबद्ध निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई करते हुए डिकॉय ऑपरेशन और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- सचिन कुर्वे

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं, समयबद्ध परिवहन और मजबूत फील्ड मॉनिटरिंग के माध्यम से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए कि परिणाम आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे तत्काल प्रभाव से लागू करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक डॉ. अजय नागरकर, संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवेश चौहान एवं डॉ. मनोज शर्मा तथा वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. नितिन अरोड़ा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।


धामी सरकार की पहल, ऐतिहासिक किपलिंग ट्रैक का होगा कायाकल्प, मसूरी को मिलेगा नया शांत पर्यटन मार्ग

प्रकृति के बीच सुकून भरा सफर देगा किपलिंग ट्रैक- बंशीधर तिवारी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राज्य में पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में देहरादून से मसूरी को जोड़ने वाले ऐतिहासिक किपलिंग ट्रैक के पुनरोद्धार की महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा लगभग 498.14 लाख रुपये की लागत से 3.50 किलोमीटर लंबे इस ऐतिहासिक ट्रैक का व्यापक विकास किया जा रहा है।

यह ट्रैक शहनसाही आश्रम से झड़ीपानी तक फैला हुआ है और प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण तथा पहाड़ी दृश्यों के कारण लंबे समय से पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। आधुनिक सड़क मार्गों पर बढ़ती भीड़ और वाहनों के शोर के बीच यह ट्रैक एक ऐसे वैकल्पिक पर्यटन मार्ग के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक प्रकृति के करीब शांत और सुकून भरा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

राज्य सरकार की मंशा है कि मसूरी क्षेत्र में पर्यटन को केवल सड़क आधारित यात्रा तक सीमित न रखकर प्रकृति आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जाए। इसी सोच के साथ किपलिंग ट्रैक के संरक्षण और विकास की योजना तैयार की गई है, ताकि आने वाले समय में यह मार्ग पर्यटकों के लिए एक अनूठा और आकर्षक अनुभव बन सके।

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विकसित होगा ट्रैक

एमडीडीए द्वारा इस परियोजना के अंतर्गत ट्रैक के संरक्षण, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाएगा, जिससे ट्रैक सुरक्षित और टिकाऊ बन सके। साथ ही ट्रैक के किनारों पर मजबूत रेलिंग लगाई जाएंगी, ताकि पर्यटक सुरक्षित रूप से इस मार्ग पर भ्रमण कर सकें। इस मार्ग को पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए रास्ते को समतल और व्यवस्थित भी किया जाएगा।

पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

किपलिंग ट्रैक के विकास में केवल संरचनात्मक कार्य ही नहीं बल्कि पर्यटकों की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है। परियोजना के अंतर्गत ट्रैक के विभिन्न स्थानों पर विश्राम स्थल विकसित किए जाएंगे, जहां आकर्षक गज़ीबो (Gazebo) बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर बैठकर पर्यटक आसपास के पर्वतीय दृश्यों, हरियाली और प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त ट्रैक पर सेल्फी प्वाइंट, कैंटीन कियोस्क, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, शौचालय, कूड़ेदान और आधुनिक लैंप पोस्ट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं से न केवल पर्यटकों को सुविधा मिलेगी बल्कि ट्रैक को एक सुव्यवस्थित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में पहचान भी मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसके विकास में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रैक के आसपास व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता और अधिक बढ़ेगी।

इसके अलावा पक्षियों के संरक्षण के लिए बर्ड हाउस भी बनाए जाएंगे, जिससे इस क्षेत्र में पक्षियों की उपस्थिति बढ़ेगी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य है कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

किपलिंग ट्रैक के विकास से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय व्यापारियों, गाइड्स, होमस्टे संचालकों और छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जुड़े कार्यों में रोजगार मिलने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार की यह पहल सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

प्रकृति के बीच नया अनुभव देगा किपलिंग ट्रैक- बंशीधर तिवारी

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि किपलिंग ट्रैक का पुनरोद्धार राज्य के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में प्रदेश में ऐसे पर्यटन स्थलों को विकसित किया जा रहा है, जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करें। उन्होंने बताया कि देहरादून से मसूरी जाने वाले पारंपरिक सड़क मार्गों पर अक्सर भीड़भाड़ रहती है, जिससे पर्यटकों को शोर और ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। किपलिंग ट्रैक के विकसित होने से पर्यटकों को एक वैकल्पिक और शांत मार्ग मिलेगा, जहां वे पैदल चलते हुए प्रकृति की गोद में समय बिता सकेंगे। बंशीधर तिवारी ने कहा कि इस ट्रैक पर विकसित की जा रही सुविधाएं इसे एक सुरक्षित, आकर्षक और व्यवस्थित पर्यटन मार्ग के रूप में स्थापित करेंगी। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतीय दृश्यों और शांत वातावरण का आनंद लेते हुए एक अलग अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद यह ट्रैक न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी एक बेहतर मनोरंजन और प्रकृति से जुड़ने का स्थान बन जाएगा।

प्रकृति के अनुकूल तैयार हो रही परियोजना- मोहन सिंह बर्निया

मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि किपलिंग ट्रैक के विकास की पूरी योजना प्रकृति के अनुकूल डिजाइन की गई है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने बताया कि ट्रैक के आसपास वृक्षारोपण, बर्ड हाउस और स्वच्छता व्यवस्था जैसी पहलें इस परियोजना को एक पर्यावरण अनुकूल पर्यटन मॉडल बनाएंगी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी मजबूत होगा।


ऋषिकेश में राफ्टिंग का नया नियम: पर्यटकों की सुरक्षा के लिए फेरों की संख्या सीमित

ऋषिकेश। देशभर में राफ्टिंग के लिए विख्यात ऋषिकेश में पर्यटन विभाग पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर राफ्टिंग संचालन में नया नियम लागू करने जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत अब टिहरी जिले के मरीन ड्राइव व शिवपुरी से संचालित होने वाली राफ्ट एक दिन में तीन से अधिक फेरे नहीं लगा सकेंगी।

हालांकि, छोटे रूट पर फेरे की अधिकतम संख्या चार तय की गई हैं। यह नई व्यवस्था अगले सप्ताह से लागू होगी।

ऋषिकेश में राफ्टिंग का बढ़ रहा क्रेज लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अधिक मुनाफा कमाने की चाह में कई राफ्टिंग गाइड व कंपनियां एक राफ्ट से चार से पांच फेरे लगाने का प्रयास करते हैं।

जिससे अंतिम फेरे की राफ्टिंग शाम ढलने के दौरान भी संचालित की जाती है, जो कि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा सकता है।

वहीं, राफ्टिंग के अंतिम फेरों में गाइड थकावट भी महसूस करते हैं। इससे रैपिड में राफ्ट पलटने या अन्य आपात स्थिति में कई बार गाइड बड़ा रेस्क्यू करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं, जिससे राफ्टिंग दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।

  • पिछले तीन वर्षों में ऋषिकेश में गंगा राफ्टिंग के दौरान कई दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

इन दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए अब पर्यटन विभाग के अधीन राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान ने अधिक लंबे रूट पर राफ्ट संचालन में फेरों की संख्या अधिकतम तीन निर्धारित करने का निर्णय लिया है।

अब इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले सप्ताह से नई व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।

यह होगी नई व्यवस्था

राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान के अनुसार, ऋषिकेश में राफ्टिंग का सबसे लंबा रूट मरीन ड्राइव-खारास्रोत (24 किलोमीटर) है, जिसे पूरा करने में औसतन साढ़े 3 घंटे का समय लगता है।

जबकि, दूसरा लंबा रूट शिवपुरी-खारास्रोत (18 किलोमीटर) है, जिसमें करीब ढाई घंटे लगते हैं।

इन दो सर्वाधिक लंबे रूटों पर ही तीन फेरे का नियम लागू रहेगा। इनके अलावा ब्रह्मपुरी-खारास्रोत व अन्य छोटे रूटों पर अधिकतम चार फेरे लगाए जा सकेंगे।

वहीं, नई व्यवस्था के तहत राफ्टिंग एवं साहसिक खेल विभाग द्वारा मरीन ड्राइव, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी में स्थित विभागीय राफ्टिंग केंद्र में प्रत्येक राफ्ट का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा।

लंबे व अन्य रूटों पर अधिकतम फेरे पूरे होने के बाद राफ्ट को गंगा में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा।

विभाग द्वारा अगले सप्ताह से लागू हो रही यह व्यवस्था में शुरुआती समय में आफलाइन मोड पर संचालित होगी, लेकिन विभाग अब सभी केंद्रों में राफ्टों के फेरों की प्रभावी निगरानी व अनियमितताएं रोकने के लिए साफ्टवेयर प्रणाली विकसित करने में जुट गया है।


हरिद्वार को मिलेगा आधुनिक रोपवे सिस्टम, सचिवालय में बनी आगे की रणनीति

देहरादून ( उत्तराखंड पोस्ट)  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बुधवार को राज्य सचिवालय में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा हरिद्वार शहर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में परियोजना के क्रियान्वयन, लागत, भूमि हस्तांतरण, कन्सेशन अवधि और वित्तीय व्यवहार्यता समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

पीपीपी मॉडल पर बनेगा आधुनिक रोपवे
बैठक के दौरान उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा ने हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का क्रियान्वयन और संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत डीबीएफओटी आधार पर किया जाना प्रस्तावित है।

प्रस्तुतीकरण में परियोजना की संरचना, संभावित मार्ग, निर्माण कार्य और संचालन व्यवस्था की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से हरिद्वार शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

प्रति किलोमीटर लागत लगभग 75 करोड़
समीक्षा बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने परियोजना की प्रति किलोमीटर लागत के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। इस पर प्रबंध निदेशक द्वारा बताया गया कि रोपवे स्टेशन, कार्यशाला और भूमि तथा अन्य आवश्यक क्लीयरेंस को छोड़कर परियोजना की संरचना के निर्माण कार्य की अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आंकी गई है। अधिकारियों ने बताया कि यह लागत केवल निर्माण कार्य से संबंधित है, जबकि भूमि, स्टेशन निर्माण और अन्य व्यवस्थाएं अलग से शामिल होंगी। बैठक में परियोजना के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की भूमि का मुद्दा उठा
बैठक में रोपवे परियोजना के लिए आवश्यक भूमि के विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित रोपवे स्टेशन के लिए जिस भूमि की आवश्यकता है, वह उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है। इस पर सचिव आवास ने निर्देश दिए कि उत्तराखंड शासन के सिंचाई विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश शासन को पुनः पत्र भेजा जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में इस विषय में प्रस्ताव भेजा जा चुका है, इसलिए अब अनुस्मारक पत्र के माध्यम से प्रमुख सचिव सिंचाई, उत्तराखंड शासन द्वारा उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से प्रस्तावित भूमि को 1 रुपये प्रतिवर्ष की दर से 99 वर्षों की लीज पर आवास विभाग, उत्तराखंड शासन को हस्तांतरित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

कन्सेशन अवधि बढ़ाने पर भी विचार
बैठक में परियोजना की कन्सेशन अवधि की भी समीक्षा की गई। वर्तमान में परियोजना के लिए 30 वर्ष की कन्सेशन अवधि प्रस्तावित है। सचिव आवास ने कहा कि परियोजना की उच्च लागत को देखते हुए निविदा प्रक्रिया में कन्सेशन अवधि बढ़ाने का विकल्प भी रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अतिरिक्त 30 वर्ष तक की अवधि बढ़ाने का प्रावधान रखा जाए, जिसे 15–15 वर्ष के दो चरणों में लागू किया जा सके। इससे परियोजना की वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित होगी और निविदा प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा भी मिल सकेगी।

डीपीआर से ईएफसी स्तर तक बढ़ेगी प्रक्रिया
समीक्षा के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना को डीपीआर स्तर पर अनुमोदित करते हुए इसे आगे की कार्यवाही के लिए ईएफसी स्तर पर प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना के सभी तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।बैठक के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ समीक्षा बैठक का समापन किया गया।

तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को मिलेगी आधुनिक और सुरक्षित परिवहन सुविधा- डॉ आर राजेश कुमार
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को आधुनिक और सुरक्षित परिवहन सुविधा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राज्य सरकार प्रदेश में आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्थाओं के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना की डीपीआर, भूमि से जुड़ी औपचारिकताओं और वित्तीय व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि परियोजना को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके।


मसूरी में खुलने जा रहा हाईटेक ईको पार्क, क्या-क्या मिलेगा; पूरी डिटेल

Eco Park in Mussoorie: पहाड़ों की रानी मसूरी में जल्द ही पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलने जा रहा है। हुसैनगंज क्षेत्र में लगभग 15.5 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित हाईटेक ईको पार्क का निर्माण कार्य जल्द शुरू होने वाला है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा इस परियोजना के टेंडर शीघ्र जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस महत्वाकांक्षी योजना को जल्द धरातल पर उतारने के निर्देश दिए हैं।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि यह ईको पार्क केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। मसूरी लंबे समय से देश-विदेश के पर्यटकों की पसंदीदा जगह रही है, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। बढ़ते पर्यटन दबाव के कारण प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में यह परियोजना एक संतुलित और इको-फ्रेंडली टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित की जाएगी।

क्या-क्या होंगी सुविधाएं?

प्रस्तावित हाईटेक ईको पार्क में प्रकृति के बीच आधुनिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा। इसकी रूपरेखा इस तरह तैयार की जा रही है कि पहाड़ों की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता को कोई नुकसान न पहुंचे। पार्क में कई आकर्षक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जैसे:

कृत्रिम पहाड़ी जलाशय

घने पेड़ों के बीच से गुजरने वाले नेचर ट्रेल/वन पथ

पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति को दर्शाने वाला छोटा संग्रहालय

बैठने और विश्राम के लिए इको-फ्रेंडली ज़ोन

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच फोटो पॉइंट्स और व्यूइंग एरिया

एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि यह पार्क पर्यटकों को एक शांत, प्राकृतिक और आधुनिक अनुभव देने के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

इस परियोजना से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। होटल, गाइड, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही, मसूरी को एक सस्टेनेबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में पहचान मिलने में भी मदद मिलेगी।

जल्द शुरू होगा निर्माण

सरकार की प्राथमिकता में शामिल इस परियोजना के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा हो और गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता न किया जाए।


उत्तराखंड में कई दृष्टि से ऐतिहासिक व विशेष है इस बार की जनगणना, पहली बार होंगे जातिगत आंकड़े भी

प्रदेश में जनगणना का पहला चरण गुरुवार से शुरू हो रहा है। यह भारत की 16वीं व आजाद भारत की आठवीं जनगणना है। इस जनगणना में कई बातें विशेष हैं। पहली यह कि इस बार इसमें जातिगत जनगणना भी की जाएगी।

यह प्रथम अवसर होगा जब जनगणना का शत-प्रतिशत कार्य डिजिटल माध्यम से संपादित किया जाएगा। यह पूरी तरह मोबाइल एप्लीकेशन पर आधारित होगी। साथ ही प्रगणक व पर्यवेक्षक अपने स्वयं के मोबाइल फोन के माध्यम से समस्त आंकड़ों का संकलन करेंगे।

भारत में सर्वप्रथम जनगणना वर्ष 1872 में हुई थी। आजाद भारत में पहली जनगणना वर्ष 1951 में हुई थी। इसके बाद हर दस साल में जनगणना करने का प्रविधान किया गया। इससे पहले जनगणना वर्ष 2011 में हुई।

इसके बाद कोरोना के कारण वर्ष 2021 में जनगणना नहीं हो पाई। अब यह जनगणना हो रही है। देश के विभिन्न राज्यों में एक अप्रैल, 2026 से जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण का कार्य शुरू किया जा चुका है।

कार्मिकों के माध्यम से मकानों की गणना का कार्यक्रम 25 अप्रैल से शुरू होकर 24 मई तक होगा। इसमें आमजन को घर की स्थिति, घर में उपयोग होने वाली वस्तुओं, मुख्य खाद्य पदार्थ आदि के संबंध में 33 प्रश्नों के भीतर जानकारी देनी होगी।

इन 16 भाषाओं में की जा सकती है स्वगणना

उन्होंने बताया कि स्वगणना में जनता की सहूलियत के लिए आनलाइन जानकारी 16 भाषाओं में दी जाएगी। इनमें असमिया, बंगाली, अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू शामिल है।

सीएमएमएस पोर्टल से रहेगी नजर

स्वगणना के बाद भवन स्वामी जो एसई आइडी रखेगा। उसका उपयोग प्रगणक मौके पर आकर भवन गणना के दौरान करेंगे। जैसे ही वह इस आइडी का प्रयोग कर गणना पूरी कर लेंगे तो उसकी जानकारी सीधे आनलाइन दर्ज हो जाएगी।

विभागीय अधिकारी जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) के माध्यम से आनलाइन यह देख सकेंगे कि प्रगणक किस क्षेत्र में हैं और उसने कितने भवनों की गणना कर ली है।

जियो टैगिंग से कर सकेंगे भवनों का चिह्नीकरण

स्वगणना में एक महत्वपूर्ण कार्य भवन की जियो टैगिंग भी होगा। इसके लिए भवन स्वामी अथवा प्रगणक स्वगणना व भवन गणना के दौरान जियो टैगिंग करेंगे। इससे भवनों की सही स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।

हरिद्वार में तैनात हैं सबसे अधिक प्रगणक

जगनणना के लिए विभाग ने 30 हजार से अधिक प्रगणकों की तैनाती की है। इनमें सबसे अधिक 3460 प्रगणक हरिद्वार, 3046 प्रगणक यूएस नगर, 2288 प्रगणक देहरादून, 1959 प्रगणक पौड़ी और 1676 प्रगणक टिहरी में तैनात होंगे। वहीं सबसे कम 699 प्रगणक रुद्रप्रयाग जिले में तैनात होंगे।


दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत? 3 घंटे में तय होगी दूरी

Namo Bharat extension plan: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जो दिल्ली से लेकर हरिद्वार और ऋषिकेश तक तेज रफ्तार कनेक्टिविटी का रास्ता खोल सकता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर को मेरठ के मोदिपुरम से हरिद्वार तक बढ़ाने की मांग की है। इसके साथ ही देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच अलग मेट्रो कॉरिडोर बनाने पर भी जोर दिया गया है।

अभी मेरठ तक, फिर बढ़कर जाएगी…

फिलहाल नमो भारत ट्रेन सराय काले खां (दिल्ली) से मेरठ के मोदिपुरम तक चल रही है। प्रस्तावित विस्तार के तहत यह कॉरिडोर मोदिपुरम से आगे बढ़ते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश तक जाएगा, जो मुख्य रूप से नेशनल हाईवे-58 के समानांतर विकसित किया जाएगा।

इस रूट में कई अहम शहर और कस्बे शामिल होंगे। इनमें मेरठ का मोदिपुरम, दौराला-सकौती, खतौली (मुजफ्फरनगर), पुरकाजी (UP-उत्तराखंड बॉर्डर), रुड़की, ज्वालापुर (हरिद्वार) और आखिर में ऋषिकेश शामिल हैं। खास बात यह है कि आईआईटी रुडकी जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्र भी इस कॉरिडोर से सीधे जुड़ जाएंगे।

दिल्ली से ऋषिकेश मात्र 3 घंटे में पहुंचेंगे

अगर यह परियोजना मंजूर होती है, तो दिल्ली से ऋषिकेश का सफर सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे पर्यटन, रियल एस्टेट और औद्योगिक विकास को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हरिद्वार और ऋषिकेश में हॉलिडे होम और सर्विस अपार्टमेंट की मांग में भारी उछाल आ सकता है, जबकि मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में इंडस्ट्रियल टाउनशिप तेजी से विकसित हो सकते हैं।

नेशनल पार्क से मंजूरी मिलने में आएगी चुनौती

हालांकि, इस परियोजना के सामने कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। रुड़की से ऋषिकेश के बीच का हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क और अन्य पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जहां निर्माण के लिए सख्त मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण और पहाड़ी इलाकों में ट्रैक बिछाने की लागत भी बड़ी बाधा बन सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक कॉरिडोर साबित हो सकता है। यह दिल्ली- मेरट-हरिद्वार बेल्ट के विकास को नई दिशा देगा। अब इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों और NCRTC द्वारा आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।


कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं

जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता है- रेखा आर्या

सोमेश्वर/अल्मोड़ा। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आगर रोलकुडी, भूलखर्कवाल, बछुराडी, नाकोट और रसियारा गांवों में आयोजित जन मिलन कार्यक्रमों में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने प्रतिभाग कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई मांगों पर मौके पर ही कार्रवाई करते हुए विकास कार्यों की घोषणाएं कीं।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, पुलिया निर्माण, खेतों की सुरक्षा के लिए तारबाड़ एवं चारदीवारी, राशन कार्ड बनवाने, सोमेश्वर सब स्टेशन में ग्रिड संख्या बढ़ाने तथा पेयजल टैंक निर्माण जैसी समस्याएं प्रमुखता से रखीं।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास और शौचालय निर्माण के लिए 18 अप्रैल को सोमेश्वर में विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा।

उन्होंने आगर रोलकुडी में पंचायत भवन की चारदीवारी, नदी पर पुलिया निर्माण और मंदिर तक जाने वाले मार्ग के निर्माण के लिए विधायक निधि से 2-2 लाख रुपये देने की घोषणा की। भूलखर्कवाल और बछुराडी में पेयजल टैंक निर्माण के लिए 3 लाख रुपये तथा सीसी मार्ग निर्माण के लिए 3 लाख रुपये देने की घोषणा की गई।

नाकोट गांव में श्मशान घाट पर स्नानागार निर्माण एवं अन्य कार्यों के लिए 2 लाख रुपये तथा सीसी सड़क निर्माण के लिए 2 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, साथ ही गोलज्यू देवता मंदिर के स्थल विकास के लिए ढाई लाख रुपये देने का ऐलान किया गया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि सोमेश्वर सब स्टेशन में एक और ग्रिड शुरू करने के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों से वार्ता की जाएगी, जिससे क्षेत्र में बिजली कटौती की समस्या से राहत मिल सके।

कार्यक्रम में सुंदर राणा, राजेंद्र कैड़ा, भुवन जोशी, राजेश सिंह रावत, भूपाल मेहरा, शंकर बिष्ट, राजेंद्र खाती, राजू लोहानी, अशोक तिवारी, गीता जोशी, खड़क सिंह नेगी, सुरेश बोरा, बंशीधर जोशी, कमल गिरी, सुनील कुमार, कमल कैड़ा, भारत भाकुनी, हरीश रावल, भारत चंद्र, पवन खाती, कृष्णा भंडारी, रेखा देवी, रंजीत रावत सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।


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