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हीट वेव का कहर: स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डॉक्टरों ने जारी की एडवाइजरी

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हीट वेव का कहर: स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, डॉक्टरों ने जारी की एडवाइजरी

गर्मी के पीक समय दोपहर में घर में रहना ही सुरक्षित, जरूरी हो तभी निकलें बाहर- डा. एस. के. झा

देहरादून। प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान और हीट वेव ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और वृद्धि की संभावना है, जिससे विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गया है।

राजधानी देहरादून में बढ़ती गर्मी के मद्देनज़र डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। अत्यावश्यक स्थिति में बाहर जाते समय सिर को छाते या कपड़े से ढकने और चेहरे को सुरक्षित रखने की हिदायत दी गई है। साथ ही शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करने पर जोर दिया गया है।

चिकित्सकों ने खानपान में भी सावधानी बरतने की सलाह देते हुए तरबूज, नींबू पानी, जलजीरा और नारियल पानी जैसे पानी से भरपूर पेय पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने की बात कही है।

रायपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस. के. झा ने बताया कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए सभी आयु वर्ग के लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शरीर में पानी की कमी न होने दें और हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े पहनें।

डॉ. झा ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों को अधिक सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि वे अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या न हो।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि हीट वेव के दौरान चक्कर आना, सिरदर्द, तेज बुखार, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकती है।

प्रशासन ने भी आमजन से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और गर्मी से बचाव के सभी जरूरी उपाय अपनाएं। जागरूकता और सावधानी ही हीट वेव से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

सड़क किनारे जूस पीते समय बरतें सावधानी
डॉ. एस. के. झा ने लोगों को सड़क किनारे जूस का सेवन करते समय स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गंदे पानी के उपयोग से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही गन्ने के जूस में बर्फ का कम से कम उपयोग करने की सलाह दी गई है।


महिला आरक्षण के समर्थन में मातृशक्ति ने निकाली महिला आक्रोश मशाल यात्रा

मेरे आह्वान पर महिला आक्रोश रैली में पहुंची हजारों की संख्या में मातृशक्ति का ह्रदय की गहराईयों से धन्यवाद व आभार- रेखा आर्या

देहरादून। महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर मातृशक्ति ने देहरादून में गांधी पार्क से घंटाघर तक महिला आक्रोश मशाल यात्रा निकाली। इस यात्रा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्री रेखा आर्या सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और महिलाएं शामिल रहीं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि महिला आरक्षण देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है और केंद्र सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी दलों का रुख महिलाओं की आकांक्षाओं के विपरीत है, जिसे जनता देख रही है।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि हमारी परंपरा में महिलाओं को सम्मान जरूर मिला है, लेकिन अब जरूरत है कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी बराबरी का स्थान मिले। संसद और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी और यह बदलाव देश के विकास को नई दिशा देगा।

मंत्री रेखा आर्या नें कहा कि इस रैली का आयोजन सौभाग्य से मुझे प्राप्त हुआ और मेरे आह्वान पर महिला आक्रोश रैली में पहुंची हजारों की संख्या में मातृशक्ति का ह्रदय की गहराईयों से धन्यवाद व आभार व्यक्त करती हूँ I

रेखा आर्या ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष का रवैया निराशाजनक रहा है। महिलाओं की अपेक्षाओं के विपरीत जाकर जो रुख अपनाया गया है, उसे देश की महिलाएं भली-भांति समझ रही हैं। आने वाले समय में महिलाएं कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित पार्टियों को हराकर मुंहतोड़ जवाब देंगी और इसका प्रभाव भी देखने को मिलेगा।

उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को उनका अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा और नारी सशक्तिकरण को और अधिक मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, संगठन महामंत्री अजय कुमार, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, विधायक सविता कपूर, पार्वती दास आशा नौटियाल, सरिता आर्या, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट, राष्ट्रीय महिला महामंत्री दीप्ति रावत, शैलेंद्र कुमार, राज्यमंत्री मधु भट्ट,बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष गीता खन्ना,महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल समेत हजारों महिलाएं उपस्थित रही।


अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए का सख्त एक्शन, मेहुवाला में 10 बीघा जमीन पर विकसित हो रही अवैध कॉलोनी ध्वस्त

देहरादून- मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मेहुवाला क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने सख्ती दिखाते हुए यह कदम उठाया, जिससे अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है।

सैक्टर वाइज टीमों से निगरानी तेज
एमडीडीए ने अवैध प्लॉटिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सैक्टर वाइज टीमों का गठन किया है। ये टीमें नियमित रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर रही हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई कर रही हैं। प्राधिकरण का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध कॉलोनियों पर समय रहते रोक लगाई जा सकेगी और शहर का विकास योजनाबद्ध तरीके से होगा।

मेहुवाला में 10 बीघा जमीन पर चल रही थी प्लॉटिंग
प्राधिकरण की टीम को जांच के दौरान मेहुवाला माफी, निकट ईंट भट्टा क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग की जानकारी मिली। यहां कमल राठौर व अन्य द्वारा “श्रीराम इन्क्लेव” में करीब 10 बीघा भूमि पर बिना स्वीकृति प्लॉटिंग की जा रही थी। मामले की पुष्टि होने पर प्राधिकरण ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के निर्देशों पर की गई। मौके पर सहायक अभियंता विजय रावत, अवर अभियंता मुनेश राणा और सुपरवाइजर की टीम मौजूद रही। पूरी कार्रवाई नियमानुसार और प्रशासनिक निगरानी में संपन्न हुई। एमडीडीए की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि प्राधिकरण अब अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ पूरी तरह सख्त रुख अपना चुका है। आने वाले समय में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है, जिससे शहर में अव्यवस्थित विकास पर रोक लगाई जा सके और नागरिकों के हितों की रक्षा हो सके।

आम जनता अधिकृत योजनाओं में ही निवेश करें – बंशीधर तिवारी
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अवैध रूप से कॉलोनियां विकसित करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे आम नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई बार लोग बिना जांच-पड़ताल के ऐसे प्लॉट खरीद लेते हैं, जिससे भविष्य में उन्हें कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एमडीडीए ने सैक्टर वाइज टीमों का गठन कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। हमारी टीमें लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और जहां भी अवैध गतिविधियां सामने आती हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की जाती है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि देहरादून का विकास पूरी तरह नियोजित और सुरक्षित तरीके से हो। इसके लिए जरूरी है कि नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही, आम जनता से भी अपील है कि वे केवल अधिकृत योजनाओं में ही निवेश करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी प्राधिकरण को दें।”

अवैध निर्माण पर नहीं होगी कोई ढील – मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा, “प्राधिकरण अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रहा है। मेहुवाला में की गई कार्रवाई इसी का उदाहरण है। हमारी टीमें लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। जो लोग नियमों का उल्लंघन कर अवैध कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। आम नागरिकों को भी सतर्क रहना चाहिए और केवल वैध स्वीकृति वाली परियोजनाओं में ही निवेश करना चाहिए।”


मंत्री गणेश जोशी ने रिटायर्ड हवलदार उदय सिंह थापा को दी 100वें जन्मदिवस की शुभकामनाएं

देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने देहरादून के जोहड़ी गांव स्थित कुठालवाली पहुंचकर 58 गोरखा राईफल्स के रिटायर्ड हवलदार उदय सिंह थापा को उनके 100वें जन्मदिवस के अवसर पर शुभकामनाएं दीं और उन्हें सम्मानित किया।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि हवलदार उदय सिंह थापा का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने देश की सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। मंत्री ने कहा कि ऐसे वीर सैनिकों के त्याग और समर्पण के कारण ही आज देश सुरक्षित और सशक्त है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि समाज को उनके अनुभवों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा महानगर उपाध्यक्ष संध्या थापा सहित परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


चारधाम यात्रा पर राजनीति न करें- सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान, कहा कि इस समय हमारे प्रदेश में चारधाम यात्रा चल रही है। लेकिन कुछ लोग रील बनाकर इसे राजनीति की भेंट चढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होने ऐसे लोगो से कहा कि वो सरकार का विरोध कर सकते हैं, बीकेटीसी का भी विरोध हो सकता है, लेकिन हमारी पवित्र चारधाम यात्रा का विरोध न करें। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम तो महादेव का स्थल है, सरकार यात्रा को हर तरह से सकुशल सम्पन्न कराने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा हमारी सामुहिक आस्था की कठिन यात्रा है। ये यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी के लिए भी लाइफलाइन का काम करती है। इसलिए नकारात्मक बातों से चारधाम यात्रा का विरोध न करें, बल्कि यात्रा और यात्रियों को प्रोत्साहन प्रदान करें।

प्रदेश में गैस संकट नहीं

मुख्यमंत्री ने गैस को लेकर उठाए गए प्रश्न पर स्पष्ट किया प्रदेश में गैस किल्लल नहीं है, इस बारे में उनकी एक दिन पहले ही केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से मुलाकात हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस समय पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है। से युद्ध मात्र भारत की चुनौती नहीं है बल्कि पूरी दुनिया इससे प्रभावित है। लेकिन हमारे पास प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व है। जिनके नेतृत्व में दुनिया पर छाए युद्ध के बादल के बीच भारत में उत्सव मनाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना के समय भी दुनिया ने भारत को लेकर ऐसी ही आशंका व्यक्त की थी कि भारत इस महामारी से नहीं संभल पाएगा। लेकिन बाद में भारत ने ना सिर्फ महामारी पर सबसे पहले अंकुश प्राप्त किया, बल्कि 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भिजवाकर उन्हें भी इस संकट से बाहर निकालने का काम किया।


भाजपा सरकार महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पूरी तरह विफल साबित हुई- यशपाल आर्य

उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस का प्रदर्शन

देहरादून। विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार को महिला आरक्षण कानून 2023 की मूल भावना का सम्मान करते हुए वर्ष 2027 के उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों तथा 2029 के लोकसभा चुनावों में मौजूदा सीटों की संख्या के 33% पर महिलाओं को आरक्षण तत्काल लागू करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि इसके लिए केंद्र सरकार को संसद के दोनों सदनों में दोबारा संविधान संशोधन विधेयक लाना पड़े, तो बिना देरी के विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने में टालमटोल कर रही है, जिससे यह साफ है कि उसकी नीयत महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि उन्हें इंतजार में रखने की है।

महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस विधान मंडल दल ने आज विशेष सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा के प्रवेश द्वार पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने एक स्वर में महिला आरक्षण के साथ-साथ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की भी मांग उठाई और अंकिता भंडारी सहित सभी पीड़ित बेटियों को न्याय दिलाने की मांग को दोहराया।

नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में कांग्रेस के सभी विधायकों के हस्ताक्षरों के साथ महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के अनुरूप 33% आरक्षण लागू करने का संकल्प प्रस्तुत किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस संकल्प को स्वीकार न किया जाना लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकारों के साथ खुला अन्याय है। यह साफ संकेत है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से भी डर रही है।

यशपाल आर्य ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित होने के बावजूद उसकी अधिसूचना तीन साल तक रोके रखना और फिर 16 अप्रैल 2026 को जारी करना, सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर किन दबावों या मजबूरियों के चलते इस कानून को लागू करने में इतनी देरी की गई।

उन्होंने आगे कहा कि 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में जिन तीन विधेयकों को प्रस्तुत किया गया, यदि वे पारित हो जाते और लोकसभा की सीटों में 50% की वृद्धि होती, तो संसद में उत्तराखण्ड की हिस्सेदारी 0.93% से घटकर मात्र 0.72% रह जाती। यह राज्य के अधिकारों पर सीधा प्रहार होता। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दिन उत्तराखण्ड के भाजपा सांसद चुप क्यों रहे? क्या वे राज्य के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल नहीं हुए?

नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि यदि ये विधेयक लागू होते, तो न केवल संसद में बल्कि उत्तराखण्ड विधानसभा में भी पर्वतीय क्षेत्रों की सीटों में भारी कमी आ जाती, जिससे पहाड़ की आवाज को दबाने की साजिश साफ नजर आती है।

महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं घर, सड़क और जंगल—कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। अंकिता भंडारी प्रकरण में आज तक वीआईपी आरोपी का खुलासा नहीं होना सरकार की नाकामी और मिलीभगत को उजागर करता है। चमोली, हरिद्वार और चंपावत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई मामलों में आरोपियों का संबंध सत्ता पक्ष से रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में जंगली जानवरों के हमलों में लगातार महिलाओं की जान जा रही है, लेकिन सरकार इस पर भी ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है।

नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि महिलाओं को केवल आरक्षण का वादा नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और न्याय चाहिए। यदि सरकार जल्द ही महिला आरक्षण को लागू करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती है, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी।


महिला आरक्षण पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा विपक्ष- सीएम धामी

‘33% आरक्षण से बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी’, सीएम धामी ने केंद्र के प्रयासों का किया समर्थन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र – ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया। मुख्यमंत्री ने सदन से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उपायों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान के स्वरूप का वंदन करते हैं। उन्होने कहा कि भारत के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक नारी शक्ति के असंख्य प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। नारी शक्ति अब केवल ’’सहभागिता’’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ’’नेतृत्व’’ की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हो, क्रिकेट का विश्व कप जीतना हो, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास-आउट होना हो, या फिर सेना और वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर काम करना हो, ये सब नारी शक्ति के उदाहरण हैं। इसी तरह उत्तराखंड भी अदम्य साहस की प्रतीक तीलू रौतेली, उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई कही जाने वाली रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी नारी शक्ति का उदाहरण हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम युगांतकारी कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये इन सदनों में केवल मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। प्रधानमंत्री ने इस विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए समस्त देशवासियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से भी सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल के कारण जब बिल पारित नहीं हो पाया तो, विपक्षी दल के नेता तालियाँ बजा रहे थे। उस दृश्य को देखकर महाभारत की वो सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।

विपक्ष कर रहा भ्रम फैलाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पर जब पहली बार किसी ने सच्चे मन से महिलाओं के हित में कार्य करने का प्रयास किया तो उसे भी नहीं करने दिया। जबकि आदरणीय प्रधानमंत्री लोकसभा में ये स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब देश की मातृशक्ति पूरी तरह से समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।

केंद्र सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ लेने के साथ ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में रखकर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। यही कारण है कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2015 में शुरू हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से पिछले 11 वर्षों में लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय परिवर्तन आए हैं। पिछले 11 वर्षों में महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात 3 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। इतना ही नहीं, बीते 11 वर्षों में संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। आज “सुकन्या समृद्धि योजना” के अंतर्गत बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स-फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है।

तीन तलाक से दिलाई मुक्ति

वहीं “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, “स्वच्छ भारत मिशन” के द्वारा घर-घर शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा प्रदान की गई है। जिससे खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान दोनों की रक्षा हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया है। जबकि पूर्व में सरकारों ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट तक बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के सामान्य घरों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही है। राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से लेकर ‘’ऑपरेशन सिंदूर’’ में अग्रणी भूमिका निभाने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।

उत्तराखंड को मिलता फायदा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में भी महिला आरक्षण पर वही झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के पहले मंत्रीमंडल और राजीव गांधी की कैबिनेट में केवल एक- एक महिला मंत्री थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं।

प्रदेश में मजबूत हो रही मातृशक्ति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश सरकार द्वारा ’’उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।

इसके साथ ही, ’’सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ’‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से हमने राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम किया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण और ‘’एकल महिला स्वरोजगार योजना’’ के माध्यम से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही साथ ’’मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, वहीं, सहकारी समितियों में भी आज महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। खेल के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लोहाघाट में लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।

एक दिन जरूर पूरा होगा संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने का काम किया है। उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।


हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिजली उत्पादन पर टैक्स नहीं लगा सकती राज्य सरकार

बिजली उत्पादन पर टैक्स का अधिकार केंद्र का, उत्तराखंड सरकार को झटका

देहरादून। उत्तराखंड में जलविद्युत परियोजनाओं से विद्युत उत्पादन पर टैक्स लगाए जाने को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। उच्च न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि बिजली उत्पादन पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जलविद्युत कंपनियों की ओर से दायर विशेष अपीलों पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि “जनरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी” पर टैक्स लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, न कि राज्य सरकार के पास। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स वैध नहीं माना जा सकता।

इस मामले में पहले एकलपीठ ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला देते हुए जलविद्युत कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने उस समय माना था कि विधायिका को इस तरह का कानून बनाने का अधिकार है और यह टैक्स पानी के उपयोग पर नहीं बल्कि उससे होने वाले बिजली उत्पादन पर आधारित है।

हालांकि, इस फैसले को विभिन्न हाइड्रो पावर कंपनियों ने चुनौती दी और खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल की। सुनवाई के दौरान जजों के बीच मतभेद सामने आने पर मामला पुनः विचार के लिए न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ को भेजा गया। अब उनकी अदालत ने कंपनियों के पक्ष में फैसला सुनाया है।

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो राज्य गठन के बाद उत्तराखंड सरकार ने नदियों पर जलविद्युत परियोजनाएं स्थापित करने के लिए निजी और सरकारी कंपनियों को आमंत्रित किया था। समझौते के तहत कुल उत्पादन की 12 प्रतिशत बिजली राज्य को मुफ्त दी जानी थी, जबकि बाकी बिजली उत्तर प्रदेश को बेची जानी थी।

बाद में वर्ष 2012 में राज्य सरकार ने ‘उत्तराखंड वाटर टैक्स ऑन इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन एक्ट’ लागू कर जलविद्युत परियोजनाओं पर उनकी क्षमता के अनुसार 2 से 10 पैसे प्रति यूनिट तक टैक्स लगा दिया। इस फैसले के खिलाफ अलकनंदा पावर प्रोजेक्ट, टीएचडीसी, एनएचपीसी समेत कई कंपनियों ने अदालत का रुख किया था।

ताजा फैसले के बाद राज्य में जलविद्युत परियोजनाओं और सरकार के बीच टैक्स को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है और इसका असर भविष्य की ऊर्जा नीतियों पर भी पड़ सकता है।


सिक्किम के लोगों ने अपने व्यवहार और देशप्रेम से जीता पूरे देश का दिल- पीएम मोदी

दो दिवसीय दौरे पर सिक्किम पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, राज्य के गठन के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में लिया हिस्सा

गंगटोक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर सिक्किम पहुंचे, जहां राज्य के गठन के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में उन्होंने हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और देशभक्ति के जज्बे की जमकर सराहना की।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सिक्किम पहुंचते ही उन्हें एक अलग ही ऊर्जा और उत्सव का माहौल महसूस हुआ। उन्होंने यहां के मौसम, हरियाली और शांत वातावरण को अद्भुत बताते हुए इसे “पूरब का स्वर्ग” करार दिया।

उन्होंने कहा कि आज जब कुछ ताकतें देश में विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं, तब सिक्किम ने “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की सच्ची तस्वीर पेश की है। यहां के लोगों ने अपने व्यवहार और देशप्रेम से पूरे देश का दिल जीत लिया है।

प्रधानमंत्री ने अपने पिछले दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि खराब मौसम के कारण वह पहले यहां नहीं पहुंच पाए थे और तब से ही लोगों से मिलने की इच्छा मन में थी, जो अब पूरी हुई। उन्होंने सिक्किम के लोगों की सादगी, विनम्रता और मुस्कान की भी तारीफ की।

उन्होंने रोड शो के दौरान दिखे उत्साह को याद करते हुए कहा कि तिरंगे के साथ लोगों का जोश और देशभक्ति का माहौल लंबे समय तक याद रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की स्वच्छता को भी सराहा और कहा कि यहां के लोग प्रकृति के सच्चे रक्षक हैं।

प्रधानमंत्री ने राज्य सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व में विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने का काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नॉर्थईस्ट भारत के लिए केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि “अष्टलक्ष्मी” है। केंद्र सरकार ‘एक्ट ईस्ट’ के साथ ‘एक्ट फास्ट’ नीति पर काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र का तेजी से विकास हो सके।

अपने संबोधन में उन्होंने पर्यटन को सिक्किम की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि छोटे से क्षेत्र में यहां जैव विविधता का विशाल भंडार है। सरकार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है, जिससे राज्य के गांव-गांव तक विकास पहुंच सके।


नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शिक्षाविद ललित मोहन जोशी को किया सम्मानित

“नशे को ना, जिंदगी को हाँ” अभियान और सुपर-300 मिशन के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान

देहरादून/नई दिल्ली।  सिक्स सिग्मा हेल्थकेयर एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026 के भव्य समारोह में स्वास्थ्य, सेवा एवं शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया गया। इस प्रतिष्ठित अवसर पर एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी द्वारा सजग इंडिया के संस्थापक शिक्षाविद ललित मोहन जोशी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान उन्हें उनके सामाजिक अभियान “नशे को ना, जिंदगी को हाँ” (युवा संवाद) तथा शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण पहल सुपर-300 मिशन के लिए प्रदान किया गया।

15 वर्षों से नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय योगदान

ललित मोहन जोशी पिछले 15 वर्षों से उत्तराखंड में युवाओं को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं। उनकी संस्था सजग इंडिया के माध्यम से युवाओं के बीच नशा मुक्ति, नैतिक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, कौशल विकास एवं सामाजिक जागरूकता पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

सम्मान प्राप्त करने के बाद जोशी ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक दिशा देना और उन्हें एक स्वस्थ, जागरूक एवं सशक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।

सुपर-300 मिशन: शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण

कार्यक्रम में विशेष श्रेणी के अंतर्गत सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ़ कॉलेज को भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान संस्थान द्वारा संचालित सुपर-300 मिशन एजुकेशन स्कीम के लिए दिया गया। इस योजना के तहत कोरोना काल एवं अन्य आपदा परिस्थितियों से प्रभावित, अनाथ, अंत्योदय परिवारों के मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर 300 विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष निःशुल्क उच्च, चिकित्सा एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। यह पहल विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संस्थान की ओर से अकादमिक निदेशक डॉ सपना जोशी ने यह सम्मान ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान संस्थान के शिक्षा एवं सामाजिक सेवा के प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है और भविष्य में भी यह प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

देशभर के गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर परमवीर चक्र विजेता मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीन रंजन, बीएसएफ डीआईजी दलवीर सिंह, मिलिट्री नर्सिंग सर्विस एडीजी लिसम्मा पी.वी., मेजर जनरल अशोक कुमार, जम्मू-कश्मीर की एनकाउंटर स्पेशलिस्ट शाहिदा परवीन, डॉ. प्रदीप भारद्वाज (प्रेसिडेंट, माउंटेन मेडिसिन सोसायटी एवं डायरेक्टर सिक्स सिग्मा) तथा मुंबई पुलिस अधिकारी एवं 26/11 आतंकी हमलों के नायक मंगेश नाइक सहित देशभर से आए 2,000 से अधिक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


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