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सफाई कर्मचारियों के अधिकारों एवं कल्याण पर विशेष जोर

Category Archives: राष्ट्रीय

सफाई कर्मचारियों के अधिकारों एवं कल्याण पर विशेष जोर

बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, नियमितीकरण व समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश

पौड़ी। उपाध्यक्ष, राज्य कर्मचारी सफाई आयोग (राज्यमंत्री) भगवत प्रसाद मकवाना ने अपने एक दिवसीय जनपद भ्रमण के दौरान नगर पालिका सभागार, पौड़ी में सफाई कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, अधिकारों, सुविधाओं एवं कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों से संबंधित किसी भी प्रकार का भुगतान या देयक एक दिन भी लंबित न रखा जाए तथा भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।

उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार सफाई कर्मचारियों के सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि सभी सफाई कर्मचारियों को 5 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया गया है, जिसका पूरा प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक पात्र कर्मचारी को इस योजना का लाभ सुनिश्चित कराया जाए।

स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों के लिए नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच, आवश्यक उपचार एवं परामर्श की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे सुरक्षित एवं स्वस्थ कार्य कर सकें। बैठक में सैप्टिक टैंक एवं सीवर की सफाई करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष बल देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से मानक सेफ्टी किट उपलब्ध कराई जाए। साथ ही “नमस्ते योजना” के अंतर्गत सभी पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा, जिससे उन्हें केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके।

उपाध्यक्ष ने मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए समाज कल्याण विभाग को नोडल विभाग नामित करने तथा एक समन्वय समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 15 जून तक विशेष शिविर आयोजित कर अधिक से अधिक पात्र कर्मचारियों को योजनाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि वर्ष 2018 तक 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। इसके अतिरिक्त सभी शहरी निकायों को अपने-अपने यहां स्वीकृत एवं कार्यरत पदों का अद्यतन विवरण प्रस्तुत करने तथा सभी कर्मचारियों के स्वास्थ्य कार्ड बनवाने के निर्देश भी दिए गए।

उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सफाई कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील, सम्मानजनक एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी शहरी स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं, अतः इनके सम्मान, सुरक्षा एवं कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बैठक में परियोजना निदेशक डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद पौड़ी संजय कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी मंगल सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, सफाई कर्मचारी एवं उनके प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


भाजपा की मानसिकता गरीब व मजदूर विरोधी- धस्माना

भाजपा की मानसिकता गरीब व मजदूर विरोधी

कांग्रेस सरकार बनने पर प्रदेश में किसी गरीब की झोपड़ी नहीं टूटने देंगे- सूर्यकांत धस्माना

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर देहरादून के घंटाघर में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ द्वारा श्रमिक सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लिया, जहां उन्हें सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने महिला श्रमिकों को सूट भेंट किए, जबकि पुरुष श्रमिकों को गमछा पहनाकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में धस्माना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा गरीबों, श्रमिकों और वंचित वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी है और सत्ता में रहते हुए उनके लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं।

उन्होंने वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की नीतियां गरीब और मजदूर वर्ग के हित में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, रोजगार की कमी और आवास से जुड़े मुद्दों ने श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

धस्माना ने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित मजदूर वर्ग ही हुआ, जिन्हें हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर लौटना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में बढ़ती महंगाई और गैस की कीमतों ने मजदूरों के लिए रोजमर्रा का जीवन और कठिन बना दिया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कौशल ने कहा कि पार्टी प्रदेश के मेहनतकश लोगों को एकजुट कर उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार की नीतियों से मजदूर वर्ग आर्थिक दबाव में है और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

इस मौके पर पूनम कंडारी, विनोद कुमार, राम गोपाल वर्मा, फरजान अंसारी समेत कई कांग्रेस नेता और बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे। कार्यक्रम के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों और समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।


सीएम धामी ने श्री पीठम स्थापना महोत्सव में 1100 कन्याओं का पूजन व माँ राजेश्वरी का किया अभिषेक

डोल आश्रम आध्यात्मिक साधना व सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र- सीएम धामी

अल्मोड़ा। जनपद के डोल स्थित आश्रम में आयोजित श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास के श्री पीठम स्थापना महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 1100 कन्याओं का पूजन कर माँ राजेश्वरी का अभिषेक एवं पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

डोल आश्रम में आगमन पर मुख्यमंत्री द्वारा आश्रम परिसर में स्थापित श्रीयंत्र एवं यहां संचालित आध्यात्मिक गतिविधियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थापित दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र को देखकर एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि बाबा कल्याणदास की साधना एवं तपस्या के कारण यह स्थान आज पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। साथ ही उन्होंने बाबा कल्याणदास द्वारा वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना के प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आश्रम धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक साधना एवं सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और चारधाम यात्रा में प्रतिवर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या प्रदेश में विकसित हो रही बेहतर व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का परिणाम है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक मोहन सिंह मेहरा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


बुद्ध पूर्णिमा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, “हर-हर गंगे” के जयघोष से गूंजे गंगा घाट

हरिद्वार। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। हर की पौड़ी समेत गंगा के प्रमुख घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना की।

घाटों पर “हर-हर गंगे” के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।

इसके अलावा, ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन की विशेष व्यवस्था लागू की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन-स्नान की सुविधा मिल सके।


भगवान बुद्ध का जीवन करुणा, अहिंसा, सत्य, शांति और मानवता का प्रतीक- मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के पावन अवसर बुद्ध पूर्णिमा पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध का जीवन करुणा, अहिंसा, सत्य, शांति और मानवता का प्रतीक है। उनके उपदेश आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश समाज में प्रेम, सद्भाव और सहअस्तित्व को बढ़ावा देता है। उनका जीवन लोगों को आत्मचिंतन और आत्मविकास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।


बुजुर्ग समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर-सीएम धामी

मुख्यमंत्री धामी ने वरिष्ठ नागरिक सम्मान एवं खेल समारोह-2026 में किया प्रतिभाग

राज्य में 6 लाख से अधिक वरिष्ठजनों को मिल रहा पेंशन का लाभ

जेरियाट्रिक केयर गिवर प्रशिक्षण कार्यक्रम को दिया जा रहा बढ़ावा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी स्थित डॉ सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रेक्षागृह में आयोजित वरिष्ठ नागरिक सम्मान एवं खेल समारोह-2026 में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में बुजुर्गों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनका सम्मान ही किसी भी सभ्य समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजन समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं, जिनके अनुभव और मार्गदर्शन से समाज को सही दिशा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस परिवार और समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने वरिष्ठजनों को समाज की मजबूत जड़ों की संज्ञा देते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन सामाजिक संरचना को सुदृढ़ बनाए रखता है।

उन्होंने समारोह में वरिष्ठ नागरिकों द्वारा वॉलीबॉल, फुटबॉल और बैडमिंटन जैसी प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह संदेश देता है कि उम्र केवल एक संख्या है और जीवन में ऊर्जा एवं उत्साह का कोई विकल्प नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं जैसे अटल वयोअभ्युदय योजना, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना और राष्ट्रीय वयोश्री योजना के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन को सुरक्षित और गरिमामय बनाने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत राज्य के लगभग 6 लाख वरिष्ठजनों को प्रतिमाह 1500 रुपये की पेंशन डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जा रही है। साथ ही, पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन देने का निर्णय उनकी आर्थिक सुरक्षा को और सुदृढ़ कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, रुद्रपुर में एक आधुनिक मॉडल वृद्धाश्रम का निर्माण भी किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अटल वयोअभ्युदय योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, राज्य में पहली बार जेरियाट्रिक केयर गिवर प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत वरिष्ठजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा निशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधा भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 1300 वरिष्ठ नागरिकों की निशुल्क सर्जरी का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को अपने भरण-पोषण के लिए कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा उनके गरिमामय जीवन के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।


खेल विभाग में कॉन्ट्रैक्ट प्रशिक्षकों की निरंतरता बढ़ाने के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड शासन ने खेल विभाग में कार्यरत कॉन्ट्रैक्ट खेल प्रशिक्षकों की सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के संबंध में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस संबंध में विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं।

जारी आदेश के अनुसार, जनपदों में तैनात कॉन्ट्रैक्ट खेल प्रशिक्षकों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निरंतरता प्रदान किए जाने तथा उनके कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

शासन ने इस विषय में पूर्व में जारी आदेशों और संशोधनों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षकों की नियुक्ति एवं सेवाओं का विस्तार नियमानुसार किया जाएगा।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि खेल विभाग के अंतर्गत वर्तमान में कार्यरत कॉन्ट्रैक्ट प्रशिक्षकों, जिनकी सेवा अवधि पूर्ण हो चुकी है, उनके मामलों में भी शासनादेश दिनांक 11 जुलाई 2024 के अनुसार आवश्यक कार्यवाही की जाए।

इसके तहत योग्य प्रशिक्षकों को निरंतरता प्रदान करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस निर्णय से प्रदेश में खेल गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है और खिलाड़ियों को निरंतर प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा।


ऋषिकेश में एमडीडीए का सख्त एक्शन, अवैध बहुमंजिला निर्माणों पर चला सीलिंग अभियान

सलान गांव से निर्मल बाग तक 10 से अधिक निर्माण सील, प्राधिकरण ने साफ किया-बिना नक्शा पास निर्माण बर्दाश्त नहीं

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए ऋषिकेश क्षेत्र में बड़ा अभियान चलाया। प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत सलान गांव और निर्मल बाग इलाके में किए जा रहे अवैध बहुमंजिला भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। संयुक्त सचिव गौरव चटवाल और एसडीएम ऋषिकेश के निर्देशों के बाद प्रवर्तन टीम ने मौके पर पहुंचकर एक के बाद एक निर्माणों को सील किया। इस कार्रवाई से अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है।

सलान गांव में पहली बड़ी कार्रवाई
अभियान की शुरुआत सलान गांव भगवंतपुर से हुई, जहां करन गुप्ता द्वारा बिना अनुमति के बहुमंजिला भवन का निर्माण किया जा रहा था। प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना स्वीकृत मानचित्र के किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह अवैध है और इस पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

निर्मल बाग बना कार्रवाई का केंद्र
इसके बाद टीम ने निर्मल बाग ब्लॉक-बी लेन नंबर 10 में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया। यहां एक ही इलाके में कई अवैध निर्माण चिन्हित किए गए थे। अजय चौहान, रवि गुप्ता, विजय रावत और प्रवीन रमन समेत कई लोगों द्वारा किए जा रहे बहुमंजिला निर्माणों को सील किया गया। प्राधिकरण की टीम ने सगुन शर्मा, विजय नायर, अमन नायर, विवेक नायर और अजय नायर के निर्माणाधीन भवनों पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया। अधिकारियों के अनुसार इन सभी निर्माणों में मानचित्र स्वीकृति और निर्माण मानकों का उल्लंघन पाया गया।

प्रवर्तन टीम और पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई
पूरी कार्रवाई एमडीडीए की गठित प्रवर्तन टीम द्वारा की गई, जिसमें सहायक अभियंता अभिषेक भारद्वाज, सुरजीत सिंह, अवर अभियंता मनीष डिमरी, अमित भारद्वाज, प्रवेश नौटियाल, हर्षित मौठानी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। इसके अलावा सहायक अभियंता शैलेन्द्र सिंह रावत और अवर अभियंता सचिन कुमार की निगरानी में सलान गांव की कार्रवाई सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।

अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस
एमडीडीए का यह अभियान साफ संकेत देता है कि प्राधिकरण अब अवैध निर्माणों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम कर रहा है। तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के बीच अनियोजित निर्माण न सिर्फ शहर की सूरत बिगाड़ते हैं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बनते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मानकों के बनाए जा रहे बहुमंजिला भवन भविष्य में बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में प्राधिकरण की यह कार्रवाई शहर की व्यवस्थित विकास योजना को लागू करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

लगातार जारी रहेगा अभियान
एमडीडीए के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। जिन क्षेत्रों में अवैध निर्माण की शिकायतें मिलेंगी, वहां तत्काल निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले आवश्यक अनुमति जरूर लें।

शहर के विकास और सुरक्षा का सवाल
देहरादून और ऋषिकेश जैसे शहर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में अनियंत्रित निर्माण न केवल ट्रैफिक, जल निकासी और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ाते हैं, बल्कि आपदा के समय जोखिम भी कई गुना बढ़ा देते हैं। एमडीडीए का यह अभियान इसी चुनौती से निपटने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर प्रवर्तन टीम को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जो लोग बिना मानचित्र स्वीकृति के बहुमंजिला भवन बना रहे हैं, उनके खिलाफ सीलिंग, ध्वस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम जनता से अपील की कि निर्माण शुरू करने से पहले सभी आवश्यक अनुमतियां अवश्य लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि ऋषिकेश क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि जिन निर्माणों में मानकों का उल्लंघन पाया जा रहा है, उन्हें चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ क्षेत्र में निगरानी कर रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।


जिले में चिन्हित 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त

शेष 8 भवनों को एक माह में हटाने के निर्देश

देहरादून। जिला प्रशासन ने जनपद में वर्षों से जर्जर और निष्प्रयोज्य पड़े विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज करते हुए बड़ी पहल की है। मुख्य शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में चिन्हित 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है, जबकि शेष 8 भवनों पर कार्रवाई जारी है और उन्हें एक माह के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के तहत 4 माध्यमिक और 52 प्रारंभिक विद्यालयों के जर्जर भवनों को गिराया गया है। इसके अलावा, विद्यालयों में पूर्ण रूप से निष्प्रयोज्य कक्षा-कक्षों में माध्यमिक विद्यालयों के 7 और प्रारंभिक विद्यालयों के 10 कक्षों में से 14 कक्षों को ध्वस्त किया जा चुका है। शेष 3 कक्षों को भी आगामी एक माह के भीतर हटाया जाएगा।

जिलाधिकारी की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के चलते वर्षों से जर्जर पड़े सैकड़ों विद्यालय भवनों के विरुद्ध पहली बार एक साथ व्यापक कार्रवाई संभव हो पाई है। शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाचार्यों की जवाबदेही तय करते हुए जर्जर भवनों के चिन्हीकरण और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाई गई।

विकासखंडवार आंकड़ों के अनुसार, चकराता में 23, कालसी में 17, विकासनगर में 8, सहसपुर में 2, रायपुर में 14 और डोईवाला में 17 विद्यालय भवन चिन्हित किए गए थे। इनमें से कुल 70 विद्यालय भवनों और कक्षा-कक्षों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। वहीं, 11 आंशिक एवं पूर्ण रूप से जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जर्जर भवनों को हटाकर सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जनपद के सभी जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है और शेष कार्य भी शीघ्र पूर्ण किया जाएगा।


धामी कैबिनेट की बैठक में कई प्रस्तावों पर लगी मुहर

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। खास तौर पर प्रदेश में मौनपालन (मधुमक्खी पालन) नीति को मंजूरी देते हुए सरकार ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 18 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत प्रवर्तन अधिकारियों के लिए वर्दी अनिवार्य की गई है।

कैबिनेट के मुख्य निर्णय

आबकारी नीति में व्यय दर 6% निर्धारित की गई थी, जिसके अनुरूप वाणिज्य कर विभाग ने अपनी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी।

परिवहन विभाग के तहत बसों की खरीद को मंजूरी दी गई। पहले 100 बसों की अनुमति थी, लेकिन जीएसटी दर 28% से घटकर 18% होने के बाद अब 109 बसें खरीदी जाएंगी।

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी।वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई।

वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष की गई।

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है।

कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को अब जिला स्तर से मान्यता मिलेगी।

कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इस संबंध में जल्द अध्यादेश लाया जाएगा।

प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) अब एक वर्ष तक ही वैध मानी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी।

सहायक अध्यापकों के लिए सेवा नियमावली को स्वीकृति।

लोक निर्माण विभाग (लोनिवि): हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में जेई भर्ती से जुड़े मामलों की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई।

वर्कचार्ज कर्मियों से जुड़े निर्णय पर हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी दी गई।

डी श्रेणी के ठेकेदारों को अब 1 करोड़ की जगह 1.5 करोड़ रुपये तक के कार्य मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ अब 21 अशासकीय कॉलेजों तक बढ़ाया गया।

वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और मानव-हाथी संघर्ष में कमी आने की उम्मीद है। वन सीमा मौन पालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष नियमावली 2026 को भी स्वीकृति दी गई।


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