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स्वास्थ्य मंत्री ने 7 मेडिकल कॉलेजों एवं राज्य कैंसर संस्थान, हल्द्वानी के साथ की मैराथन समीक्षा बैठक

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स्वास्थ्य मंत्री ने 7 मेडिकल कॉलेजों एवं राज्य कैंसर संस्थान, हल्द्वानी के साथ की मैराथन समीक्षा बैठक

देहरादून। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने दून अस्पताल, देहरादून में राज्य के 7 राजकीय मेडिकल कॉलेजों एवं हल्द्वानी स्थित राज्य कैंसर संस्थान के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य एवं निदेशक उपस्थित रहे। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्या भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक के दौरान राज्य कैंसर संस्थान, हल्द्वानी के निदेशक डॉ. पांडे द्वारा संस्थान की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। मंत्री ने चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़, सुलभ एवं प्रभावी बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्देश एवं निर्णय लिए।

बैठक के प्रमुख निर्णय एवं निर्देश निम्नानुसार हैं:

राज्य कैंसर संस्थान, हल्द्वानी में शीघ्र ही इंडोर सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी।

हरिद्वार मेडिकल कॉलेज में 15 दिनों के भीतर नियमित ओपीडी सेवाएं शुरू की जाएंगी।

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में इसी माह कैथ लैब प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही अल्मोड़ा एवं हल्द्वानी में स्थापित कैथ लैब के संचालन हेतु कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग 70 प्रतिशत एवं देहरादून में लगभग 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। फैकल्टी रिटेंशन हेतु प्रभावी नीति बनाने पर मंथन किया गया।

सीनियर रेजिडेंट्स के वेतन में वृद्धि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर किए जाने का निर्णय लिया गया।

रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को फैकल्टी के रूप में समायोजित करते हुए इसी शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।

डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल विकसित किए जाएंगे तथा पर्वतीय क्षेत्रों में समयबद्ध सेवा नीति लागू करने पर बल दिया गया।

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में चारधाम यात्रा मार्ग को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित किया जाएगा। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों के निकट हेलीपैड निर्माण की योजना तैयार की जाएगी।

पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में इसी वर्ष से कक्षाएं प्रारंभ करने हेतु कार्ययोजना शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए गए।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

आपातकालीन स्थितियों में विशेषज्ञ चिकित्सकों को हेली सेवा के माध्यम से आवश्यक स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

हल्द्वानी में कैथ लैब के शीघ्र शुभारंभ के निर्देश दिए गए।

रोस्टर प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के सभी क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

संस्थागत एम्बुलेंस सेवाओं का उपयोग 108 सेवा की तर्ज पर करने के निर्देश दिए गए।

अस्पताल परिसरों में स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ करने, अनावश्यक रेफरल पर रोक लगाने तथा बाहर से दवाएं लिखने की प्रवृत्ति पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने अस्पतालों में “सफाई, दवाई और भलाई” को स्वास्थ्य सेवाओं के तीन प्रमुख स्तंभ बताते हुए इन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर, भूमि धोखाधड़ी पर प्रशासन ने कसा शिकंजा

भूमि फर्जीवाडे़ पर बडी कार्रवाई, आयुक्त ने 24 मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश

खसरा हेरफेर कर दोहरी बिक्री, सुनवाई में भूमाफियों का बड़ा खेल उजागर

बडे भू-प्रकरणों में देरी पर आयुक्त सख्त, 15 दिन में प्रगति के निर्देश

आयुक्त का स्पष्ट संदेश- लंबित न रहे मामले, तुरंत करें कार्रवाई

देहरादून। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या की समीक्षा की गई। इस दौरान समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए मामलों सहित 125 मामलों सुनवाई की गई। इस दौरान समिति द्वारा कुल 45 प्रकरणों का निस्तारण के साथ ही 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। लैंड फ्रॉड समिति में दर्ज नए मामलों में सबसे अधिक 74 मामले देहरादून जनपद के है, जबकि हरिद्वार के 15, पौडी के 13, टिहरी के 02 तथा चमोली का 01 प्रकरण भी इसमें शामिल है।

गढ़वाल आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रकरणों में संयुक्त निरीक्षण अपेक्षित है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि हर 15 दिनों के अंतराल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में आयोजित ताजा बैठक में कुल 125 प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें 20 लंबित और 105 नए मामले शामिल थे। इनमें से 24 प्रकरण अत्यंत गंभीर पाए गए, जिनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन 24 मामलों में उदय सिंह, सुचेता सेमवाल, राजीव जायलवाल, गुलाब सिंह, किरन बागड़ी, अजय कुमार, संजीव गर्ग, मिथलेश सिंघल, जगदंबा रावत, अर्जुन सिंह, सामरजी देवी समेत कुल 13 शिकायतें विशेष रूप से भूमि पर तारबाड़ कर कब्जा व जमीन को खुर्द-बुर्द करने से संबंधित हैं। आयुक्त ने कहा कि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं-कहीं बिना जमीन के ही बिक्री, कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर अलग भूमि देना, तो कहीं 2 बीघा भूमि को 4 बीघा बताकर बेचना जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं। आयुक्त ने ऐसे मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त भूमि धोखाधडी, अवैध कब्जा एवं गंभीरता वाले अन्य 11 मामलो पर भी आयुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए है।

आयुक्त ने कहा कि 24 एफआईआर योग्य मामलों के अतिरिक्त 45 अन्य प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया है। इनमें कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है। कुछ में लेन-देन की समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप से सुलझ गई और धनराशि वापस कर दी गई। वहीं, कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए, जिनमें बेनामा निरस्तीकरण से संबंधित विवाद हैं और इनमें लैंड फ्रॉड नहीं पाया गया। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निस्तारण विधिवत न्यायालय के माध्यम से ही होगा।

आयुक्त ने विशेष रूप से बड़े भू-क्षेत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे लंबित प्रकरणों में 15 दिनों के भीतर ठोस प्रगति लाना सुनिश्चित करें। ऐसे मामलें जिनमें अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है, उनमें तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए। स्पष्ट भूमि धोखाधड़ी के सभी मामलों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। जो मामले भूमि धोखाधडी से संबंधित नही है उनकी सूचना शिकायतकर्ता को भी दी जाए। आयुक्त ने निर्देश दिए कि भूमि से संबंधित मामलों में प्रारंभिक स्तर पर ही विवाद की पहचान कर आवश्यक प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में जटिलताएं उत्पन्न न हों।

आयुक्त ने न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा किसी भी भूमि संबंधी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के निर्देश दिए।

लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी टिहरी शैलेन्द्र सिंह नेगी, एसपी (ग्रामीण) जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ट, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम यमकेश्वर छत्तर सिंह चौहान, एसडीएम गैरसैंण अहमद अबरार, उप निबंधक स्टाम्प रामदत्त मिश्र सहित वर्चुअल माध्यम से सभी संबंधित तहसीलों के वरिष्ठ अधिकारी व तहसीलदार उपस्थित थे।


राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा- मुख्यमंत्री

15 जून तक सीएम घोषणाओं के लंबित शासनादेश जारी होंगे

देहरादून। मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा उनकी प्रभावी निगरानी के लिए प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू टेक्निक (पी.ई.आर.टी.) चार्ट तैयार किया जाए। बिजली, पेयजल, वनाग्नि, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा सड़क से संबंधित समस्याओं का विभागों द्वारा यथाशीघ्र समाधान किया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

विधायकगणों द्वारा अपने क्षेत्रों की जिन समस्याओं को उठाया जा रहा है, अधिकारी उन्हें गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करें। जिन घोषणाओं के अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उन्हें 15 जून 2026 तक जारी किया जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से जनसमस्याओं का समाधान करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्रों यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और कोटद्वार की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को ये निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में छात्राओं की सर्वाधिक संख्या वाले विद्यालयों को चिन्हित करते हुए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए। उन्होंने कहा कि रघुनाथ मंदिर, कोट ब्लॉक स्थित लक्ष्मण मंदिर तथा फलस्वाड़ी स्थित सीता माता मंदिर को धार्मिक सर्किट के रूप में भव्यता से विकसित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगणों द्वारा केंद्रीय विद्यालय संगठन खोलने के लिए दिए जा रहे प्रस्तावों पर शिक्षा विभाग तथा संबंधित जिलाधिकारी केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने पर उन्हें शीघ्र स्वीकृति मिल सके।युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पौड़ी में मल्टीपरपज हॉल बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा बैठक में उठाई गई समस्याओं का संबंधित विभागीय सचिव प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित रोपवे प्रकरणों की अलग से समीक्षा की जाए। साथ ही पार्किंग की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए तथा सरकारी कार्यालयों में नियमित रूप से सोलर पैनल लगाए जाएं।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, विधायक श्रीमती रेनू बिष्ट, राजकुमार पोरी, दलीप सिंह रावत, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, रणवीर सिंह चौहान, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा वर्चुअल माध्यम से गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय और जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति भदौरिया उपस्थित थे।


चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

सुनवाई के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि 13 अप्रैल के जारी सर्कुलर का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है और आयोग को नियुक्तियों का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि मतगणना केंद्रों पर सभी राजनीतिक दलों के एजेंट मौजूद रहते हैं, इसलिए यह मायने नहीं रखता कि पर्यवेक्षक केंद्र सरकार का अधिकारी है या राज्य सरकार का। न्यायालय के अनुसार, अधिकारियों की नियुक्ति चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करती है।

दरअसल, यह विवाद मतगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर खड़ा हुआ था। आयोग ने निर्देश दिया था कि वोटों की गिनती में केंद्रीय कर्मचारियों को पर्यवेक्षक बनाया जाएगा, जिसका तृणमूल कांग्रेस ने विरोध किया। पार्टी का कहना था कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने टीएमसी की ओर से दलील रखते हुए कहा कि आयोग के सर्कुलर में केवल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और राज्य कर्मियों को बाहर रखना उचित नहीं है।

हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि नियमों के तहत आयोग को यह अधिकार है कि वह केंद्र या राज्य, किसी भी स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति कर सकता है। अदालत ने यह भी साफ किया कि आयोग का निर्णय नियमों के अनुरूप है और उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।


ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को हुए नुकसान का शीघ्र आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें- गणेश जोशी

नुकसान का आकलन कर शीघ्र मुआवजा देने के निर्देश

देहरादून। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश में हाल ही में हुई ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को हुए नुकसान को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र आंकलन कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दूरभाष के माध्यम से निदेशक कृषि से वार्ता करते हुए कहा कि ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का वास्तविक आकलन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि किसानों को जल्द राहत मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को राजस्व विभाग के साथ समन्वय बनाकर संयुक्त सर्वे कराने के भी निर्देश दिए।

कृषि मंत्री जोशी ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार के निर्धारित मानकों के अनुसार नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों को शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और किसी भी प्रभावित किसान को राहत से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वे कार्य में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित की जाए, जिससे किसानों को समय पर सहायता मिल सके और उनकी आजीविका पर पड़े प्रभाव को कम किया जा सके।


आज आपके फोन में आएगा अलर्ट, घबराएं नहीं

सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम की होगी जांच, मोबाइल पर आएगा परीक्षण संदेश

देहरादून। राज्य में आज आपातकालीन सूचना प्रसारण प्रणाली की कार्यक्षमता जांचने के लिए सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के जरिए एक परीक्षण अलर्ट जारी किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक टेस्ट मैसेज होगा, जिसे लेकर लोगों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपदा की स्थिति में चेतावनी संदेश समय पर और व्यापक स्तर पर आम जनता तक पहुंच सकें। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अलर्ट को केवल परीक्षण के रूप में ही लें और किसी तरह की अफवाह या भ्रम की स्थिति से बचें।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह प्रणाली राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से विकसित की जा रही है, ताकि मौसम और आपदा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां समय रहते लोगों तक पहुंचाई जा सकें।

यह परीक्षण विभिन्न मोबाइल नेटवर्क सेवाओं के माध्यम से किया जाएगा, जिससे यह आकलन किया जा सके कि अलर्ट संदेश कितनी तेजी और सटीकता से लोगों तक पहुंच रहे हैं। साथ ही, किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है, इसका भी मूल्यांकन किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि भविष्य में जब वास्तविक आपदा अलर्ट जारी किए जाएंगे, तो उन्हें गंभीरता से लेना और संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। इससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

परीक्षण के दौरान लोगों के मोबाइल पर जो संदेश प्राप्त होगा, उसमें बताया जाएगा कि भारत सरकार द्वारा स्वदेशी तकनीक के माध्यम से त्वरित आपदा चेतावनी सेवा शुरू की जा रही है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि यह एक परीक्षण संदेश है और इस पर किसी प्रकार की कार्रवाई अपेक्षित नहीं है।

सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से राज्य में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा लोगों को समय रहते सतर्क कर सुरक्षित रखा जा सकेगा।


बौद्ध सर्किट कॉरिडोर में उत्तराखंड को शामिल कराने का होगा प्रयास- महाराज

विकासनगर (देहरादून)। आज के समय में जब समाज को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और विश्व में युद्ध के हालात बने हुए हैं ऐसे समय में भगवान बुद्ध के विचार और भी प्रासांगिक हो जाते हैं। हमें उनके बताये मार्ग पर चलकर आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

उक्त बात प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने बौद्ध उत्सव मेला समिति, कालसी द्वारा विकास नगर स्थित हैरिटेज डी.एस. में आयोजित बैसाखी बुद्ध पूर्णिमा समरोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने सम्बोधन में कहीं। उन्होंने कार्यक्रम आयोजकों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्वोत्तर के 5 राज्यों में ‘बौद्ध सर्किट कॉरिडोर’ बनाने की घोषणा की है। हमारा प्रयास होगा कि उत्तराखंड को भी इसमें शामिल किया जाये। देहरादून स्थित बुद्धा टेंपल बौद्ध धर्म का एक बड़ा केंद्र है। माइंडरोलिंग मठ, बुद्धा टैम्पल, एशिया का सबसे बड़ा स्तूप यहाँ है। इसमें शाक्यमुनि बुद्ध की विशाल मूर्ति और भित्ति चित्र हैं।

महाराज ने कहा कि बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन धरती पर करूणा के सूर्य का उदय हुआ, लुम्बिनी में राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म हुआ और बोधगया में उन्हें बोधि मिली जबकि कुशीनगर में उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। एक ही तिथि को तीन महापर्व हुए थे। इसीलिए इसे हम बुद्ध पूर्णिमा या त्रिविधि पावनी भी कहते हैं।

कैबिनेट मंत्री महाराज ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध उत्सव मेला समिति द्वारा आयोजित समारोह पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मानवता, शांति और करूणा का संदेश देने वाला एक प्रेरणादायक समारोह है। उन्होंने कहा कि समिति ने इस आयोजन के माध्यम से समाज में भगवान बुद्ध के विचारों और सिद्धान्तों को जागृत करने का प्रयास किया है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और हमें जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। भगवान बुद्ध ने हमें अहिंसा, करूणा और सत्य का अनुसरण करने का संदेश दिया है। हमारा कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढ़ियों को भी इन महान शिक्षाओं से परिचित करायें और एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां शांति, सहिष्णुता और नैतिकता का वास हो। हम सभी इस पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम भगवान बुद्ध के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे।

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विकास नगर विधायक, मुन्ना सिंह चौहान, राज्य मंत्री श्यामवीर सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री धर्मवीर सैनी, हरबर्टपुर नगरपालिका अध्यक्ष नीरू देवी, वीरेंद्र सैनी, गुरु दयाल सैनी, चौधरी इंद्राज सिंह सैनी एवं बौद्ध उत्सव मेला समिति के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।


हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं, कानून हाथ में लेने वालों पर होगी कठोरतम कार्रवाई- कुसुम कंडवाल

​पिथौरागढ़ नृशंस हत्याकांड पर राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा कुसुम कंडवाल ने लिया स्वतः संज्ञान

पुलिस क्षेत्राधिकारी धारचूला से आयोग अध्यक्ष ने की वार्ता; आरोपी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश

​देहरादून। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने पिथौरागढ़ जनपद के अस्कोट क्षेत्र में पति द्वारा अपनी पत्नी की कुल्हाड़ी से काटकर की गई निर्मम हत्या के प्रकरण का अत्यंत गंभीरता से स्वतः संज्ञान लिया है। कंडवाल ने इस जघन्य अपराध के संदर्भ में पुलिस क्षेत्राधिकारी धारचूला से दूरभाष पर वार्ता कर घटना की वस्तुस्थिति और अब तक की गई पुलिसिया कार्रवाई की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि इस वीभत्स हत्याकांड की विवेचना त्वरित और पारदर्शी ढंग से की जाए तथा अभियुक्त के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे कठोरतम दंड दिलाया जाए।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी पति ने पत्नी के किसी अन्य युवक के साथ अनैतिक संबंधों से क्षुब्ध होकर इस नृशंस हत्या को अंजाम दिया है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कुसुम कंडवाल ने कहा कि कथित अनैतिक संबंधों का तर्क देकर किसी की जीवनलीला समाप्त कर देना कानून का घोर उल्लंघन और अमानवीय कृत्य है।

उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि वैवाहिक अथवा पारिवारिक कलह की स्थिति में हिंसा को समाधान मानना एक संकुचित और अपराधी प्रवृत्ति का परिचायक है। क्योंकि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, कानून हाथ में लेने वालों पर होगी कठोरतम कार्रवाई होगी।

उन्होंने अपील करते हुए कहा है कि नागरिक कानून व्यवस्था को बनाए रखने में पूर्ण सहयोग करें और किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लें। हिंसा किसी भी समस्या का तार्किक समाधान नहीं हो सकती और कानून हाथ में लेने वाले व्यक्ति को संवैधानिक तंत्र की कठोरता का सामना करना ही होगा।

​अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि यदि किन्हीं अपरिहार्य कारणों से संबंधों में दरार आ गई है और आपसी सामंजस्य संभव नहीं रह गया है, तो सभ्य समाज में विधिक सहायता लेते हुए सम्मानजनक तरीके से संबंध विच्छेद कर लेना ही एकमात्र उचित मार्ग है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस प्रकार की निर्मम हत्या करने वाले अपराधियों को विधिक प्रक्रिया के तहत ऐसी कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए, जो समाज में एक ‘निवारक’ के रूप में कार्य करे। उन्होंने कहा कि न्याय कठोरता ऐसी होनी चाहिए जिससे समाज में भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसे कदम उठाने से पूर्व सौ बार सोचने पर विवश हो जाए।

राज्य महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है और इस मामले में न्याय मिलने तक निरंतर अनुश्रवण करता रहेगा।


टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य आगाज़

खेल मंत्री रेखा आर्या रहीं मुख्य अतिथि

हरिद्वार। उत्तराखंड टेनिस बॉल क्रिकेट एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित टेनिस बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ प्रदेश की खेल मंत्री के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, कोच, अभिभावक और खेल प्रेमी मौजूद रहे।

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची खेल मंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं प्रतिभाओं को निखारने का मजबूत मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश में खेल संस्कृति को नई दिशा देते हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्म सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था लागू की गई है, साथ ही सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों को 4 प्रतिशत आरक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।

खेल मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़े खेल आयोजन होने हैं, ऐसे में प्रदेश के खिलाड़ियों के पास अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर है। सरकार बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को हर संभव सहयोग दे रही है।

उन्होंने खिलाड़ियों से अनुशासन, समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है।

कार्यक्रम के अंत में खेल मंत्री ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी और सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


अग्निवीर भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए कैंप आयोजित

यूथ फाउंडेशन ने आज लगाए दो कैंप, 41 अभ्यर्थियों का चयन

देहरादून के कुंआवाला में दी जाएगी लिखित परीक्षा की ट्रेनिंग

देहरादून- कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल की प्रदेश के युवाओं को देशसेवा और देश रक्षा के लिए सेना में जाने की मुहिम रंग ला रही है। कर्नल कोठियाल की दूरदर्शिता और महत्वकांक्षी योजना के तहत यूथ फाउंडेशन सेना में अग्निवीर लिखित भर्ती परीक्षा के लिए आज से युवाओं का चयन कर रहा है। चयनित अभ्यर्थियों को यूथ फाउंडेशन निशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है। यह प्रशिक्षण कुंआवाला में अनुभवी प्रशिक्षिकों के द्वारा दिया जाएगा।

यूथ फाउंडेशन ने आज दूधली और मियांवाला में अभ्यर्थियों के लिए चयन कैंप लगाए। प्रशिक्षिक ताजबर सिंह ने बताया कि दूधली में 40 अभ्यर्थियों ने आज परीक्षा दी। इनमें से 20 को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया है जबकि मियांवाला कैंप में 51 अभ्यर्थियों में से 21 का चयन किया गया है।

गौरतलब है कि यूथ फाउंडेशन के माध्यम से अब तक सेना, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस फोर्स में अब तक 15 हजार से भी अधिक युवा भर्ती हो चुके हैं। अग्निवीर योजना के तहत अब तक यूथ फाउंडेशन द्वारा संचालित निशुल्क कैंपों के माध्यम से एक हजार युवा भर्ती हो चुके हैं।
यूथ फाउंडेशन लिखित भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियों के चयन के लिए कल यानी 2 मई को डोईवाला के सरस्वती शिशु मंदिर और माजरी चौक शिव मंदिर तिलवाड़ी में कैंप आयोजित करेगा। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को कुंआवाला कैंप में निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।


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