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द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान से खुले

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द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान से खुले

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को दी शुभकामनाएं

रुद्रप्रयाग। द्वितीय केदार के नाम से विख्यात श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट आज 21 मई गुरुवार पूर्वाह्न 11.30 बजे कर्क लग्न में श्रद्धा, भक्ति उल्लास एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत खोल दिए गए। कपाटोत्सव के अवसर पर मंदिर को फूलों से सजाया गया था, इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

कपाट खुलने के अवसर पर अपने जारी संदेश में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान मदमहेश्वर का आशीर्वाद सभी भक्तों पर बना रहे। वहीं बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि श्री मदमहेश्वर यात्रा हेतु समिति के स्तर पर व्यापक तैयारियां की गयी है।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि भगवान मदमहेश्वर जी की चल विग्रह डोली 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर से प्रथम पड़ाव श्री राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हकहकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची तथा आज प्रातः गौंडार से प्रस्थान कर श्री मदमहेश्वर धाम पहुंची आज निर्धारित तिथि 21 नवंबर पूर्वाह्न समय 11.30 बजे भगवान मदमहेश्वर जी के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल गये।

यह भी ज्ञातव्य है कि 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से समारोह पूर्वक रावल भीमाशंकर लिंग तथा श्री ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली को प्रस्थान कराया था। श्री ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने बताया कि आज 1135 श्रद्धालु श्री मदमहेश्वर धाम दर्शन को पहुंचे है।

कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत पुजारी शिवशंकर लिंग ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं कपाट खुलने की प्रक्रिया संपन्न कराई। इस दौरान भगवान महेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप प्रदान किया इससे पहले भगवान मदमहेश्वर जी की चलविग्रह डोली ने भंडार कक्ष तक अवलोकन को पहुंची ।

इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दानीदाता दिनेश कानोड़िया,डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट,विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार गणेश सेमवाल प्रकाश पंवार सहित स्थानीय हकहकूकधारी, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


बंगाल के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य, राज्य सरकार का बड़ा फैसला

बंगाल में स्कूलों के बाद अब मदरसों में भी अनिवार्य हुआ ‘वंदे मातरम’

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने मदरसों को लेकर एक अहम फैसला लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने नया आदेश जारी करते हुए सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ के गायन को अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त सभी मदरसों पर लागू होगा। सरकार के इस फैसले के बाद राज्यभर के मदरसों में इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

दरअसल, हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग ने भी राज्य के सभी स्कूलों को निर्देश दिया था कि हर दिन कक्षाएं शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम’ का गायन सुनिश्चित किया जाए। विभाग का कहना था कि छात्रों में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इसी क्रम में अब मदरसों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है।

राज्य सरकार का यह निर्णय केंद्र सरकार के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में इसके गायन को प्रोत्साहित करने की बात कही गई थी। हालांकि, नए आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अब तक स्कूलों में गाए जाने वाले राज्य गीत ‘बांग्लार माटी, बांग्लार जल’ का क्या होगा और क्या उसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

इस बीच कुछ स्कूलों और शिक्षण संस्थानों ने व्यावहारिक परेशानियों का मुद्दा भी उठाया है। कई प्रधानाचार्यों का कहना है कि राष्ट्रगान पहले से अनिवार्य है, ऐसे में वंदे मातरम और राज्य गीत को भी शामिल करने से प्रार्थना सभा का समय बढ़ जाएगा और कक्षाओं के संचालन पर असर पड़ सकता है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आदेश केवल ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी किया गया है और राज्य गीत के संबंध में कोई अलग निर्देश नहीं दिए गए हैं। वहीं, कई शिक्षण संस्थानों ने इस फैसले को लागू करना भी शुरू कर दिया है। जादवपुर विद्यापीठ के प्रधानाध्यापक पार्थ प्रतिम बैद्य ने बताया कि उनके स्कूल में पिछले सप्ताह से राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जा रहा है।


मुख्यमंत्री धामी ने पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा की पुण्यतिथि पर किया उन्हें याद

मुख्यमंत्री ने कहा, बहुगुणा का प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और हिमालय की रक्षा के लिए किया गया संघर्ष देश और समाज के लिए प्रेरणास्रोत 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रख्यात पर्यावरणविद्, चिपको आंदोलन के अग्रदूत और पद्म विभूषण से सम्मानित सुंदरलाल बहुगुणा की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा का प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और हिमालय की रक्षा के लिए किया गया आजीवन संघर्ष देश और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सुंदरलाल बहुगुणा ने जनजागरण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया और लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति बहुगुणा के विचार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।


भीषण गर्मी से तप रहा दून, तापमान हुआ 40 के पार

अगले सात दिन राहत के आसार नहीं

मौसम विभाग ने जारी किया लू का अलर्ट

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून भीषण गर्मी की चपेट में है। बुधवार को शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिससे लोगों को तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ा। मोहकमपुर क्षेत्र में अधिकतम तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। मौसम विभाग ने आज भी तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताते हुए लू का अलर्ट जारी किया है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार राज्य के मैदानी इलाकों में गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। देहरादून के अलावा हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल और उत्तरकाशी के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी लू चलने की आशंका है। वहीं पंतनगर में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पर्वतीय क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। मुक्तेश्वर में 29.1 और टिहरी में 29.9 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।

हालांकि, मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। देहरादून जिला प्रशासन ने आपदा परिचालन केंद्र को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों में ओआरएस, आईवी फ्लूड्स और जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मौसम विभाग के सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। आने वाले दिनों में देहरादून का तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रह सकता है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।


पैनेसिया हॉस्पिटल अग्निकांड- स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने जाना मरीजों एवं घायल पुलिसकर्मियों का हाल

संकट की घड़ी में सरकार प्रभावितों के साथ खड़ी- सुबोध उनियाल

देहरादून। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने पैनेसिया हॉस्पिटल में आग लगने की दुखद घटना के उपरांत अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुरक्षित रूप से कैलाश हॉस्पिटल, जोगीवाला शिफ्ट किए जाने के बाद अस्पताल पहुंचकर मरीजों एवं घायल पुलिसकर्मियों का कुशलक्षेम जाना।

उन्होंने चिकित्सकों से उपचाररत मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी लेते हुए सभी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में पुलिस, प्रशासन, फायर सर्विस एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा तत्परता एवं साहस के साथ किया गया राहत एवं बचाव कार्य सराहनीय है।

उन्होंने राहत एवं बचाव अभियान के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावितों के साथ खड़ी है।


उत्तराखंड में हीट वेव से निपटने को स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

जिलों को जारी एडवाइजरी- हीटस्ट्रोक कक्ष, दवाओं की उपलब्धता और रोजाना रिपोर्टिंग अनिवार्य

हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- सचिन कुर्वे

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग भीषण गर्मी और संभावित हीट वेव से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से जारी एडवाइजरी के तहत सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों (HRI) की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस बार सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए समय रहते व्यापक रणनीति लागू कर दी है, ताकि जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह तैयार रहें।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों (HRI) की रोकथाम और प्रबंधन के लिए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मार्च से मई के बीच सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद यह एडवाइजरी और भी अहम हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि समय रहते ठोस कदम उठाकर हीट स्ट्रोक और इससे होने वाली मौतों को न्यूनतम किया जा सके।

अस्पतालों में विशेष इंतजाम

राज्य के जिला और उप-जिला अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कक्षों में मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे IV फ्लूइड और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। “पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें” प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके। इसके अलावा ORS, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जरूरी दवाओं की 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

रोजाना निगरानी और रिपोर्टिंग

हीट वेव के प्रभाव पर नजर रखने के लिए 1 मार्च 2026 से दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। सभी जिला इकाइयों को IHIP प्लेटफॉर्म पर हीट-सम्बंधित मामलों की रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। मरीज-स्तर की जानकारी संकलित करने के साथ-साथ संदिग्ध मौतों की जांच और ऑडिट भी किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि डेटा की गुणवत्ता और समयबद्ध रिपोर्टिंग में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संवेदनशील वर्ग पर खास फोकस

एडवाइजरी में शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक जोखिम वाला वर्ग बताया गया है। इन समूहों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और नियमित रूप से पानी पीने की सलाह दी गई है। साथ ही ठंडे इलाकों से आने वाले लोगों को 10-15 दिन का अनुकूलन समय देने की बात भी कही गई है।

सार्वजनिक आयोजनों के लिए गाइडलाइन

गर्मी के दौरान होने वाले सामूहिक आयोजनों और खेल गतिविधियों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दोपहर के समय बाहरी कार्यक्रमों से बचने और हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। बड़े आयोजनों में चिकित्सा टीमों की तैनाती, ORS और आइस बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

अग्नि सुरक्षा पर भी जोर

बढ़ते तापमान के साथ बिजली के उपकरणों पर लोड बढ़ने की संभावना को देखते हुए अस्पतालों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। ICU सहित सभी संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत लोड ऑडिट, स्मोक डिटेक्टर और फायर फाइटिंग सिस्टम की कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- सचिन कुर्वे

स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य सरकार हीट वेव की चुनौती को लेकर पूरी तरह गंभीर है और सभी जिलों को समय रहते तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। कुर्वे ने स्पष्ट किया कि हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है और सभी जिलों से रोजाना रिपोर्ट मांगी जा रही है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, विशेषकर दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। कुर्वे ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

हीट वेव से निपटने के लिए राज्यभर में माइक्रो-लेवल प्लानिंग- मनुज गोयल

एनएचएम के मिशन निदेशक मनुज गोयल ने बताया कि हीट वेव से निपटने के लिए राज्यभर में माइक्रो-लेवल प्लानिंग की जा रही है। सभी स्वास्थ्य इकाइयों को अलर्ट पर रखा गया है और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि IHIP पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सके। गोयल ने कहा कि जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है और इसके लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग समय रहते सावधानी बरत सकें।


हीट वेव से निपटने को DEOC 24×7 अलर्ट मोड पर, चिकित्सा एवं रेखीय विभागों को व्यापक दिशा-निर्देश जारी

हीट वेव अलर्ट : नागरिकों की सुरक्षा हेतु प्रशासन सक्रिय

मौसम विभाग का अलर्ट: दून और मैदानी क्षेत्रों में भीषण गर्मी के आसार; तापमान 40 डिग्री तक जाने की संभावना

डीएम की आमजन से अपील: भीषण गर्मी और लू में बरतें जरूरी सावधानियां, दोपहर की तेज धूप से बचें

देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर जनपद में लगातार बढ़ते तापमान एवं संभावित लू (हीट वेव) की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूर्ण सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने तथा मैदानी क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी विभागों को समन्वित कार्रवाई करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार देहरादून नगर सहित आसपास के मैदानी क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी रहने तथा जौलीग्रांट एवं डोईवाला क्षेत्रों में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहने की संभावना है। इसके दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, नगर निकाय, शिक्षा, श्रम एवं आपदा प्रबंधन सहित सभी संबंधित विभागों को आवश्यक सतर्कता एवं राहत उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) को 24×7 सक्रिय रखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को सभी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों, ORS, IV Fluids एवं चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। हीट स्ट्रोक एवं डिहाइड्रेशन से प्रभावित मरीजों के उपचार हेतु विशेष चिकित्सा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

नगर निकायों को सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशन एवं प्रमुख चौराहों पर पेयजल, छायादार स्थल एवं वाटर टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अस्थायी शेड एवं विश्राम स्थलों की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

विद्युत विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने तथा पेयजल व्यवस्था प्रभावित न होने देने के निर्देश दिए गए हैं। जल संस्थान एवं पेयजल विभाग को नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने तथा जल संकट वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त टैंकर उपलब्ध कराने को कहा गया है।

निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों एवं बाहरी कार्यस्थलों पर कार्यरत श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य अवधि को प्रातः एवं सायंकालीन समय तक सीमित रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। श्रमिकों हेतु छाया, पेयजल एवं प्राथमिक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

शिक्षा विभाग को मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप विद्यालय संचालन समय में आवश्यक परिवर्तन अथवा अवकाश के संबंध में निर्णय लेने हेतु निर्देशित किया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों में बच्चों के लिए पर्याप्त पेयजल एवं प्राथमिक उपचार व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

जिला प्रशासन द्वारा आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं ग्राम पंचायत स्तर के कार्मिकों के माध्यम से बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों एवं गंभीर रोगियों की नियमित निगरानी किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अतिरिक्त जनसामान्य को लू से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने हेतु सोशल मीडिया, एफएम रेडियो, स्थानीय समाचार पत्र, मोबाइल मैसेज एवं सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से नियमित एडवाइजरी जारी की जाएगी।

पशुपालन विभाग को पशुओं हेतु पेयजल एवं छायादार स्थानों की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को सफाई कर्मियों, होमगार्ड, पुलिसकर्मियों एवं फील्ड स्टाफ के लिए सुरक्षा उपाय एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को समन्वय स्थापित करते हुए सतत निगरानी बनाए रखने तथा किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु पूर्ण तत्परता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


11000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन में फंसा हेलीकॉप्टर, महिला पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

सत्यो-सकलाना के खेतों में कराई सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग, सभी 6 यात्री सकुशल

टिहरी गढ़वाल। चम्बा-आराकोट क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का एक हेलीकॉप्टर 11000 वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गया। हेलीकॉप्टर के पिछले रोटर में हाईटेंशन तार फंसने से वह हवा में बुरी तरह हिचकोले खाने लगा और अनियंत्रित होने लगा। इस दौरान हेलीकॉप्टर में सवार यात्रियों की सांसें थम गईं, लेकिन महिला पायलट की सूझबूझ, साहस और कुशलता से एक बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ धाम से यात्रियों को लेकर देहरादून जा रहा था। हेलीकॉप्टर चम्बा-आराकोट क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा था, तभी अचानक उसका पिछला हिस्सा 11000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के मुताबिक, तार रोटर में फंसते ही हेलीकॉप्टर तेज झटके खाने लगा और कुछ देर तक हवा में असंतुलित स्थिति में रहा। इस भयावह स्थिति में भी महिला पायलट ने धैर्य नहीं खोया और फंसे हुए बिजली के तार के साथ ही हेलीकॉप्टर को नियंत्रित करते हुए सत्यो-सकलाना क्षेत्र के खुले खेतों तक पहुंचाया, जहां सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।

हेलीकॉप्टर का पिछला भाग क्षतिग्रस्त हो गया। बावजूद इसके, हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह यात्री और पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं।

घटना की सूचना मिलते ही टिहरी पुलिस, प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं सुरक्षा कार्य शुरू किया। पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बनाकर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

इस घटना के बाद यात्रियों ने महिला पायलट की बहादुरी और सूझबूझ की जमकर सराहना करते हुए कहा कि उनकी हिम्मत और त्वरित निर्णय ने सभी की जान बचा ली।


देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में लगी भीषण आग, एक बुजुर्ग महिला की मौत

फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू

देहरादून। हरिद्वार रोड स्थित पैनेसिया हॉस्पिटल में बुधवार को अचानक आग लगने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसे में बीरावती नाम की एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में दहशत फैल गई।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार अस्पताल में आग एसी में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। देखते ही देखते धुआं पूरे अस्पताल परिसर में फैल गया, जिससे आईसीयू और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को बाहर निकालने के लिए तत्काल राहत अभियान चलाना पड़ा। उस समय आईसीयू में छह मरीज भर्ती थे। अस्पताल स्टाफ, पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीमों ने मिलकर सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया।

धुएं और आग की चपेट में आने से अस्पताल के कुछ कर्मचारी भी घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

घटना की सूचना पर एसएसपी प्रमोद डोबाल भी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। पुलिस और प्रशासन की टीम आग लगने के कारणों की जांच में जुटी हुई है।


उत्तराखंड में भीषण गर्मी का कहर, दून में 40 डिग्री के करीब पहुंचा तापमान

प्रदेश में फिलहाल नहीं मिलेगी गर्मी से राहत, मौसम विभाग ने जताई तापमान बढ़ने की आशंका

देहरादून। उत्तराखंड में मई महीने की गर्मी लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है। प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में तेज धूप और गर्म हवाओं का असर साफ दिखाई दे रहा है।

राजधानी देहरादून में तापमान इस सीजन के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार को दून का अधिकतम तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब चार डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी 23.1 डिग्री दर्ज किया गया। दिनभर तेज धूप और उमस भरी गर्मी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे मैदानी इलाकों में लू का असर और तेज होने की संभावना है।


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