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कंटेंट क्रिएशन: आज़ादी या एक नया बंधन?

Category Archives: जीवन शैली

कंटेंट क्रिएशन: आज़ादी या एक नया बंधन?

वंशिका

जब से मोबाइल और इंटरनेट हर हाथ में पहुँचा है, तब से ऑनलाइन पैसे कमाने के नए-नए रास्ते खुल गए हैं। आज हर कोई सोशल मीडिया पर सक्रिय है — कोई वीडियो बना रहा है, कोई रील्स डाल रहा है, कोई व्लॉग कर रहा है, तो कोई इंस्टाग्राम पर मोटिवेशनल बातें शेयर कर रहा है।

कंटेंट क्रिएशन एक ऐसा माध्यम बन चुका है, जो हर इंसान को — चाहे वो किसी भी क्षेत्र से हो — अपनी बात कहने और पैसे कमाने का मौका देता है। आज 15–30 सेकेंड के एक मज़ेदार या दिल को छू लेने वाले वीडियो से लोग लाखों व्यूज़ ले रहे हैं और अपनी पहचान बना रहे हैं।

बहुत से लोग अब अपने रेगुलर काम के साथ-साथ कंटेंट बनाना शुरू कर चुके हैं, और कई लोग तो इस पर पूरी तरह निर्भर हो गए हैं। इसने हमें रचनात्मक (क्रिएटिव) बनाया है, यह बात पूरी तरह सही है। लोग अब वीडियो एडिट करना सीख रहे हैं, कैमरे के सामने आत्मविश्वास से बोलना सीख रहे हैं, और अपने स्किल्स को निखार रहे हैं।

लेकिन सवाल ये उठता है — क्या हम इस डिजिटल दुनिया के इतने आदी हो चुके हैं कि अब ये हमें कंट्रोल करने लगी है?

हर दिन हज़ारों लोग नए कंटेंट क्रिएटर्स बन रहे हैं। ऐसे में अपनी एक अलग पहचान बनाए रखना आसान नहीं है। हर कोई कुछ “नया” या “हटके” करने की कोशिश करता है — और इसी दौड़ में कई बार कंटेंट का असली मक़सद खो जाता है।

जो कंटेंट कभी आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम था, वो अब सिर्फ लाइक्स, व्यूज़ और फॉलोअर्स के लिए बनाया जाने लगा है। हम खुद से ये सवाल पूछना ही भूल गए हैं कि —
क्या मैं जो बना रहा हूं, वो सच में मेरे दिल से है, या सिर्फ एल्गोरिदम को खुश करने के लिए?”

कंटेंट क्रिएशन हमें आज़ादी देता है — ये सच है। लेकिन अगर हर दिन हम अपने फ़ोन की स्क्रीन पर वेलिडेशन (मान्यता) ढूंढ रहे हैं, तो शायद हम धीरे-धीरे उसी कंटेंट के गुलाम बनते जा रहे हैं।

ज़रूरत है एक संतुलन (बैलेंस) बनाने की — क्योंकि ये दुनिया जितनी ज़्यादा मौक़े देती है, उतनी ही तेज़ी से खपत (consume) भी करती है।

असली सवाल यही है —
क्या हम कंटेंट बना रहे हैं, या कंटेंट हमें बना रहा है?


देहरादून में क्लब कल्चर का बढ़ना: अच्छा है या बुरा?

प्रियांश कुकरेजा 

देहरादून में क्लब कल्चर तेजी से बढ़ रहा है और यह आज के युवाओं के लिए मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आजकल के युवा पढ़ाई और काम के कारण बहुत तनाव में रहते हैं, ऐसे में क्लबों का होना उनके लिए एक अच्छा विकल्प साबित होता है जहाँ वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर मस्ती कर सकते हैं, नाच-गाना कर सकते हैं और अपने मन को ताज़ा कर सकते हैं।, इसके अलावा, क्लबों की वजह से देहरादून में नए रोजगार के अवसर भी बनते हैं जैसे वेटर, मैनेजर, डीजे, सिक्योरिटी गार्ड्स आदि, जिससे शहर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। क्लबों की मौजूदगी से देहरादून की नाइटलाइफ भी रंगीन होती है, जो पर्यटकों को भी आकर्षित करती है और शहर में घूमने आने वाले लोग भी बढ़ते हैं। हालांकि, क्लब कल्चर के कुछ नुकसान भी हैं, जैसे कि कभी-कभी इसमें शराब और नशे का सेवन युवाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, और क्लब के तेज संगीत से आसपास के लोग शोर से परेशान हो सकते हैं। इसके अलावा, अगर युवा बिना सोचे समझे ज़्यादा समय और पैसे क्लब में लगाते हैं, तो यह उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।” लेकिन मेरी राय में, अगर क्लब और युवा दोनों ही जिम्मेदारी से काम लें, नियमों का पालन करें और सही तरीके से इसका उपयोग करें, तो क्लब कल्चर देहरादून के लिए फायदे का सौदा है। यह न केवल युवाओं को तनाव से राहत देता है, बल्कि यह शहर को आगे बढ़ाने में भी मदद करता है। इसलिए हमें क्लब कल्चर को फायदेमंद नजरिए से देखना चाहिए और इसे अपनी ज़िन्दगी में सही तरीके से अपनाना चाहिए ताकि यह हमारे शहर और युवाओं के लिए एक स्वस्थ और लाभकारी बदलाव साबित हो। कुल मिलाकर,देहरादून में क्लब कल्चर का बढ़ना एक नया बदलाव है, और अगर हम इसे समझदारी और सही तरीके से अपनाएं तो यह युवाओं और शहर के लिए अच्छा साबित हो सकता है।”


खाली पेट पपीता खाना से सेहत के लिए है फायदेमंद

अगर आप अच्छी सेहत चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। पपीता एक ऐसा फल है जो सुबह खाली पेट खाया जाए तो पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है।

पपीते में मौजूद पपेन एंजाइम प्रोटीन पचाने में मदद करता है, जबकि इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों की सफाई कर कब्ज की समस्या दूर करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और ऊर्जा भी देता है।

आयुर्वेदाचार्य अच्युत त्रिपाठी के अनुसार, पपीता न केवल पाचन में सहायक है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है और दिल की बीमारियों से भी बचाता है। यह त्वचा में निखार लाने और शरीर को विटामिन-ए व सी प्रदान करने में भी मददगार है।

हालांकि, जिन लोगों का पेट संवेदनशील हो, उन्हें इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए क्योंकि इससे कुछ मामलों में एसिडिटी हो सकती है।


सही डाइट के बावजूद भी नहीं घट रहा वजन? जानिए वजह

आज की आधुनिक जीवनशैली में वजन कम करना बहुत से लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बन गया है। हम सभी स्वस्थ और फिट रहना चाहते हैं, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने में हमारी ही कुछ गलत आदतें रुकावट बन सकती हैं। ये आदतें न केवल हमारे वजन घटाने के प्रयासों को धीमा करती हैं, बल्कि कभी-कभी उन्हें पूरी तरह से रोक भी देती हैं।

हमारा शरीर एक जटिल मशीन की तरह है, और जब हम इसे सही ईंधन या उचित आराम नहीं देते, तो इसका संतुलन बिगड़ जाता है। कई बार हमारी कुछ गलत आदतें न केवल हमारे मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती हैं, बल्कि हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। यदि आप भी वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं और अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो आपको भी इस लेख को बहुत ध्यान से पढ़ना चाहिए। आइए जानते हैं ये कौन सी आदतें हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है।

अनियमित नींद की आदतें
नींद और वजन का गहरा संबंध है। अनियमित नींद या कम सोना भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन को असंतुलित करता है। इससे भूख बढ़ती है और लोग ज्यादा खाते हैं। नींद की कमी तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को भी बढ़ाती है, जो वजन बढ़ने का बड़ा कारण है। रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें और सोने-जागने का समय निश्चित करें।

अधिक प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन
चिप्स, बर्गर, पिज्जा, और पैकेटबंद स्नैक्स जैसे प्रोसेस्ड फूड्स में कैलोरी, चीनी, और ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है। ये वजन बढ़ाने के साथ-साथ डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ाते हैं। इनके बजाय ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और घर का बना खाना डाइट में शामिल करें। खाने की सामग्री की लेबलिंग पढ़ें और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें।

पर्याप्त पानी न पीना
पानी की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा करती है, जिससे कैलोरी बर्न होने की प्रक्रिया रुकती है। पर्याप्त पानी पीने से भूख नियंत्रित रहती है और शरीर डिटॉक्स होता है। रोजाना 8-10 गिलास पानी पिएं। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना वेट लॉस के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है।

डाइट में फाइबर की कमी
फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे साबुत अनाज, फल, सब्जियां, और दालें, वजन घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। डाइट में फाइबर की कमी से कब्ज और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। इसलिए डाइट में हरी सब्जियां, ओट्स, चिया सीड्स, और सेब जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करें।

(साभार)


खाने के बाद नहाना क्यों है नुकसानदायक? आइये जानते हैं इसके कारण

खाने के बाद तुरंत नहाना, यह आदत भले ही कुछ लोगों को ताजगी देती हो, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है? अक्सर घरों में बड़े-बुजुर्ग खाने के तुरंत बाद नहाने से मना करते हैं, और इसके पीछे कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक कारण है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान में भी खाने के तुरंत बाद नहाने से मना किया जाता है।

जब हम भोजन करते हैं, तो हमारे शरीर का रक्त प्रवाह पाचन क्रिया में मदद करने के लिए पेट और आंतों की ओर बढ़ता है। इस दौरान पाचन सक्रिय होता है, जो भोजन को तोड़ने और पोषक तत्वों को अवशोषित करने के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन, खाने के तुरंत बाद नहाने से शरीर का तापमान बदलता है और रक्त प्रवाह शरीर के बाहरी हिस्सों, जैसे त्वचा और मांसपेशियों, की ओर मुड़ जाता है।

इससे पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे अपच, गैस, पेट फूलना और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह आदत लंबे समय में पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है। ऐसे में अक्सर लोगों के दिमाग में सवाल आता है कि अगर भोजन के बाद नहाना हो तो कम से कम कितने देर का गैप होना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

नहाकर खाने के बीच अंतराल
सबसे पहले ये बात समझना जरूरी है कि खाने और नहाने के बीच टाइम गैप की बात करते हैं तो ये बात पहले नहाने की और उसके बाद खाने की होती है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कम से कम आधे घंटे से एक घंटे का अंतराल रखना चाहिए।

भोजन के बाद नहाने के बीच अंतराल
आयुर्वेद के अनुसार, खाने के बाद शरीर का रक्त संचार पेट की ओर केंद्रित होता है ताकि भोजन पच सके। ठंडे पानी से नहाने पर तापमान कम होता है और रक्त प्रवाह शरीर के बाहरी हिस्सों, जैसे त्वचा और मांसपेशियों, की ओर मुड़ जाता है, जिससे पाचन बाधित होता है। आधुनिक विज्ञान भी बताता है कि तुरंत नहाने से पाचन एंजाइम्स की गतिविधि धीमी पड़ सकती है। इससे पेट में भारीपन, गैस और थकान हो सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खाने के बाद नहाने के लिए कम से कम 2-3 घंटे का अंतराल होना चाहिए। इससे आपकी पाचन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नहाकर भोजन करने के कई फायदे होते हैं, इसलिए कोशिश करें कि नहाने के बाद ही भोजन करें।

(साभार)


सेल्फ-केयर: खुद से जुड़ने की सबसे ज़रूरी आदत

ये कोई ऐशो-आराम नहीं, बल्कि दिमाग, दिल और शरीर के बीच तालमेल की शुरुआत है—क्योंकि जब आप खुद का ख्याल रखते हैं, तभी दूसरों के लिए भी पूरी तरह से साथ दे पाते हैं

प्रियांश कुकरेजा 

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर दूसरों का ख्याल रखते-रखते खुद को भूल जाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि खुद की देखभाल यानी सेल्फ-केयर करना कोई शौक़ नहीं बल्कि ज़रूरी है। सेल्फ-केयर का मतलब है अपने शरीर, मन और दिल का ध्यान रखना—जैसे समय पर सोना, अच्छा खाना, थोड़ी कसरत करना, अपनी भावनाओं को समझना, ज़रूरत पड़ने पर “ना” कहना, और कभी-कभी खुद के लिए थोड़ा समय निकालना।

मेरे नज़रिए से, सेल्फ-केयर का मतलब सिर्फ आराम करना नहीं है, बल्कि खुद को समझना भी है। ये जानना कि हमें क्या चीज़ें थकाती हैं, और क्या हमें ऊर्जा देती हैं। ये वो छोटी-छोटी चीज़ें हो सकती हैं जो हमें खुद से जोड़ती हैं—”जैसे बिना किसी जल्दी के अपनी सुबह की चाय का स्वाद लेना, दिन की शुरुआत कुछ गहरी साँसों के साथ करना, या बस खुद से यह पूछना कि ‘मैं आज कैसा महसूस कर रहा/रही हूँ?’” यह हमें न सिर्फ तनाव से बचाता है बल्कि हमारी सेहत को बेहतर बनाता है, मानसिक रूप से मज़बूत करता है और हमें खुश रहने में मदद करता है। अगर हम खुद को समय नहीं देंगे, तो हम दूसरों का भी ठीक से साथ नहीं दे पाएंगे।

इसलिए हर दिन कुछ मिनट अपने लिए निकालना बहुत ज़रूरी है—चाहे वो एक कप चाय के साथ बैठना हो, थोड़ा सा टहलना, कोई पसंदीदा चीज़ करना या बस चैन से सांस लेना। याद रखें, खुद से प्यार करना और अपनी देखभाल करना पहली ज़िम्मेदारी है, क्योंकि जब आप खुद खुश रहेंगे, तभी दुनिया भी खूबसूरत लगेगी।


पेट में गैस क्यों बनती है? आइये जानते हैं इसके कारण और असरदार समाधान

पेट में गैस बनना एक ऐसी आम समस्या है जिससे शायद ही कोई अछूता हो। यह सिर्फ पेट फूलने या हल्की असहजता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अक्सर तेज दर्द, ऐंठन और सामाजिक असहजता का कारण भी बन जाती है। चाहे मीटिंग हो या कोई पार्टी, गैस की समस्या हमारी एकाग्रता और आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित करती है।

यह परेशानी अक्सर हमारे खानपान की गलत आदतों, अनियमित जीवनशैली या फिर कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का नतीजा होती है। जब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो भोजन के कण पेट में फर्मेंट होने लगते हैं, जिससे गैस का उत्पादन बढ़ जाता है। इस समस्या को समझना और सही उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि आप पेट की असहजता से बचकर एक आरामदायक और स्वस्थ जीवन जी सकें। आइए जानें पेट में गैस बनने के चार आम कारण और राहत के प्रभावी उपाय।

अनुचित खानपान
कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे फलियां, गोभी, ब्रोकली, डेयरी उत्पाद और उच्च फाइबर वाली चीजें, पेट में गैस बना सकती हैं। इनमें मौजूद लैक्टोज या जटिल कार्बोहाइड्रेट्स आंतों में गैस पैदा करते हैं। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड्स भी गैस बढ़ाते हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए इन खाद्य पदार्थों को सीमित मात्रा में खाएं। भोजन को अच्छी तरह चबाएं और हल्का भोजन, जैसे मूंग दाल या खिचड़ी खाएं।

जल्दबाजी में खाना
बहुत से लोग बहुत तेज और कम समय में भोजन करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो खाते समय बात करते हैं। ऐसे में वे भोजन को अच्छे से चबाकर नहीं खा पाते हैं। जिससे पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं और पेट में गैस बनने लगता है। इससे बचने का उपाय बहुत सरल है कि खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं और खाते समय बातचीत कम करें।

पाचन संबंधी विकार
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, लैक्टोज इंटॉलरेंस या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन गैस के प्रमुख कारण हो सकते हैं। ये आंतों में गैस उत्पादन को बढ़ाते हैं और सूजन पैदा करते हैं। बार-बार गैस की शिकायत होने पर ऐसी स्थिति में चिकित्सक से जांच कराएं। लैक्टोज इंटॉलरेंस के लिए डेयरी उत्पादों से परहेज करें और प्रोबायोटिक्स, जैसे सादा दही, अपने आहार में शामिल करें।

तनाव और सैडेंटरी लाइफस्टाइल
तनाव पाचन तंत्र को धीमा करता है, जिससे गैस और सूजन की समस्या बढ़ती है। घंटों एक स्थान पर एक पोजिसन में बैठे रहना भी पाचन को प्रभावित करती है। ऐसे में अपनी दिनचर्या में रोज 20-30 मिनट टहलने और योग करने की आदत को शामिल करें। तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें और मेडिटेशन करें।

पेट में गैस होने पर क्या करें?
पेट में गैस होने पर आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर पी सकते हैं। इससे गैस की समस्या से आपको राहत मिल सकती है। नींबू पानी पाचन को उत्तेजित कर एसिडिटी कम करता है। अदरक चबाना या इसकी चाय पीना भी फायदेमंद है, क्योंकि यह सूजन और गैस कम करता है। अजवाइन का पानी भी आपको गैस से तुरंत आराम देता है।

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पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती क्यों? आइये जानते हैं इसकी असली वजह

क्या कभी ऐसा होता है कि रात में पूरी नींद लेने के बावजूद, आपको दिनभर अजीब सी सुस्ती महसूस होती है या हर समय नींद आती है? यह सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति हो सकती है जिसे हाइपरसोम्निया कहते हैं। इसमें व्यक्ति को सामान्य से कहीं ज्यादा नींद की आवश्यकता होती है, जो उनकी दिनचर्या और काम पर बुरा असर डालती है।

जिन लोगों को पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती महसूस होती है, उन्हें अक्सर लगता है कि वे आलसी हैं या उनकी नींद पूरी नहीं हुई। जबकि, हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं। यह किसी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है। हाइपरसोम्निया कई बार किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। ये स्थितियां शरीर के ऊर्जा स्तर को प्रभावित करती हैं और नींद की गुणवत्ता को बाधित करती हैं, जिससे दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसलिए, अगर आप लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। आइए इस लेख में जानते हैं कि किन बीमारियों का आशंका अधिक होती है।

डायबिटीज
अनियंत्रित रक्त शर्करा हाइपरसोम्निया का कारण बन सकता है। डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में असमर्थ होता है, जिससे थकान और नींद की समस्या होती है। बार-बार प्यास, पेशाब और वजन कम होना इसके अन्य लक्षण हैं।

थायराइड डिसऑर्डर
हाइपोथायरायडिज्म एक बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्रंथि कम सक्रिय होती है, मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है। इससे सुस्ती, थकान और अत्यधिक नींद की समस्या बढ़ जाती है। वजन बढ़ना, ठंड लगना और बाल झड़ना इसके लक्षण हो सकते हैं।

एनीमिया
एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है, जिससे थकान और नींद की समस्या बढ़ जाती है। यह आयरन, विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी से हो सकता है।

स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है, जिससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिलती। इस कारण दिन में अत्यधिक नींद, थकान, खर्राटे, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

(साभार)


पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती क्यों? आइये जानते हैं इसकी असली वजह

क्या कभी ऐसा होता है कि रात में पूरी नींद लेने के बावजूद, आपको दिनभर अजीब सी सुस्ती महसूस होती है या हर समय नींद आती है? यह सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति हो सकती है जिसे हाइपरसोम्निया कहते हैं। इसमें व्यक्ति को सामान्य से कहीं ज्यादा नींद की आवश्यकता होती है, जो उनकी दिनचर्या और काम पर बुरा असर डालती है।

जिन लोगों को पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती महसूस होती है, उन्हें अक्सर लगता है कि वे आलसी हैं या उनकी नींद पूरी नहीं हुई। जबकि, हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं। यह किसी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है। हाइपरसोम्निया कई बार किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। ये स्थितियां शरीर के ऊर्जा स्तर को प्रभावित करती हैं और नींद की गुणवत्ता को बाधित करती हैं, जिससे दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसलिए, अगर आप लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। आइए इस लेख में जानते हैं कि किन बीमारियों का आशंका अधिक होती है।

डायबिटीज
अनियंत्रित रक्त शर्करा हाइपरसोम्निया का कारण बन सकता है। डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में असमर्थ होता है, जिससे थकान और नींद की समस्या होती है। बार-बार प्यास, पेशाब और वजन कम होना इसके अन्य लक्षण हैं।

थायराइड डिसऑर्डर
हाइपोथायरायडिज्म एक बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्रंथि कम सक्रिय होती है, मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है। इससे सुस्ती, थकान और अत्यधिक नींद की समस्या बढ़ जाती है। वजन बढ़ना, ठंड लगना और बाल झड़ना इसके लक्षण हो सकते हैं।

एनीमिया
एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है, जिससे थकान और नींद की समस्या बढ़ जाती है। यह आयरन, विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी से हो सकता है।

स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है, जिससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिलती। इस कारण दिन में अत्यधिक नींद, थकान, खर्राटे, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

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क्या आप भी हैं सनबर्न से परेशान? तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे, मिलेगी राहत

तेज धूप से लोगों का हाल बेहाल हो रहा है। कई जगहों पर पारा 45 डिग्री भी पार कर गया है। धूप और गर्मी से न सिर्फ लोगों की सेहत खराब हो रही है, बल्कि इसकी वजह से अब लोगों की स्किन भी डैमैज हो रही है। दरअसल, सनबर्न का मुख्य कारण है तेज धूप। खासतौर पर अब जब पारा इतना ज्यादा बढ़ता जा रहा है तो हर दूसरा व्यक्ति सनबर्न से परेशान है।

सनबर्न से राहत पाने के लिए वैसे तो तमाम क्रीम बाजार में आती हैं, जो तत्काल राहत दिलाती हैं। पर, आप चाहें तो कुछ घरेलू चीजों के इस्तेमाल से भी सनबर्न की जलन को कम कर सकते हैं। यहां हम आपको इसी बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

एलोवेरा जेल

धूप से जब सनबर्न हो जाता है तो इससे स्किन पर काफी ज्यादा जलन होती हैं। इससे राहत पाने के लिए आप तत्काल ही फ्रेश एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एलोवेरा की पत्ती से ताजा जेल निकालें और उसे स्किन पर अप्लाई करें।
इससे आपको जलन से तत्काल राहत मिलेगी। यदि आपके पास ताजा जेल नहीं है तो आप रेडीमेड मिलने वाले जेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूध

दूध में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो स्किन को न सिर्फ चमकाते हैं, बल्कि इससे स्किन को गर्मी से भी राहत मिलती है। तो यदि आप सनबर्न से परेशान हैं और इससे आपका चेहरा झुलस गया है तो दूध का इस्तेमाल करें।
इसके लिए रूई को ठंडे दूध में भिगोकर चेहरे पर हल्के से लगाएं। कुछ देर चेहरे को ऐसे ही रहने दें और फिर ठंडे पानी से अपने चेहरे को धो लें।

खीरा

इस मौसम में खीरा काफी ज्यादा मिलता है, जिसके इस्तेमाल से भी आप सनबर्न से राहत पा सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले खीरे को काटकर चेहरे पर रखें या फिर खीरे के स्लाइस से चेहरे पर मसाज करें।
आप चाहें तो उसका रस निकालकर चेहरे पर अप्लाई कर सकते हैं। खीरे का रस स्किन को ठंडक पहुंचाता है और सूजन व जलन को कम करता है।

दही

हर भारतीय घर में दही तो रखा ही होता है, तो आप इसके इस्तेमाल से भी चेहरे की जलन से तत्काल राहत पा सकते हैं। इसके लिए चेहरे पर दही अप्लाई करें।
बस ध्यान रखें कि ये दही फ्रिज का रखा होना चाहिए, ताकि दही अपना असर दिखा सके। अब ठंडे दही को अपने चेहरे पर लगाएं और फिर 20 मिनट इसे ऐसे ही लगा रहने दें। 20 मिनट के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।

(साभार)


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