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क्या आप भी अपने बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से पिलाते हैं दूध, अगर हां, तो जान लीजिये इसके दुष्प्रभाव 

Category Archives: फिटनेस

क्या आप भी अपने बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से पिलाते हैं दूध, अगर हां, तो जान लीजिये इसके दुष्प्रभाव 

आजकल अधिकांश घरों में छोटे बच्चों को दूध पिलाने के लिए प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग आम बात हो गई है। यह सुविधा तो देती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके बच्चे की सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है? विशेषज्ञों की मानें तो प्लास्टिक बोतलों का नियमित उपयोग बच्चों के शारीरिक ही नहीं, मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात की चेतावनी दे रहे हैं कि शिशुओं के लिए प्लास्टिक की बोतलें सुरक्षित नहीं हैं। इनसे न केवल शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जमा हो सकता है, बल्कि इसके कारण क्रॉनिक बीमारियों और बौद्धिक विकास में बाधा का भी खतरा रहता है।

हाल ही में एक अध्ययन में यह सामने आया है कि प्लास्टिक बोतलों में मौजूद रसायन बच्चों के आईक्यू स्तर को भी प्रभावित कर सकते हैं। अगर बोतलों की सफाई में लापरवाही बरती जाए, तो यह संक्रमण का कारण बन सकती है, जिससे शिशु की सेहत को अनेक प्रकार के नुकसान हो सकते हैं।

हानिकारक रसायनों की उपस्थिति

स्वीडन की कार्लस्टेड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्ल गुस्ताफ बोर्नहैग बताते हैं कि प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाला रसायन बिस्फेनॉल एफ बच्चों की तंत्रिका प्रणाली के विकास से जुड़े जीन पर नकारात्मक असर डाल सकता है। गर्भावस्था के दौरान इसके संपर्क में आने से बच्चों का बौद्धिक स्तर सात साल की उम्र तक घट सकता है।

माइक्रोप्लास्टिक का खतरा

गर्म पानी या धूप में रखे जाने पर प्लास्टिक की बोतल से रसायन दूध या अन्य पेय में मिल सकते हैं। इससे बच्चों के शरीर में सूक्ष्म प्लास्टिक कण और विषैले रसायन पहुंच सकते हैं, जो सेहत को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

आईक्यू पर प्रभाव की पुष्टि

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में किए गए शोध में 100 शिशुओं पर अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि प्लास्टिक की बोतलों से दूध पीने वाले बच्चों में आगे चलकर आईक्यू स्तर में गिरावट का खतरा अधिक होता है।

संक्रमण का खतरा

इसके अलावा, अगर बोतलों की नियमित और सही तरीके से सफाई नहीं की जाती, तो उनमें हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इससे शिशुओं को ई.कोलाई, साल्मोनेला और स्ट्रेप्टोकोकस जैसे संक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों और बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि शिशुओं को बोतल की बजाय कटोरी और चम्मच से दूध पिलाना अधिक सुरक्षित विकल्प है। केवल अत्यधिक आवश्यकता होने पर ही बोतल का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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क्या आपको भी आता है बहुत ज्यादा गुस्सा, अगर हां, तो जान लीजिये इसके नुकसान

गुस्सा आना एक स्वाभाविक प्रकिया है, ये एक सामान्य मानवीय भावना है। किसी चीज को लेकर निराशा, गलत महसूस करने या स्थितियों से नियंत्रण खोने की प्रतिक्रिया में आपको गुस्सा आता है। इसे तनाव को कम करने के लिए शरीर के मैकेनिज्म का भी एक हिस्सा माना जाता है। हालांकि गुस्सा या कोई भी शारीरिक भावना तभी तक अच्छी है जब तक ये आपके नियंत्रण में रहती है।

क्या आपको बहुत ज्यादा या लगातार गुस्सा आता रहता है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये स्थिति आपकी सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है। बहुत ज्यादा गुस्सा आने की समस्या हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। कुछ स्थितियों में इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

ज्यादा गुस्सा आने का हृदय स्वास्थ्य पर असर

कई शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि ज्यादा गुस्सा आने का आपके हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है।

ब्रिटिश हार्ट एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर आपको अक्सर गुस्सा आता रहता है तो ये ब्लड प्रेशर को काफी बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण हृदय स्वास्थ्य पर दबाव बढ़ता है जिससे हार्ट अटैक आने का खतरा भी बढ़ जाता है।

जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट बताती है कि अक्सर गुस्से में रहने वाले लोगों की रक्त वाहिकाओं में मौजूद कोशिकाएं ठीक से काम करना बंद कर देती हैं जिसके कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज होने का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट अटैक का बढ़ जाता है खतरा

साल 2015 में सर्कुलेशन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि तीव्र स्तर के गुस्से के 2 घंटे के भीतर हार्ट अटैक होने की आशंका लगभग पांच गुना बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि गुस्से की अवस्था में स्ट्रेस हार्मोन (जैसे एड्रेनालिन और कोर्टिसोल) बहुत तेजी से बढ़ते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को असामान्य रूप से बढ़ा देते हैं। इससे हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है।

लगातार गुस्सा करने वाले लोगों की धमनी में सूजन और संकुचन की दिक्कत भी अधिक होती है, जो समय के साथ धमनियों की कठोरता का कारण बनती है, इसके कारण भी हार्ट अटैक हो सकता है।

ज्यादा गुस्सा आने के और भी कई नुकसान

ज्यादा गुस्सा आने की समस्या सिर्फ हृदय स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, इसके और भी कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
बार-बार गुस्सा आने की समस्या मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डालती है, जो डिप्रेशन और एंग्जायटी को बढ़ावा दे सकती है।
गुस्सा आने की स्थिति नींद की समस्या उत्पन्न करने लगती है। इससे आपको एकाग्रता में कमी और निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर हो सकता है।
इस तरह का भावनाएं पाचन समस्याएं जैसे अल्सर, एसिडिटी को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

गुस्से को कंट्रोल कैसे किया जाए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आप दिनचर्या में कुछ प्रकार के बदलाव करके गुस्से को कंट्रोल कर सकते हैं साथ ही इसके कारण होने वाली समस्याओं के खतरे को भी कम कर सकते हैं। गहरी सांस लेने, मेडिटेशन-योग, नियमित व्यायाम की आदत बनाकर आप गुस्से को नियंत्रित कर सकते हैं।

हालांकि अगर इन उपायों से भी आपको लाभ न मिल रहा हो तो किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह ले लें। कई बार डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी स्थितियां भी गुस्से को बढ़ाने वाली हो सकती हैं जिसका समय पर निदान और इलाज किया जाना जरूरी है। डॉक्टर आपको समस्या के आधार पर दवाओं और थेरेपी के माध्यम से गुस्स को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं।

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कहीं आप भी तो नहीं करते खाना खाने के बाद यह गलतियां, अगर हां, तो जान लीजिये इसके दुस्प्रभाव 

भोजन का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। पौष्टिक आहार का सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। यह शरीर को काम करने, बढ़ने और स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। ऐसे में जैसा भोजन आप करते हैं, वैसा ही स्वास्थ्य लाभ मिलता है लेकिन कुछ खराब आदते हैं जो पौष्टिक आहार के सेवन के बाद भी शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। यह आदते खाने के बाद की होती है।

आप चाहे जितने पौष्टिक आहार का सेवन कर लें लेकिन अगर खाने के बाद कुछ आदतों को नहीं बदलेंगे तो पाचन तंत्र पर दुष्प्रभाव होगा। अक्सर हम अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो पेट की गड़बड़ी से लेकर गंभीर बीमारियों तक की वजह बन सकती है। भोजन के बाद सही आदतें अपनाकर आप पाचन तंत्र को मजबूत रख सकते हैं और स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। इस लेख में आपको ऐसी बात गलतियां बताई जा रही हैं जो आमतौर पर लोग खाना खाने के बाद करते हैं, जिसका बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ता है।
आइए जानते हैं कि खाना खाने के तुरंत बाद कौन से पांच काम भूल से भी नहीं करने चाहिए ताकि अगली बार किन 5 गलतियों से बचा जा सके।

तुरंत पानी पीना

कुछ लोग खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीते हैं। इससे पाचन क्रिया बाधित होती है। अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद पानी पिएंगे तो खाना पचने में समय ज्यादा लगता है और एसिडिटी व ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। सही तरीका है कि खाने के लगभग 30 मिनट बाद ही पानी पिएं। अगर बहुत प्यास लगे तो गुनगुना पानी बहुत कम मात्रा में लें।

तुरंत सोना या लेटना

अक्सर लोग खाने के बाद तुरंत आराम करने के लिए लेट जाते हैं। खाने के बाद लेटने से पेट का एसिड भोजन के साथ ऊपर की ओर आ सकता है जिससे एसिड रिफ्लक्स, सीने में जलन और बदहजमी हो सकती है। आप इन समस्याओं से बचना चाहते हैंं तो खाने के बाद कम से कम 30-40 मिनट तक बैठे रहें या हल्की वॉक करें।

धूम्रपान करना

वैसे तो धूम्रपान करना ही सेहत के लिए नुकसानदायक होता है लेकिन भोजन के तुरंत बाद धूम्रपान करना सेहत के लिए ज्यादा घातक हो सकता है। इससे निकोटिन का अवशोषण दोगुना हो जाता है, जिससे आंतों को नुकसान पहुंचता है और पाचन तंत्र कमजोर होता है।धूम्रपान पूरी तरह छोड़ना बेहतर है, लेकिन खासकर भोजन के एक घंटे पहले और बाद में न करें।

व्यायाम

खाने के तुरंत बाद सामान्य गति से टहल सकते हैं लेकिन व्यायाम करने के बारे में भी न सोचें। खाना खाने के बाद व्यायाम करना सेहत के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। इससे उल्टी, मतली, पेट दर्द और पाचन से जुड़ी कई बड़ी समस्याएं झेलनी पड़ सकती है। अगर आप व्यायाम करना ही चाहते हैं तो भोजन के एक से डेढ़ घंटे बाद व्यायाम करें।

नहाना

खाना खाने के तुरंत बाद नहाने से रक्त का प्रवाह बदल सकता है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो सकती है। खाने के बाद पाचन तंत्र सबसे ज्यादा एक्टिव होता है लेकिन आपके नहाने से शरीर का तापमान बदल जाता है और खाना ठीक से पच नहीं पाता है।

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सुबह उठते ही करें ये आसान योगासन, बिना बिस्तर छोड़े पाएँ जबरदस्त फायदे

लोग फिट तो रहना चाहते हैं लेकिन अधिक मेहनत नहीं करना चाहते। योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्राकृतिक उपचार है। सुबह योगासनों का अभ्यास कई स्वास्थ्य लाभ दे सकता है लेकिन सुबह-सुबह उठकर योग करने का मन ही नहीं करता है। लोग आलस या समय की कमी के कारण योग नहीं कर पाते लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ आसन आप बिस्तर पर लेटे-लेटे ही कर सकते हैं।

इन योगासनों के अभ्यास के लिए आपको बिस्तर छोड़ने की भी जरूरत नहीं है। आप नींद खुलने के बाद इन योगासनों को बिस्तर पर आरामदायक स्थिति में लेटकर ही कर सकते हैं। यहां जानिए ऐसे तीन आसान लेकिन असरदार योगासन, जिन्हें आप बिस्तर पर ही कर सकते हैं।

पवनमुक्तासन 

इस आसन का अभ्यास सुबह उठते ही करना चाहिए। अभ्यास के लिए बिस्तर पर पीठ के बल ही लेटे रहें। एक पैर को घुटने से मोड़ें और छाती की ओर लाएं। अब दोनों हाथों से घुटने को पकड़ें और धीरे-धीरे सिर को उठाकर घुटने से मिलाएं। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहें, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आएं। इसी क्रिया को दूसरे पैर से दोहराएं। पवनमुक्तासन का अभ्यास गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। रोज सुबह इसे करने से पाचन बेहतर होता है और पेट हल्का महसूस होता है।

गोमुखासन

गोमुखासन का अभ्यास पवनमुक्तासन के बाद करना चाहिए। इसके अभ्यास के लिए बिस्तर पर आराम से बैठ जाएं। अब एक हाथ को सिर के ऊपर से पीछे की ओर ले जाएं और दूसरा हाथ पीछे से ऊपर की ओर। दोनों हाथों की उंगलियों को एक-दूसरे से पकड़ने की कोशिश करें। कुछ सेकंड तक स्थिति बनाए रखें और फिर हाथ बदल कर दोहराएं। यह आसन कंधों और छाती की मांसपेशियों को खोलता है। इससे तनाव कम करता है और शरीर के ऊपरी हिस्से की स्थिति में सुधार होता है।

शवासन 

योगाभ्यास के आखिर में शवासन का अभ्यास करें। इसके लिए पीठ के बल सीधे लेटकर हाथों को शरीर से थोड़ी दूरी पर रखें और हथेलियां ऊपर की ओर रहें। आंखें बंद करके गहरी सांस लें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें। दो से पांच मिनट तक इसी स्थिति में रहें और केवल सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। इस आसन के अभ्यास से थकान दूर होती है। शरीर को ऊर्जा मिलती है और मानसिक रूप से तरोताजा महसूस होता है।


क्या नींद की कमी से बढ़ सकता है वजन, आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

वजन घटाना आज के समय में ज्यादातर लोगों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बढ़ते वजन-मोटापे की समस्या के साथ कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं।

वजन बढ़ने के लिए लाइफस्टाइल और आहार से संबंधित गड़बड़ियों को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। इसके अलावा जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें भी मोटापा और अधिक वजन का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नींद पूरी न होने और वजन बढ़ने के बीच एक गहरा और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध संबंध है। कई शोधों ने यह साबित किया है कि नींद की कमी से हमारे शरीर के हार्मोनल संतुलन, मेटाबॉलिज्म, भूख पर नियंत्रण और ऊर्जा खर्च पर प्रभाव पड़ता है, जिससे वजन बढ़ने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

नींद और वजन बढ़ने के बीच संबंध

अच्छी नींद और शरीर के वजन पर होने वाले इसके प्रभावों को जानने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं। इसमें से ज्यादातर शोध में पाया गया है कि रात में अच्छी नींद लेने से वजन घटाने में लाभ और नींद की कमी के कारण इसके नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। आइए इस बारे में समझते हैं।

एक शोध के अनुसार नींद की कमी वाले अमेरिकी प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि यह स्थिति औसत बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में वृद्धि का कारण बनती है, जो शरीर के अधिक वजन और मोटापे की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

नींद की कमी बढ़ा सकती है वजन

नींद की कमी और वजन बढ़ने के बीच एक संबंध हमारे शरीर में हार्मोन्स के असंतुलन का भी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नींद की कमी भूख को प्रभावित करती है। न्यूरोट्रांसमीटर घ्रेलिन और लेप्टिन को भूख के लिए जिम्मेदार माना जाता है। घ्रेलिन भूख को बढ़ावा देता है, और लेप्टिन पूर्ण महसूस करने में योगदान देता है।

शरीर स्वाभाविक रूप से पूरे दिन इन न्यूरोट्रांसमीटर को नियंत्रित रखता है। शोध में पाया गया है कि जिन लोगों को नींद न आने की समस्या होती है उनमें घ्रेलिन की अधिकता और लेप्टिन की कमी पाई गई। यह स्थिति आपको अधिक कैलोरी लेने को मजबूर करती है जिससे तेजी से वजन बढ़ने का खतरा रहता है।

अध्ययन में क्या पता चलता है?

यूनिवर्सिटी ऑफ सिकागो (2004) के एक अध्ययन में पाया गया कि जब लोग केवल 5 घंटे सोते हैं, तो उनके घ्रेलिन का स्तर बढ़ता है और लेप्टिन का स्तर घटता है, जिससे भूख बढ़ती है और ज़्यादा खाना खाने की प्रवृत्ति होती है।

नींद की कमी से मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स कमजोर हो जाता है, जो निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होता है। इससे लोग ज्यादा फैट और शुगर वाले खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित होते हैं।

वेट लॉस के लिए करें प्रयास

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप वजन कम करने की कोशिशों में लगे हुए हैं तो जरूरी है कि स्वस्थ आहार के साथ नियमित व्यायाम और रात की अच्छी नींद पर ध्यान दिया जाए। नियमित व्यायाम करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और यह नींद को सुधारने में भी कारगर हो सकती है। व्यायाम नींद और वजन दोनों के लिए फायदेमंद है, सभी लोगों को दिनचर्या में इसे जरूर शामिल करना चाहिए।

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क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए ज्यादा नमक खाना भी है खतरनाक, आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ 

डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। ब्लड शुगर बढ़े रहने वाली इस बीमारी पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका इलाज न हो पाए तो इसके कारण शरीर के कई अंगों पर नकारात्मक असर हो सकता है।

डायबिटीज से बचे रहने या फिर ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने के लिए सभी लोगों को चीनी वाली चीजें कम खाने की सलाह दी जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि शुगर के मरीजों के लिए चीनी अकेला दुश्मन नहीं है, चीनी की ही तरह अगर आप डायबिटीज में ज्यादा नमक खाते हैं तो इसके कारण भी सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है।

डायबिटीज में ज्यादा नमक खाने से क्या दिक्कतें होती हैं, आइए समझते हैं।

डायबिटीज है तो नमक और चीनी दोनों कम खाएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह बहुत ही महत्वपूर्ण और अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली बात है कि केवल चीनी ही नहीं, बल्कि अधिक नमक (सोडियम) का सेवन भी डायबिटीज रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। अधिक नमक से भी इंसुलिन रेसिस्टेंस की समस्या बढ़ सकती है।

जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया कि ज्यादा नमक का सेवन शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस को बढ़ाता है, जिससे शरीर में शुगर लेवल कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। जब हमारे शरीर में इंसुलिन हार्मोन ठीक से काम नहीं करता, तो खून में मौजूद ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता बल्कि खून में ही जमा होने लगता है, जिससे डायबिटीज की दिक्कत बढ़ सकती है।

ब्लड प्रेशर और हार्ट की समस्या

नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या के बारे में हम सभी अक्सर सुनते-पढ़ते रहते हैं। अगर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर एक साथ हो जाए तो इससे हृदय रोग, किडनी फेलियर और स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में हृदय रोग का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में अगर आप अधिक मात्रा में नमक खाना शुरू कर देते हैं तो ये जोखिम और भी बढ़ सकते हैं।

किडनी फेलियर का खतरा

ब्लड शुगर के बढ़ना आपकी किडनी के लिए नुकसानदायक माना जाता रहा है। हाई शुगर की स्थिति किडनी में मौजूद तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाने लगती है। ऐसे में अगर आप अधिक मात्रा में नमक खाते हैं तो ये जोखिम और भी अधिक हो सकता है।

नेशनल किडनी फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा नमक डायबिटिक रोगियों में किडनी को नुकसान पहुंचाता है क्योंकि यह किडनी पर प्रेशर बढ़ाता है और माइक्रोएलब्युमिन्यूरिया का खतरा पैदा करता है, इससे किडनी फेल होने की शुरुआत हो सकती है।

इन सावधानियों का भी रखें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज को कंट्रोल रखने और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं से बचे रहने के लिए खान-पान पर ध्यान देते रहना बहुत जरूरी है। चीनी के साथ-साथ नमक का भी सेवन कम से कम करें। ज्यादा नमक शरीर में इंफ्लेमेशन को बढ़ाने लगता है जो क्रॉनिक बीमारियों का शुरुआती संकेत है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक नमक का सेवन 5 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।

खाने में नमक की मात्रा कम रखने के साथ प्रोसेस्ड फूड (जैसे चिप्स, अचार, सॉसेज, इंस्टेंट नूडल्स) से बचें। लो-सोडियम लेबल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें। चीनी और नमक दोनों के कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं को कम करने के लिए दिनभर में खूब पानी पीते रहना चाहिए।

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मलेरिया के इलाज के बाद भी रहती है कमजोरी और थकान, इन योगासनों का करे अभ्यास, मिलेगा लाभ

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है जो संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छरों के काटने से फैलती है। आमतौर पर मलेरिया वातावरण में नमी या बरसात के मौसम में जमा पानी के कारण हो सकता है। मलेरिया के मच्छर के काटने के कुछ सामान्य लक्षण हैं, जैसे बुखार, सिरदर्द, उल्टी आना, ठंड लगना, थकान होना, चक्कर आना और पेट में दर्द होना।

मलेरिया के इलाज के लिए करीब दो सप्ताह दवाइयां चलती हैं। हालांकि मलेरिया के इलाज के बाद भी कमजोरी और थकान बनी रहती है। मलेरिया के बाद शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। ऐसे में जब दवाइयों से राहत मिल जाए तो धीरे-धीरे शरीर को फिर से ऊर्जा देने के लिए योगासनों का अभ्यास करना बहुत फायदेमंद हो सकता है। इस लेख में कुछ ऐसे योगासन दिए गए हैं जो मलेरिया से ठीक हो रहे मरीजों के लिए बेहद लाभकारी हैं।

वज्रासन

इस आसन के अभ्यास से पाचन ठीक होता है। ये आसन शरीर को आराम देता है और दवाइयों से हुए अपच को दूर करता है। वज्रासन के अभ्यास के लिए घुटनों के बल बैठकर अपने पैरों को पीछे की ओर मोड़ें। पीठ को सीधा रखें और हाथों को घुटनों पर रखें।  गहरी सांस लेते हुए 5-10 मिनट तक इसी स्थिति में बैठें।

भुजंगासन

मलेरिया के मरीजों को थकावट होती है, जिसे दूर करने के लिए भुजंगासन का अभ्यास किया जा सकता है। इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और ऊर्जा मिलती है। भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के नीचे रखें। सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं और नजर सामने रहे। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहने के बाद धीरे से नीचे आएं।

बालासन

बालासन शरीर को विश्राम देता है। तनाव कम करता है और मानसिक ऊर्जा लौटाता है। इसके अभ्यास के लिए घुटनों के बल बैठकर सिर को जमीन पर टिकाएं और हाथों को आगे की ओर फैलाएं।

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शरीर में क्यों होती है कैल्शियम की कमी? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

शरीर को फिट रखने के लिए हड्डियों का मजबूत होना बहुत आवश्यक माना जाता है। हालांकि लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी के कारण कम उम्र में ही हड्डियों से संबंधित समस्याओं का जोखिम तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है, कैल्शियम की कमी को इसका एक कारण माना जा सकता है।

भारत में कैल्शियम की कमी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, अध्ययनों से पता चलता है कि विभिन्न आयु समूहों में लो कैल्शियम की दिक्कत देखी जाती रही है। अध्ययन में पाया गया कि भारत में शहरी क्षेत्र में स्कूल जाने वाले 59.9% बच्चों और किशोरों में कैल्शियम की कमी हो सकती है। कैल्शियम हड्डियों, दांतों, मांसपेशियों, नसों और हृदय के सामान्य कामकाज के लिए बहुत जरूरी खनिज है।

क्यों होती है कैल्शियम की कमी?

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोगों को नियमित रूप से आहार में कैल्शियम युक्त चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैल्शियम हड्डियों-दांतों से संबंधित लाभ के अलावा हृदय की लय और मांसपेशियों के संकुचन को भी नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण है। क्या आप अपने आहार के माध्यम से इस पोषक तत्व की पूर्ति कर पा रहे हैं?

शरीर में अपर्याप्त कैल्शियम हाइपोकैल्सीमिया नामक स्थिति का कारण बन सकती है। इस समस्या में भ्रम, मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ-पैर में सुन्नता और हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है। कैल्शियम की कमी हड्डियों की ताकत को कम कर सकती है और ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उम्र के साथ शरीर में कैल्शियम का अवशोषण घट जाता है, यही कारण है कि 50 की आयु के बाद वाले लोगों में इसकी महत्वपूर्ण कमी देखी जाती है। इसके अलावा महिलाओं में विशेषकर रजोनिवृत्ति के बाद, एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं।

आहार में डेयरी उत्पादों की कमी या किडनी-लिवर की बीमारी वाले लोग भी कैल्शियम की कमी से परेशान देखे जाते हैं। कुछ बातों का ध्यान रखकर आप शरीर में कैल्शियम की पूर्ति कर सकते हैं।

कैल्शियम के लिए इस बात का भी रखें ध्यान

शरीर में कैल्शियम की पूर्ति के लिए विटामिन-डी वाले आहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। असल में कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है। कैल्शियम हड्डियों के निर्माण और इसकी मजबूती को बनाए रखने में मदद करता है, जबकि विटामिन-डी आपके शरीर में कैल्शियम को प्रभावी ढंग से अवशोषित करने में मदद करता है। इसलिए भले ही आप पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम ले रहे हों, लेकिन विटामिन डी की कमी होने पर यह बेकार हो सकता है।

कैल्शियम के लिए क्या खाएं?

सभी मेवों में से बादाम में सबसे अधिक कैल्शियम होता है। केवल 28 ग्राम बादाम से आप कैल्शियम की दैनिक जरूरतों के 6% की पूर्ति कर सकते हैं। हड्डियों को स्वस्थ रखने के साथ दिमाग के लिए भी बादाम लाभकारी है।

दूध, दही और पनीर जैसे उत्पाद कैल्शियम से भरपूर होते हैं और इसके सेवन से शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम प्राप्त हो सकता है।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को रोजाना दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

दूध से न सिर्फ कैल्शियम मिलता है साथ ही यह पूर्ण आहार भी माना जाता है। रोजाना दूध के साथ बादाम खाने से हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने में विशेष लाभ मिल सकता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां सिर्फ आयरन ही नहीं कैल्शियम का भी बेहतर स्रोत हैं। गोभी, पालक और कोलार्ड कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।

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क्या आप भी लेते हैं ज्यादा स्ट्रेस, अगर हां, तो जान लीजिये इसके नुकसान

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, यही कारण है कि मेंटल हेल्थ की समस्याओं के कारण शारीरिक स्वास्थ्य और शारीरिक समस्याओं के कारण मेंटल हेल्थ पर असर हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को स्ट्रेस को कंट्रोल रखने की सलाह देते हैं। अगर आप भी तनाव के शिकार हैं तो समय रहते इसे कंट्रोल करने के उपाय कर लीजिए, ये संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रेस एक शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रिया है जो तब होती है जब आप किसी चुनौतीपूर्ण या खतरनाक स्थिति का सामना करते हैं। यह प्रतिक्रिया शरीर को फाइट मोड में ले जाती है, जहां से कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं और आपको उस समस्या से निपटने में मदद करते हैं।

पर क्या आप जानते हैं कि बहुत अधिक या लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल की अधिकता होती है जिसका संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है।

गड़बड़ तो नहीं रहता है पाचन?

पाचन से संबंधित समस्याओं को आमतौर पर खान-पान और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी की दिक्कत के रूप में जाना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक बने रहने वाली पाचन की दिक्कतें इस बात का भी संकेत हो सकती हैं कि आप स्ट्रेस का शिकार है?

जॉन्स हॉप्किंस की रिपोर्ट के मुताबिक तनाव का पाचन प्रणाली पर सीधा असर पड़ता है। इतना ही नहीं लंबे समय तक बने रहने वाली स्ट्रेस की समस्या के कारण इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) और पेप्टिक अल्सर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अक्सर एसिडिटी-कब्ज, गैस या अपच बनी रहती है और सामान्य दवाओं से लाभ नहीं मिल रहा है तो ये स्ट्रेस का भी संकेत हो सकता है।

हार्ट बीट बढ़ना भी हो सकता है स्ट्रेस का संकेत

स्ट्रेस का आपके हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक तनाव की समस्या हृदय रोगों (जैसे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन तेज़ होना, हार्ट अटैक) का खतरा बढ़ा देती है।

असल में तनाव की स्थिति ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं कोर्टिसोल की अधिक कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाने वाली हो सकती है। ये सभी स्थितियां दिल की बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

क्रॉनिक स्ट्रेस से डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर, और नींद की समस्याएं भी बढ़ जाती है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग अधिक तनाव में रहते हैं उनमें डिप्रेशन होने का जोखिम अधिक रहता है। इससे दिमाग की कार्यक्षमता और याददाश्त की भी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। डिप्रेशन मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या है जिसका शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर होता है।

स्ट्रेस के कारण होने वाली अन्य समस्या

लंबे समय तक बनी रहने वाली स्ट्रेस की समस्या आपको संपूर्ण स्वास्थ्य को कई और प्रकार से भी प्रभावित करने लगती है।
अमेरिकल साइकोलॉजी एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक अगर आप तनाव का शिकार रहते हैं तो ये प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है। इससे संक्रमण, एलर्जी और ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
स्ट्रेस के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने से भूख भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि इससे वजन बढ़ने और मोटापे की भी दिक्कत हो सकती है।

(साभार)


क्या आप भी रात में देर से करते है भोजन? तो हो जाए सावधान, बढ़ सकता है बीमारियों का खतरा 

खान-पान की गड़बड़ी ने कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। भोजन के दो पहलू हैं- आप क्या खाते हैं और कब खाते हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी सेहत चाहते हैं तो हमेशा ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे शरीर के लिए आवश्यक अधिकतर पोषक तत्वों की पूर्ति हो सके। आहार की पौष्टिकता के साथ आप किस समय भोजन करते हैं इसका भी सेहत पर असर होता है।

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ और पाचन क्रिया को बेहतर रखने के लिए भोजन का एक समय निर्धारित करें और रोजाना उसी समय पर ही भोजन करें। रात के भोजन को लेकर और भी सावधानी बरतना जरूरी है। आइए जानते हैं कि रात में खाने का सही समय क्या है? और देर में खाना खाने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

रात में देर से भोजन करने के क्या नुकसान हैं?

हाल ही में किए गए अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में देर से भोजन करने वाले लोगों में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है, इससे मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी तरह एंडोक्राइन सोसाइटी के जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, देर से खाना खाने से वजन और रक्त शर्करा का स्तर बढ़ सकता है।

देर से डिनर और वजन बढ़ने की समस्या

पहले अध्ययन में शोधकर्ताओं ने उन स्थितियों के बारे में जानने की कोशिश की जिनके कारण रात में देर से खाने से मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक फ्रैंक ए जे एल स्कीर कहते हैं,  देर से भोजन करने वाले लोगों में लेप्टिन और ग्रेलिन जैसे भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स पर असर देखा गया।

लेप्टिन हार्मोन जो पेट भरा होने का संकेत देता है, इसकी देर से भोजन करने वाले लोगों में विशेष कमी देखी गई। जो लोग रात 11 बजे के बाद भोजन करते हैं  उनमें कैलोरी बर्न की गति भी कम देखी गई जिसके कारण वजन बढ़ने का खतरा भी अधिक देखा गया।

भोजन करने के समय में बदलाव शरीर के सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर देता है जिसके कारण इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।

डायबिटीज का भी हो सकता है खतरा

दूसरे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि देर से खाना खाने से वजन और रक्त शर्करा का स्तर बढ़ सकता है।

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. जोनाथन सी. जेन कहते हैं अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि देर से खाना खाने वालों में रक्त शर्करा का स्तर अधिक और फैट बर्न की मात्रा कम होती है।  यदि आप अपनी दिनचर्या को सामान्य सर्कैडियन रिदम के साथ लेकर नहीं चलते हैं, तो शरीर में ग्लूकोज का उस तरह से मेटाबॉलिज्म नहीं हो पाता है जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।

देर से डिनर करने से टाइप-2 डायबिटीज और इसके कारण होने वाली जटिलताओं का खतरा भी बढ़ जाता है। रात में सोने से 2-3 घंटे पहले डिनर करने से शरीर, इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम होता है।

अब सवाल उठता है कि फिर डिनर का सही समय क्या है?

अधिकांश विशेषज्ञों और शोध के अनुसार, रात का खाना सोने से कम से कम 2 से 3 घंटे पहले कर लेना चाहिए। अगर आप रात को 10 बजे सोते हैं, तो डिनर 7 से 8 बजे के बीच होना बेहतर माना जाता है। सोने से दो घंटे पहले खाना खाने से शरीर को भोजन को पचाने के लिए समय मिलता है।

(साभार)


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