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क्या खाना खाने के बाद आपका भी फूल जाता है पेट? अगर हां, तो आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण

Category Archives: फिटनेस

क्या खाना खाने के बाद आपका भी फूल जाता है पेट? अगर हां, तो आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण

पाचन स्वास्थ्य को पूरे शरीर का केंद्र माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपका पाचन ठीक है तो ये संकेत है कि आप कई प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित हो सकते हैं। हालांकि जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसका पाचन स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर देखा जा रहा है।

अक्सर गैस-एसिडिटी, हार्ट बर्न या अपच की समस्या बने रहना इस बात का संकेत है कि आपके पेट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसी दिक्कतों का समय रहते डॉक्टर से मिलकर निदान कराना जरूरी है क्योंकि पाचन की समस्याएं कई बार गंभीर बीमारियों का लक्षण भी हो सकती हैं।

क्या खाना खाने के बाद आपका भी पेट फूल जाता है? अगर हां, तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं?

पेट फूलने (ब्लोटिंग) की दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई बार दैनिक जीवन की कुछ आदतें पेट फूलने (ब्लोटिंग) के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं, जिनको बदलने से ही इसमें राहत मिल जाती है। वहीं कुछ मामलों में ये किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।

रात के भोजन के बाद कई लोगों को पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या हो जाती है। लोग इसे आम समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, हालांकि सही जानकारी और आदतों को अपनाकर पेट फूलने की समस्या से बचा जा सकता है।

क्या हो सकती है इसकी वजह?

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, रात के समय भारी-तैलीय और मसालेदार भोजन पचने में ज्यादा समय लेता है, अगर आप इस तरह की चीजें खाते हैं तो ये पाचन के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। इसके कारण पेट में गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। भोजन करते समय जल्दबाजी में खाना खाने से पेट में ज्यादा हवा चली जाती है, इससे भी पेट फूलने की समस्या हो सकती है।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जुगल किशोर कहते हैं, रात का खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबा कर खाएं और भोजन के बाद 10-15 मिनट तक जरूर टहलें। भोजन के बाद थोड़ी देर भी टहलने की आदत बना ली जाए तो इससे पाचन की कई दिक्कतों को कम किया जा सकता है। अपनी डाइट में फाइबर और दही जैसे प्रोबायोटिक फूड शामिल करें, इससे पाचन में सुधार होता है और ब्लोटिंग की दिक्कत भी कम होती है।

इन कारणों पर भी दें ध्यान

पेट फूलने का एक कारण खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना भी है, इसका भी पाचन तंत्र पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे खाना सही से पच नहीं पाता और गैस की समस्या हो जाती है।
अधिक नमक खाना भी शरीर में पानी को रोककर पेट फूलने (ब्लोटिंग) का कारण बन सकता है। इसलिए नमक का कम सेवन करें।
अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है तो रात का खाना पचने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए ऐसे आहार का सेवन करें, जो पचने में आसान हो।
आप दलिया या खिचड़ी का सेवन करें। सोडा और कोल्ड ड्रिंक पेट में गैस बढ़ा सकती है, जिससे ब्लोटिंग होती है। सोने से पहले इनका सेवन बिल्कुल न करें।

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बढ़ती गर्मी के साथ क्यों बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा, आइये जानते हैं इसके कारण और बचाव के उपाय 

अप्रैल के तीसरे हफ्ते में ही पूर्वी भारत के अधिकतर राज्यों में पारा 40 के पार होने लगा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से गर्मी बढ़ती जा रही है और मौसम वैज्ञानिकों का जो पूर्वानुमान है, उसे ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को अभी से अलर्ट हो जाने की जरूरत है।

40 से ऊपर जाता तापमान हमारे शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है। बढ़ती गर्मी के साथ शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और इसके कारण होने वाली समस्याएं तो बढ़ ही जाती है, साथ ही इस तरह का मौसम पहले से ही ब्लड प्रेशर-शुगर के मरीजों के लिए और भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।

डॉक्टर्स कहते हैं, बढ़ती गर्मी के साथ डायबिटीज के मरीजों की दिक्कतें भी बढ़ने लगती हैं, आपको बार-बार हाई शुगर की समस्या हो सकती है इसलिए इस मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

अब सवाल ये है कि गर्मियों में ब्लड शुगर क्यों बढ़ने लगता है और इसे कंट्रोल में रखने के लिए क्या उपाय करने जरूरी हैं?

डिहाइड्रेशन और हाई शुगर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ती गर्मी का हमारी सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर होता है, यही वजह है कि पहले से ही क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज-ब्लड प्रेशर के शिकार लोगों को इस मौसम में अलर्ट रहना चाहिए।

गर्मी के कारण निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का जोखिम बढ़ जाता है जो ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है। बढ़ता तापमान इंसुलिन के अवशोषण और इसकी क्रियाशीलता को भी प्रभावित कर देती है।

डॉक्टर बताते हैं कि उच्च रक्त शर्करा के कारण बार-बार पेशाब आता है जिससे निर्जलीकरण होने का जोखिम अधिक हो सकता है। गर्मी के दिनों में शुगर के मरीजों की समस्या बढ़ने के लिए इसे प्रमुख कारण माना जाता है।

डायबिटीज की बढ़ जाती है दिक्कतें

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए) की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड शुगर लो या हाई होना दोनों ही स्थितियों में आपको पसीना अधिक आता है। जिन लोगों का ब्लड शुगर लगातार उच्च बना रहता है, उनके लिए पसीना अधिक आना तंत्रिका क्षति से संबंधित समस्याओं को भी बढ़ाने वाला हो सकता है।

मधुमेह से पीड़ित लगभग आधे लोगों को किसी न किसी रूप में तंत्रिका क्षति का अनुभव होता है। ये आंखों, हृदय से लेकर डायबिटिक फुट जैसी समस्याओं को भी बढ़ाने वाली स्थिति हो सकती है। यही कारण है कि डायबिटीज वाले सभी रोगियों को गर्मी के दिनों में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

गर्मियों में शुगर बढ़ने के ये भी हो सकते हैं कारण
गर्मियों में लोग अक्सर बाहर कम निकलते हैं, जिससे व्यायाम या फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है। शारीरिक गतिविधि में कमी ब्लड शुगर कंट्रोल में अहम भूमिका निभाती है।
गर्मी के कारण तनाव का स्तर बढ़ जाता है, जो शरीर में कोर्टिसोल को बढ़ाने लगती है। हाई कोर्टिसोल के कारण भी ब्लड शुगर बढ़ने का जोखिम रहता है।
गर्मियों में लोग अक्सर शुगर वाले कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और आइसक्रीम का सेवन ज्यादा करते हैं जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं।

गर्मियों में ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्मियों में शुगर को कंट्रोल रखने के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं।
रोजाना कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
सुबह या शाम को जब तापमान कम हो, उस समय वॉक या योग करें।
नींबू पानी (बिना चीनी), नारियल पानी, छाछ आदि का सेवन करें। मीठे ड्रिंक्स से बचें।
गर्मियों में ब्लड शुगर को हफ्ते में कम से कम 3-4 बार मॉनिटर करें, खासकर अगर आप इंसुलिन या दवाइयों पर हैं।
नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। अगर शुगर बढ़ा हुआ रहता है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ती जा रही है फैटी लिवर की समस्या, आइये जानते हैं इसके कारण और बचाव के उपाय 

लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी ने कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। इसका संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिवर-किडनी सहित कई अंगों की बढ़ती बीमारियों के लिए भी इसे एक कारण माना जा सकता है।

लिवर की बढ़ती बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते हैं। लिवर से संबंधित समस्याओं पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। लिवर की बढ़ती बीमारियों के बारे में लोगों को अलर्ट करने और इससे बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है।

डॉक्टर कहते हैं, युवाओं में फैटी लिवर की दिक्कत तेजी से बढ़ती जा रही है। फैटी लिवर (हेपेटिक स्टीटोसिस) होने पर लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है। सही इलाज न मिलने पर यह बीमारी फाइब्रोसिस, सिरोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर का रूप ले लेती है।

इसके गंभीर मामलों में लिवर सामान्य काम करना बंद कर देता है, जिसके बाद लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है। इस बीमारी का कोई सटीक उपचार नहीं हैं, लेकिन जीवनशैली और खानपान में कुछ बदलाव करके इसके नुकसान को रोकने या ठीक करने में मदद मिल सकती है।

क्यों बढ़ती जा रही है लिवर की ये समस्या

अल्कोहल के अत्यधिक सेवन, मोटापे, हाई कोलेस्ट्रॉल और टाइप-2 डायबिटीज की वजह से फैटी लिवर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसके अलावा अधिक मात्रा में तेल और वसा युक्त भोजन करने, शरीर का वजन अधिक होने, इंसुलिन प्रतिरोध होने पर, रक्त में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का उच्च स्तर, तेजी से वजन कम होने से भी फैटी लिवर हो सकता है।

कहीं आपको भी तो नहीं हो रही हैं ये दिक्कतें

फैटी लिवर होने पर पेट के ऊपरी दाहिने भाग में हल्का दर्द या बेचैनी महसूस हो सकती है। इसके अलावा पेट में भारीपन और जल्दी थकान एवं कमजोरी महसूस करना, भूख न लगना, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, वजन कम होना, पीलिया, पेट, पैरों और पंजों में सूजन दिखाई दे सकती है। यदि आप इन लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं तो चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

फैटी लिवर से बचने के लिए आप फल, सब्जियां, साबुत अनाज, प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करें। मीठे पेय पदार्थों, मिठाइयों और उच्च ट्रांस वसा वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों, जैसे- फलियां, और साबुत अनाज लिवर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा एवोकाडो, नट्स, बीज को आहार में शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। अधिक से अधिक ताजा जूस, जैसे- नारियल पानी या नींबू पानी पीएं।

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए इन बातों पर भी दें ध्यान

तेजी से वजन घटाने से फैटी लिवर की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए आहार और व्यायाम से प्रति सप्ताह 1-2 पाउंड वजन धीरे-धीरे और स्थायी रूप से घटाने का लक्ष्य रखें। शरीर के वजन में 5-10 प्रतिशत की कमी भी लिवर के स्वास्थ्य में काफी सुधार कर सकती है। इसलिए धीरे-धीरे वजन घटाने के तरीकों को अपनाएं। नियमित व्यायाम, जैसे-तेज चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जरूर करें।
अल्कोहल का सेवन न करें। दवाओं का इस्तेमाल निर्देशानुसार करें और उन दवाओं से बचें, जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
यदि आपको मधुमेह है तो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखें।
कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने के लिए आहार, व्यायाम और यदि आवश्यक हो तो दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह के बाद करें।
समय-समय पर रक्त परीक्षण से लिवर एंजाइम के स्तर और उसके स्वास्थ्य पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

कम उम्र में ही बढ़ रहा जोखिम

खासकर शहरी क्षेत्रों में। युवाओं में इसके प्रसार के लिए अक्सर खराब आहार, गतिहीन जीवनशैली, मोटापा और आनुवंशिक कारकों के संयोजन को जिम्मेदार ठहराया जाता है। जब लिवर पर अतिरिक्त वसा का बोझ बढ़ जाता है तो रक्त से विषाक्त पदार्थों को छानने और पोषक तत्वों को संसाधित करने की क्षमता कम हो जाती है। फैटी लिवर से रोगी को दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है।

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डायबिटीज को करना चाहते हैं कंट्रोल, तो इन दो प्रकार के आटे को करें अपने आहार में शामिल, मिलेगा लाभ 

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार पाए जा रहे हैं। लाइफस्टाल और खान-पान में गड़बड़ी के कारण होने वाली इस बीमारी पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज से बचे रहना है या फिर इसे कंट्रोल में रखना है तो सबसे पहले अपने आहार में सुधार कर लें। खाने में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स, लो कैलोरी और हाई फाइबर वाली चीजों को अधिक मात्रा में शामिल करें।

एक्सपर्ट्स कहते हैं, डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए आपको आटे में भी बदलाव करना चाहिए। अध्ययनों में दो प्रकार के आटे को डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में लाभकारी प्रभावों वाला पाया गया है।

सोयाबीन के आटे को आहार में करें शामिल

शोध से पता चलता है कि मधुमेह में सोयाबीन का आटा खाना आपके लिए लाभप्रद हो सकता है। सोयाबीन लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होने के साथ फाइबर और प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत है जिससे शरीर में इंसुलिन के स्तर को बेहतर रखने में मदद मिलती है।

सोयाबीन के आटे में सोडियम, पोटेशियम, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को पोषण देते हैं और टूटने के खतरे को कम करते हैं। इस आटे के सेवन से मांसपेशियों में होने वाले दर्द में भी काफी राहत मिलती है। अगर आप लंबे समय से अपने मोटापे को कम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं तो डाइट में सोयाबीन के आटे से बनी रोटी को शामिल कर सकते हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस आटे से बनी रोटी के सेवन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आप अतिरिक्त खाने से बच जाते हैं। जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है, इससे डायबिटीज भी कंट्रोल में आने लगती है। बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी इसके लाभ देखे गए हैं, जिससे हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक का खतरा भी कम हो सकता है।

आहार विशेषज्ञ नेहा पठानिया कहती हैं, सोयाबीन के आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी कम होती है। मधुमेह के मरीजों के लिए इस आटे से बनी रोटी काफी फायदेमंद होती है। हालांकि अगर आपको कोई बीमारी या एलर्जी की समस्या है, तो आहार विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही सोयाबीन आटे का सेवन करें। इसे गेहूं के आटे में मिलाकर इसकी रोटियां बनाकर भी खाई जा सकती है।

डायबिटीज में फायदेमंद है कटहल का आटा

सोयाबीन की ही तरह हरे कटहल के आटे को भी अध्ययनों में डायबिटीज के मरीजों लिए फायदेमंद पाया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि हरे कटहल के आटे का इस्तेमाल करने से टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों को काफी लाभ मिल सकता है।

कटहल का आटा मधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के स्तर को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) को नियंत्रित करने में काफी कारगर गया था। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना, मधुमेह का संकेत माना जाता है।

मरीजों पर देखे गए अच्छे परिणाम

शोधकर्ताओं ने हरे कटहल के आटे के प्रभाव को जानने के लिए 12 सप्ताह तक 40 प्रतिभागियों (24 पुरुषों और 16 महिलाओं) पर अध्ययन किया। प्रतिभागियों को दैनिक भोजन के साथ हरे कटहल के आटे से तैयार चीजें खाने को दी गईं।

इस अध्ययन के परिणाम को अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में रखा गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि हरे कटहल के आटे के नियमित सेवन से टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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गर्मी के मौसम में लू से बचे रहने के लिए रोज कितना पानी पीना चाहिए?, आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ 

देशभर में पिछले कुछ हफ्तों से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। अप्रैल के दूसरे हफ्ते में ही पारा 40 को पार करने लगा है। शुक्रवार (11 अप्रैल) को तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमानों के मुताबिक इस बार की गर्मी पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड्स तोड़ सकती है।

पहले ही इस साल की फरवरी 125 साल में तीसरी सबसे गर्म फरवरी रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है अभी से ही गर्मी से बचने रहने के उपाय शुरू कर दें, विशेषकर बच्चों-बुजुर्गों की सेहत के लिए समस्याकारक हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्मी के दिनों में हीटस्ट्रोक होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इससे बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है धूप के संपर्क में आने से बचना और दिनभर में खूब पानी पीते रहना। इन दिनों लू से बचे रहने के लिए रोज कितना पानी पीना चाहिए? अगर आपके मन में भी ये सवाल है तो आइए इसका जवाब जान लेते हैं?

गर्मियों में तरल पदार्थों का करें अधिक सेवन

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लू से बचने और डिहाइड्रेशन के खतरे को कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। गर्मियों में शरीर से पसीने के रूप में बहुत सारा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए सभी लोगों को भरपूर मात्रा में पानी पीते रहने की सलाह दी जाती है।

गर्मियों में बढ़ जाता है डिहाइड्रेशन का खतरा

गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए आपको अधिक पसीना आता है और पसीने के माध्यम से शरीर से पानी के साथ सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकल जाते हैं। जो लोग गर्म वातावरण में या बाहर काम करते हैं जैसे मजदूर, किसान, पुलिस आदि उन्हें डिहाइड्रेशन को खतरा और अधिक होता है।

यही कारण है कि गर्मी के दिनों में तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने की सलाह दी जाती है।

शरीर को रोज कितने पानी की जरूरत होती है?

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग और मेडिसिन की रिपोर्ट्स के अनुसार शरीर को स्वस्थ रखने और धूप-लू से बचे रहने के लिए पुरुषों को रोजाना लगभग 3.7 लीटर तरल पदार्थ की जरूरत होती है।
महिलाओं को लगभग 2.7 लीटर तरल पदार्थ पीने की सलाह दी जाती रही है। इसमें पानी और अन्य तरल पेय शामिल होते हैं।
हालांकि सभी लोगों को कम से कम 2 से 2.5 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
गर्मियों में चूंकि शरीर से अत्यधिक पानी निकल जाता है इसलिए सभी लोगों को आधे से एक लीटर अधिक पानी पीने की सलाह दी जाती है।

इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति पर भी दें ध्यान

दिन में 8–10 गिलास पानी जरूर पिएं।
नींबू पानी में थोड़ा नमक और चीनी डालकर पीने से शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है।
नारियल पानी पीना इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति के लिए सबसे अच्छा तरीका है।
घर का बना छाछ या लस्सी पिएं।

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मधुमेह को बढ़ने से रोकने के लिए शुरू करें ग्रीन-टी, होगा काफी लाभकारी

मधुमेह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार पाए जा रहे हैं। इसे कंट्रोल में रखने के लिए लाइफस्टाइल और आहार दोनों में सुधार करना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 55 से कम होता है। इन चीजों के खाने से तेजी से शुगर बढ़ने का खतरा नहीं रहता है।

कुछ अध्ययन बताते हैं कि शुगर को बढ़ने से रोकने के लिए नियमित रूप से ग्रीन-टी पीने की आदत बनाना भी आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकता है।

ग्रीन-टी के चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए दुनियाभर में इसकी मांग काफी तेजी से बढ़ी है। इसमें प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिन्हें कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को कम करने वाला पाया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं इसका सेवन शुगर के मरीजों के लिए भी काफी लाभकारी हो सकता है।

ग्रीन-टी और इसके लाभ

ग्रीन-टी सिर्फ एक ताजगी देने वाला पेय पदार्थ नहीं है, ये आपको बीमारियों से बचाए रखने में भी सहायक है।शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीन-टी ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने के साथ समग्र स्वास्थ्य को बेहतर  बनाए रखने के लिए एक बेहतर पेय हो सकती है।

ग्रीन टी में कैटेचिन नामक एक तत्व होता है जिसे इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने के लिए फायदेमंद माना जाता है। कोशिकाओं की ग्लूकोज को अवशोषित करने की क्षमता में सुधार करके ब्लड शुगर को प्रभावी ढंग से कंट्रोल करने में इससे आप लाभ पा सकते हैं।

डायबिटीज में ग्रीन-टी के लाभ

शोध से पता चलता है कि मेडिटेरेनियन डाइट प्लान के हिस्से के रूप में ग्रीन-टी को शामिल करना टाइप-2 डायबिटीज को रोकने में सहायक हो सकता है। जिन लोगों ने नियमित रूप से इसके सेवन की आदत बनाई उनमें डायबिटीज विकसित होने का जोखिम भी कम देखा गया।

शोध में विशेषज्ञों ने पाया कि ग्रीन-टी इंसुलिन की क्रियाशीलता को बढ़ाने में मदद करती है, साथ ही इंसुलिन प्रतिरोध को कम करती है।

कुछ अध्ययनों के अनुसार, जो लोग प्रतिदिन दो से तीन कप ग्रीन टी पीते हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने का जोखिम 19% तक कम हो सकता है। इस पेय पदार्थ के नियमित सेवन से उपवास के दौरान रक्त शर्करा का स्तर कम होता है जिससे डायबिटीज के कारण होने वाली अन्य समस्याओं जैसे आंखों की दिक्कत, हार्ट की समस्या और तंत्रिकाओं की दिक्कतों से बचा जा सकता है।

 मधुमेह प्रबंधन में वजन को नियंत्रित रखने की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्रीन-टी मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वेट लॉस करने में भी आपके लिए सहायक है।

कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी रहता है कंट्रोल

डायबिटीज के मरीजों में हृदय रोगों का खतरा भी अधिक होता है। अध्ययनों में पाया गया कि ग्रीन-टी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने और रक्तचाप को संतुलित करने में भी मदद करता है। शोध बताते हैं कि यह बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कम करके गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में भी मददगार पेय है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

एक अध्ययन के अनुसार, ग्रीन-टी पीने से हृदय रोग के जोखिम को 31% तक कम किया जा सकता है। हालांकि, ग्रीन-टी से हृदय स्वास्थ्य को होने वाले फायदों को जानने के लिए अभी और नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है।

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क्या आप भी हैं पीठ के दर्द से परेशान, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, मिलेगी राहत 

कभी न कभी हर किसी को पीठ में बहुत ज्यादा दर्द होता है। कुछ लोगों के लिए पीठ में दर्द की समस्या आम बात है तो कुछ लोगों को थकान, अधिक मेहनत वाले काम या अन्य किसी कारण से अचानक पीठ में दर्द होने लगता है। यह एक आम समस्या है जो रोजमर्रा के कामों को भी मुश्लिक बना देती है। पीठ में दर्द खराब मुद्रा के कारण, लंबे समय तक बैठने या मांसपेशियों में खिंचाव के कारण हो सकता है। दर्द को नजरअंदाज करने से ये बढ़ सकता है। कार्य में समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए जल्दी से जल्दी राहत पानी जरूरी होता है।

कुछ योगासनों के अभ्यास से आपकी मांसपेशियों में खिंचाव आता है। योग मांसपेशियों को मजबूत बनाकर, लचीलेपन में सुधार करके और बेहतर मुद्रा को बढ़ावा देकर पीठ दर्द को कम करने में मदद करते हैं। यहां कुछ प्रभावी योगासन बताए जा रहे हैं जो पीठ के दर्द को जल्दी कम करने और राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं।

बालासन

यह योग मुद्रा पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और रीढ़ को धीरे से खींचती है, तनाव से राहत देती है और लचीलेपन में सुधार करती है। यह शरीर को आराम देने के साथ तनाव को कम करती है जो पीठ दर्द को कम करने में सहायक है। इसके अभ्यास के लिए घुटनों के बल बैठकर सांस छोड़ते हुए आगे झुकें। माथा जमीन पर टिकाएं और इस दौरान हाथों को आगे या पीछे रख सकते हैं। कुछ देर इसी स्थिति में रहें।

कैट काउ पोज

इस आसन को मार्जरी आसन कहते हैं। इसके अभ्यास के लिए फर्श पर दोनों घुटनों और दोनों हाथों को टेक कर बिल्ली जैसी मुद्रा बनाएं। जांघों को ऊपर की ओर सीधा करके पैर के घुटनों पर 90 डिग्री का कोण बनाएं। अब लंबी सांस लें और सिर को पीछे की ओर झुकाते हुए टेलबोन को ऊपर उठाएं। फिर सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे की ओर झुकाएं और ठुड्डी को छाती से लगाने का प्रयास करें। इस प्रक्रिया को दोहराएं।

भुजंगासन

कमर दर्द और पीठ दर्द के लिए सबसे लोकप्रिय आसनों में से एक भुजंगासन है। भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के नीचे रखें। सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं और नजर सामने रहे। कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहने के बाद धीरे से नीचे आएं।

सेतुबंधासन

सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए अपने घुटनों को मोड़कर और पैरों को कूल्हे की चौड़ाई से अलग करके अपनी पीठ के बल लेट जाएं। अब पैरों को जमीन पर दबाएं और अपने कूल्हों को छत की ओर उठाएं। 20-30 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें।

(साभार)


क्या आप भी पीते हैं जरूरत से ज्यादा ठंडा या फ्रिज का पानी, तो जान लीजिये इसके नुकसान 

गर्मी के मौसम में ठंडा पानी पीना राहत देने वाला लगता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा ठंडा या फ्रिज का पानी पीना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि ठंडा पानी कब और कैसे पीना चाहिए।

ठंडा पानी तुरंत राहत देता है, लेकिन इसका अधिक सेवन या गलत समय पर सेवन आपकी सेहत के लिए खतरे का कारण बन सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए मटके या सामान्य तापमान का पानी पीना सबसे उपयुक्त होता है। आइए कब और किसे फ्रिज का ठंडा पानी पीने से परहेज करना चाहिए और जरूरत से ज्यादा ठंडा पानी पीने से कौन सी बीमारियां हो सकती हैं, साथ ही फ्रिज का पानी पीने के क्या नुकसान हो सकते हैं।

ठंडा पानी कब नहीं पीना चाहिए?

अगर आप को ठंडा पानी पीने के इच्छा है तो भी कुछ खास मौकों पर कभी भी ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी पीने का एक सही समय होता है। खाने के तुरंत बाद भूल से भी ठंडा पानी न पीएं। क्योंकि ठंडा पानी पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। इससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

व्यायाम या वर्कआउट के तुरंत बाद फ्रिज का पानी पीना नुकसानदायक हो सकता है। वर्कआउट के दौरान शरीर गर्म होता है और ठंडा पानी अचानक पीने से झटका लग सकता है। इससे मांसपेशियों में अकड़न और थकान बढ़ सकती है। सर्दी-जुकाम या बुखार में ठंडा पानी पीने से स्थिति और बिगड़ सकती है और गले की सूजन बढ़ सकती है। इसके अलावा सोने से ठीक पहले ठंडा पानी पीने से पाचन पर असर पड़ सकता है और नींद में खलल पड़ सकती है।

फ्रिज का पानी पीने से कौन सी बीमारी हो सकती है?

अक्सर बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि फ्रिज का ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए बल्कि ताजा और मिट्टी के मटके के भरा ठंडा पानी पीना चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी नुकसानदायक हो सकता है। इससे स्वास्थ्य पर कई दुष्प्रभाव पड़ते हैं और ये कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

गला खराब होना या टॉन्सिल की शिकायत
साइनस की समस्या बढ़ना
पाचन तंत्र कमजोर होना
जोड़ों में दर्द या गठिया की परेशानी
सिरदर्द या माइग्रेन बढ़ना
ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट

किन लोगों को फ्रिज का पानी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए?

कुछ लोगों को स्वास्थ्य विशेषज्ञ फ्रिज का पानी पीने से बिल्कुल मना करते हैं। इसमें साइनस, अस्थमा या श्वसन रोगों से ग्रसित लोग शामिल हैं। साथ ही जिनका अक्सर गला खराब रहता है, बुजुर्ग या जिनके जोड़ों में दर्द की शिकायत रहती हैं, उन्हें भी फ्रिज के पानी से परहेज करा चाहिए। पाचन संबंधी परेशानी हो या डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को भी इससे बचना चाहिए।

ज्यादा ठंडा पानी पीने के नुकसान

ज्यादा ठंडा पानी पीने से शरीर की प्राकृतिक तापमान प्रणाली प्रभावित होती है। इससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। ठंडे पानी के कारण ब्लड वेसेल्स सिकुड़ने लगते हैं, जिससे शरीर में ब्लड फ्लो धीमा हो सकता है। डाइजेस्टिव एंजाइम की क्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं और मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है, जिससे वजन बढ़ सकता है।

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क्या आप भी अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर सुनते हैं गाने, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकते हैं बहरे 

क्या आप भी फोन पर घंटों बात करते रहते हैं? अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर गाने सुनते रहते हैं? अगर हां, तो तुरंत इन आदतों में सुधार कर लें वरना बहुत जल्दी आपके सुनने की शक्ति छिन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि कम उम्र के लोगों में कान की बीमारी या कम सुनाई देने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। तेज आवाज में गाना सुनने और घंटों फोन कॉल पर बात करने की आदत युवाओं को बहरा बना सकती है।

100 करोड़ से अधिक लोगों में बहरेपन का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी पहले ही अलर्ट कर चुका है कि 12 से 35 वर्ष की आयु के एक बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों में सुनने की क्षमता कम होने या बहरेपन का जोखिम हो सकता है। इसके लिए मुख्यरूप से लंबे समय तक ईयरबड्स से तेज आवाज में संगीत सुनने और शोरगुल वाली जगहों पर रहना एक बड़ा कारण माना जा रहा है। तेज आवाज वाले ये उपकरण आंतरिक कान को क्षति पहुंचाते हैं। सभी लोगों को इन उपकरणों का इस्तेमाल बड़ी सावधानी से करना चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

दिल्ली-एनसीआर के एक अस्पताल से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक 18 से 30 वर्ष की उम्र करीब 1400 मरीज हर महीने अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इन्हें कम सुनाई देने, कानों में सीटी की आवाज आने जैसी दिक्कतें होती हैं।

ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स ) के ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हुकम सिंह बताते हैं, ईयरफोन, हेडफोन के अलावा अन्य गाने सुनने के उपकरणों से तेज ध्वनि में संगीत कानों पर नकारात्मक असर डाल रही है। फोन पर लगातार बात करने की आदत भी खतरनाक है। इन आदतों के कारण लोगों को कान बहने, कम सुनाई देने और अजीब तरीके की आवाजें गूंजने की समस्या हो रही है।

तेज आवाज कानों के लिए ठीक नहीं

अध्ययनों से पता चलता है कि ईयरबड्स या हेडफोन के साथ पर्सनल म्यूजिक प्लेयर का इस्तेमाल करने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोग लगातार 85 (डेसिबल) से ज्यादा आवाज में इसे प्रयोग में लाते हैं। इतनी तीव्रता वाली आवाज को कानों के आंतरिक हिस्से के लिए काफी हानिकारक पाया गया है। युवा आबादी में फोन पर बहुत बात करना या ईयरबड्स जैसे उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल 40 की उम्र तक सुनने की क्षमता को कम कमजोर करने वाली स्थिति हो सकती है।

अध्ययन में क्या पता चला?

बीएमजे पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 50,000 से अधिक लोगों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि वीडियो गेम्स के दौरान होने वाली आवाज तय सीमा से कहीं अधिक होती है।

सामान्य लोगों के लिए 25-30 डेसीबल ध्वनि को पर्याप्त माना जाता है, जबकि 80-90 डेसीबल ध्वनि श्रवण शक्ति को स्थायी हानि पहुंचाने वाली हो सकती है। विश्लेषण के दौरान पाया गया कि वीडियो गेमिंग के समय अधिकतर लोगों का ध्वनि स्तर 85 और 90 डेसीबल के आसपास रहा, जो कानों की सहनशक्ति से कहीं अधिक है। इससे बहरेपन का जोखिम हो सकता है।

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यदि आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिनके गर्मी में फट रहे होंठ, तो इन चीजों का इस्तेमाल करके इस परेशानी से पाए राहत 

सर्दियों में होंठ फटना तो बेहद आम बात है, लेकिन जब गर्मी में भी होंठ फटते हैं, तो ये चिंता का विषय हो जाता है। लेकिन आज के समय में तेज धूप, प्रदूषण और अन्य परेशानियों की वजह से ज्यादातर लोग होंठों के फटने से परेशान हैं।

यदि आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिनके होंठ गर्मी में फट रहे हैं तो कुछ चीजों का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से राहत पा सकते हैं। यहां हम आपको इन्हीं चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आप भी इस परेशानी से आतान तरीके से राहत पा सकें।

नारियल का तेल

यदि आपके होंठ फटना बंद नहीं हो रहे हैं तो आप नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें पाए जाने वाले तत्व आपके होंठों को सूखने से बचाते हैं। इसका इस्तेमाल करना काफी आसान है। इस्तेमाल के लिए केवल रात के समय में होंठों पर नारियल का तेल लगाएं और ऐसे ही सो जाएं।

शहद

शहद के इस्तेमाल से आपको फटे हुए होंठों से राहत मिलेगी। इसके इस्तेमाल के लिए होंठों पर शहद की पतली सी लेयर लगाएं। 10 से 15 मिनट तक इसे ऐसे ही होंठों पर लगा रहने दें और फिर हल्के हाथ से पोंछ लें। हल्के हाथ से पोंछने के बाद होंठों पर मॉइश्चराइजर लगाएं और सो जाएं।

एलोवेरा

एलोवेरा का पौधा तो लगभग हर घर में होता है। ऐसे में आप इसके इस्तेमाल से भी अपने फटे हुए होंठों को सही कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए रात के समय एलोवेरा जेल को होंठों पर लगाएं और फिर कुछ ही दिनों में इसका असर देखें।

गुलाब जल

गर्मी के मौसम में घर-घर में गुलाब रख रखा रहता है। ऐसे में आप इसके इस्तेमाल से भी फटे होंठों को ठीक कर सकते हैं। इसके लिए कॉटन बॉल पर डालकर होंठों पर हल्के से लगाएं। ये नुस्खा आपके होंठों को हाइड्रेट रखने में मदद करेगा।

ग्लिसरीन

इस मौसम में भी ग्लिसरीन आपके होंठों की हालत सुधारने में मदद करेगा। ग्लिसरीन को थोड़ा सा शहद के साथ मिलाकर होंठों पर लगाएं और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। फिर इसे पोंछ लें। इससे भी आपको फायदा दिखेगा।

घी

गर्मियों में आप घी को मॉइस्चराइजर के रूप में भी यूज कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से होंठ कोमल और नर्म बन जाते है। घी होंठों को नमी प्रदान करता है। इसको आप रात में लगाकर सो सकते हैं।

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