Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

क्या धूम्रपान आपकी उम्र 10 साल तक घटा सकता है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

Category Archives: फिटनेस

क्या धूम्रपान आपकी उम्र 10 साल तक घटा सकता है? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के लिए हमारी गड़बड़ लाइफस्टाइल और खान-पान की दिक्कतों को बड़ा कारण माना जाता रहा है। हृदय रोग-डायबिटीज हो या कैंसर, इन सभी का मुख्य जड़ बदलती जीवनशैली और गड़बड़ आदतों को माना गया है। इसमें भी जिस आदत के कारण शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है वह है- धूम्रपान।

धूम्रपान हमारी सेहत के लिए हानिकारक है, इस बारे में हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं। इसे सांस की समस्याओं से लेकर फेफड़ों के कैंसर तक के लिए जोखिम कारक माना जाता है। यह कई गंभीर और क्रोनिक बीमारियों का कारक भी है। जिस तरह से कम उम्र के लोगों में ये आदत देखी जा रही है वह और भी चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है।

अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि धूम्रपान करने वाले लोगों में समय के साथ अंधे-बहरे होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

आपकी उम्र भी हो रही है कम

डॉक्टर कहते हैं, धूम्रपान एक धीमा जहर है जो शरीर के हर अंग को नुकसान पहुंचाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में 80 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों से होती है। धूम्रपान करने वालों की औसत आयु धूम्रपान न करने वालों की तुलना में 10 वर्ष तक कम हो सकती है। ऐसे लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक देखा गया है।

क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान सिर्फ फेफड़ों की समस्याओं तक सीमित नहीं है। शरीर के कई अन्य अंगों पर भी इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इतना ही नहीं जिन लोगों को डायबिटीज या हृदय रोगों की समस्या है, उनके लिए धूम्रपान की स्थिति कई प्रकार की जटिलताओं को बढ़ाने वाली भी हो सकती है।

हानिकारक रसायनों के कारण हो रहा नुकसान

ऑस्ट्रेलियन डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ऐज्ड केयर के विशेषज्ञों के अनुसार कश लेने के 10 सेकंड के भीतर तंबाकू के धुएं में मौजूद जहरीले रसायन आपके मस्तिष्क, हृदय और अन्य अंगों तक पहुंच जाते हैं। धूम्रपान शरीर के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाती है और इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

यह आदत मस्तिष्क में फील गुड हार्मोन के स्राव को भी प्रभावित करने लगती है जिसके कारण आपको अक्सर उदासी की भावना बनी रह सकती है।

अंधापन-बहरापन का बन सकती है कारण

अध्ययनकर्ता कहते हैं, धूम्रपान की आदत आंखों और कानों की क्षमता पर गंभीर रूप से असर डालती है। इस आदत के शिकार लोगों के कान में रक्त के प्रवाह की कमी हो सकती है, धूम्रपान करने वालों की सुनने की शक्ति समय से पहले कम हो सकती है, कुछ स्थितियों में इसे बहरेपन का भी कारण माना जाता है।

इसी प्रकार धूम्रपान के कारण मैकुलर डिजनरेशन का खतरा बढ़ जाता है जो उम्र के साथ अंधेपन के मुख्य कारणों में से एक है।

हृदय रोग-मधुमेह की बढ़ सकती हैं जटिलताएं

धूम्रपान हृदय रोग, गंभीर स्थितियों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण भी बन सकती है।
धूम्रपान करने वालों में रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है, जो हृदय, मस्तिष्क या पैरों में रक्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर देता है।
रक्त परिसंचरण समस्याओं के कारण हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना तक बढ़ जाता है।
इसे स्ट्रोक के भी प्रमुख कारकों में एक माना जाता है।

इसी तरह ये आदत टाइप-2 डायबिटीज के विकास और जटिलताओं को बढ़ाने का कारण बनता है। धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में डायबिटीज होने या इसकी गंभीर जटिलताओं का खतरा 30 से 40% अधिक पाया गया है।

(साभार)


खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीना बन सकता है आपकी सेहत का रक्षक, आइये जानते हैं इसके फायदे

सुबह की शुरुआत हमारे पूरे दिन की दशा तय करती है। यदि हम अपने दिन की शुरुआत किसी स्वस्थ और ताजगी भरी आदत से करें, तो उसका सकारात्मक प्रभाव हमारी ऊर्जा और मूड पर दिनभर बना रहता है। ऐसी ही एक बेहद आसान और पुरानी आदत है, रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीना। यह सिर्फ एक साधारण पेय नहीं, बल्कि हमारे शरीर और मन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

नींबू विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और खनिजों का भंडार है, जो शरीर को पोषण देता है। यह छोटी सी आदत हमारे शरीर को भीतर से शुद्ध करने का काम करती है। नींबू पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। विटामिन-सी से भरपूर होने के कारण, यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक लाता है। खाली पेट इसका सेवन आंतों की सफाई करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। यह हमें दिनभर हाइड्रेटेड रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। यह एक छोटी सी आदत आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर बड़ा और प्रभावशाली असर डाल सकती है।

स्वस्थ पाचन तंत्र
गुनगुना नींबू पानी पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है। नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज, अपच और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं। सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर पीने से पाचन सुचारू होता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक है, जिससे पेट हल्का और स्वस्थ रहता है।

पोटैशियम का समृद्ध स्रोत
नींबू में पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो हृदय, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए जरूरी है। गुनगुना नींबू पानी रक्तचाप को नियंत्रित करता है और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। पोटैशियम मांसपेशियों के कार्य और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। रोजाना नींबू पानी पीने से शरीर में पोटैशियम की कमी पूरी होती है, जिससे थकान और कमजोरी दूर रहती है।

किडनी स्टोन से बचाव
नींबू पानी किडनी स्टोन को रोकने में प्रभावी है। नींबू में मौजूद साइट्रेट यूरिन में कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल्स को बनने से रोकता है, जो किडनी स्टोन का मुख्य कारण हैं। नियमित रूप से गुनगुना नींबू पानी पीने से यूरिन अधिक क्षारीय होता है, जिससे स्टोन बनने की संभावना कम होती है। पर्याप्त पानी के साथ नींबू पानी पीना इस समस्या से बचाव का आसान उपाय है।

तनाव कम करता है और मूड को बेहतर बनाता है
नींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव को कम करने में मदद करते हैं। यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क को ताजगी देता है। सुबह नींबू पानी पीने से मूड बेहतर होता है और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। नींबू की ताजगी भरी खुशबू भी मानसिक तनाव को कम करती है।

वजन कम करने में फायदेमंद
रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीना वजन घटाने में कारगर होता है। नींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करते हैं। साइट्रिक एसिड पाचन को बेहतर बनाता है और भूख नियंत्रित करता है। कम कैलोरी वाला यह पेय फैट बर्न करता है।

(साभार)


खाली पेट गुनगुना नींबू पानी पीना बन सकता है आपकी सेहत का रक्षक, आइये जानते हैं इसके फायदे

सुबह की शुरुआत हमारे पूरे दिन की दशा तय करती है। यदि हम अपने दिन की शुरुआत किसी स्वस्थ और ताजगी भरी आदत से करें, तो उसका सकारात्मक प्रभाव हमारी ऊर्जा और मूड पर दिनभर बना रहता है। ऐसी ही एक बेहद आसान और पुरानी आदत है, रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीना। यह सिर्फ एक साधारण पेय नहीं, बल्कि हमारे शरीर और मन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

नींबू विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और खनिजों का भंडार है, जो शरीर को पोषण देता है। यह छोटी सी आदत हमारे शरीर को भीतर से शुद्ध करने का काम करती है। नींबू पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। विटामिन-सी से भरपूर होने के कारण, यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और त्वचा में प्राकृतिक चमक लाता है। खाली पेट इसका सेवन आंतों की सफाई करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। यह हमें दिनभर हाइड्रेटेड रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। यह एक छोटी सी आदत आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर बड़ा और प्रभावशाली असर डाल सकती है।

स्वस्थ पाचन तंत्र
गुनगुना नींबू पानी पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है। नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज, अपच और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं कम होती हैं। सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर पीने से पाचन सुचारू होता है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी सहायक है, जिससे पेट हल्का और स्वस्थ रहता है।

पोटैशियम का समृद्ध स्रोत
नींबू में पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो हृदय, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के लिए जरूरी है। गुनगुना नींबू पानी रक्तचाप को नियंत्रित करता है और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। पोटैशियम मांसपेशियों के कार्य और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। रोजाना नींबू पानी पीने से शरीर में पोटैशियम की कमी पूरी होती है, जिससे थकान और कमजोरी दूर रहती है।

किडनी स्टोन से बचाव
नींबू पानी किडनी स्टोन को रोकने में प्रभावी है। नींबू में मौजूद साइट्रेट यूरिन में कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल्स को बनने से रोकता है, जो किडनी स्टोन का मुख्य कारण हैं। नियमित रूप से गुनगुना नींबू पानी पीने से यूरिन अधिक क्षारीय होता है, जिससे स्टोन बनने की संभावना कम होती है। पर्याप्त पानी के साथ नींबू पानी पीना इस समस्या से बचाव का आसान उपाय है।

तनाव कम करता है और मूड को बेहतर बनाता है
नींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव को कम करने में मदद करते हैं। यह कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क को ताजगी देता है। सुबह नींबू पानी पीने से मूड बेहतर होता है और दिनभर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। नींबू की ताजगी भरी खुशबू भी मानसिक तनाव को कम करती है।

वजन कम करने में फायदेमंद
रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीना वजन घटाने में कारगर होता है। नींबू में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करते हैं। साइट्रिक एसिड पाचन को बेहतर बनाता है और भूख नियंत्रित करता है। कम कैलोरी वाला यह पेय फैट बर्न करता है।

(साभार)


गर्मी में शिशु की देखभाल में न बरतें लापरवाही, इन गलतियों से करें परहेज

गर्मियों का मौसम छोटे बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। तेज धूप, लू और पसीना छोटे बच्चों को जल्दी प्रभावित करता है। ऐसे में माता-पिता को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। गर्मियों में थोड़ा ध्यान और देखभाल नन्हे शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और खुश रख सकती है। हालांकि जाने-अनजाने में माता-पिता कुछ ऐसी गलती कर जाते हैं तो बच्चे के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में अगर कोई असामान्य लक्षण दिखे, जैसे बुखार, स्किन रैश या सुस्ती तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आपके घर में नन्हा मेहमान है तो गर्मियों में इन बातों का जरूर ध्यान रखें।

गर्मियों में इन गलतियों से परहेज करें
शिशु को गर्मी में मोटा कपड़ा न पहनाएं। उन्हें हल्के सूती और आरामदायक कपड़े पहनाएं ताकि उनका शरीर तापमान के अनुकूल रहे।
छोटे बच्चों को लंबे समय तक डायपर पहनाना नुकसानदायक हो सकता है। इससे उन्हें रैशेज और जलन हो सकती है। समय-समय पर हवा लगने दें।
बच्चे को तेज धूप में बाहर न ले जाें। अगर बाहर जाना है तो नवजात को सुबह 10 बजे से पहले या शाम को ही बाहर ले जाएं।
तापमान में अचानक बदलाव से बच्चा बीमार हो सकता है। इसलिए ठंडा पानी न दें और ना ही एयर कंडीशनर में अचानक ले जाएं।
छोटे बच्चे के लिए हर चीज सुरक्षित नहीं होती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के घरेलू नुस्खे न अपनाएं।

बच्चे की देखभाल के जरूरी टिप्स
गर्मी में बच्चे को हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनाएं। इससे शरीर को हवा मिलती है और बच्चा सहज रहता है।
बच्चे को दिन में दो-तीन बार गीले कपड़े से पोंछें या गुनगुने पानी से स्नान कराएं। इससे पसीना और गंदगी हटती है।
जिस कमरे में बच्चा रहता है, उसका तापमान सामान्य रखें। न ज्यादा ठंडा और न ज्यादा गर्म।
गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए नियमित फीडिंग जरूरी है। इसलिए समय समय पर स्तनपान कराते रहें।
इस मौसम में मच्छर भी बढ़ जाते हैं। बच्चे का मच्छरों से बचाव करें। लेकिन बच्चे के आसपास हार्श केमिकल्स वाले मॉस्किटो रिपेलेंट का प्रयोग न करें।

(साभार)


गर्मी में शिशु की देखभाल में न बरतें लापरवाही, इन गलतियों से करें परहेज

गर्मियों का मौसम छोटे बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। तेज धूप, लू और पसीना छोटे बच्चों को जल्दी प्रभावित करता है। ऐसे में माता-पिता को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। गर्मियों में थोड़ा ध्यान और देखभाल नन्हे शिशु को स्वस्थ, सुरक्षित और खुश रख सकती है। हालांकि जाने-अनजाने में माता-पिता कुछ ऐसी गलती कर जाते हैं तो बच्चे के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में अगर कोई असामान्य लक्षण दिखे, जैसे बुखार, स्किन रैश या सुस्ती तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आपके घर में नन्हा मेहमान है तो गर्मियों में इन बातों का जरूर ध्यान रखें।

गर्मियों में इन गलतियों से परहेज करें
शिशु को गर्मी में मोटा कपड़ा न पहनाएं। उन्हें हल्के सूती और आरामदायक कपड़े पहनाएं ताकि उनका शरीर तापमान के अनुकूल रहे।
छोटे बच्चों को लंबे समय तक डायपर पहनाना नुकसानदायक हो सकता है। इससे उन्हें रैशेज और जलन हो सकती है। समय-समय पर हवा लगने दें।
बच्चे को तेज धूप में बाहर न ले जाें। अगर बाहर जाना है तो नवजात को सुबह 10 बजे से पहले या शाम को ही बाहर ले जाएं।
तापमान में अचानक बदलाव से बच्चा बीमार हो सकता है। इसलिए ठंडा पानी न दें और ना ही एयर कंडीशनर में अचानक ले जाएं।
छोटे बच्चे के लिए हर चीज सुरक्षित नहीं होती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के घरेलू नुस्खे न अपनाएं।

बच्चे की देखभाल के जरूरी टिप्स
गर्मी में बच्चे को हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनाएं। इससे शरीर को हवा मिलती है और बच्चा सहज रहता है।
बच्चे को दिन में दो-तीन बार गीले कपड़े से पोंछें या गुनगुने पानी से स्नान कराएं। इससे पसीना और गंदगी हटती है।
जिस कमरे में बच्चा रहता है, उसका तापमान सामान्य रखें। न ज्यादा ठंडा और न ज्यादा गर्म।
गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए नियमित फीडिंग जरूरी है। इसलिए समय समय पर स्तनपान कराते रहें।
इस मौसम में मच्छर भी बढ़ जाते हैं। बच्चे का मच्छरों से बचाव करें। लेकिन बच्चे के आसपास हार्श केमिकल्स वाले मॉस्किटो रिपेलेंट का प्रयोग न करें।

(साभार)


क्या आप भी कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से हैं परेशान, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, कुछ ही दिनों में मिलेगी राहत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। गलत खानपान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लोग अक्सर पेट से जुड़ी परेशानियों का सामना करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि योग इन समस्याओं से निजात दिलाने का एक प्राकृतिक और असरदार तरीका हो सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खास योगासन न सिर्फ कब्ज को दूर करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं। आइए जानते हैं चार ऐसे योगासनों के बारे में, जो रोजाना करने से आपको कुछ ही दिनों में राहत मिल सकती है।

1. पवनमुक्तासन 
पवनमुक्तासन को कब्ज दूर करने का सबसे कारगर योग माना जाता है। ये आसन पेट में जमा गैस को बाहर निकालता है और पाचन को बेहतर बनाता है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएं और हाथों से उन्हें पकड़ लें। सिर को थोड़ा ऊपर उठाएं और नाक को घुटनों की ओर ले जाने की कोशिश करें। इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें और गहरी सांस लें। रोजाना सुबह इसे करने से पेट हल्का महसूस होता है और मल त्याग आसान हो जाता है।

2. वज्रासन 
वज्रासन खाने के बाद भी किया जा सकता है, जो इसे खास बनाता है। ये आसन पाचन अंगों में रक्त संचार बढ़ाता है और कब्ज से राहत देता है। इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठें, एड़ियों को अलग रखें और नितंबों को एड़ियों के बीच टिकाएं। पीठ सीधी रखें और हाथों को जांघों पर रखें। इस स्थिति में 2-3 मिनट तक रहें। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पाचन क्रिया सुधरती है।

3. भुजंगासन
भुजंगासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को साफ करता है। इसे करने के लिए पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और सांस लेते हुए सीने को ऊपर उठाएं। नजर सामने रखें और इस स्थिति में 15-20 सेकंड तक रहें। फिर धीरे से नीचे आएं। ये आसन पेट पर दबाव डालता है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या कम होती है। रोजाना 4-5 बार इसे दोहराएं।

4. बालासन 
बालासन तनाव कम करने के साथ-साथ पाचन अंगों को आराम देता है। इसे करने के लिए घुटनों पर बैठें, फिर आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन पर टिकाएं। हाथों को आगे की ओर बढ़ाएं या शरीर के पास रखें। गहरी सांस लेते हुए 1-2 मिनट तक इस मुद्रा में रहें। ये आसन पेट को हल्का मालिश देता है, जिससे मल त्याग में आसानी होती है।


क्या आप भी करते हैं गर्मियों में अधिक आम का सेवन, अगर हां, तो जान लीजिये इसके नुकसान  

गर्मियों का मौसम आते ही आम की मिठास हर किसी को लुभाती है। ‘फलों का राजा’ कहलाने वाला आम न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। आम में फाइटोन्यूट्रिएंट्स, विटामिन-सी, विटामिन-ए, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में आम खाने से पेट की समस्याएं, ब्लड शुगर में वृद्धि और अन्य स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं। इसके अलावा, केमिकल से पके आम खाने से टॉक्सिसिटी का खतरा भी बढ़ सकता है। आइए जानते हैं ज्यादा आम खाने के क्या नुकसान हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि आम खरीदने से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

ज्यादा आम खाने के नुकसान-

पाचन संबंधी समस्याएं-
आम में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो सामान्य मात्रा में पाचन के लिए फायदेमंद है। लेकिन ज्यादा आम खाने से डायरिया, पेट में ऐंठन, गैस या अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर, अगर इसे खाली पेट या रात में खाया जाए, तो पाचन तंत्र तो प्रभावित कर सकता है।

ब्लड शुगर में वृद्धि
आम में प्राकृतिक शर्करा अधिक होती है। अधिक मात्रा में आम खाने से ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है। सामान्य लोगों में भी अधिक आम खाने से यह थकान या चक्कर का कारण बन सकता है।

केमिकल से पकने का खतरा
बाजार में बिकने वाले कई आम केमिकल की मदद से पकाए जाते हैं। इसके लिए कैल्शियम कार्बाइड (CaC2) जैसे हानिकारक रसायन का इस्तेमाल होता है, जो पानी के साथ मिलकर एसिटिलीन गैस रीलीज होता है। यह गैस फलों को जल्दी पकाने में मदद करती है, लेकिन इसे खाने से टॉक्सिसिटी, त्वचा की समस्याएं, पेट में जलन, और गंभीर मामलों में पॉइजनिंग या किडनी फेलियर का खतरा हो सकता है।

आम खाने से पहले जरूरी सावधानियां-

बाजार से लाए गए आम को कम से कम 2 घंटे पानी में भिगोकर रखें। इसके बाद, बहते पानी में अच्छी तरह धोकर ही खाएं। यह आम के उपरी परत पर लगे केमिकल और कीटाणुओं को हटाने में मदद करता है।
एक दिन में 1-2 मध्यम आकार के आम पर्याप्त हैं। डायबिटीज के मरीज डॉक्टर की सलाह से ही इसका सेवन करें।

सुबह खाली पेट आम खाने से पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए खाली पेट आम खाने से बचना चाहिए।
ऐसे आम खरीदें जो प्राकृतिक रूप से पके हों। केमिकल से पके आम की पहचान उनके असमान रंग से की जा सकती है।
कुछ लोगों को आम खाने से एलर्जी, जैसे त्वचा पर चकत्ते या खुजली, हो सकती है। अगर ऐसा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।]

(साभार)

 


गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है यूटीआई का खतरा? आइये जानते हैं क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन की समस्या होना बहुत आम बात है। डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर में थकान और कमजोरी होने लगती है, कई बार यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) की समस्या भी देखने को मिलती है। कई बार ये समस्या इतनी गंभीर हो जाती है कि उठने-बैठने में भी परेशानी होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मिमी के मौसम में पर्याप्त पानी न पीने से मूत्राशय में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे यूटीआई की समस्या हो सकती है। अगर किसी को बार-बार यूटीआई की समस्या हो रही है तो इसका प्रभाव किडनी पर भी पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि गर्मी के दिनों में आप कुछ सावधानियां बरतकर इस गंभीर समस्या से दूर रह सकते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

डिहाइड्रेशन के कारण बढ़ सकती है समस्या
गर्मियों में पसीने के कारण शरीर से पानी तेजी से निकलता है। अगर इसकी पूर्ति न की जाए, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। डिहाइड्रेशन के कारण मूत्राशय में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जो यूटीआई का प्रमुख कारण बनता है। खासकर महिलाओं में मूत्रमार्ग की संरचना के कारण यह समस्या अधिक देखी जाती है। पर्याप्त पानी न पीना, कैफीनयुक्त पेय पदार्थों का अधिक सेवन, और अस्वच्छता भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं।

कैसे करें इसकी पहचान?
यूटीआई के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है ताकि समय रहते उपचार शुरू किया जा सके। इसके मुख्य लक्षण हैं-
पेशाब करते समय जलन या दर्द होना
बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना
मूत्र का रंग गहरा होना
पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
हल्का बुखार होना
कुछ मामलों में थकान और कमजोरी भी महसूस हो सकती है

यूटीआई के लक्षण दिखें तो क्या करें?
अगर आपको यूटीआई के लक्षण महसूस हों, तो सबसे पहले पानी का सेवन बढ़ाएं। दिनभर में कम से 2.5 से 3 लीटर पानी पीएं। पर्याप्त पानी पीने से मूत्राशय में जमा बैक्टीरिया बाहर निकल सकते हैं। इसके अलावा, बिना देर किए किसी यूरोलॉजिस्ट या सामान्य चिकित्सक से सलाह लें।

यूटीआई के खतरे से बचे रहने के लिए क्या करें?
यूटीआई से बचाव के लिए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। सबसे पहले, दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीने की आदत डालें। गर्मियों में नींबू पानी, नारियल पानी, और फलों का रस जैसे हाइड्रेटिंग पेय पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करें। पर्सनल हाइजीन का विशेष ध्यान रखें। कॉटन के अंडरगारमेंट्स पहने और टाइट कपड़ों से बचें। इसके अलावा हर तीन घंटे में एक बार पेशाब जरूर करें। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है उनमें यूटीआई का खतरा अधिक होता है, ऐसे लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

(साभार)


गर्मी से राहत या खतरा? एसी में ज्यादा समय बिताना सेहत पर डाल सकता है भारी असर

आज के आधुनिक युग में गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर (एसी) का उपयोग आम बात हो गई है। घर, ऑफिस, मॉल से लेकर गाड़ियों तक एसी का इस्तेमाल किया जाता है। कई बार तो एसी को स्टेटस सिंबल के रूप में भी देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप एसी में ज्यादा देर तक समय बिताते हैं तो इसका प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है?

वेबएमडी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार एसी वैसे तो सुरक्षित है, पर एसी वाली जगहों पर वेंटिलेशन यानी हवा के आने-जाने की अच्छी व्यवस्था भी जरूर होनी चाहिए। इस रिपोर्ट के अनुसार, अगर आपका एसी खराब वेंटिलेशन वाली जगह पर लगा है तो आपको सिरदर्द, सूखी खांसी, चक्कर आने-मतली, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।

सिरदर्द और माइग्रेन का खतरा
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जो लोग एसी में देर तक रहते हैं उनमें सिरदर्द और माइग्रेन का जोखिम बढ़ जाता है। इसका एक मुख्य कारण है कि एसी कमरे की हवा से नमी को सोख लेना है, जिससे हवा बहुत ज्यादा शुष्क हो जाती है। यह शुष्क हवा साइनस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, साथ ही इस शुष्क वातावरण का प्रभाव हमारी आंखों पर भी पड़ता है, जो सिरदर्द का कारण बन सकता है।

इसके अलावा, जब लोग ठंडे एसी वाले माहौल से अचानक गर्मी में बाहर निकलते हैं, तो तापमान में यह तीव्र बदलाव कुछ संवेदनशील लोगों में माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकता है।

श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा
जो लोग एसी में ज्यादा देर तक रहते हैं, वो उनमें अन्य लोगों की तुलना में श्वसन संबंधी समस्याएं (नाक मार्ग में जलन, सांस लेने में परेशानी) अधिक होती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एसी से निकलने वाली ठंडी और शुष्क हवा सीधे संपर्क में आने पर नाक और गले की नाजुक झिल्लियों को सुखा सकती हैं, जिससे जलन, खराश और रूखापन महसूस हो सकता है। जिन लोगों को अस्थमा-ब्रोंकाइटिस की समस्या होती है उन्हें एसी में ज्यादा समय बिताने से बचना चाहिए।

मेटाबॉलिज्म पर असर
कुछ अध्ययनों और विशेषज्ञों के विचारों के अनुसार, एसी में लगातार एक समान ठंडे तापमान में रहने का असर शरीर के मेटाबॉलिज्म (चयापचय) पर भी पड़ सकता है। सामान्य परिस्थितियों में, जब शरीर को अलग-अलग तापमान का सामना करना पड़ता है, तो वह अपने आंतरिक तापमान को बनाए रखने के लिए कुछ ऊर्जा खर्च करता है। गर्मी लगने पर पसीना आता है और ठंड लगने पर शरीर गर्मी पैदा करने की कोशिश करता है, इन प्रक्रियाओं में कैलोरी बर्न होती है।

एसी वाले नियंत्रित माहौल में रहने से शरीर को तापमान संतुलन के लिए उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती, जिससे आप कम फैट बर्न कर पाते हैं। इसके अलावा आप ठंडे वातावरण में आप सामान्य से कम पानी पीते हैं जिसके कारण भी पाचन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है। ये स्थितियां कब्ज-अपच जैसी दिक्कतों का कारण बन सकती हैं।

(साभार)


क्या बालों का गिरना थायरॉइड का संकेत है? जानिए कारण और समाधान

आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या बन गया है, लेकिन जब बाल तेजी से और असामान्य रूप से झड़ने लगें, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। कई बार यह सिर्फ मौसम, तनाव या गलत शैंपू का परिणाम नहीं होता, बल्कि थायराइड जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में लगभग 4.2 करोड़ लोग थायराइड से पीड़ित हैं, और विशेषज्ञों के मुताबिक थायरॉइड की समस्या बालों के झड़ने का एक प्रमुख कारण हो सकती है। आइए, जानते हैं कि थायरॉइड और बालों के झड़ने का क्या संबंध है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

थायरॉइड से बाल झड़ने का क्या है कनेक्शन?
थायरॉइड ग्रंथि, जो गले में तितली के आकार की होती है, शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल और हार्मोन बैलेंस को कंट्रोल करती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो हाइपोथायरायडिज्म (कम सक्रिय) या हाइपरथायरायडिज्म (अधिक सक्रिय) की स्थिति पैदा होती है। दोनों ही स्थितियों में बालों का तेजी से झड़ना एक सामान्य लक्षण है। हाइपोथायरायडिज्म में बाल रूखे, पतले और कमजोर हो जाते हैं, जबकि हाइपरथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म की अधिकता के कारण बालों के रोम कमजोर पड़ते हैं।

विशेषज्ञ के मुताबिक, ‘थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन बालों के विकास चक्र को बाधित करता है, जिससे बाल समय से पहले झड़ने लगते हैं। अगर रोजाना 100 से ज्यादा बाल झड़ रहे हैं, तो ये थाइराइड का लक्षण हो सकता है और ऐसी स्थिति में जरूर टेस्ट करवाना चाहिए।’

थायरॉइड के अन्य लक्षण
बालों के झड़ने के अलावा, थायरॉइड के कुछ अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। हाइपोथायरायडिज्म में थकान, वजन बढ़ना, रूखी त्वचा, ठंड सहन न करना और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म में वजन घटना, चिड़चिड़ापन, तेज हृदय गति, ज्यादा पसीना और नींद की कमी जैसे लक्षण दिखते हैं। खासकर महिलाओं में गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान थायरॉइड की समस्या अधिक देखी जाती है।

क्या हैं कारण?
थायरॉइड के कई कारण हो सकते हैं, जैसे आनुवंशिकता, तनाव, गलत खानपान, आयोडीन की कमी, या सोया उत्पादों का अधिक सेवन। गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव भी थायरॉइड को ट्रिगर कर सकते हैं।

बचाव और उपाय
अगर बाल झड़ने के साथ थायरॉइड के अन्य लक्षण भी दिख रहे हैं तो, ऐसी स्थिति में TSH, T3 और T4 टेस्ट करवाएं। आयोडीन, सेलेनियम और जिंक से भरपूर फूड प्रोडक्ट जैसे मछली, अंडे, दही और हरी सब्जियां खाएं। सोया, गोभी और प्रोसेस्ड फूड से बचें। थायरॉइड पॉजिटिव होने पर डॉक्टर की सलाह लें।

(साभार)


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp