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बार-बार हिचकी आना: क्या यह किसी बीमारी के लक्षण तो नहीं ? आइये जानते हैं इसके कारण

Category Archives: फिटनेस

बार-बार हिचकी आना: क्या यह किसी बीमारी के लक्षण तो नहीं ? आइये जानते हैं इसके कारण

हिचकी एक आम समस्या है, जो कभी-न-कभी हर किसी को होती है। यह अचानक शुरू होती है और कई बार अपने आप बंद भी हो जाती है, लेकिन जब यह बार-बार या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह परेशानी का कारण बन सकती है। लोग अक्सर इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि हिचकी क्यों आती है? क्या यह सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है या किसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकती है? आइए, इसके कारणों, उपायों और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

हिचकी क्या है और क्यों आती है?
हिचकी तब होती है, जब डायाफ्राम (मध्यपट) में अनैच्छिक संकुचन होता है। डायाफ्राम एक मांसपेशी है, जो फेफड़ों के नीचे होती है और सांस लेने में मदद करती है। जब यह मांसपेशी अचानक सिकुड़ती है, तो स्वरयंत्र बंद हो जाता है, जिससे ‘हिक’ की आवाज निकलती है।

हिचकी आने के सामान्य कारण
हिचकी एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है, जो कई कारणों से हो सकती है। अधिक खाना या जल्दबाजी में खाना इसका एक प्रमुख कारण है। ज्यादा मात्रा में भोजन, खासकर मसालेदार खाना, पेट में गैस बनना भी इसका कारण है, जो डायाफ्राम को उत्तेजित करता है और हिचकी शुरू हो जाती है। इसके अलावा, कार्बोनेटेड पेय जैसे सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स या शराब का सेवन भी पेट में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे हिचकी की समस्या हो सकती है। भावनात्मक तनाव, घबराहट या अचानक ठंडा-गर्म तापमान में बदलाव भी हिचकी का कारण बन सकता है।

हल्की-फुल्की हिचकी रोकने के आसान उपाय
हिचकी को रोकने के लिए कुछ सरल और प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे पहले, थोड़ा स्थिर हो जाएं और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, यह डायाफ्राम को स्थिर करने में मदद करता है। छोटे-छोटे घूंट में ठंडा पानी पीना भी हिचकी को रोकने का आसान तरीका है। इसके अलावा, एक चम्मच चीनी या शहद को जीभ के नीचे रखने से नसों को उत्तेजना मिलती है, जो हिचकी को कम करने में सहायक होती है।

क्या हिचकी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वैसे तो हिचकी को सामान्यतौर कोई बीमारी नहीं माना जाता है, लेकिन कुछ गंभीर स्थितियों में हिचकी को लक्षण के तौर पर देखा जा सकता है। इसीलिए, यदि हिचकी लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे अनदेखा न करें। लगातार हिचकी आना किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकता है, जिस पर समय रहते गौर करना जरूरी है।

लंबे समय तक हिचकी आने का एक संभावित कारण वेगस या फ्रेनिक तंत्रिकाओं में क्षति या जलन हो सकती है। ये तंत्रिकाएं डायाफ्राम की मांसपेशियों को सुचारु रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक होती हैं। कभी-कभी गर्दन में मौजूद थायरॉयड ग्रंथि से संबंधित कोई समस्या या सिस्ट भी इन तंत्रिकाओं को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में, तुरंत चिकित्सीय सलाह लेना और उचित इलाज प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।”

(साभार)


युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? जानें कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान के चलते दिल का दौरा किसी को भी पड़ सकता है, लेकिन हार्ट अटैक की रोकथाम आपके कंट्रोल में हो सकती है। आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ हार्ट से जुड़ी समस्या या फिर हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है, लेकिन आज के समय में युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। युवाओं में हार्ट अटैक का सबसे महत्वपूर्ण कारण लाइफस्टाइल है। हालांकि, दिल के दौरे के कई कारण होते हैं। इसका जोखिम कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल बहुत ही आवश्यक है। आइये जानते हैं  युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?

अब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही…”
आज के दौर में 24 से 45 वर्ष की उम्र के युवा भी हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो ये आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है गलत जीवनशैली।

मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती है?
एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में हुए:

400 एंजियोग्राफी

175 एंजियोप्लास्टी

25 पेसमेकर सर्जरी में से लगभग 20% मरीज 30 से 45 वर्ष के बीच के थे।
सबसे कम उम्र का हृदय रोगी 24 साल का था।

युवाओं में हार्ट अटैक के प्रमुख कारण:

कम नींद और मोबाइल की लत
देर रात तक स्क्रीन देखना, तकिए के पास मोबाइल रखना, बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना – ये सब नींद की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं।

तनाव और अत्यधिक वर्कलोड
नौकरी का प्रेशर, निजी जीवन में असंतुलन और बिना ब्रेक के काम करना मानसिक और शारीरिक थकावट ला रहा है।

धूम्रपान और शराब का सेवन
यह दिल की धमनियों को कमजोर बनाता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है।

फिटनेस की कमी और फास्ट फूड का सेवन
शारीरिक गतिविधि की कमी और तेल-मसाले वाले खाने से धमनियों में वसा जम जाती है, जिससे ब्लॉकेज हो जाती है।

हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज
ये सभी फैक्टर हार्ट के लिए बेहद खतरनाक हैं और बिना लक्षण के धीरे-धीरे दिल को नुकसान पहुंचाते हैं।

  • हार्ट अटैक से बचाव के आसान उपाय:
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें
    7-8 घंटे की गहरी नींद जरूर लें
    मोबाइल का उपयोग सोने से कम से कम 1 घंटे पहले बंद करें
    धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचें
    घर का बना संतुलित आहार लें
    समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं
    हर 6 महीने में हार्ट चेकअप करवाएं (विशेषकर अगर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है)

(साभार)


खाली पेट पपीता खाना से सेहत के लिए है फायदेमंद

अगर आप अच्छी सेहत चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। पपीता एक ऐसा फल है जो सुबह खाली पेट खाया जाए तो पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और इम्युनिटी को मजबूत करता है।

पपीते में मौजूद पपेन एंजाइम प्रोटीन पचाने में मदद करता है, जबकि इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों की सफाई कर कब्ज की समस्या दूर करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और ऊर्जा भी देता है।

आयुर्वेदाचार्य अच्युत त्रिपाठी के अनुसार, पपीता न केवल पाचन में सहायक है, बल्कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है और दिल की बीमारियों से भी बचाता है। यह त्वचा में निखार लाने और शरीर को विटामिन-ए व सी प्रदान करने में भी मददगार है।

हालांकि, जिन लोगों का पेट संवेदनशील हो, उन्हें इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए क्योंकि इससे कुछ मामलों में एसिडिटी हो सकती है।


खाने के बाद नहाना क्यों है नुकसानदायक? आइये जानते हैं इसके कारण

खाने के बाद तुरंत नहाना, यह आदत भले ही कुछ लोगों को ताजगी देती हो, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है? अक्सर घरों में बड़े-बुजुर्ग खाने के तुरंत बाद नहाने से मना करते हैं, और इसके पीछे कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक कारण है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान में भी खाने के तुरंत बाद नहाने से मना किया जाता है।

जब हम भोजन करते हैं, तो हमारे शरीर का रक्त प्रवाह पाचन क्रिया में मदद करने के लिए पेट और आंतों की ओर बढ़ता है। इस दौरान पाचन सक्रिय होता है, जो भोजन को तोड़ने और पोषक तत्वों को अवशोषित करने के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन, खाने के तुरंत बाद नहाने से शरीर का तापमान बदलता है और रक्त प्रवाह शरीर के बाहरी हिस्सों, जैसे त्वचा और मांसपेशियों, की ओर मुड़ जाता है।

इससे पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे अपच, गैस, पेट फूलना और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह आदत लंबे समय में पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है। ऐसे में अक्सर लोगों के दिमाग में सवाल आता है कि अगर भोजन के बाद नहाना हो तो कम से कम कितने देर का गैप होना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

नहाकर खाने के बीच अंतराल
सबसे पहले ये बात समझना जरूरी है कि खाने और नहाने के बीच टाइम गैप की बात करते हैं तो ये बात पहले नहाने की और उसके बाद खाने की होती है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कम से कम आधे घंटे से एक घंटे का अंतराल रखना चाहिए।

भोजन के बाद नहाने के बीच अंतराल
आयुर्वेद के अनुसार, खाने के बाद शरीर का रक्त संचार पेट की ओर केंद्रित होता है ताकि भोजन पच सके। ठंडे पानी से नहाने पर तापमान कम होता है और रक्त प्रवाह शरीर के बाहरी हिस्सों, जैसे त्वचा और मांसपेशियों, की ओर मुड़ जाता है, जिससे पाचन बाधित होता है। आधुनिक विज्ञान भी बताता है कि तुरंत नहाने से पाचन एंजाइम्स की गतिविधि धीमी पड़ सकती है। इससे पेट में भारीपन, गैस और थकान हो सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खाने के बाद नहाने के लिए कम से कम 2-3 घंटे का अंतराल होना चाहिए। इससे आपकी पाचन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नहाकर भोजन करने के कई फायदे होते हैं, इसलिए कोशिश करें कि नहाने के बाद ही भोजन करें।

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पेट में गैस क्यों बनती है? आइये जानते हैं इसके कारण और असरदार समाधान

पेट में गैस बनना एक ऐसी आम समस्या है जिससे शायद ही कोई अछूता हो। यह सिर्फ पेट फूलने या हल्की असहजता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अक्सर तेज दर्द, ऐंठन और सामाजिक असहजता का कारण भी बन जाती है। चाहे मीटिंग हो या कोई पार्टी, गैस की समस्या हमारी एकाग्रता और आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित करती है।

यह परेशानी अक्सर हमारे खानपान की गलत आदतों, अनियमित जीवनशैली या फिर कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का नतीजा होती है। जब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो भोजन के कण पेट में फर्मेंट होने लगते हैं, जिससे गैस का उत्पादन बढ़ जाता है। इस समस्या को समझना और सही उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है, ताकि आप पेट की असहजता से बचकर एक आरामदायक और स्वस्थ जीवन जी सकें। आइए जानें पेट में गैस बनने के चार आम कारण और राहत के प्रभावी उपाय।

अनुचित खानपान
कुछ खाद्य पदार्थ, जैसे फलियां, गोभी, ब्रोकली, डेयरी उत्पाद और उच्च फाइबर वाली चीजें, पेट में गैस बना सकती हैं। इनमें मौजूद लैक्टोज या जटिल कार्बोहाइड्रेट्स आंतों में गैस पैदा करते हैं। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड्स भी गैस बढ़ाते हैं। ऐसे में इससे बचने के लिए इन खाद्य पदार्थों को सीमित मात्रा में खाएं। भोजन को अच्छी तरह चबाएं और हल्का भोजन, जैसे मूंग दाल या खिचड़ी खाएं।

जल्दबाजी में खाना
बहुत से लोग बहुत तेज और कम समय में भोजन करते हैं। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो खाते समय बात करते हैं। ऐसे में वे भोजन को अच्छे से चबाकर नहीं खा पाते हैं। जिससे पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं और पेट में गैस बनने लगता है। इससे बचने का उपाय बहुत सरल है कि खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं और खाते समय बातचीत कम करें।

पाचन संबंधी विकार
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, लैक्टोज इंटॉलरेंस या गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन गैस के प्रमुख कारण हो सकते हैं। ये आंतों में गैस उत्पादन को बढ़ाते हैं और सूजन पैदा करते हैं। बार-बार गैस की शिकायत होने पर ऐसी स्थिति में चिकित्सक से जांच कराएं। लैक्टोज इंटॉलरेंस के लिए डेयरी उत्पादों से परहेज करें और प्रोबायोटिक्स, जैसे सादा दही, अपने आहार में शामिल करें।

तनाव और सैडेंटरी लाइफस्टाइल
तनाव पाचन तंत्र को धीमा करता है, जिससे गैस और सूजन की समस्या बढ़ती है। घंटों एक स्थान पर एक पोजिसन में बैठे रहना भी पाचन को प्रभावित करती है। ऐसे में अपनी दिनचर्या में रोज 20-30 मिनट टहलने और योग करने की आदत को शामिल करें। तनाव कम करने के लिए गहरी सांस लें और मेडिटेशन करें।

पेट में गैस होने पर क्या करें?
पेट में गैस होने पर आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर पी सकते हैं। इससे गैस की समस्या से आपको राहत मिल सकती है। नींबू पानी पाचन को उत्तेजित कर एसिडिटी कम करता है। अदरक चबाना या इसकी चाय पीना भी फायदेमंद है, क्योंकि यह सूजन और गैस कम करता है। अजवाइन का पानी भी आपको गैस से तुरंत आराम देता है।

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पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती क्यों? आइये जानते हैं इसकी असली वजह

क्या कभी ऐसा होता है कि रात में पूरी नींद लेने के बावजूद, आपको दिनभर अजीब सी सुस्ती महसूस होती है या हर समय नींद आती है? यह सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति हो सकती है जिसे हाइपरसोम्निया कहते हैं। इसमें व्यक्ति को सामान्य से कहीं ज्यादा नींद की आवश्यकता होती है, जो उनकी दिनचर्या और काम पर बुरा असर डालती है।

जिन लोगों को पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती महसूस होती है, उन्हें अक्सर लगता है कि वे आलसी हैं या उनकी नींद पूरी नहीं हुई। जबकि, हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं। यह किसी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है। हाइपरसोम्निया कई बार किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। ये स्थितियां शरीर के ऊर्जा स्तर को प्रभावित करती हैं और नींद की गुणवत्ता को बाधित करती हैं, जिससे दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसलिए, अगर आप लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। आइए इस लेख में जानते हैं कि किन बीमारियों का आशंका अधिक होती है।

डायबिटीज
अनियंत्रित रक्त शर्करा हाइपरसोम्निया का कारण बन सकता है। डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में असमर्थ होता है, जिससे थकान और नींद की समस्या होती है। बार-बार प्यास, पेशाब और वजन कम होना इसके अन्य लक्षण हैं।

थायराइड डिसऑर्डर
हाइपोथायरायडिज्म एक बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्रंथि कम सक्रिय होती है, मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है। इससे सुस्ती, थकान और अत्यधिक नींद की समस्या बढ़ जाती है। वजन बढ़ना, ठंड लगना और बाल झड़ना इसके लक्षण हो सकते हैं।

एनीमिया
एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है, जिससे थकान और नींद की समस्या बढ़ जाती है। यह आयरन, विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी से हो सकता है।

स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है, जिससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिलती। इस कारण दिन में अत्यधिक नींद, थकान, खर्राटे, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

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पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती क्यों? आइये जानते हैं इसकी असली वजह

क्या कभी ऐसा होता है कि रात में पूरी नींद लेने के बावजूद, आपको दिनभर अजीब सी सुस्ती महसूस होती है या हर समय नींद आती है? यह सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति हो सकती है जिसे हाइपरसोम्निया कहते हैं। इसमें व्यक्ति को सामान्य से कहीं ज्यादा नींद की आवश्यकता होती है, जो उनकी दिनचर्या और काम पर बुरा असर डालती है।

जिन लोगों को पूरी नींद लेने के बाद भी दिनभर थकान और सुस्ती महसूस होती है, उन्हें अक्सर लगता है कि वे आलसी हैं या उनकी नींद पूरी नहीं हुई। जबकि, हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं। यह किसी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है। हाइपरसोम्निया कई बार किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। ये स्थितियां शरीर के ऊर्जा स्तर को प्रभावित करती हैं और नींद की गुणवत्ता को बाधित करती हैं, जिससे दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसलिए, अगर आप लगातार इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो इसे हल्के में न लें। आइए इस लेख में जानते हैं कि किन बीमारियों का आशंका अधिक होती है।

डायबिटीज
अनियंत्रित रक्त शर्करा हाइपरसोम्निया का कारण बन सकता है। डायबिटीज में शरीर ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में असमर्थ होता है, जिससे थकान और नींद की समस्या होती है। बार-बार प्यास, पेशाब और वजन कम होना इसके अन्य लक्षण हैं।

थायराइड डिसऑर्डर
हाइपोथायरायडिज्म एक बीमारी है, जिसमें थायराइड ग्रंथि कम सक्रिय होती है, मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है। इससे सुस्ती, थकान और अत्यधिक नींद की समस्या बढ़ जाती है। वजन बढ़ना, ठंड लगना और बाल झड़ना इसके लक्षण हो सकते हैं।

एनीमिया
एनीमिया में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम होती है, जिससे थकान और नींद की समस्या बढ़ जाती है। यह आयरन, विटामिन B12 या फोलिक एसिड की कमी से हो सकता है।

स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है, जिससे गहरी और सुकून भरी नींद नहीं मिलती। इस कारण दिन में अत्यधिक नींद, थकान, खर्राटे, सिरदर्द और एकाग्रता में कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

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क्या आप भी हैं सनबर्न से परेशान? तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे, मिलेगी राहत

तेज धूप से लोगों का हाल बेहाल हो रहा है। कई जगहों पर पारा 45 डिग्री भी पार कर गया है। धूप और गर्मी से न सिर्फ लोगों की सेहत खराब हो रही है, बल्कि इसकी वजह से अब लोगों की स्किन भी डैमैज हो रही है। दरअसल, सनबर्न का मुख्य कारण है तेज धूप। खासतौर पर अब जब पारा इतना ज्यादा बढ़ता जा रहा है तो हर दूसरा व्यक्ति सनबर्न से परेशान है।

सनबर्न से राहत पाने के लिए वैसे तो तमाम क्रीम बाजार में आती हैं, जो तत्काल राहत दिलाती हैं। पर, आप चाहें तो कुछ घरेलू चीजों के इस्तेमाल से भी सनबर्न की जलन को कम कर सकते हैं। यहां हम आपको इसी बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

एलोवेरा जेल

धूप से जब सनबर्न हो जाता है तो इससे स्किन पर काफी ज्यादा जलन होती हैं। इससे राहत पाने के लिए आप तत्काल ही फ्रेश एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए एलोवेरा की पत्ती से ताजा जेल निकालें और उसे स्किन पर अप्लाई करें।
इससे आपको जलन से तत्काल राहत मिलेगी। यदि आपके पास ताजा जेल नहीं है तो आप रेडीमेड मिलने वाले जेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

दूध

दूध में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो स्किन को न सिर्फ चमकाते हैं, बल्कि इससे स्किन को गर्मी से भी राहत मिलती है। तो यदि आप सनबर्न से परेशान हैं और इससे आपका चेहरा झुलस गया है तो दूध का इस्तेमाल करें।
इसके लिए रूई को ठंडे दूध में भिगोकर चेहरे पर हल्के से लगाएं। कुछ देर चेहरे को ऐसे ही रहने दें और फिर ठंडे पानी से अपने चेहरे को धो लें।

खीरा

इस मौसम में खीरा काफी ज्यादा मिलता है, जिसके इस्तेमाल से भी आप सनबर्न से राहत पा सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले खीरे को काटकर चेहरे पर रखें या फिर खीरे के स्लाइस से चेहरे पर मसाज करें।
आप चाहें तो उसका रस निकालकर चेहरे पर अप्लाई कर सकते हैं। खीरे का रस स्किन को ठंडक पहुंचाता है और सूजन व जलन को कम करता है।

दही

हर भारतीय घर में दही तो रखा ही होता है, तो आप इसके इस्तेमाल से भी चेहरे की जलन से तत्काल राहत पा सकते हैं। इसके लिए चेहरे पर दही अप्लाई करें।
बस ध्यान रखें कि ये दही फ्रिज का रखा होना चाहिए, ताकि दही अपना असर दिखा सके। अब ठंडे दही को अपने चेहरे पर लगाएं और फिर 20 मिनट इसे ऐसे ही लगा रहने दें। 20 मिनट के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें।

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क्या आप भी करते हैं चाय- कॉफी का अधिक सेवन, अगर हां, तो जान लीजिये इसके नुकसान 

सुबह की शुरुआत अक्सर एक कप चाय या कॉफी के बिना अधूरी सी लगती है। भारतीय घरों में तो ये पेय पदार्थ रोज सुबह के समय पीना बहुत आम बात है। इनकी खुशबू और गरमाहट दिनभर के लिए हमें तैयार करती है। लेकिन इस आरामदायक आदत का एक दूसरा पक्ष भी है, जिस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

जी हां, अधिक मात्रा में चाय-कॉफी का सेवन करना आपके सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। हालांकि, एक या दो कप चाय-कॉफी फायदेमंद हो सकती है। इन कैफीन युक्त पेय पदार्थों की अत्यधिक मात्रा हमारी स्लीप साइकिल को बिगाड़ सकती है, दांतों पर बुरा असर डाल सकती है और शरीर में पोषण के अवशोषण को भी प्रभावित कर सकती है। यदि आप दिन में 3-4 कप से ज्यादा चाय या कॉफी पी रहे हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। इस आदत को नियंत्रित करना आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। आइए इस लेख में जानते हैं कि अधिक मात्रा में चाय या कॉफी पीने से क्या परेशानी हो सकती है, साथ ही ये भी जानेंगे कि इसे कंट्रोल करने के क्या उपाय हैं।

इनसोम्निया
चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन एक उत्तेजक (स्टीमुलैंट) है, जो मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। अधिक कैफीन स्लीप साइकिल को बाधित करता है, जिससे इनसोम्निया की समस्या हो सकती है। रात में नींद न आने से थकान, चिड़चिड़ापन होता है, जिससे कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। अध्ययनों के अनुसार, दिन में 400 मिलीग्राम से ज्यादा कैफीन (लगभग 4 कप कॉफी) नींद को प्रभावित करता है। इसे नियंत्रित करने के लिए दिन में 2 कप चाय-कॉफी से ज्यादा न पीएं।

दांतों पर दाग
चाय और कॉफी में टैनिन्स जैसे यौगिक होते हैं, जो दांतों पर भूरे-पीले दाग छोड़ सकते हैं। नियमित और अधिक सेवन से दांतों की चमक कम होती है और मुस्कान प्रभावित होती है। इसे कम करने के लिए चाय-कॉफी पीने के बाद पानी से कुल्ला करें। स्ट्रॉ का उपयोग करें और नियमित रूप से दांतों की सफाई करवाएं।

आयरन की कमी
चाय और कॉफी में मौजूद टैनिन्स और पॉलीफेनॉल्स भोजन से आयरन के अवशोषण को बाधित करते हैं। यह विशेष रूप से शाकाहारी लोगों और महिलाओं के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इससे एनीमिया, थकान और कमजोरी हो सकती है। इसे रोकने के लिए चाय-कॉफी भोजन के तुरंत पहले या बाद में न पिएं। भोजन के 1-2 घंटे बाद इसका सेवन करें।

कैफीन को नियंत्रित करने के उपाय-
दिन में 1-2 कप चाय या कॉफी तक सीमित रखें।
हर्बल टी, जैसे पुदीना या कैमोमाइल, को डाइट में शामिल करें, इनमें कैफीन की मात्रा ना के बराबर होती है।
पर्याप्त पानी पिएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके।
नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए रात में गुनगुना दूध या पानी पिएं।
तनाव प्रबंधन के लिए योग और ध्यान करें, जो कैफीन की लत कम करने में मदद करते हैं।

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क्या आप भी हैं पेट की चर्बी से परेशान, तो घर पर इन दो योगासनों का करें अभ्यास, मिलेगा फायदा

लटकी हुई तोंद और चर्बी किसी को पसंद नहीं होती। इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। चर्बी घटाने के लिए लोग जिम जाते हैं और जमकर पसीना बहाते हैं। हालांकि अगर तोंद या चर्बी को कम करने के लिए आपके पास जिम जाने का समय नहीं है तो दो सरल योगासन आपकी शरीर के फैट को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। रोजाना केवल 15-20 मिनट का अभ्यास आपको फिट और घटी हुई तोंद की ओर ले जा सकता है।

योग सिर्फ वजन घटाने का तरीका नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। इन दो आसनों को अगर नियमित रूप से सही तरीके से किया जाए तो कुछ ही हफ्तों में आप खुद फर्क महसूस करेंगे। योगासन से न सिर्फ लटकती तोंद पर असर पड़ता है, बल्कि पूरा शरीर हल्कापन और ऊर्जा भी महसूस करता है।

नौकासन कैसे करें

इस आसन में शरीर की मुद्रा किसी नाव की तरह होती है। अभ्यास के लिए पीठ के बल सीधा लेट जाएं। अब दोनों पैर और छाती को एक साथ ऊपर उठाएं। हाथों को आगे की ओर फैलाएं, जैसे नाव बना रहे हों। इस मुद्रा में 15-30 सेकंड तक रहें, फिर धीरे से वापस आएं।

नौकासन के फायदे

यह आसन पेट की मांसपेशियों, पीठ और पैरों को मजबूत करता है।
नौकासन के नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन और लचीलापन बेहतर बनता है।
इस आसन का अभ्यास पाचन अंगों को उत्तेजित करता है, जिससे चयापच और पाचन में सुधार होता है।
नौकासन का नियमित पांच से 10 मिनट का अभ्यास पेट की चर्बी को कम कर सकता है और वजन घटाने में मदद करता है।
यह आसन पैरो और बांह की मांसपेशियों को टोन करता है जिससे शरीर का निचला हिस्सा मजबूत होता है।
नौकासन दिमाग को शांत करता है और तनाव दूर करने में मदद करता है।

भुजंगासन कैसे करें

भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेट जाएं। इस दौरान हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और सांस लेते हुए सिर और छाती को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कोहनी थोड़ी मुड़ी रहें और गर्दन को पीछे की ओर खींचें। 15-30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें, फिर आराम करें।

भुजंगासन के फायदे

भुजंगासन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे पीठ दर्द में राहत मिलती है।
यह आसन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है और पाचन क्रिया में सुधार लाता है। इससे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
भुजंगासन का अभ्यास पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, जिससे अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव और थकान को कम किया जा सकता है और शरीर को ऊर्जावान बना सकते हैं।

(साभार)


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