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पटेलनगर में फायरिंग के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई, एक आरोपी गिरफ्तार

Category Archives: क्राइम

पटेलनगर में फायरिंग के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई, एक आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। पटेलनगर क्षेत्र में फायरिंग की घटना के बाद दून पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चंद घंटों के भीतर एक आरोपी को घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट कार के साथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की ओर से मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

20 अगस्त 2026 को कंट्रोल रूम के माध्यम से पटेलनगर क्षेत्र में स्विफ्ट कार सवार युवकों द्वारा फायरिंग किए जाने तथा एक युवक के घायल होने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना पर पटेलनगर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई। घायल युवक साहिल को उसके साथियों द्वारा उपचार के लिए महंत इंद्रेश अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के संबंध में घायल युवक के साथी अंशुल पुत्र शिवकुमार, निवासी शिकारपुर, मंगलौर ने कोतवाली पटेलनगर में तहरीर दी। तहरीर के अनुसार उसका तथा उसके साथी आदित्य और सुजल का गुरमीत नामक युवक से विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी विवाद के चलते गुरमीत ने अपने साथियों अमन, रोहित व एक अन्य युवक के साथ मिलकर उन पर फायरिंग की, जिसमें साहिल घायल हो गया।

तहरीर के आधार पर कोतवाली पटेलनगर में मु0अ0सं0-544/26, धारा 109/3(5)/352 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कंट्रोल रूम के माध्यम से जनपद के सभी थानों एवं सीमावर्ती चेक पोस्टों को संदिग्ध स्विफ्ट कार की तलाश के लिए अलर्ट किया गया। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान घटना में शामिल आरोपी रोहित को घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट कार सहित नया गांव बैरियर से गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपी रोहित ने पुलिस को बताया कि गुरमीत का उक्त युवकों के साथ विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते गुरमीत व उसके साथियों ने आईटीएस कॉलेज वाली रोड पर आदित्य, सुजल और उनके साथियों पर फायरिंग की। मौके पर लोगों के एकत्र होने पर आरोपी स्विफ्ट कार से फरार हो गए। इसके बाद आदित्य व उसके साथियों द्वारा मोटरसाइकिल से उनका पीछा किया गया। शिमला बाईपास रोड स्थित सेंट ज्यूडस चौक के पास दोबारा फायरिंग की गई, जिसमें साहिल घायल हो गया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

पुलिस द्वारा घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में अलग-अलग टीमें गठित कर उनके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।

गिरफ्तार अभियुक्त

रोहित पुत्र प्रदीप सिंह, निवासी ग्राम दलेड़ी, थाना बड़गांव, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश। वर्तमान में सुभारती कॉलेज, देहरादून में होटल मैनेजमेंट का छात्र।

बरामदगी

घटना में प्रयुक्त स्विफ्ट कार संख्या HR-51-AZ-0890


मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस चालक को थार से कुचलने का प्रयास, आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। रायवाला थाना क्षेत्र के मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस चालक को थार वाहन से कुचलने का प्रयास करने के मामले में दून पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त थार वाहन भी बरामद कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय जौलीग्रांट की बस विद्यार्थियों और महिला स्टाफ को लेकर हरिद्वार जा रही थी। नेपाली फार्म के पास एक काले रंग की थार बस के आगे-पीछे चलने लगी। मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस रुकने के बाद बस चालक ने थार चालक से इस तरह वाहन चलाने का कारण पूछा।

आरोप है कि इस दौरान कहासुनी होने पर थार चालक ने तैश में आकर बस चालक को जान से मारने की नीयत से वाहन उसके ऊपर चढ़ाने का प्रयास किया। बस चालक को कुछ दूर तक घसीटने के बाद थार ने आगे चल रही एक मारुति सियाज कार को भी टक्कर मार दी और आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना में बस चालक को गंभीर चोटें आईं।

मामले में वादिनी की तहरीर पर थाना रायवाला में मुकदमा अपराध संख्या 135/2026 के तहत धारा 109(1)/324(4) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया।

मेरठ और दिल्ली में दबिश, कोर्ट जाने से पहले गिरफ्तारी

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देश पर रायवाला पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए टीम गठित की। पुलिस ने आरोपी की तलाश में मेरठ और दिल्ली क्षेत्र में दबिश दी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी ऋषिकेश कोर्ट में सरेंडर करने के लिए जा रहा है।

सूचना पर पुलिस टीम ने 19 अगस्त 2026 को गुरु नानक ढाबा, बहादराबाद तिराहा से आरोपी देव चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त थार वाहन संख्या UK-06-BD-0070 भी बरामद किया गया।

पूछताछ में आरोपी ने बताई घटना की वजह

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि थार वाहन उसके पिता के दोस्त संदीप कुमार के नाम पंजीकृत है और वह वर्ष 2022 से इसे चला रहा है। 13 अगस्त को वह अपने दोस्त के साथ नेपाली फार्म के पास था। बस में उसकी एक परिचित लड़की होने के कारण वह बस के आगे-पीछे थार चलाने लगा।

मोतीचूर फ्लाईओवर पर बस रुकने के बाद बस में सवार लोगों के साथ उसकी कहासुनी हो गई। आरोपी के अनुसार, गुस्से में उसने वाहन आगे बढ़ा दिया, जिससे बस चालक को चोट लगी और आगे चल रही सियाज कार से भी टक्कर हो गई। घटना के बाद वह थार को अपने घर में खड़ा कर पुलिस से बचने के लिए मेरठ स्थित रिश्तेदारी में चला गया था। बाद में ऋषिकेश कोर्ट में सरेंडर करने के लिए आते समय पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी

देव चौधरी पुत्र गुड्डू चौधरी उर्फ विकास चौधरी, निवासी गली नंबर 07, टिहरी विस्थापित कॉलोनी, न्यू शिवालिक नगर, थाना रानीपुर, जनपद हरिद्वार, उम्र 20 वर्ष।

बरामदगी

घटना में प्रयुक्त थार वाहन संख्या UK-06-BD-0070

पुलिस टीम

उप निरीक्षक रघुबीर कपरवान, हेड कांस्टेबल राजीव यादव, कांस्टेबल दीपक कुमार और कांस्टेबल विकास कुमार शामिल रहे।


फाजिल्का में नशा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई, 8 महीने में 924 केस दर्ज, 1,331 आरोपी गिरफ्तार

फाजिल्का। पंजाब के फाजिल्का जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बीते आठ महीनों में बड़ी कार्रवाई की है। ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के दौरान पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 924 मामले दर्ज कर 1,331 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान बड़ी मात्रा में हेरोइन, अफीम, पोस्त की भूसी और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 41.124 किलोग्राम हेरोइन, 3.85 ग्राम क्रिस्टल मेथामफेटामाइन, 6.503 किलोग्राम अफीम, 42 ग्राम चरस और 250.537 किलोग्राम पोस्त की भूसी जब्त की गई। इसके अलावा नशीली दवाओं के 15,843 कैप्सूल और गोलियां भी बरामद हुईं। नशा तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 38 वाहनों को पुलिस ने जब्त किया है।

पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना भी है। अभियान के तहत 252 लोगों को नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कराया गया, जबकि 1,809 लोगों को ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट केंद्रों के लिए रेफर किया गया।

इसके अलावा एनडीपीएस एक्ट की धारा 64-ए के तहत 141 लोगों को लाभ दिया गया है। पुलिस का कहना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए कार्रवाई के साथ जागरूकता और उपचार को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

फाजिल्का पुलिस ने संगठित अपराध और गैंगस्टरों से जुड़े लोगों के खिलाफ भी अभियान चलाया। एसएसपी गगन अजीत सिंह के मुताबिक, आर्म्स एक्ट के तहत 10 मामले दर्ज कर 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनके कब्जे से 25 पिस्तौल, एक देसी पिस्तौल, 32 मैगजीन, 52 जिंदा कारतूस और तीन ड्रोन बरामद किए गए।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों और गैंग से जुड़े लोगों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि संगठित अपराध पर प्रभावी तरीके से रोक लगाई जा सके।

पुलिस ने जनता के साथ संपर्क बढ़ाने के लिए 99 ‘प्रोजेक्ट संपर्क’ बैठकें आयोजित कीं। इसके अलावा 334 नशा विरोधी जागरूकता शिविर और सेमिनार भी आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को नशे के दुष्परिणामों और अपराध की रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया।

साइबर अपराध की शिकायत के लिए लोगों को 1930 हेल्पलाइन और साइबर क्राइम पोर्टल की जानकारी भी दी गई।

फाजिल्का पुलिस ने सीमा से जुड़े इलाकों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया है। जिले के प्रमुख प्रवेश और निकास मार्गों पर सात स्थायी रात्रि नाके लगाए गए हैं। इन स्थानों पर 39 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

112 सेवा से जुड़े 21 इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्हीकल में 102 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा पांच पीसीआर मोटरसाइकिलों पर भी पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं।

पुलिस जांच में तकनीक का भी इस्तेमाल बढ़ाया गया है। पहचान सत्यापन के लिए पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जबकि वाहनों की जानकारी जांचने के लिए वाहन डेटाबेस की मदद ली जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए डिजिटल फोरेंसिक लैब भी स्थापित की गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों और तकनीक आधारित खुफिया तंत्र की मदद से अपराधियों की पहचान और उनकी लोकेशन ट्रेस करने में काफी सहायता मिल रही है। NATGRID और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद से भी आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने सीमा पार से होने वाली नशा तस्करी के मामलों में भी कार्रवाई की है। ऐसे 16 मामले दर्ज कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में 26.822 किलोग्राम हेरोइन के साथ एक पिस्तौल, पांच मैगजीन, 13 जिंदा कारतूस और एक ड्रोन बरामद किया गया है।

फाजिल्का पुलिस के मुताबिक, नशा तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।


तीन गुना मुनाफे का झांसा देकर 200 लोगों से करोड़ों की ठगी का आरोप, एसएसपी से शिकायत

मेरठ। क्रिप्टो करेंसी और अलग-अलग निवेश योजनाओं में पैसा लगाने पर तीन गुना तक मुनाफा देने का दावा कर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। लिसाड़ी गेट निवासी सुहेल ने इस संबंध में एसएसपी को शिकायत देकर फरमान समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब एक वर्ष पहले फरमान उसके स्कूल पहुंचा था। उसने खुद को बेटफ्लिक्स कंपनी से जुड़ा बताया और लोगों को निवेश की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दी। आरोप है कि उसने निवेश की रकम की जिम्मेदारी लेने के साथ करीब तीन गुना मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया।

बताया गया कि भरोसे में आकर सुहेल ने शुरुआत में दो लाख रुपये निवेश किए। कुछ समय तक उसे लाभ की रकम दी गई, जिससे उसका विश्वास बढ़ गया। इसके बाद उसने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी योजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। उसके भाई शारिफ और एक दोस्त ने भी करीब चार लाख रुपये निवेश किए।

शिकायत के अनुसार, कुछ समय तक निवेश की रकम पर भुगतान किया गया, लेकिन बाद में पैसा मिलना बंद हो गया। जब निवेश की रकम वापस मांगी गई तो आरोपितों की ओर से दो महीने में भुगतान करने का आश्वासन दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि चार महीने बीतने के बाद भी रकम वापस नहीं मिली।

आरोप है कि इसके बाद पीड़ितों पर दोबारा पैसा लगाने का दबाव बनाया गया। ऐसा करने से मना करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।

सुहेल ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि इस नेटवर्क से 200 से अधिक लोग जुड़े थे और उनसे करोड़ों रुपये लिए गए। आरोप है कि पहले योजना का नाम बेटफ्लिक्स था, जिसे बाद में बदलकर बिटब्रेन कर दिया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि हापुड़ रोड स्थित एक होटल में पी-काइन नामक क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर भी लोगों से रकम जुटाई जाती थी।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को भुगतान से संबंधित रसीदें और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराने की बात कही है। उसने पूरे मामले की जांच कर आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। साथ ही आरोपितों के देश से बाहर जाने की आशंका जताते हुए गिरफ्तारी की मांग भी की गई है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता और कथित निवेश नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।


बलथर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 16 लाख के गांजे के साथ तीन तस्कर गिरफ्तार

बेतिया। बलथर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नेपाल से गांजे की खेप लेकर भारत में प्रवेश करने वाले तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दो कारों की तलाशी के दौरान कुल 1 क्विंटल 61 किलो 29 ग्राम गांजा बरामद किया। बरामद गांजे को 17 बंडलों में छिपाकर रखा गया था।

पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह सिकटा-बेतिया मुख्य मार्ग पर बलथर गैस गोदाम के पास वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान नेपाल की तरफ से आ रही दो संदिग्ध कारों को रोककर तलाशी ली गई। जांच के दौरान दोनों वाहनों की डिक्की और सीट के नीचे छिपाए गए गांजे के पैकेट बरामद हुए।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मैनाटांड़ थाना क्षेत्र के पीपरपांती गांव निवासी सबजाद मियां (28), भंगहा थाना क्षेत्र के नकरदेही निवासी रफी आलम (35) और सुग्रीव प्रसाद (32) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, एक कार सबजाद मियां चला रहा था, जबकि दूसरी कार की ड्राइविंग रफी आलम कर रहा था। सुग्रीव प्रसाद भी इनमें से एक वाहन में सवार था।

थानाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि दो कारों के जरिए नेपाल से गांजे की बड़ी खेप भारत लाई जा रही है। सूचना के आधार पर गैस गोदाम के पास विशेष वाहन जांच शुरू की गई। करीब 10 बजे दोनों कारों को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें गांजे की खेप पकड़ी गई।

बीडीओ जय प्रकाश की मौजूदगी में दोनों वाहनों की तलाशी ली गई। पुलिस के अनुसार, जब्त गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 16 लाख 12 हजार 900 रुपये है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल दोनों कारों को भी जब्त कर लिया है।

पुलिस ने तीनों आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के आधार पर पुलिस अब गांजे की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किसे पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी जुटा रही है। तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

कार्रवाई में थानाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता के साथ एसआई सुनील सिंह, शमसाद अहमद, डीएपी के जवान और गृह रक्षा वाहिनी के जवान शामिल रहे।


दिल्ली में हथियार तस्करी के नेटवर्क का खुलासा, 10 अवैध हथियारों के साथ तस्कर गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंतरराज्यीय हथियार तस्करी से जुड़े एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 10 अवैध हथियार बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर निवासी प्रेम सिंह राठौड़ के रूप में हुई है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और कथित मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है।

डीसीपी नारा चैतन्य के अनुसार, पुलिस को लंबे समय से दिल्ली-एनसीआर समेत राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले गिरोह की जानकारी मिल रही थी। इनपुट के आधार पर स्पेशल सेल की टीम ने आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की।

पुलिस के मुताबिक, 8 अगस्त को मिली गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे पर शंकर विहार बस स्टैंड के नजदीक कार्रवाई की और प्रेम सिंह राठौड़ को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक जिगाना पिस्टल, चार 7.65 एमएम सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और पांच कट्टे बरामद हुए।

इस मामले में स्पेशल सेल ने आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अब बरामद हथियारों की सप्लाई और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह करीब एक साल से बुरहानपुर निवासी राहुल के लिए हथियारों की डिलीवरी कर रहा था। पुलिस के अनुसार, राहुल स्थानीय कारीगरों से अवैध हथियार तैयार करवाता था और फिर कूरियर के जरिए दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के राज्यों में हथियार पहुंचाए जाते थे।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए हथियार अपराधियों और गैंग से जुड़े लोगों तक पहुंचाए जा रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अब तक कितनी खेप पहुंचाई और इस नेटवर्क से कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

पुलिस के मुताबिक, प्रेम सिंह राठौड़ पहले अपने गांव में खेती-किसानी करता था। बाद में वह हथियार तस्करी के नेटवर्क में शामिल हो गया। स्पेशल सेल अब कथित मास्टरमाइंड राहुल समेत गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।

पुलिस का कहना है कि हथियारों की यह खेप समय रहते पकड़ लिए जाने से दिल्ली-एनसीआर में संभावित आपराधिक वारदातों को रोकने में मदद मिली है। मामले में आगे की जांच जारी है।


पुलिस पर फायरिंग के मामले में PLFI सुप्रीमो अमृत होरो को 3 साल की सजा, 30 हजार जुर्माना

गुमला। पुलिस टीम पर फायरिंग कर फरार होने की कोशिश करने के मामले में एडीजे-3 भूपेश कुमार की अदालत ने पीएलएफआई सुप्रीमो अमृत होरो उर्फ मेचो को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 30 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।

मामला वर्ष 2015 का है। 13 जून को कामडारा पुलिस को सूचना मिली थी कि अमृत होरो अपने कुछ साथियों के साथ थाना क्षेत्र के गरई इलाके में मौजूद है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर घेराबंदी की।

पुलिस को देखते ही अमृत होरो ने कथित तौर पर फायरिंग शुरू कर दी और मौके से भागने लगा। पुलिस से बचने के दौरान वह एक कुएं में जा गिरा। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे बाहर निकालकर गिरफ्तार कर लिया था। घटना को लेकर कामडारा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामले की सुनवाई पूरी हुई और बुधवार को अदालत ने अमृत होरो को दोषी मानते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

अमृत होरो को मई 2026 में लापुंग थाना क्षेत्र में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पूर्व पीएलएफआई सुप्रीमो मार्टिन केरकेट्टा के मारे जाने के बाद अगस्त 2025 में अमृत होरो के संगठन की कमान संभालने की बात सामने आई थी।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अमृत होरो लंबे समय से झारखंड के विभिन्न इलाकों में सक्रिय रहा है। उसके खिलाफ हत्या, आगजनी, रंगदारी और ठेकेदारों को धमकाने जैसे कई गंभीर आरोप हैं। रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों के अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ 50 से अधिक नक्सली मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

पुलिस के मुताबिक, अमृत होरो पर कारोबारियों, ईंट-भट्ठा संचालकों और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों से लेवी वसूलने के आरोप भी रहे हैं। वर्ष 2023 में लापुंग क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या और 2024 में पश्चिमी सिंहभूम में संगठन के एक कथित बागी सदस्य की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।

अप्रैल 2026 में खूंटी के कर्रा थाना क्षेत्र में एक रेल लाइन परियोजना की साइट पर फायरिंग और रोड रोलर में आग लगाने की घटना में भी उसके गिरोह की संलिप्तता बताई गई थी। इस मामले में ठेकेदार से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, लोहरदगा और पिठौरिया क्षेत्र में भी लेवी वसूली के लिए धमकी देने के मामले सामने आए थे।


काशीपुर में टेंट कारोबारी हत्याकांड का खुलासा, पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर रची थी साजिश

काशीपुर। प्रतापपुर क्षेत्र में कार के अंदर खून से लथपथ मिले टेंट कारोबारी संजीव कुमार की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि संजीव की हत्या किसी हादसे का नतीजा नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश थी। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पत्नी निशा ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई थी। वारदात को अंजाम देने में दुकान पर काम करने वाले दो किशोरों का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक साक्ष्यों की मदद से मामले की कड़ियां जोड़ीं। पूछताछ और जांच के दौरान पत्नी और किशोर के बीच प्रेम संबंध की बात सामने आई। पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होते थे, जिसके बाद संजीव को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

एसएसपी अजय गणपति के अनुसार, 16 अगस्त को एक किशोर ने जन्मदिन मनाने के बहाने संजीव से रामनगर घूमने चलने की बात कही। दोनों किशोर संजीव की कार में उसके साथ रामनगर गए। वापसी के दौरान राजपुर रोड, थारी के पास कार में पीछे बैठे एक किशोर ने 12 बोर के तमंचे से संजीव की गर्दन पर सटाकर गोली चला दी।

गोली लगने के बाद कार अनियंत्रित होकर खेत में जा गिरी। वारदात के बाद दोनों किशोर मौके से फरार हो गए और संजीव को कार में ही छोड़ दिया। पुलिस के मुताबिक, इससे पहले रामनगर में भी हत्या की कोशिश की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। बाद में संजीव के नशे में होने का फायदा उठाकर उसकी हत्या कर दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी किशोर ने संजीव की पत्नी निशा को मैसेज भेजकर काम पूरा होने की जानकारी दी थी। पुलिस ने इसी तरह के डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई। निशा के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों में अंतर मिलने के बाद पुलिस का शक गहरा गया।

17 अगस्त को कार में संजीव का शव मिलने के बाद शुरुआती जांच में गले पर चोट के निशान भी संदिग्ध पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की।

पुलिस और एसओजी की टीम ने दोनों किशोरों को मालवा फार्म पुलिया के पास से पकड़ा। उनकी निशानदेही पर 12 बोर का तमंचा, तीन खोखे, पांच जिंदा कारतूस और खून से सने कपड़े बरामद किए गए। पुलिस ने मृतक की पत्नी निशा को भी गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, अवैध संबंध करीब एक साल से चल रहे थे और इसकी जानकारी संजीव को नहीं थी। हत्या के लिए इस्तेमाल तमंचा करीब एक महीने पहले खरीदा गया था। पुलिस अब हथियार उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की भी तलाश कर रही है।

दोनों किशोरों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच में उनकी उम्र नाबालिग पाए जाने के बाद उनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले में अन्य संभावित आरोपितों और हथियार सप्लायर की भूमिका की भी जांच कर रही है।


कर्नाटक में पिता ने दो मासूम बच्चों को नहर में धकेला, खुद पुलिस को दी सूचना

बेंगलुरु। कर्नाटक के यादगीर जिले में पारिवारिक विवाद के बीच एक पिता पर अपने ही दो बच्चों की हत्या करने का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने अपने बेटे और बेटी को नहर में धकेल दिया। इसके बाद उसने खुद आपातकालीन नंबर 112 पर फोन कर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। पुलिस ने दोनों बच्चों के शव नहर से बरामद कर लिए। पुलिस के अनुसार, मृतकों में एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं।

बच्चों का मां से ज्यादा लगाव बना वजह

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि दोनों बच्चे अपनी मां रेणुका के काफी करीब थे, जबकि उसके साथ उनके संबंध अच्छे नहीं थे। इसी बात को लेकर उसके मन में नाराजगी थी। पुलिस इस बयान के आधार पर घटना के पीछे की वजह की जांच कर रही है।

यादगीर के पुलिस अधीक्षक पृथ्वीक शंकर के मुताबिक, पुलिस नियंत्रण कक्ष को शांताप्पा नाम के व्यक्ति का 112 पर फोन आया था। उसने बताया कि वह अपने दो बच्चों को बिगूड़ी इलाके की नहर में धकेल चुका है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी दोपहर करीब 2:15 से 2:30 बजे के बीच अपने तीन बच्चों को मोटरसाइकिल से लेकर नहर के पास पहुंचा था। वहां उसने कथित तौर पर अपने बेटे और बेटी को पानी में धकेल दिया। इसके बाद वह अपनी छह वर्षीय बेटी को अपने साथ लेकर यादगीर चला गया।

अलग-अलग समय पर मिले दोनों बच्चों के शव

यादगीर पहुंचने के बाद आरोपी ने पुलिस को फोन कर वारदात की जानकारी दी। एसपी के मुताबिक, बेटे का शव दोपहर करीब 3:30 बजे बरामद हुआ, जबकि बेटी का शव शाम करीब 5:30 से 6 बजे के बीच मिला।

पुलिस ने आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया है। पहले मामले में अपहरण की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था, जबकि अब हत्या की धारा भी जोड़ी जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।


दिल्ली में कैब चालक हत्याकांड का खुलासा, मुख्य आरोपित समेत पांच गिरफ्तार

दिल्ली। गोविंदपुरी थाना क्षेत्र में चार दिन पहले कैब चालक राजू की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। ईएसआईसी अस्पताल के सामने बस स्टॉप के पीछे जंगलनुमा इलाके में 30 वर्षीय कैब चालक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित किरण समेत पांच लोगों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपितों में एक नाबालिग भी शामिल बताया जा रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान मुख्य आरोपित किरण की भूमिका सामने आई। बताया जा रहा है कि वह गोविंदपुरी थाना क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में स्मैक समेत अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री करता था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीला सामान बरामद किए जाने का दावा किया है।

पुलिस हत्या के पीछे की वजह और वारदात में शामिल सभी आरोपितों की भूमिका की जांच कर रही है। हालांकि, अभी पुलिस की ओर से आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।


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