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अब नहीं चलेगी फिल्म पाइरेसी! सरकार ने टेलीग्राम को दिया अल्टीमेटम

अब नहीं चलेगी फिल्म पाइरेसी! सरकार ने टेलीग्राम को दिया अल्टीमेटम

पूजा भट्ट
डिजिटल पाइरेसी पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण (I&B) मंत्रालय ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) को नोटिस जारी करते हुए उस पर अवैध रूप से शेयर किए जा रहे फिल्मों और OTT कंटेंट के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने टेलीग्राम से कहा है कि वह पाइरेटेड कंटेंट को रोकने और हटाने के लिए उठाए गए सभी कदमों का विस्तृत ब्योरा 15 दिनों के भीतर एक व्यापक ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ के रूप में सरकार को सौंपे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई भारत की तेजी से बढ़ रही क्रिएटर इकोनॉमी और मनोरंजन उद्योग को डिजिटल पाइरेसी से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से की गई है। नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज़ होने के कुछ ही घंटों के भीतर टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी तरीके से उपलब्ध होने लगती हैं, जिससे फिल्म निर्माताओं, OTT प्लेटफॉर्म्स, प्रसारण कंपनियों, कंटेंट क्रिएटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। सरकार का मानना है कि ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना जरूरी है ताकि कंटेंट निर्माताओं के अधिकार सुरक्षित रह सकें और डिजिटल इकोनॉमी को मजबूती मिले।
टेलीग्राम इससे पहले भी सरकार की जांच के दायरे में आ चुका है। जून 2026 में NEET-UG पुनर्परीक्षा से पहले प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील सामग्री के प्रसार और अन्य मामलों को लेकर उस पर कार्रवाई की गई थी। अब एक बार फिर सरकार ने प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करते हुए स्पष्ट किया है कि कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठाना उसकी जिम्मेदारी है।
इस बीच, सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स की निगरानी का दायरा भी बढ़ा दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टेलीग्राम, सिग्नल (Signal) और मेटा (Meta) को उनके ‘यूज़रनेम’ (Username) फीचर को लेकर नोटिस जारी किया है। मंत्रालय ने इन कंपनियों से पूछा है कि इस फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए उन्होंने कौन-कौन से सुरक्षा उपाय किए हैं और यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य की पहचान का इस्तेमाल करने की कोशिश करता है तो उसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है।
सरकार का मानना है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो यूज़रनेम फीचर साइबर अपराधियों के लिए लोगों को निशाना बनाना आसान बना सकता है। नोटिस में कहा गया है कि इस सुविधा का इस्तेमाल ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर घोटालों और सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, कंपनियों या अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए किया जा सकता है। सरकार को आशंका है कि इससे पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
केंद्र सरकार ने मेटा से यह भी कहा है कि जब तक इस फीचर को लेकर सरकार के साथ आवश्यक चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सभी सुरक्षा पहलुओं पर संतोषजनक स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक इसे लॉन्च न किया जाए। हालांकि, व्हाट्सएप ने दावा किया है कि उसने यूज़रनेम फीचर के लिए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है। कंपनी के अनुसार यह फीचर अभी लाइव नहीं हुआ है और इसे इस वर्ष के अंत तक चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। व्हाट्सएप का कहना है कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों, वेरिफाइड अकाउंट्स और प्रमुख ब्रांड्स से जुड़े यूज़रनेम पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं ताकि केवल उनके वास्तविक मालिक ही उनका उपयोग कर सकें। इसके अलावा, ऐसे नाम जो प्रसिद्ध अकाउंट्स से मिलते-जुलते हैं, उन्हें भी फिलहाल होल्ड पर रखा गया है ताकि किसी तरह की फर्जी पहचान या धोखाधड़ी की संभावना को कम किया जा सके।
अब सभी की निगाहें टेलीग्राम की 15 दिनों में आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी। माना जा रहा है कि डिजिटल पाइरेसी, कॉपीराइट संरक्षण और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर आने वाले समय में टेक कंपनियों के लिए नियम और अधिक सख्त किए जा सकते हैं, ताकि क्रिएटर्स के अधिकार सुरक्षित रहें और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को साइबर धोखाधड़ी से बेहतर सुरक्षा मिल सके।


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