Tuesday, October 6th, 2026

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सरकारी नौकरी और विदेश भेजने के नाम पर 2 करोड़ की ठगी, जम्मू-कश्मीर में फर्जी गृह मंत्रालय का नेटवर्क पकड़ा गया

सरकारी नौकरी और विदेश भेजने के नाम पर 2 करोड़ की ठगी, जम्मू-कश्मीर में फर्जी गृह मंत्रालय का नेटवर्क पकड़ा गया

सरकारी नौकरी और विदेश भेजने के नाम पर 2 करोड़ की ठगी, जम्मू-कश्मीर में फर्जी गृह मंत्रालय का नेटवर्क पकड़ा गया

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी और विदेश में दाखिले का सपना दिखाकर लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठने वाले कथित ठगी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी विभागों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को नौकरी, एसपीओ नियुक्ति, सरकारी मंजूरी और विदेश भेजने का भरोसा दिलाते थे। पुलिस ने मामले में एक अधिवक्ता जहांगीर अहमद डार और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फ्रंट (जेकेपीएफ) के चेयरमैन फिरदौस नबी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क कथित तौर पर वर्ष 2019 से सक्रिय था और अब तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है। प्रारंभिक जांच में करीब दो करोड़ रुपये की ठगी की बात सामने आई है। पुलिस को संदेह है कि गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है, जिसकी जांच की जा रही है।

मामला उस समय सामने आया जब 17 अगस्त 2026 को बीरवाह थाने में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उससे एसपीओ की नौकरी दिलाने के नाम पर करीब तीन लाख रुपये लिए गए थे। इसके बदले उसे गृह मंत्रालय के नाम से जारी एक कथित नियुक्ति और सिफारिश पत्र दिया गया।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दस्तावेज में तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव का नाम इस्तेमाल किया गया था और पत्र जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक को संबोधित था। कथित पत्र में बड़गाम के अलग-अलग गांवों के 10 युवाओं को विशेष पुलिस अधिकारी के तौर पर नियुक्त करने का उल्लेख किया गया था।

पुलिस के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर जहांगीर अहमद डार की कथित भूमिका सामने आई। इसके बाद जम्मू के नानक नगर स्थित उसके किराये के ठिकाने पर छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान पुलिस को फर्जी सरकारी आदेश, मुहरें, 12 एटीएम कार्ड, खाली बैंक लेटरहेड, पहचान पत्र के अलावा पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज मिले।

जांच टीम को एक डायरी भी बरामद हुई है। पुलिस का दावा है कि इसमें कथित तौर पर पैसों के लेन-देन का विवरण दर्ज था। बरामद सामग्री के आधार पर पुलिस अब गिरोह के काम करने के तरीके और उसके संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर ठगी का एक पैटर्न सामने आया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य पहले लोगों से छोटी रकम लेते थे और काम होने का भरोसा दिलाकर उनका विश्वास हासिल करते थे। इसके बाद सरकारी नौकरी, नियुक्ति, सरकारी योजनाओं की मंजूरी या सब्सिडी दिलाने के नाम पर उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी।

जांच में 2.3 लाख रुपये, 15 लाख रुपये और 27 लाख रुपये की कथित ठगी से संबंधित शिकायतें भी सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और दिहाड़ी मजदूरों को भी इस नेटवर्क ने निशाना बनाया।

आरोपियों द्वारा तैयार किए गए कथित फर्जी दस्तावेज पीड़ितों को व्हाट्सऐप के ‘व्यू वन्स’ फीचर के माध्यम से भेजे जाते थे। इस तरीके से दस्तावेज को सीमित समय के लिए दिखाकर उसके दोबारा इस्तेमाल या सुरक्षित रखे जाने की संभावना कम करने की कोशिश की जाती थी।

पासपोर्ट और वीजा से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कथित नेटवर्क के जम्मू-कश्मीर से बाहर या विदेश में भी कोई संपर्क था या नहीं।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी कथित नेटवर्क के बड़े हिस्से से जुड़े हो सकते हैं। उनसे पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों और ठगी के शिकार लोगों की पहचान की जा रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई गई है।


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