Thursday, September 24th, 2026

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TMC नाम-चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगी अंतिम फैसले की समयसीमा

TMC नाम-चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगी अंतिम फैसले की समयसीमा

TMC नाम-चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगी अंतिम फैसले की समयसीमा

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम निर्णय की समयसीमा बताने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ने गुरुवार को ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। ममता बनर्जी ने आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत TMC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फ्रीज किया गया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू से पूछा कि विवाद पर अंतिम फैसला कब तक लिया जा सकता है। वहीं, ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने से उनकी ओर प्रभावी राहत का विकल्प प्रभावित हुआ है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग को मामले की सुनवाई शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग जरूरत पड़ने पर कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है और दोनों पक्षों को अपने दस्तावेज व साक्ष्य रखने का अवसर देकर विवाद का निपटारा कर सकता है।

पश्चिम बंगाल में 6 अक्तूबर को विधानसभा उपचुनाव होना है। जस्टिस बागची ने भी सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया शुरू होने का उल्लेख किया। इस पर कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा रही है।

चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के तहत दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए गए हैं। दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम के इस्तेमाल से भी रोका गया है, जबकि मूल चुनाव चिह्न को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। आयोग के अनुसार, चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

चार हाईकोर्ट में 12 अतिरिक्त जज होंगे स्थायी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाईकोर्ट में कार्यरत 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी जज बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की 23 सितंबर को हुई बैठक में आंध्र प्रदेश, केरल, उत्तराखंड और गुवाहाटी हाईकोर्ट से जुड़े प्रस्तावों पर फैसला लिया गया।

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों को स्थायी नियुक्ति देने की मंजूरी मिली है। इनमें जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम, जस्टिस थूटा चंद्र धन शेखर, जस्टिस चल्ला गुणरंजन, जस्टिस अवधनम हरिहरनाध शर्मा और डॉ. जस्टिस यदवल्ली लक्ष्मण राव शामिल हैं।

केरल हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त जजों के नाम भी स्थायी नियुक्ति के लिए मंजूर किए गए हैं। इनमें जस्टिस पी. कृष्ण कुमार, जस्टिस केवी जयकुमार, जस्टिस मुरली कृष्ण एस., जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन और जस्टिस पीवी बालकृष्णन शामिल हैं।

इसके अलावा उत्तराखंड हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस सुभाष उपाध्याय और गुवाहाटी हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज जस्टिस कौशिक गोस्वामी को स्थायी जज बनाए जाने के प्रस्ताव को भी कॉलेजियम ने मंजूरी दी है।

आमतौर पर अतिरिक्त जजों की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होती है। स्थायी नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा है। अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्तियों को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

AAP नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का ED को नोटिस
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी नेता दीपक सिंगला की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब मांगा है। सिंगला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 9 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व वी. मोहना की पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए ईडी को नोटिस जारी किया। सिंगला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा। ईडी ने सिंगला को 18 मई को गिरफ्तार किया था।

मामला महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी कथित बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है। सीबीआई ने 2018 में तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के एक सहायक महाप्रबंधक की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि कंपनी ने सिंगापुर स्थित सहयोगी कंपनी, कुछ निजी लोगों और बैंक के एक अधिकारी के साथ मिलकर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट में कथित तौर पर बदलाव किए। जांच में बैंक को करीब 155.21 करोड़ रुपये के कथित नुकसान की बात सामने आई थी, जबकि कंपनी पर मूल बकाया राशि करीब 239.46 करोड़ रुपये बताई गई। सीबीआई ने 10 अगस्त 2020 को मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।

इसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत जांच शुरू की। एजेंसी ने आरोप लगाया कि विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट की राशि 21.47 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 173.03 करोड़ रुपये की गई और आयात से संबंधित दस्तावेजों में भी कथित फर्जीवाड़ा हुआ।

ईडी ने अपनी दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत में सिंगला को आरोपी बनाया। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने मुख्य आरोपियों को कथित तौर पर अपराध से हासिल रकम छिपाने, अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित करने और विभिन्न खातों व संस्थाओं के माध्यम से घुमाने में मदद की।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ईडी की ओर से पेश सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया सिंगला की भूमिका की जांच जरूरी दिखाई देती है। अब सुप्रीम कोर्ट ईडी का जवाब मिलने के बाद जमानत याचिका पर आगे सुनवाई करेगा।


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