Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

अदालत का बड़ा फैसला— अल-फलाह समूह के चेयरमैन जावद सिद्दीकी की 13 दिन की ईडी रिमांड मंजूर

अदालत का बड़ा फैसला— अल-फलाह समूह के चेयरमैन जावद सिद्दीकी की 13 दिन की ईडी रिमांड मंजूर

अदालत का बड़ा फैसला— अल-फलाह समूह के चेयरमैन जावद सिद्दीकी की 13 दिन की ईडी रिमांड मंजूर

अदालत ने माना—अपराध से अर्जित है 415 करोड़ की राशि, जांच में सहयोग जरूरी

नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अल-फलाह समूह के चेयरमैन और विश्वविद्यालय के संस्थापक जावद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 13 दिन की ईडी हिरासत में भेजने का निर्णय लिया है। मध्यरात्रि के बाद जज के चैंबर में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोप अत्यंत गंभीर हैं और जांच को आगे बढ़ाने के लिए अभियुक्त की कस्टडी आवश्यक है।

रात 11 बजे जज के आवास पर हुई कार्रवाई

साकेत अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान के घर पर देर रात पेश किए गए जावद सिद्दीकी को अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद ईडी को सौंप दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सिद्दीकी पर फर्जी मान्यता दिखाकर विश्वविद्यालय चलाने, अवैध धन हस्तांतरण और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं, जिनकी गहराई से जांच जरूरी है।

ईडी ने पीएमएलए धारा 19 के तहत की गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय ने सिद्दीकी को 18 नवंबर की रात मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने अदालत को बताया कि जांच शुरुआती दौर में है और आरोपियों से पूछताछ कर उन लोगों की पहचान करनी है, जो धन के प्रवाह, फर्जी कागजात और वित्तीय अनियमितताओं में शामिल रहे।
ईडी का कहना है कि यदि हिरासत न मिली तो सबूत नष्ट होने और गवाहों पर दबाव बनाने की आशंका बढ़ सकती है।

415 करोड़ रुपये की संदिग्ध कमाई पर नजर

एजेंसी द्वारा कोर्ट में पेश वित्तीय आकलन के अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच अल-फलाह संस्थान ने फीस और अन्य शैक्षणिक मदों से लगभग 415.10 करोड़ रुपये की आय प्राप्त की। ईडी का आरोप है कि यह पूरी कमाई गलत तरीके से प्राप्त की गई थी, क्योंकि इस दौरान विश्वविद्यालय की मान्यता और वैधानिक स्थिति को सार्वजनिक रूप से भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया था।

कोर्ट ने माना—धनराशि अपराध से अर्जित

अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि धन, धोखाधड़ी व जालसाजी जैसी गतिविधियों का प्रत्यक्ष परिणाम है और यह पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर ईडी की मांग स्वीकार करते हुए सिद्दीकी को 13 दिन की हिरासत में भेजा गया।

लाल किला कार बम धमाका मामले से जुड़े तार

जांच एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी लंबे समय से संदिग्ध वित्तीय और नेटवर्क गतिविधियों के कारण निगरानी में थी। लाल किला कार बम धमाके के मुख्य आरोपियों में से एक, डॉक्टर उमर नबी, इसी विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़ा रहा है। इसके अलावा सफेदपोश आतंकी नेटवर्क में पकड़े गए कई व्यक्तियों के भी संस्थान से संबंध पाए गए।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की दो FIR के आधार पर शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच में विश्वविद्यालय के करीब 25 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसके बाद सिद्दीकी की गिरफ्तारी की गई।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp