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जिला कारागार में बंदियों ने सीखा मोमबत्ती-अगरबत्ती निर्माण का हुनर

जिला कारागार में बंदियों ने सीखा मोमबत्ती-अगरबत्ती निर्माण का हुनर

जिला कारागार में बंदियों ने सीखा मोमबत्ती-अगरबत्ती निर्माण का हुनर

दस दिवसीय प्रशिक्षण में 21 बंदियों ने लिया हिस्सा, स्वरोजगार से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

पौड़ी- जिला कारागार पौड़ी में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की ओर से आयोजित 10 दिवसीय मोमबत्ती एवं अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को समापन हो गया। प्रशिक्षण में 21 बंदियों ने प्रतिभाग कर मोमबत्ती और विभिन्न प्रकार की अगरबत्ती बनाने का हुनर सीखा। बंदियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण आयोजित किया गया, ताकि सजा पूरी होने के बाद वे सीखे हुए हुनर के माध्यम से स्वरोजगार शुरू कर परिवार का भरण-पोषण कर सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें।

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने प्रशिक्षणार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के साथ-साथ जेल में निरुद्ध बंदियों को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने बंदियों से कहा कि सजा पूरी होने के बाद सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर प्रशिक्षण में सीखे हुनर को रोजगार का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि इससे बंदी समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नए सिरे से जीवन की शुरुआत कर सकेंगे।

मास्टर ट्रेनर आशा नेगी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को मोमबत्ती, अगरबत्ती सहित विभिन्न प्रकार की अगरबत्तियां बनाने की विधि सिखाई गई। उन्होंने कहा कि सभी प्रशिक्षणार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण लिया। उम्मीद है कि यहां सीखे हुनर को भविष्य में रोजगार का आधार बनाकर वे अपने परिवार का बेहतर ढंग से भरण-पोषण कर सकेंगे।

कारागार अधीक्षक कौशल कुमार ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि जेलों को सुधार एवं पुनर्वास के साथ ही कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जाय। बंदियों को विभिन्न रोजगारपरक कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जेल से बाहर जाने के बाद बंदी सीखे हुए हुनर को अपनाकर परिवार के साथ सम्मानजनक जीवन शुरू कर सकें, इसी दिशा में कौशल विकास कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


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