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अवैध घुसपैठ से बिगड़ा राज्य का सामाजिक संतुलन– हिमंत बिस्वा सरमा

अवैध घुसपैठ से बिगड़ा राज्य का सामाजिक संतुलन– हिमंत बिस्वा सरमा

अवैध घुसपैठ से बिगड़ा राज्य का सामाजिक संतुलन– हिमंत बिस्वा सरमा

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने अवैध घुसपैठ को बताया बड़ी चुनौती

गुवाहाटी। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम की जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य की मौजूदा परिस्थितियां संतोषजनक नहीं हैं और इसकी एक बड़ी वजह लंबे समय से जारी अवैध घुसपैठ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस घुसपैठ का सीधा असर राज्य के सामाजिक संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा है।

अवैध घुसपैठ को बताया बड़ी चुनौती

सीएम सरमा ने आरोप लगाया कि असम में मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से अवैध रूप से आया है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया उस दौर में तेज हुई, जब राज्य और केंद्र में कांग्रेस की सरकारें थीं। मुख्यमंत्री का कहना है कि उस समय सीमा प्रबंधन में लापरवाही बरती गई, जिससे समस्या और गंभीर हो गई।

सुरक्षा को लेकर जताई आशंका

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में राज्य के कुछ तत्व बाहरी हितों का समर्थन कर सकते हैं, जो आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने अवैध प्रवास को न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बताया।

सरकार के कदम

सीएम सरमा ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की पहचान, जमीन और संसाधनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई, सीमा पर निगरानी मजबूत करने और नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार ऐतिहासिक भूलों को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है।

विपक्ष का पलटवार

मुख्यमंत्री के बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। उनका कहना है कि अवैध प्रवास का मुद्दा संवेदनशील है और इसे राजनीतिक बयानबाजी की बजाय संवैधानिक और मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए।

दशकों पुराना संवेदनशील मुद्दा

गौरतलब है कि असम में अवैध प्रवास का सवाल दशकों से राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर हुए आंदोलनों और समझौतों ने राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है।


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