Friday, September 18th, 2026

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हरिपुर कालसी को मिली बड़ी आध्यात्मिक सौगात, मुख्यमंत्री धामी ने किया माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण

हरिपुर कालसी को मिली बड़ी आध्यात्मिक सौगात, मुख्यमंत्री धामी ने किया माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण

हरिपुर कालसी को मिली बड़ी आध्यात्मिक सौगात, मुख्यमंत्री धामी ने किया माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण

“ 2100 दीपों से जगमगाया यमुना तट”

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर कालसी पहुंचकर क्षेत्र को धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सौगातें दीं। मुख्यमंत्री ने माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण करने के साथ हरिघाट का लोकार्पण और माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया। इस दौरान माँ यमुना के पावन तट पर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम और यमुना आरती का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ साधु-संतों, श्रद्धालुओं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के दौरान कालसी का यमुना तट श्रद्धा और आस्था के रंग में डूबा नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने माँ यमुना के तट पर दीप प्रज्वलित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री के साथ साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने भी दीप जलाए। इस अवसर पर कुल 2100 दीप प्रज्वलित किए गए, जिससे यमुना का पावन तट रोशनी से जगमगा उठा।

दीपों की जगमगाहट के बीच मुख्यमंत्री ने साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ माँ यमुना की आरती में श्रद्धापूर्वक प्रतिभाग किया। आरती के दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई। पूरे आयोजन के दौरान यमुना तट पर आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा।

कालसी की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई मजबूती

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कालसी की धरती इतिहास, आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है। माँ यमुना की प्रतिमा का अनावरण, हरिघाट का लोकार्पण और यमुना आरती जैसे आयोजन क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी कालसी के धार्मिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हनोल मास्टर प्लान के लिए 150 करोड़ रुपये मंजूर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जौनसार-बावर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में हनोल मास्टर प्लान के लिए 150 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अवस्थापना सुविधाओं को विकसित करने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि लाखामंडल समेत जौनसार क्षेत्र के अन्य ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है।

पर्यटन विस्तार से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल तीर्थ और पर्यटन स्थलों का विकास करना नहीं है, बल्कि इन विकास कार्यों का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाना भी है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, परिवहन, खान-पान और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर की विशिष्ट लोक संस्कृति, परंपराएं, वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य उत्तराखंड की अमूल्य धरोहर हैं। सरकार विकास के साथ इन परंपराओं और विरासत के संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।

आस्था, विरासत और विकास को जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। चारधाम के साथ प्रदेश के विभिन्न पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कालसी, हनोल, लाखामंडल और जौनसार-बावर क्षेत्र के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को नई पहचान देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड की आस्था और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर प्रदेश के विकास और स्थानीय रोजगार का आधार बनाया जाए।

कार्यक्रम में विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि, अन्य जनप्रतिनिधि, विभिन्न साधु-संत और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।


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