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जमरानी बांध परियोजना में लापरवाही पर मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पांडे सख्त, धीमी प्रगति और मलबा निस्तारण पर जताई नाराजगी

जमरानी बांध परियोजना में लापरवाही पर मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पांडे सख्त, धीमी प्रगति और मलबा निस्तारण पर जताई नाराजगी

जमरानी बांध परियोजना में लापरवाही पर मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पांडे सख्त, धीमी प्रगति और मलबा निस्तारण पर जताई नाराजगी

हल्द्वानी : जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशानुसार, बुधवार को मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे ने जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का स्थलीय निरीक्षण एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति, मलबा निस्तारण, पुनर्वास, गुणवत्ता नियंत्रण और सामाजिक दायित्व से जुड़े कई गंभीर मुद्दे सामने आए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था को सभी कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

निरीक्षण में पाया गया कि मलबा निस्तारण के लिए तीन डंपिंग साइटों का चयन किया गया है, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही साइट का उपयोग किया जा रहा है। उक्त स्थल पर भी वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से मलबे का निस्तारण नहीं हो रहा है। नदी किनारे डाले गए मलबे का हिस्सा बारिश के दौरान नदी में बह रहा है, जबकि अन्य चयनित डंपिंग साइटों पर अब तक कार्य शुरू नहीं किया गया है।

मुख्य विकास अधिकारी ने सभी डंपिंग साइटों को शीघ्र विकसित कर पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप मलबा निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) नीति के अंतर्गत लगभग 408 करोड़ रुपये के मुआवजे की भी समीक्षा की गई।

परियोजना केअधिकारियों ने बताया कि अभी लगभग 68 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित होना शेष है, जबकि लगभग 12 करोड़ रुपये से जुड़े 14 परिवारों के मामले मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) में लंबित हैं। मुख्य विकास अधिकारी ने इन मामलों का शीघ्र निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली थर्ड पार्टी एजेंसी पिछले चार-पांच महीनों से साइट का निरीक्षण नहीं कर रही है, जबकि नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में निरीक्षण किया जाना आवश्यक है। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में परियोजना पर मैनपावर एवं मशीनरी क्षमता से कम कार्यरत है, जिसके कारण निर्माण कार्यों की कम प्रगति हो रही है। वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले परियोजना पीछे चल रही है।मुख्य विकास अधिकारी ने संसाधनों में वृद्धि कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

बैठक में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए पराग फार्म में विकसित की जा रही कॉलोनी की प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

कॉर्पोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी (CER) नीति के तहत 13 करोड़ रुपये की लागत से प्रभावित क्षेत्र के 19 गांवों में 1,175 सोलर लाइटें लगाए जाने की योजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि स्थापना कार्य जिला प्रशासन की निगरानी में कराया जाए। पिछले वर्ष लगाई गई सोलर लाइटों का एसडीएम एवं पीओ उरेडा की संयुक्त समिति द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाएगा तथा नई सोलर लाइटों की खरीद भी जिला प्रशासन के पर्यवेक्षण में होगी।

सामाजिक दायित्व के तहत शिक्षा, शौचालय, स्मार्ट क्लास सहित अन्य विकास कार्यों के लिए निर्धारित 13 करोड़ रुपये (पांच वर्ष) की राशि में अब तक केवल 40 लाख रुपये खर्च किए जाने पर मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने वर्षवार बजट का स्पष्ट विभाजन कर प्रभावित गांवों के लिए कार्ययोजना तैयार करने तथा सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक ललित कुमार, हिमांशु पंत सहित परियोजना से जुड़े अधिकारी तथा जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी डॉ. मुकेश नेगी,यूयूएसडीए के परियोजना प्रबंधक कुलदीप कुमार सहित जमरानी बांध परियोजना के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस दौरान परियोजना के महाप्रबंधक मौके पर उपस्थित नहीं पाए गए इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की।


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