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“हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ खुले तुंगनाथ मंदिर के कपाट

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“हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ खुले तुंगनाथ मंदिर के कपाट

सैकड़ों श्रद्धालु बने इस पावन क्षण के साक्षी

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट आज विधि-विधान और शुभ मुहूर्त के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा धाम भक्तिमय वातावरण में डूब गया और सैकड़ों श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बने।

बाबा तुंगनाथ के कपाटोद्घाटन के अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था, जहां फूलों की आकर्षक सजावट ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। करीब साढ़े सात सौ से अधिक भक्तों ने इस ऐतिहासिक पल को प्रत्यक्ष देखा और भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कपाट खुलने से पहले भगवान की चल उत्सव डोली चोपता से सुबह धाम के लिए रवाना हुई। कठिन चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ डोली के साथ चलते रहे। जयकारों और भक्ति गीतों के बीच डोली मंदिर परिसर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।

मंदिर पहुंचने के बाद डोली की परिक्रमा कर उसे पार्वती मंदिर में विराजमान किया गया। इसके बाद हक-हकूकधारी ब्राह्मणों द्वारा गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की गई। परंपरा के अनुसार स्वयंभू शिवलिंग का पूजन कर उसे जागृत किया गया, जिसके बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

कपाट खुलने के साथ ही भक्तों ने जलाभिषेक और पूजा कर भगवान तुंगनाथ का आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।

इस पावन अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, धार्मिक गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने इस दिव्य आयोजन में भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की।


मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा, स्वच्छ, हरित और सुरक्षित वातावरण केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की नींव है

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व पृथ्वी दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, हरित और सुरक्षित वातावरण केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की नींव है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व पृथ्वी दिवस हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस अवसर पर सभी लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्प लें और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित एवं जिम्मेदारी से उपयोग करें।

उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि इन संसाधनों के संरक्षण में जनभागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने लोगों से पर्यावरण के प्रति जागरूक रहते हुए हर स्तर पर योगदान देने का आह्वान किया।


एनडीएमए सदस्य डाॅ. असवाल ने आपदा की तैयारियों को परखा

आपदा का कारण न बनें विकास कार्य-असवाल

कहा-जीरो डेथ का लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में करें कार्य

देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डाॅ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि आपदाओं में जीरो डेथ का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब जोखिम के प्रभाव को न्यूनतम किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास आवश्यक है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि विकास कार्य किसी नई आपदा का कारण न बनें।

यूएसडीएमए में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में डाॅ. असवाल ने आपदा प्रबंधन विभाग एवं राज्य के सभी 13 जनपदों की तैयारियों का व्यापक आकलन किया। उन्होंने जनपदों की क्षमताओं का परीक्षण करते हुए तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया, साथ ही निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन के तहत आपदा जोखिम न्यूनीकरण को केंद्र में रखते हुए कार्य किया जाए तथा आपदा पूर्व तैयारी, जोखिम पहचान और न्यूनीकरण उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने एसडीएमपी और डीडीएमपी की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण में यह मील का पत्थर साबित होंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम का विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए एनडीएमए स्तर पर हर संभव तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग का भरोसा दिलाया। डाॅ. असवाल ने राज्य के सभी जनपदों में मोबाइल कनेक्टिविटी के लिहाज से शैडो एरिया को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की सूची एनडीएमए को भेजी जाए। इन क्षेत्रों में संचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एनडीएमए टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश देगा।

बैठक के दौरान सचिव विनोद कुमार सुमन ने नदियों के चैनलाइजेशन के लिए ड्रेजिंग कार्यों हेतु एसडीआरएफ फंड में छूट प्रदान किए जाने का अनुरोध किया। इस पर डाॅ. असवाल ने कहा कि राज्य सरकार प्रस्ताव प्रस्तुत करे, जिसे एनडीएमए स्तर पर प्राथमिकता के साथ विचार कर आवश्यक छूट दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के अनुरोध पर भी उन्होंने सकारात्मक आश्वासन दिया।

युवा आपदा मित्र योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने सामुदायिक सशक्तीकरण को आपदा प्रबंधन की सबसे मजबूत कड़ी बताया और अधिक से अधिक लोगों को प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि उपकरणों, मानव संसाधनों, संवेदनशील क्षेत्रों एवं गांवों की विस्तृत जीआईएस मैपिंग कर उन्हें जिला आपदा प्रबंधन योजना में शामिल किया जाए।

उन्होंने राज्य के सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, मॉल, अपार्टमेंट एवं स्टेडियम के लिए आपदा प्रबंधन योजना की अनिवार्यता पर बल दिया। इस संबंध में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने अवगत कराया कि रेखीय विभागों के प्लान तैयार किए जा चुके हैं तथा अन्य संस्थानों के प्लान तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से प्रगति पर है।

डाॅ. असवाल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रत्येक माह कम से कम एक बार सेना, वायु सेना, एसएसबी, बीएसएफ, एनडीआरएफ एवं अन्य अर्द्धसैनिक बलों के साथ समन्वय बैठक अवश्य करें, ताकि आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। बैठक में सचिव खाद्य आनंद स्वरूप, एसीईओ प्रशासन महावीर सिंह चैहान, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार आदि उपस्थित रहे।

पिरूल से बनाएं ब्रिकेट, एनडीएमए फंडिंग के लिए तैयार
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डाॅ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में वनाग्नि की घटनाओं का एक प्रमुख कारण पिरूल है, जिसे यदि सही तरीके से उपयोग में लाया जाए तो यह समस्या के बजाय एक उपयोगी संसाधन बन सकता है। उन्होंने बताया कि पिरूल से ब्रिकेट (ईंधन के ठोस ब्लॉक) बनाने की पहल को बढ़ावा देने के लिए एनडीएमए बड़े स्तर पर फंडिंग करने के लिए भी तैयार है। इस दिशा में उन्होंने सभी जनपदों से प्रस्ताव तैयार कर एनडीएमए को भेजने को कहा। डाॅ. असवाल ने यह भी सुझाव दिया कि पिरूल के प्रभावी और बड़े पैमाने पर एकत्रीकरण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया, जिससे कार्य अधिक तेज, सुरक्षित और दक्ष तरीके से किया जा सके।

आपदा सुरक्षित नए गांव और कस्बे बसाए जाएं
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डाॅ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के अत्यधिक संवेदनशील गांवों से लोगों का चरणबद्ध विस्थापन सुरक्षित स्थानों पर नए गांव और कस्बे बसाकर किया जाए। उन्होंने हर जिले में एक माॅडल गांव/कस्बा बसाने का सुझाव दिया जो हर प्रकार की आपदा के लिहाज से पूर्णतः सुरक्षित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद नाजुक हैं, इसलिए बसावट और निर्माण की योजना उसी के अनुरूप बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में ऐसे निर्माण को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है, जो स्थानीय भौगोलिक संवेदनशीलता के अनुकूल हों और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित न करें। इसके लिए बिल्डिंग बायलॉज में आवश्यक संशोधन किए जाएं और उन्हें सख्ती से लागू किया जाए। डाॅ. असवाल ने निर्देश दिए कि यूएसडीएमए इन मानकों की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करे, ताकि नियमों का पालन जमीन पर भी दिखाई दे और भविष्य में आपदा जोखिम को कम किया जा सके।

आपदा प्रबंधन में डिजीटल ट्विन तकनीक अपनाने पर जोर
देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य डाॅ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल ट्विन तकनीक को लागू करने का सुझाव दिया, जिससे संभावित आपदाओं का पहले से आकलन कर बेहतर तैयारी की जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स को भी अवसर दिए जाएं, ताकि नई तकनीकों और समाधान का उपयोग कर आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाया जा सके।


विधि-विधान के साथ खुले केदारनाथ धाम के कपाट

“हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजा बाबा का धाम

सीएम धामी ने धाम पहुंचकर की विशेष पूजा-अर्चना

प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं को पांच संकल्प अपनाने का दिया संदेश

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय बाबा केदार” के जयघोषों से गूंज उठा। इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु धाम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी धाम पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली की कामना की, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धालुओं को पांच संकल्प अपनाने का संदेश दिया।

मंदिर को इस वर्ष करीब 51 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया, जिसने केदारपुरी को दिव्य आभा से भर दिया। कपाट खुलने से पहले बाबा केदार की पंचमुखी डोली ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होकर कठिन पैदल मार्ग तय करते हुए केदारनाथ पहुंची। जंगलचट्टी, रामबाड़ा, लिनचोली और बेस कैंप होते हुए यह डोली धाम पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया।

डोली के मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद परिक्रमा और विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान सैन्य बैंड की मधुर धुनों और डमरू की गूंज से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस और आईटीबीपी के जवानों की तैनाती के साथ पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ यात्रा का विधिवत आगाज हो गया है। श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए भारी उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए संदेश में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सेवा भावना, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा और यात्रा नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया गया है।

इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण को आस्था और भक्ति के साथ अनुभव किया।


आगामी नेशनल गेम्स में पदकों की संख्या बढ़ाने पर करें फोकस : रेखा आर्या

विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों के लिए गहन प्रशिक्षण शिविर लगाने पर जोर

आगामी नेशनल चैंपियनशिप जैसे आयोजन उत्तराखंड में कराने की तैयारी

देहरादून । नॉर्थ ईस्ट राज्यों में होने वाले 39 वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के पदकों की संख्या 38वें नेशनल गेम्स के मुकाबले और ज्यादा बढ़ाने पर फोकस किया जाएगा। सचिवालय के एफआरडीसी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में खेल मंत्री रेखा आर्या ने इसके निर्देश जारी किए।

बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि उन्होंने 24 घंटे के अंदर अधिकारियों को 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी की पूरी कार्य योजना बनाकर देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत खिलाड़ियों को गहन प्रशिक्षण दिए जाने, विभिन्न खेल संघों के साथ समन्वय बनाकर तैयारी करने और राष्ट्रीय खेलों से पहले विभिन्न खेलों की नेशनल चैंपियनशिप ज्यादा से ज्यादा संख्या में उत्तराखंड में आयोजित कराने के लिए कहा गया है।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अधिकारियों से कहा कि मेघालय व अन्य नॉर्थ ईस्ट राज्यों के पास अगर साइकिलिंग, शूटिंग जैसे खेलों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी हो तो उन्हें इसकी सुविधा उत्तराखंड में देने पर विचार किया जाए।

बैठक में हल्द्वानी की गौलापार में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की तैयारी की भी समीक्षा की गई। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि जुलाई से शैक्षिक सत्र शुरू करने के लिए आवश्यक करिकुलम कमेटी व परिनियमावली कमेटी बना दी गई है और पद सृजित करने की प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी के मामले में खेल विभाग चाहता है कि खेल विभाग में ही अधिसंख्य पद सृजित किए जाएं। इसके लिए तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश बैठक में अधिकारियों को दिए गए।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना, मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना और संविदा प्रशिक्षक नीति के शासनादेश में भी कुछ संशोधन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे कि इन योजनाओं के वास्तविक लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करने में मदद मिल सके।

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप उत्तराखंड में “एक जनपद एक खेल” नीति का प्रारूप तैयार कर लिया गया है और इस पर जल्द ही अमल शुरू कर दिया जाएगा।

बैठक में विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिन्हा, अपर निदेशक अजय अग्रवाल, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश मंमगाई, उपनिदेशक शक्ति सिंह आदि उपस्थित रहे।


मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई वन संसाधन प्रबंधन समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने अखरोट विकास योजना की प्रगति पर मांगी रिपोर्ट

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन समिति की उच्चाधिकार समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में समिति की विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा करते हुए कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

मुख्य सचिव ने अखरोट विकास कार्यक्रम के तहत लगाए गए पौधों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली और संबंधित प्रभागों के डीएफओ को इसका मूल्यांकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को इस योजना से हो रहे फलोत्पादन की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा, ताकि आगे की कार्ययोजना तैयार की जा सके।
बैठक में जापान के तकनीकी सहयोग से चल रहे मृदा अपरदन नियंत्रण और अवसाद आपदा शमन कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन तकनीकों के महत्वपूर्ण पहलुओं को आपदा प्रबंधन विभाग के साथ साझा किया जाए, जिससे राज्य में भूस्खलन नियंत्रण में सहायता मिल सके।

उन्होंने आजीविका से जुड़े स्वयं सहायता समूहों, क्लस्टर्स और राज्य स्तरीय फेडरेशन के क्षमता विकास, बाजार उपलब्धता और हैंडहोल्डिंग पर विशेष जोर दिया। साथ ही पिरूल की तर्ज पर लैंटाना के उपयोग और प्रबंधन पर भी कार्य करने की आवश्यकता बताई।

बैठक में पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, धीराज गर्ब्याल, सी. रविशंकर, एपीसीसीएफ नरेश कुमार, अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का किया स्थलीय निरीक्षण

पुल निर्माण का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जाए- मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त हुए पुल की कार्य प्रगति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुल निर्माण का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आमजन को आवागमन में सुविधा मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुल देहरादून और मसूरी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों का आवागमन होता है। उन्होंने कहा कि यातायात को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों ओर से आवागमन के लिए वैली ब्रिज का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है, जो दूसरी ओर से भी शीघ्र ही पूर्ण होकर संचालित हो जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थान पर स्थायी पुल का निर्माण कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है, जिसे आगामी 2 से 3 माह के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में सड़कों एवं पुलों के सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में सड़क एवं पुल निर्माण से संबंधित अनेक परियोजनाएं तेजी से क्रियान्वित की जा रही हैं, जिससे प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी चारधाम यात्रा एवं आदि कैलास यात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक अवसंरचनात्मक कार्यों को समय पर पूर्ण किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा कार्यों की प्रगति की निरंतर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।


सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने उपनल कर्मचारी के परिजनों को सौंपा ₹50 लाख की बीमा राशि का चैक

मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उपनल कर्मचारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए लगातार प्रयासरत है- गणेश जोशी

देहरादून। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अपने कैंप कार्यालय में दिवंगत उपनल कर्मचारी कविता गुसाईं के परिजनों को उपनल द्वारा पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से ₹50 लाख की शेष बीमा राशि का चेक प्रदान किया। इस दौरान दिवंगत कर्मचारी की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत उपनल (UPNL) कर्मचारियों के लिए ₹50 लाख का आकस्मिक दुर्घटना बीमा कवर सुनिश्चित किया गया है। ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को यह सहायता राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि अब तक 8 पीड़ित आश्रितों को यह बीमा राशि दी जा चुकी है। उन्होंने इस सहयोग के लिए पीएनबी बैंक के अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उपनल कर्मचारियों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बीमा राशि को ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि प्रभावित परिवारों को और अधिक राहत मिल सके।

गौरतलब है कि 10 जुलाई को कविता गुसाईं ड्यूटी से घर लौटते समय रायपुर-लाडपुर मार्ग पर एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई थी।

इस अवसर पर दिवगंत कर्मचारी की माता निर्मला देवी, निदेशक ब्रिगेडियर जेएनएस बिष्ट (सेवानिवृत्त), डीजीएम कर्नल राजेश नेगी (सेवानिवृत्त) एवं डीजीएम मेजर हिमांशु रौतेला (सेवानिवृत्त) पीएनबी बैंक जोनल मैनेजर अनुपम, डीजीएम पीएनबी अभिनंदन सिंह, एजीएम चर्तुभुज, आशीष सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री धामी ने मैक्स अस्पताल पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का जाना हालचाल

मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से ली उनके स्वास्थ्य की जानकारी 

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मैक्स अस्पताल, देहरादून में भर्ती पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (से.नि) का कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।


टिहरी में दर्दनाक सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर सरिये से लदे ट्रक से टकराई कार, एक महिला की मौत

हादसे में सात लोग घायल 

टिहरी। टिहरी जनपद के कौड़ियाला क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। ब्यासी के पास खड़े सरिये से लदे ट्रक से एक तेज रफ्तार कार जा टकराई, जिसमें एक महिला की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हो गए।

मिली जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब आठ बजे यह हादसा हुआ।  ब्यासी के पास एक सरिये से लदा ट्रक खड़ा था। इस दौरान दूसरी ओर से आ रही एक कार अचानक अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई। कार में कुल आठ लोग सवार थे, जिनमें पांच महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे।

घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान 55 वर्षीय धूमा देवी, पत्नी स्वर्गीय दिलवर सिंह के रूप में हुई है। उनका शव कार में बुरी तरह फंसा हुआ था, जिसे टीम ने वाहन को काटकर कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।

वहीं, हादसे में घायल हुए अन्य सात लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए एंबुलेंस के जरिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।


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