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मानसून में दही खाना सही है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

Category Archives: जीवन शैली

मानसून में दही खाना सही है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

बारिश का मौसम आते ही खानपान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। इन्हीं में से एक सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि क्या मानसून के दौरान दही खाना सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे सर्दी-जुकाम और कफ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दही पूरी तरह से नुकसानदायक नहीं है, लेकिन इसका सेवन सही समय और संतुलित मात्रा में करना जरूरी है।

दही प्रोबायोटिक्स से भरपूर खाद्य पदार्थ है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, बारिश के मौसम में नमी और तापमान में बदलाव के कारण कुछ लोगों का पाचन कमजोर हो सकता है। ऐसे में दही का अधिक या गलत समय पर सेवन परेशानी का कारण बन सकता है।

दही खाने के प्रमुख फायदे
पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मददगार।
आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक।
शरीर को जरूरी पोषक तत्व और ऊर्जा प्रदान करता है।
किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में दही का सेवन दिन के समय करना बेहतर माना जाता है। रात में दही खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे कुछ लोगों को पाचन संबंधी दिक्कत या कफ की समस्या हो सकती है। दही में भुना जीरा, काली मिर्च या सेंधा नमक मिलाकर खाने से यह अधिक सुपाच्य हो जाता है। साथ ही हमेशा ताजा और घर का बना दही ही खाना चाहिए।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?

जिन लोगों को पहले से सर्दी-जुकाम, अस्थमा, एलर्जी या कमजोर इम्यूनिटी की समस्या है, उन्हें दही का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। यदि दही खाने के बाद किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर की सलाह लेना उचित रहेगा।

कुल मिलाकर, मानसून में दही खाना पूरी तरह से वर्जित नहीं है। यदि इसे सही समय, उचित मात्रा और सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर के लिए लाभदायक साबित हो सकता है। वहीं, किसी भी स्वास्थ्य समस्या या विशेष परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या आहार संबंधी निर्णय के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

(साभार)


Full Body Checkup: क्या स्वस्थ व्यक्ति को भी हर साल कराना चाहिए हेल्थ चेकअप? जानिए किन टेस्ट्स की है जरूरत

आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले की तुलना में अधिक सतर्क हो गए हैं। हल्की-फुल्की परेशानी होने पर भी कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लड टेस्ट या फुल बॉडी हेल्थ चेकअप पैकेज बुक करा लेते हैं। वहीं, कुछ लोग हर तीन या छह महीने में पूरे शरीर की जांच कराना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी हर साल फुल बॉडी चेकअप कराना जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है, तो उसे बार-बार फुल बॉडी चेकअप कराने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, साल में एक बार कुछ जरूरी स्वास्थ्य जांच जरूर करानी चाहिए। कौन-कौन से टेस्ट कराए जाएं, यह व्यक्ति की उम्र, जीवनशैली, पारिवारिक बीमारी के इतिहास और स्वास्थ्य जोखिम (Risk Profile) पर निर्भर करता है।

साल में एक बार कराएं ये जरूरी टेस्ट

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार कुछ बेसिक हेल्थ टेस्ट जरूर कराने चाहिए। इनमें शामिल हैं—

  • ब्लड प्रेशर (Blood Pressure)
  • ब्लड शुगर (Blood Glucose)
  • लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल जांच)
  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
  • किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT)
  • थायरॉइड प्रोफाइल
  • हीमोग्लोबिन टेस्ट (एनीमिया की जांच)
  • विटामिन D और विटामिन B12 की जांच

इन जांचों से शरीर में होने वाली कई समस्याओं का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू करना आसान हो जाता है।

ब्लड टेस्ट के अलावा ये जांच भी हैं जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल ब्लड टेस्ट ही पर्याप्त नहीं हैं। समय-समय पर चेस्ट एक्स-रे और पेट का अल्ट्रासाउंड भी कराया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड के जरिए लिवर, किडनी, पित्ताशय और पेट के अन्य अंगों की स्थिति का पता चलता है। इससे फैटी लिवर जैसी समस्याओं की भी शुरुआती पहचान संभव हो सकती है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत?

जिन लोगों का वजन अधिक है या जो मोटापे से जूझ रहे हैं, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए क्योंकि मोटापा कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। वहीं, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए, ताकि बीमारी नियंत्रण में रहे और किसी जटिलता से बचा जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जरूरत बार-बार टेस्ट कराने के बजाय संतुलित जीवनशैली, नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर जरूरी जांच कराना ही बेहतर विकल्प है।


Mango Pickle Recipe: घर पर बनाएं स्वादिष्ट आम का अचार, इन आसान टिप्स से महीनों तक नहीं होगा खराब

भारतीय खाने में आम का अचार स्वाद का ऐसा तड़का है, जो साधारण भोजन को भी खास बना देता है। दाल-चावल, पराठा, पूरी या रोटी के साथ इसका स्वाद हर किसी को पसंद आता है। लेकिन कई बार घर पर बनाया गया अचार कुछ ही दिनों में खराब होने लगता है या उसमें फंगस लग जाती है। यदि अचार बनाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यह लंबे समय तक सुरक्षित और स्वादिष्ट बना रह सकता है।

अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे आम चुनें

स्वादिष्ट और टिकाऊ अचार बनाने के लिए सबसे पहले ताजे और सख्त कच्चे आम का चयन करें। आम को अच्छी तरह धोने के बाद साफ कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रखें कि आम पर जरा भी नमी न हो, क्योंकि यही अचार खराब होने की सबसे बड़ी वजह बनती है।

इसके बाद आम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उन पर थोड़ा नमक छिड़क दें और कुछ घंटों तक धूप में रखें। इससे आम का अतिरिक्त पानी निकल जाता है, जिससे अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

मसालों का सही संतुलन बढ़ाएगा स्वाद

आम के टुकड़ों में हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, सौंफ, मेथी दाना, कलौंजी, धनिया पाउडर, हींग, नमक और स्वादानुसार गरम मसाला मिलाएं। सभी मसालों को अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर टुकड़ा समान रूप से मसालों से ढक जाए। सही मात्रा में मसाले अचार का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाते हैं।

सरसों का तेल है सबसे जरूरी

आम के अचार में सरसों का तेल न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का भी काम करता है। तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करें और पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही मसालेदार आम में मिलाएं। इससे अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और उसका स्वाद भी बेहतर हो जाता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

अचार को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू का रस भी मिला सकते हैं। तैयार अचार को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे कांच के जार में भरें। जार का ढक्कन अच्छी तरह बंद रखें और उसे नमी वाली जगह पर रखने से बचें।

अचार तैयार होने के बाद करीब 10 दिनों तक इसे रख दें। इस दौरान बीच-बीच में केवल सूखे और साफ चम्मच से हल्का-सा चलाते रहें ताकि मसाले और तेल अच्छी तरह मिलते रहें। लगभग 10 दिन बाद अचार खाने के लिए तैयार हो जाएगा और समय के साथ इसका स्वाद और भी निखर जाएगा।

अचार को खराब होने से बचाने के आसान टिप्स

  • अचार बनाते समय पानी या नमी बिल्कुल न रहने दें।
  • हमेशा सूखे और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करें।
  • कांच के जार का उपयोग करें और उसे अच्छी तरह बंद रखें।
  • अचार निकालते समय केवल सूखा चम्मच ही इस्तेमाल करें।
  • जार को धूप या नमी वाली जगह पर रखने से बचें।

इन आसान उपायों को अपनाकर आप घर पर ऐसा आम का अचार तैयार कर सकते हैं, जो लंबे समय तक ताजा, स्वादिष्ट और सुरक्षित बना रहेगा।


बारिश में बच्चों पर सबसे ज्यादा मंडराता है मलेरिया का खतरा, इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलने लगती हैं। इनमें मलेरिया बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते लक्षणों की पहचान और उचित इलाज से मलेरिया को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

बच्चों में क्यों अधिक होता है मलेरिया का खतरा?

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मलेरिया का जोखिम वयस्कों की तुलना में अधिक होता है। इसके पीछे कई कारण हैं—

  • बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती।
  • वे लंबे समय तक बाहर खेलते हैं, जिससे मच्छरों के संपर्क में अधिक आते हैं।
  • छोटे बच्चे अपनी परेशानी या लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते।
  • कुपोषण या कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
  • पहली बार मलेरिया परजीवी के संपर्क में आने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

अगर घर या आसपास गंदा पानी जमा रहता है या साफ-सफाई की कमी है, तो संक्रमण का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

बच्चों में मलेरिया के शुरुआती लक्षण

शुरुआत में मलेरिया के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। ऐसे में इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—

  • तेज बुखार
  • ठंड लगना और कंपकंपी
  • अत्यधिक पसीना आना
  • सिरदर्द
  • कमजोरी और थकान
  • छोटे बच्चों में लगातार रोना या चिड़चिड़ापन
  • दूध या खाना न खाना
  • सुस्ती और सामान्य गतिविधियों में कमी

यदि बच्चा ऐसे क्षेत्र में रहता है जहां मलेरिया के मामले अधिक हैं, तो इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

समय पर इलाज न मिलने पर क्या हो सकता है?

इलाज में देरी होने पर मलेरिया गंभीर रूप ले सकता है। इसके कारण—

  • दौरे पड़ सकते हैं।
  • बेहोशी की स्थिति हो सकती है।
  • सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
  • किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं।
  • गंभीर मामलों में शरीर के कई अंगों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, समय पर जांच और सही उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी होता है।

बच्चों को मलेरिया से कैसे बचाएं?

  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
  • बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं।
  • रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।
  • घर की नियमित साफ-सफाई रखें।
  • बुखार आने पर स्वयं दवा देने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

अस्वीकरण  :  यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यदि बच्चे को तेज बुखार या मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।


15–20 मिनट में बनाएं टेस्टी मिनी पिज्जा बाइट्स, बच्चों से लेकर बड़ों तक आएंगे पसंद

शाम के समय हल्की भूख लगने पर अक्सर कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का मन करता है। ऐसे में हर बार बाहर से महंगा पिज्जा मंगाना संभव नहीं होता। यदि आप कम समय में घर पर ही पिज्जा जैसा स्वाद चाहते हैं, तो मिनी पिज्जा बाइट्स एक बेहतरीन विकल्प हैं। यह रेसिपी साधारण ब्रेड और कुछ बेसिक सामग्री से सिर्फ 15–20 मिनट में तैयार हो जाती है।

इस स्नैक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तवे या ओवन, दोनों में आसानी से बनाया जा सकता है। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से चीज़ी होने की वजह से यह बच्चों और बड़ों, दोनों को बेहद पसंद आता है। साथ ही, इसमें सब्जियों और चीज़ का संतुलित उपयोग होने से यह बाजार के तले-भुने स्नैक्स की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है।

सामग्री

  • 6–8 ब्रेड स्लाइस या मिनी पिज्जा बेस
  • 4–5 चम्मच पिज्जा सॉस
  • 1 कप मोजरेला चीज़ (कद्दूकस किया हुआ)
  • ½ कप शिमला मिर्च (बारीक कटी हुई)
  • ½ कप प्याज (बारीक कटा हुआ)
  • ½ कप टमाटर (बीज निकालकर बारीक कटे हुए)
  • 3–4 चम्मच उबले हुए स्वीट कॉर्न
  • 1 चम्मच ऑरिगेनो
  • 1 चम्मच चिली फ्लेक्स
  • 2–3 चम्मच बटर

बनाने की विधि

  1. सबसे पहले ब्रेड स्लाइस को गोल आकार में काट लें।
  2. प्रत्येक स्लाइस पर पिज्जा सॉस की एक पतली परत लगाएं।
  3. इसके ऊपर शिमला मिर्च, प्याज, टमाटर और कॉर्न समान रूप से फैलाएं।
  4. अब ऊपर से भरपूर मात्रा में मोजरेला चीज़ डालें।
  5. ऑरिगेनो और चिली फ्लेक्स छिड़कें।
  6. तवे पर हल्का बटर लगाकर धीमी आंच पर ढककर 5–7 मिनट तक पकाएं, जब तक चीज़ अच्छी तरह पिघल न जाए और ब्रेड नीचे से सुनहरी व क्रिस्पी न हो जाए।
  7. यदि ओवन का उपयोग कर रहे हैं, तो 180°C पर 8–10 मिनट तक बेक करें।

परोसने का तरीका

गरमा-गरम मिनी पिज्जा बाइट्स को टोमैटो केचप, चिली सॉस या अपनी पसंदीदा डिप के साथ परोसें। यह बच्चों के टिफिन, शाम की चाय या अचानक आने वाले मेहमानों के लिए भी एक बेहतरीन और झटपट तैयार होने वाला स्नैक है।


क्या टमाटर खाने से बढ़ जाती है किडनी स्टोन की समस्या? जानिए विशेषज्ञों की राय

टमाटर भारतीय रसोई का एक प्रमुख हिस्सा है और इसका उपयोग सब्जी, सलाद, सूप समेत कई व्यंजनों में किया जाता है। हालांकि, किडनी स्टोन (पथरी) से पीड़ित लोगों के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या टमाटर का सेवन पथरी को बढ़ा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका जवाब व्यक्ति की पथरी के प्रकार और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन का सबसे सामान्य प्रकार कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन होता है। टमाटर में ऑक्सालेट की थोड़ी मात्रा मौजूद होती है, इसलिए जिन लोगों को बार-बार इस प्रकार की पथरी होती है, उन्हें डॉक्टर सीमित मात्रा में टमाटर खाने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, अधिकांश लोगों के लिए सामान्य मात्रा में टमाटर का सेवन नुकसानदायक नहीं माना जाता।

टमाटर के बीजों को लेकर भी कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक ऐसे ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं, जो यह साबित करें कि केवल टमाटर के बीज किडनी स्टोन का कारण बनते हैं। फिर भी, जिन मरीजों को बार-बार पथरी की समस्या होती है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बीज निकालकर टमाटर खाने की सलाह दी जा सकती है।

डॉक्टरों का मानना है कि किडनी स्टोन के हर मरीज को टमाटर पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती। सही आहार का निर्णय पथरी के प्रकार, मेडिकल हिस्ट्री और जांच रिपोर्ट के आधार पर किया जाना चाहिए। इसलिए बिना डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के किसी भी खाद्य पदार्थ को आहार से हटाना उचित नहीं है।

किडनी स्टोन से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना, नमक और प्रोसेस्ड फूड का सीमित सेवन करना, संतुलित आहार अपनाना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। यदि पहले से पथरी की समस्या है, तो व्यक्तिगत डाइट प्लान के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है.

नोट: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी, उपचार या आहार में बदलाव से पहले योग्य चिकित्सक या डाइट विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


बजट में फिटनेस के लिए बेहतर विकल्प बने Campus स्पोर्ट्स शूज, कीमत 1000 रुपये से कम

अगर आप जिम, रनिंग या रोजाना वॉक के लिए किफायती और आरामदायक स्पोर्ट्स शूज की तलाश में हैं, तो Campus ब्रांड के स्पोर्ट्स शूज एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। हल्के वजन और आरामदायक डिजाइन के कारण ये लंबे समय तक पहनने पर भी पैरों पर कम दबाव डालते हैं और बेहतर सपोर्ट प्रदान करते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Campus के कई स्पोर्ट्स शूज 1000 रुपये से कम शुरुआती कीमत में उपलब्ध हैं। इनमें अच्छी ग्रिप, कुशनिंग और स्थिरता जैसे फीचर्स मिलते हैं, जो जिम और रनिंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन में मदद करते हैं। इन्हें विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से भी आसानी से खरीदा जा सकता है।

फिटनेस विशेषज्ञों का कहना है कि स्पोर्ट्स शूज खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि कंफर्ट, ग्रिप, कुशनिंग और फुट सपोर्ट को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। सही जूते न सिर्फ प्रदर्शन बेहतर बनाते हैं, बल्कि पैरों और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर चोट के जोखिम को भी घटाते हैं। ऐसे में बजट सेगमेंट में Campus स्पोर्ट्स शूज फिटनेस पसंद करने वालों के लिए एक बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं।


हेल्दी डाइट के बावजूद भी क्यों बढ़ता है बैड कोलेस्ट्रॉल? जानें इसके कारण

आजकल कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोग संतुलित और हेल्दी डाइट लेने के बावजूद बढ़ते बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) से परेशान रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल हेल्दी भोजन करना ही काफी नहीं होता। शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के पीछे आनुवंशिक कारण, निष्क्रिय जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी और प्रोसेस्ड फूड जैसी कई आदतें अहम भूमिका निभाती हैं। आइए जानते हैं वे प्रमुख कारण, जिनकी वजह से एलडीएल का स्तर बढ़ सकता है।

1. आनुवंशिक कारण भी बन सकते हैं वजह
कुछ लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या परिवार से ही मिलती है। इस स्थिति को फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया कहा जाता है, जिसमें शरीर खून से एलडीएल को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता। ऐसे लोगों को नियमित जांच और डॉक्टर की निगरानी में रहना चाहिए।

2. शारीरिक गतिविधि का अभाव
घंटों बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को कम कर सकता है। इससे बैड कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। रोजाना 30 से 45 मिनट की वॉक, योग या किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी फायदेमंद साबित हो सकती है।

3. ज्यादा फैट वाला भोजन
घी, मक्खन, तला-भुना भोजन, बेकरी उत्पाद और ट्रांस फैट से भरपूर खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन एलडीएल को बढ़ा सकता है। हेल्दी फैट भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए, क्योंकि जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

4. तनाव और अपर्याप्त नींद
लगातार तनाव रहने से शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो फैट मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं। वहीं पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की रिकवरी प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए रोजाना 7–8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है।

5. प्रोसेस्ड फूड और छिपी हुई शुगर
पैकेज्ड फूड, मीठे पेय, एनर्जी ड्रिंक्स और इंस्टेंट स्नैक्स में मौजूद अतिरिक्त शुगर, प्रिजर्वेटिव और एडिटिव्स शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकते हैं। बेहतर होगा कि भोजन में ताजे, प्राकृतिक और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाए।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

(साभार)


बार-बार आते हैं चक्कर? तो भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है किसी बीमारी का संकेत

अगर बैठने या लेटने के बाद अचानक खड़े होते ही आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है, सिर घूमने लगता है या शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार चक्कर आना कई बार शरीर में पानी की कमी से लेकर एनीमिया, लो ब्लड प्रेशर, कान की बीमारी या गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का संकेत भी हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभार चक्कर आना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहे या बार-बार दोहराई जाए तो इसकी वजह जानना जरूरी है। अक्सर लोग इसे थकान, पर्याप्त नींद न लेने या कमजोरी का असर मान लेते हैं, जबकि कई मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी की शुरुआती चेतावनी भी हो सकती है।

बार-बार चक्कर आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), लंबे समय तक खाली पेट रहना, लो ब्लड प्रेशर और इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन इसके सामान्य कारण हैं। खासतौर पर गर्मी और बरसात के मौसम में पसीना अधिक आने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है, जिससे सिर हल्का लगने और चक्कर आने की शिकायत बढ़ सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार एनीमिया भी इस समस्या की बड़ी वजह है। शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने पर मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे कमजोरी, थकान, सांस फूलना और चक्कर आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। महिलाओं में आयरन की कमी के कारण यह समस्या अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।

इसके अलावा कान के अंदर मौजूद संतुलन नियंत्रित करने वाली प्रणाली में गड़बड़ी होने पर वर्टिगो की समस्या हो सकती है। ऐसे मरीजों को सिर घुमाने पर तेज चक्कर, मतली, उल्टी और चलने में असंतुलन महसूस हो सकता है। ऐसी स्थिति में ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि अनियंत्रित डायबिटीज, हृदय रोग, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में भी बार-बार चक्कर आने की शिकायत हो सकती है। यदि चक्कर के साथ बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, सीने में दर्द, बेहोशी या दृष्टि धुंधली होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दी गई सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

(साभार)


क्या किडनी स्टोन में टमाटर खाना नुकसानदायक है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

टमाटर लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। सब्जियों से लेकर सलाद और सूप तक, इसका इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति को किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या होती है, तो अक्सर उसे टमाटर खाने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या टमाटर वास्तव में पथरी बढ़ाने का कारण बन सकता है या यह केवल एक आम धारणा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी स्टोन कई प्रकार के होते हैं, जिनमें कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन सबसे सामान्य माना जाता है। टमाटर में ऑक्सालेट नामक तत्व थोड़ी मात्रा में पाया जाता है, जो कुछ लोगों में पथरी बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से डॉक्टर कुछ मरीजों को टमाटर का सेवन सीमित करने की सलाह देते हैं, खासकर उन लोगों को जिन्हें बार-बार कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन की समस्या होती है।

टमाटर के बीजों को लेकर भी कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं। आमतौर पर माना जाता है कि टमाटर के बीज पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होते हैं, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में इस बात के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि, जिन लोगों को बार-बार पथरी की शिकायत रहती है, उन्हें एहतियात के तौर पर बीज निकालकर टमाटर खाने की सलाह दी जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर पथरी के मरीज को टमाटर पूरी तरह छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पथरी किस प्रकार की है और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह आहार से हटाना उचित नहीं माना जाता।

किडनी स्टोन की समस्या से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नमक और प्रोसेस्ड फूड का सीमित सेवन करना, संतुलित आहार अपनाना और नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बेहद जरूरी है। साथ ही डॉक्टर या डाइट विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए खानपान संबंधी निर्देशों का पालन करने से पथरी की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

नोट: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या या डाइट में बदलाव से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।


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