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पॉल्यूशन से बचने के लिए कौन सा मास्क बेहतर? यहां जानिए जवाब

Category Archives: जीवन शैली

पॉल्यूशन से बचने के लिए कौन सा मास्क बेहतर? यहां जानिए जवाब

दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों की हवा जहरीली हो गई है। लोगों का खुलकर सांस लेना भी दुश्वार हो गया है। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स आए दिन खतरनाक लेवल क्रॉस कर रहा है. वायु प्रदूषण बढऩे की वजह से लोगों की सेहत में गंभीर नुकसान देखने को मिल रहे हैं। पॉल्यूशन लोगों के फेफड़ों को बीमार कर रहा है. वहीं दिल से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही कई रिसर्च में प्रदूषण की वजह से कैंसर होने के खतरे की बात भी सामने आ रही है। इन सभी के पीछे का कारण है एक महीन कण पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5)। यही सभी बीमारियों की जड़ है। वायु में घुले इस बारीक कण की वजह से ही लोग बीमार पड़ रहे हैं. ये सांस के जरिए सीधे लोगों के फेफड़ों में पहुंच रहा है. इससे बचने का सिर्फ एक ही तरीका है वो है मास्क। अब लोगों में मास्क को लेकर भी बड़ी कंफ्यूजन है कि कौन सा मास्क दिल्ली जैसे प्रदूषण से बचाव कर सकता है। आइए जानते हैं एन95 बनाम एन99 मास्क में कौन सा मास्क आपके लिए बेहतर रहेगा।

एन95 मास्क या एफएफपी1
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक एन95 मास्क मेडिकल तौर पर सबसे ज्यादा इफेक्टिव होता है। दिल्ली-एनसीआर में जो लोग रोजाना प्रदूषण के संपर्क में आते हैं उनके लिए 95%  फिल्ट्रेशन रेट के लिए एफएफपी1 मास्क अच्छा साबित हो सकता है. इससे फायदा न मिले तो एन95 मास्क का यूज करें। एन95 मास्क पीएम 2.5 और अन्य प्रदूषक को 95% तक फिल्टर कर सकता है।

एन99 मास्क
एन99 मास्क प्रदूषण को पूरी तरह रोक नहीं पाता है। लेकिन काफी हद तक छोटे कणों को शरीर के अंदर जाने से रोक सकता है।

एन100 मास्क
एन100 मास्क हाई लेवल फिल्टरेशन का  काम करते हैं। एन100  99.97% तक प्रदूषक तत्वों को फि़ल्टर करता है। इनका इस्तेमाल बहुत अधिक प्रदूषित जगहों पर किया जाता है. इनमें सांस लेना थोड़ा मुश्किल होता है. इसे ज्यादा देर तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

पी95 और आर95 मास्क
पी95 मास्क ऑयल बेस्ड पार्टिकल्स से बचाव करता है। नॉन-ऑयल और ऑयल बेस्ड पार्टिकल्स जैसे प्रदूषण वाले वातावरण के लिए परफेक्ट हैं। इन्हें शॉर्ट टर्म के लिए यूज कर सकते हैं।

पॉल्यूशन से बचने के लिए कैसा मास्क खरीदें?
एक्सपर्ट के अनुसार पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) कणों की वजह से बचने के लिए हमेशा ऐसा मास्क खरीदना चाहिए जिनकी सील पक्की हो. इसके साथ ही इस  बात का खास ख्याल रखें की उनमें कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालने के लिए वॉल्व भी बना  हो।


क्या लगातार पानी पीने से कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशर? इतना होता है फायदा

दिनभर की भागदौड़ और काम के चक्कर में हम सही तरह अपना ख्याल नहीं रख पाते हैं. जिसकी वजह से कई समस्याएं हो सकती हैं. ब्लड प्रेशर भी दिन में कई बार कम-ज्यादा होता रहता है. यह नॉर्मल प्रक्रिया है. जिससे दिल, दिमाग और फेफड़ों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन मिलती है. शरीर के पोजिशन के हिसाब से भी बीपी खुद को एडजेस्ट करता रहती है. ब्लड प्रेशर बढऩा या घटना दोनों ही खतरनाक हो सकता है. इससे हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, किडनी रोग हो सकता है. हालांकि, लाइफस्टाइल और खानपान को बेहतर बनाकर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर सकते हैं. इसमें पानी भी फायदेमंद हो सकता है।

डॉक्टर्स के अनुसार, हमारे हार्ट का करीब 73त्न हिस्सा पानी से बना है, इसलिए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए पानी से बेहतर कोई चीज नहीं हो सकती है. कई स्टडीज में भी साबित हो चुका है कि पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स बीपी कम करने में असरदार हो सकते हैं, इसलिए हर दिन ज्यादा से ज्यादा पानी पीनी चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप ज्यादा पानी नहीं पी पीते हैं तो उसकी जगह कोई हेल्दी लिक्विड ले सकते हैं. नींबू, खीरा, ताजे फल, हर्बल चाय, लो-सोडियम सूप, दूध, दही अपनी ड्डडाइट में शामिल कर सकते हैं. इससे शरीर को जरूरत के हिसाब से पानी मिल जाता है।

पानी पीने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल कैसे रहता है
1. पानी ब्लड वेसल्स को आराम देता है, जिससे ब्लड प्रेशर कम होता है।
2. पानी खून को पतला कर नसों से खून फ्लो को आसान बनाता है, जिससे बीपी का खतरा कम होता है।
3. पानी शरीर से टॉक्सिक पदार्थ बाहर निकालकर बीपी कंट्रोल में रखता है।
4. पानी दिल की सेहत को दुरुस्त रखता है, जिससे ब्लड प्रेशर मेंटेन रहता है।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए क्या करें
1. वजन कम रखें।
2. कैलोरी वाले फूड्स।
3. रोजाना कम से कम  30 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें. वॉकिंग, स्वीमिंग, योग, मेडिटेशन करें।
4. स्ट्रेस कम करने की कोशिश करें।
5. आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन जरूर शामिल करें।
6. ज्यादा नमक और शराब से दूर रहें।


कभी देखा है नीले रंग का केला, गजब है इसका स्वाद, जबरदस्त हैं फायदे

पीला केला तो हम सभी ने देखा है लेकिन क्या आपने कभी नीला केला देखा है। आप सोच रहे होंगे भला केला भी कभी नीला होता है। जी हां, नीले रंग का भी केला होता है। इसे ब्लू जावा बनाना कहा जाता है. इसका बनावट मलाईदार होता है। ये नीले रंग का जावा मूसा बालबसियाना और मूसा एक्यूमिनता का हाइब्रिड है। ये सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। आइए जानते हैं नीला केला कहां पाया जाता है, इससे शरीर को क्या-क्या लाभ होते हैं…

ब्लू जावा बनाना कहां उगाया जाता है
नीले जावा केले की खेती दक्षिण पूर्व एशिया में होती है। इसके अलावा हवाई द्वीपों में भी इन केलों की खेती होती है. यह ज्यादातर ठंडे प्रदेशों और कम तापमान वाली जगहों पर होता है. इस केले का टेस्ट आइसक्रीम जैसा होता है। सोशल मीडिया पर बहुत से लोग इसका टेस्ट वनिला आइसक्रीम जैसा बता रहे हैं. इसी वजह से इसे आइसक्रीम केला भी कहते हैं।

ब्लू जावा बनाना के फायदे

1. आयरन से भरपूर
ब्लू जावा बनाना में आयरन भर-भरकर पाया जाता है।  इससे शरीर में एनीमिया यानी हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाली बीमारी नहीं होती है। यह शरीर में आयरन की कमी दूर कर कई तरह से फायदे पहुंचाता है।

2. कब्ज से छुटकारा
ब्लू जावा केला पेट के लिए बेहद फायदेमंद बताया जा रहा है। इससे कब्ज, एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर हो सकती हैं। पेट की अन्य समस्याओं में भी इस केले को उपयोगी बताया जा रहा है।

3. तनाव होगा दूर
कई रिसर्च में बताया गया है कि ब्लू जावा बनाना तनाव से राहत दिला सकता है. इसमें ऐसा प्रोटीन होता है, जो शरीर को रिलैक्स मोड में पहुंचाता है. इससे डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी दूर हो सकती हैं। इस केले में विटामिन बी6 पाया जाता है, जो ब्लड ग्लूकोज लेवल को ठीक रखता है।

4. शरीर को ऊर्जावान बनाए
नीले केले के सेवन से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है और ताकत मिलती है। नियमित तौर पर दूध के साथ इसे खाने से शरीर चुस्त और तंद्रुस्त बनता है. इससे कमजोरी दूर होती है और कई बीमारियों से राहत मिलती है।

5. डाइजेस्टिव सिस्टम अच्छा बनाए
ब्लू जावा बनाना में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाने का काम करता है। इससे पेट से जुड़ी कई अन्य बीमारियों से भी छुटकारा मिल सकता है।


ठंड में घुटने के दर्द से परेशान हैं? राहत पाने के लिए रोजाना 15 मिनट करें ये एक्सरसाइज

घुटनों में दर्द एक आम समस्या है। जो गलत जूते पहनने और उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने समेत कई कारणों से बढऩे लगती है। घुटनों में समस्या उम्र बढऩे के कारण भी हो सकती है. घुटने में दर्द चलने, उठने और बैठने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है. अक्सर लोग दवाइयों का सेवन कर मांसपेशियों में बढ़ती ऐंठन और सूजन से छुटकारा पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कुछ आसान व्यायाम इस समस्या को दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

आइए जानते हैं घुटनों के दर्द से राहत दिलाने वाले आसान सी एक्सरसाइज। जर्नल ऑफ अमेरिकन फैमिली फिजिशियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 25 प्रतिशत लोग घुटनों में दर्द का अनुभव करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 20 सालों में घुटनों के दर्द के मामलों में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

घुटनों के दर्द को कम करने के लिए ये एक्सरसाइज करें

1. क्लैम शेल एक्सरसाइज
क्लैमशेल एक्सरसाइज करने से हिप्स और ग्लूट्स मजबूत होते हैं, चलने और बैठने में मदद मिलती है. नियमित अभ्यास से घुटनों की मांसपेशियां लचीली बनी रहती हैं, जिससे दर्द की समस्या दूर होती है।

इस एक्सरसाइज को करने के लिए मैट पर सीधे लेट जाएं और अपनी दाईं ओर मुड़ें. अपने दाहिने हाथ को ऊपर की ओर उठाएं.अब अपने घुटनों को 90 डिग्री पर मोडक़र अपने बाएं घुटने को जितना हो सके उतना खोलें और फिर दूसरे घुटने पर रखें।
इस एक्सरसाइज को 2 सेट में 20 बार करें. इससे घुटनों में होने वाले दर्द को कम किया जा सकता है।

2. साइड लेग रेज एक्सरसाइज
साइड लेग रेज एक बॉडीवेट एक्सरसाइज है जिसे लेटकर और खड़े होकर दोनों तरह से किया जा सकता है. इसे करने से ग्लूट्स, कोर और हैमस्ट्रिंग मजबूत होते हैं। इससे पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है।

इस एक्सरसाइज को करने के लिए अपनी बाईं ओर लेट जाएं और अपने दोनों घुटनों को मोडक़र रखें.अब अपने दाहिने पैर को सीधा करें और जितना हो सके उतना ऊपर उठाएं और फिर नीचे लाएं. इस व्यायाम का अभ्यास अपने शरीर की क्षमता के अनुसार करें। इससे कूल्हे की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे शरीर का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलती है।

3. स्टैटिक क्वाड स्ट्रेच
जांघों के सामने की तरफ मौजूद मांसपेशियों को क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियां कहते हैं. इस व्यायाम को करने से इन मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे रक्त संचार बढ़ता है. इसे लेटकर या खड़े होकर किया जा सकता है. इससे घुटने का दर्द कम हो सकता है।

इस व्यायाम को करने के लिए मैट पर पेट के बल लेट जाएं और फिर दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बनाए रखें. अब अपने दाहिने पैर को घुटने से मोडक़र अपने कूल्हों के पास लाएं और ऊपर की ओर खींचें. इस दौरान गहरी सांस लें.इसके बाद दाहिने पैर को जमीन पर रखें और बाएं पैर को ऊपर की ओर लाएं. इस व्यायाम का अभ्यास 10 से 15 बार करें।

4. हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच
हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए इस व्यायाम का अभ्यास करें. इससे शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे दर्द और सूजन कम हो सकती है।

इस व्यायाम को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और अपने दाहिने पैर को ऊपर की ओर उठाएं. इस दौरान गहरी सांस लें.अब तौलिया लें और उसे अपने दाहिने पैर से घुमाएं और नीचे की ओर खींचें। इससे आपके घुटनों की मांसपेशियों को आराम मिलेगा।
शरीर की क्षमता के अनुसार इस व्यायाम का अभ्यास करें. इसके बाद दोनों पैरों को सीधा कर लें।


सर्दियों में टूटने लगे हैं बाल तो इस चीज से करें मालिश, नहीं होगा नुकसान

सर्दियों का मौसम आते ही बालों की समस्याएं बढऩे लगती हैं। बाल टूटने, रूखे और बेजान होने लगते हैं. ऐसे में बालों की देखभाल करना बहुत जरूरी है. अगर आप भी ठंड के दिनों में आप भी हेयरफॉल और अन्य प्रॉब्लम्स से परेशान हैं तो नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तेल में एंटीबैक्टीरियल, एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटी फंगल और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और मिनरल्स भी कूट-कूटकर भरे होते हैं। जिससे मालिश करने से बाल मजबूत, चमकदार और रूखे-बेजान होने से बचते हैं।आइए जानते हैं इसके फायदे…

सर्दियों में क्यों टूटने लगते हैं बाल

ड्राई एयर
कम तापमान
बालों की खराब देखभाल
पोषण की कमी
हार्मोनल बदलाव

नारियल तेल से मालिश के फायदे

बालों को पर्याप्त पोषण मिलता है।
नारियल तेल में लॉरिक एसिड होता है, जिससे बालों को प्रोटीन मिलता है।
नारियल का तेल बालों के लिए कंडीशनर का भी काम करता है।
बालों को मजबूती मिलती है।
बाल रूखे और बेजान नहीं होते हैं।
बाल टूटते नहीं है।
फ्रिजी बालों की समस्या दूर होती है।
बालों में शाइनिंग आती है।
बाल मुलायम, चमकदार और खूबसूरत बनते हैं।

नारियल तेल को बालों में कैसे लगाएं
1. सबसे पहले नारियल के तेल को गर्म कर लें।
2. अब तेल को स्कैल्प और बालों में अच्छी तरह लगाएं और अच्छे से मसाज करें।
3. कोकोनट ऑयल को करीब 30 मिनट तक बालों में लगाए रखें।
4. अब अच्छी क्वॉलिटी के शैंपू से बालों को धोएं।
5. बालों को अच्छी तरह सुखाएं।

सर्दियों में नारियल का तेल बालों में लगाने से पहले क्या करें
अगर नहाने से 2-3 घंटे पहले भी बालों पर नारियल का तेल लगा सकते हैं।
नारियल के तेल बालों में रात में सोते समय भी लगा सकते हैं, सुबह उठकर माइल्ड शैंपू कर सकते हैं।
स्किन पर नारियल तेल लगा रहे हैं, तो नहाने के बाद लगाएं. इससे स्किन मॉइश्चराइज रहती है।
नहाने से पहले भी पूरे शरीर पर नारियल का तेल लगा सकते हैं।

सर्दियों में नारियल तेल के अन्य फायदे
1. रूखी और बेजान स्किन से राहत मिल सकती है।
2. त्वचा मुलायम, शाइनी और चमकदार बनती है।
3. चेहरे के एक्ने, दाग-धब्बों से छुटकारा मिलता है।
4. स्किन से जुड़ी बीमारियां खत्म हो सकती हैं।


पानी पीने के बाद भी लगी रहती है प्यास? कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं

क्या पानी पीने के बावजूद आपकी प्यास नहीं बुझ रही, बार-बार प्यास लगी रहती है, हाइड्रेशन महसूस होता रहता है। अगर ऐसा है, तो ये सामान्य नहीं बल्कि किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है, प्यास लगना सामान्य होता है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो ये शरीर में कुछ गड़बड़ होने का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं कि पानी पीने के बाद भी प्यास लगने से किन-किन बीमारियों का खतरा होता है…

पानी पीने के बाद बार-बार क्यों लगती है प्यास

1. पॉलीडिप्सिया
पानी हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी है। प्यास लगना एक नॉर्मल प्रक्रिया है लेकिन अगर बार-बार प्यास लग रही है तो ये पॉलीडिप्सिया की कंडीशन हो सकता है.पॉलीडिप्सिया में प्यास कई दिनों, हफ़्तों या महीनों तक काफी ज्यादा बनी रह सकती है। इसमें पानी पीने के बावजूद प्यास बुझती नहीं है।

2. डायबिटीज इन्सिपिडस
डायबिटीज इन्सिपिडस  की समस्या में भी प्यास बार-बार लगती रहती है। पानी पीने के बावजूद प्यास महसूस होती रहती है. इस बीमारी में किडनी और इससे जुड़ी ग्रंथियों के साथ ही हार्मोन भी प्रभावित होते है। इसकी वजह से यूरीन ज्यादा निकल सकता है. जिसकी वजह से बार-बार प्यास लग सकती है।

3. हाइपोकैलिमिया
जब खून में पोटैशियम की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है तो हाइपोकैलिमिया की कंडीशन होती है। इसके मरीजों को बार-बार और ज्यादा प्यास लगती है. उल्टी-दस्त, कुछ दवाओं को खाने से पोटैशियम का लेवल प्रभावित हो सकता है। अगर ये समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो ज्यादा प्यास लग सकती है।

शरीर के इन संकेतों को न करें इग्नोर
प्यास लगने का मतलब शरीर बताता है कि उसमें लिक्विड की कमी हो गई है. सामान्य परिस्थितियों में पानी पीने के बाद प्यास दूर हो जाती है। अगर पानी पीने के बाद भी प्यास महसूस हो रही है तो गंभीर समस्याओं का संकेत है. इसे लेकर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. सामान्य तौर पर एक दिन में तीन-चार लीटर पानी तो पीना ही चाहिए. बहुत ज्यादा पानी पीना भी हानिकारक हो सकता है।


खाली पेट फल खाने के फायदे हैं या नुकसान? जानें सच्चाई

खाली पेट फल खाने को लेकर कई तरह की धारणाएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इससे शरीर को पोषण मिलता है, जबकि कुछ लोग इसे हानिकारक मानते हैं।इस लेख में हम इन धारणाओं का विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि खाली पेट फल खाना सही है या नहीं। हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस पर चर्चा करेंगे, ताकि आप सही निर्णय ले सकें। इसके अलावा, हम यह भी जानेंगे कि कब खाली पेट फल खाना फायदेमंद होता है।

खाली पेट फल खाने से पाचन बेहतर होता है?
कई लोग मानते हैं कि खाली पेट फल खाने से पाचन स्वास्थ्य बेहतर होता है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह पूरी तरह सही नहीं है। फलों में फाइबर और पानी की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें खाली पेट खाया जाए।अगर आप पहले से ही किसी गैस्ट्रिक समस्या से जूझ रहे हैं, तो खाली पेट फल खाना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

क्या सुबह-सुबह केवल फल खाना वजन घटाने में मदद करता है?
वजन घटाने के लिए कई लोग सुबह-सुबह खाली पेट फल खाते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि फलों में कैलोरी कम होती है और ये विटामिन और मिनरल का अच्छा स्रोत होते हैं।हालांकि, केवल फलों पर निर्भर रहना संतुलित डाइट नहीं मानी जा सकती। वजन घटाने के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स और वसा का संतुलन भी जरूरी होता है, ताकि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें और ऊर्जा बनी रहे।

क्या खाली पेट खट्टे फल खाना सुरक्षित है?
नींबू और संतरे जैसे खट्टे फलों को लेकर धारणा बनी हुई है कि इन्हें खाली पेट खाने से एसिडिटी बढ़ सकती है।हालांकि, यह सभी लोगों पर लागू नहीं होता। अगर आपका पाचन तंत्र मजबूत है तो आप इन्हें बिना किसी चिंता के खा सकते हैं। वहीं, जिन लोगों को एसिडिटी की समस्या है, उन्हें इनका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है। अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए खाली पेट खट्टे फल खाएं।

क्या रात को सोने से पहले फल खाना सही होता है?
रात को सोने से पहले हल्का भोजन करना अच्छा माना जाता है, ताकि नींद अच्छी आए और पाचन भी ठीक रहे। ऐसे में कुछ लोग रात को सोने से पहले सिर्फ फल खाते हैं, जो एक स्वस्थ विकल्प हो सकता है। ज्यादा मात्रा में फ्रक्टोज लेने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है, इसलिए फलों का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें। इससे नींद भी अच्छी आएगी और पाचन तंत्र भी ठीक रहेगा।


करेले के जूस में छिपा है सेहत का राज, रोजाना पीने से मिलेंगे कई फायदे

करेला का जूस शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है. यह एक खास तरह की सब्जी होती है. जो कड़वे स्वाद और अपने फायदे के लिए जाने जाते हैं. करेला का जूस सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है. इसमें कई तरह के औषधीय गुण होते हैं. करेला का जूस भले ही स्वाद में कड़वा होता है लेकिन यह पूरे शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है. साथ ही साथ ब्लड में शुगर लेवल को कंट्रोल करने का काम करता है. इसे पीने से हार्ट हेल्थ से लेकर पाचन भी काफी अच्छा होता है. इसका ड्रिंक पीना है तो आप इसमें नींबू, अदरक और शहद मिलाएं. ताकि इसका स्वाद काफी ज्यादा अच्छा रहे।

करेले का जूस विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से होता है भरपूर
करेले के जूस में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत होता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मददगार होते हैं. इसे पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है, संक्रमण होने का खतरा भी कम होता है. करेले में मौजूद विटामिन ए और बीटा कैरोटीन की मात्रा आंखों के लिए काफी फायदेमंद होती है, इसे नियमित रूप से पीने से आंखों की रोशनी बढ़ती है. करेले के जूस में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं.पिंपल या मुंहासे को भी कम करने में मदद करते हैं. करेले में मौजूद बिटर्स और अल्कलॉइड तत्व रक्तशोधक का काम करते हैं।

करेले का जूस कंट्रोल करता है डायबिटीज
करेले का जूस पीने से डायबिटीज कंट्रोल में होता है. इसे पीने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है. इससे डायबिटीज के लक्षण कम होते हैं यह शरीर में इंसुलिन को एक्टिव करता है. करेले का जूस लीवर के लिए भी हेल्दी होता है, ये लिवर एंजाइम को बढ़ाने के साथ-साथ लिवर को डिटॉक्स करने में भी काफी मददगार होता है. करेले का जूस मोटापे सहित खूनी बवासीर में भी फायदेमंद होता है, इससे पाचन क्रिया सही रहती है।

डायबिटीज मरीज के लिए करेले का जूस वरदान की तरह है . यह काफी ज्यादा फायदेमंद होता है. साथ ही इसमें पाए जाने वाले तत्व शरीर में इंसुलिन के लेवल को बढ़ाते हैं. साथ ही शुगर कंट्रोल करते हैं. अगर डायबिटीज मरीज इसे सही तरीके से पढ़े तो यह डायबिटीज मैनेजमेंट में अहम भूमिका निभाता है।


क्या दूध पीने से कम हो जाती है एसिडिटी, आइए मिलकर जानें इस मिथक की सच्चाई

दूध को अक्सर एसिडिटी के इलाज के रूप में देखा जाता है। कई लोग मानते हैं कि दूध पीने से पेट की जलन और एसिडिटी कम होती है।इसमें मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन पेट को अस्थायी रूप से राहत देते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो दूध का तात्कालिक प्रभाव होता है, लेकिन लंबे समय तक इसका असर नहीं रहता। आइए इस मिथक को समझें और जानें कि क्या दूध वास्तव में एसिडिटी कम करने में मदद करता है।

क्या दूध से वाकई में होता है एसिडिटी का इलाज
दूध पीने पर तुरंत राहत मिलती है, क्योंकि यह पेट को ठंडक पहुंचाकर अस्थायी रूप से जलन को कम करता है। यह राहत केवल कुछ समय के लिए होती है, लेकिन बाद में समस्या बढ़ सकती है। दूध में कैल्शियम और प्रोटीन होते हैं, जो पेट में एसिड उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। इससे एसिडिटी की समस्या फिर से उत्पन्न हो सकती है।इसलिए, दूध पीना एसिडिटी का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।

जानिए एसिडिटी का सही समाधान
एसिडिटी का सही समाधान संतुलित डाइट और जीवनशैली हो सकते हैं। आपको मसालेदार और तली-भुनी चीजों से बचना चाहिए और कम भोजन करना चाहिए, ताकि पेट पर दबाव न पड़े।इसके अलावा, नियमित एक्सरसाइज और पानी पीना भी फायदेमंद होता है। खाने के बाद तुरंत लेटने से बचें और सोने से पहले हल्का भोजन करें।ताजे फल, सब्जियां और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाना भी लाभकारी हो सकता है। इससे एसिडिटी की समस्या को कम किया जा सकता है।

डॉक्टर की सलाह लें
अगर आपको बार-बार एसिडिटी की समस्या होती है तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। वे आपकी स्थिति के अनुसार उचित उपचार बता सकते हैं, जो आपकी समस्या को कम कर सकता है।इस प्रकार, दूध पीकर एसिडिटी कम करने का मिथक पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। बेहतर होगा कि आप संतुलित डाइट अपनाएं और स्वस्थ जीवनशैली जीएं, ताकि आपको इस समस्या से निजात मिल सके।

दूध के सेवन के मुख्य लाभ
अगर आप अपने रोजाना के खान-पान में दूध शामिल करते हैं, तो आपको कैल्शियम मिल सकता है। इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं, रक्तचाप सुधरता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। इसके अलावा, इससे पाचन स्वास्थ्य भी दुरुस्त हो जाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से निजात मिल सकता है। अगर आप नियमित रूप से दूध पीते हैं, तो आपको आराम की अनुभूति भी हो सकती है।


पेड़-पौधे लगाते समय हो जाएं सावधान, नहीं तो बढ़ सकता है इन 6 बीमारियों का खतरा

क्या आप भी अपने गार्डन में ढेर सारे  पेड़ पौधे लगाते हैं, किचन गार्डन से लेकर शो प्लांट और तरह-तरह के पेड़ पौधे लगाए हुए हैं. पेड़ पौधों की देखभाल एकदम छोटे बच्चों की तरह करनी पड़ती है, जिन्हें समय-समय पर पानी देना होता है, खाद डालनी होती है और उनकी कटाई छटाई भी जरूरी होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गार्डनिंग करने से 6 बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कैसे आप इन बीमारियों  से बच सकते हैं और किस तरह से अपने गार्डनिंग टाइम को मजेदार और सुरक्षित बना सकते हैं।

टिटनेस
मिट्टी और गंदगी में टिटनेस बैक्टीरिया (क्लॉस्ट्रिडियम टेटनी) पाया जाता है, जो पेड़-पौधे लगाने के दौरान त्वचा में चोट लगने पर शरीर में जा सकता है. इससे बचने के लिए बागवानी के दौरान हमेशा दस्ताने पहनें और तेज धार वाले उपकरणों से सावधान रहें. टिटनेस वैक्सीन समय पर लें और यदि कट या चोट लगे तो तुरंत साफ करें और मरहम लगाएं।

लेप्टोस्पायरोसिस
यह बैक्टीरिया गंदे पानी, खासकर पालतू जानवरों या चूहों के पेशाब से संक्रमित पानी में पाया जाता है. गार्डनिंग करते समय रबर के दस्ताने और गम बूट्स पहनें, साफ पानी का उपयोग करें और अपने बगीचे में पानी का ठहराव न होने दें।

फंगल संक्रमण (रिंगवर्म)
रिंगवर्म फंगस संक्रमित मिट्टी या पौधों में पाया जाता है और स्किन से कॉन्टैक्ट होने से संक्रमण फैलता है. इससे बचने के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले दस्ताने पहनें. यदि स्किन पर कोई खुजली या रैश हो, तो तुरंत एंटी-फंगल क्रीम लगाएं।

एलर्जी और अस्थमा के लक्षण
पौधे लगाते समय परागकण, फंगस के बीजाणु और धूल से एलर्जी हो सकती है. ऐसे में गार्डनिंग करते समय मास्क पहनें, खासकर अगर आप धूल भरे या फूलों वाले पौधों के बीच काम कर रहे हों. इसके बाद तुरंत नहाएं और कपड़े बदलें।

जिआर्डिएसिस
यह परजीवी पानी में पाया जाता है और गंदे हाथ या पानी के माध्यम से शरीर में जा सकता है. इससे बचने के लिए बागवानी के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन और पानी से धोएं।

बैक्टीरियल इन्फेक्शन(सेप्सिस)
मिट्टी में पाए जाने वाले विभिन्न बैक्टीरिया, जैसे कि स्टैफिलोकोकस, घाव के माध्यम से शरीर में जा सकते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं. ऐसे में दस्ताने पहनें और कट या खरोंच लगने पर तुरंत उसे साफ करें और दवा लगाएं।


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