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क्यों आती है पढ़ाई करते समय नींद ? आलस नहीं झपकी लगने के हैं और भी कारण

Category Archives: जीवन शैली

क्यों आती है पढ़ाई करते समय नींद ? आलस नहीं झपकी लगने के हैं और भी कारण

बच्चे हो या फिर युवा अक्सर ऐसा सभी के साथ होता है कि किताब खोलते ही नींद आने लगती है। क्या आपको पता है इसके पीछे आलस नहीं कई और भी कारण होते हैं। यहां जानिए कारण।

पढ़ते समय नींद की झपकी आना सामान्य बात है। कई बार कोई भी बुक या मैग्जीन पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि आंखें अपने आप बंद हो जाएंगी। आइए जानते हैं पढ़ते समय नींद आने के कारण।

मानसिक मेहनत
पढ़ाई करते समय हमारी मानसिक मेहनत होती है. ये थका देने वाली प्रक्रिया होती है. जब भी हम पढ़ते हैं तो उस दौरान हमारा दिमाग लगातार नई जानकारी को हासिल करने और उसे प्रोसेस करने की कोशिश करता है। यह मानसिक मेहनत हमारे शरीर को थका देती है और नींद आने लगती है।

स्लीप साइकिल गड़बड़ होना
जिन लोगों की स्लीप साइकल गड़बड़ होती है उन्हें भी पढ़ते समय झपकी आती है. अगर आप रात को पूरी नींद नहीं लेते हैं, तो दिन में आपको नींद आना स्वाभाविक है. अनियमित स्लीप साइकिल आपके शरीर की नेचुरल स्लीप-वेक साइकिल को बाधित करता है और आपको दिन में थका हुआ महसूस कराता है।

एक ही पोजीशन में पढऩा
एक ही पोजीशन में पढऩे की वजह से भी आपको नींद आ सकती है. अगर आप एक ही पोजीशन में लंबे समय तक बैठकर पढ़ते हैं या अकेले कमरे में पढ़ते हैं, तो आपका शरीर और दिमाग जल्दी थक सकता है, जिसके कारण नींद आने लगती है।

स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं कारण
अगर आपको किसी भी तरह की कोई स्वास्थ्य समस्या है तो भी आपको नींद आ सकती है. कुछ स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि एनीमिया, थायरॉइड समस्याएं और डिप्रेशन भी पढ़ते समय नींद आने का कारण बन सकती हैं।

(आर एन एस )


हिचकी से राहत पाने के लिए इन चार तरीकों से इस्तेमाल करें ‘डिल सीड ऑयल’

हिचकी आना एक आम समस्या है, जो कभी भी और कहीं भी हो सकती है। इससे निपटने के कई तरीके हैं, लेकिन क्या आपने कभी डिल सीड ऑयल का इस्तेमाल करने के बारे में सोचा है? यह एसेंशियल ऑयल प्राकृतिक रूप से हिचकी को रोकने में मदद कर सकता है। डिल सीड ऑयल का इस्तेमाल करके आप हिचकी से राहत पा सकते हैं।आइए इसके कुछ खास इस्तेमाल और तरीके जानते हैं, जिनसे आप इसे आजमा सकते हैं।

डिल सीड ऑयल की मालिश करें
हिचकी आने पर पेट पर हल्की मालिश करना बहुत फायदेमंद हो सकता है।इसके लिए आप डिल सीड तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तेल को हल्का गर्म करके पेट पर गोलाकार गति में मालिश करें। इससे मांसपेशियों को आराम मिलेगा और हिचकी कम होगी।यह उपाय न केवल हिचकी को रोकने में मदद करता है, बल्कि पेट की अन्य समस्याओं से भी राहत दिला सकता है।

पानी में मिलाकर पिएं
डिल सीड ऑयल को पानी में मिलाकर पीना भी एक अच्छा उपाय है।इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में 2-3 बूंदें डिल सीड ऑयल की डालें और धीरे-धीरे पिएं।यह उपाय आपके पाचन तंत्र को शांत करेगा और हिचकी से राहत दिलाएगा। इससे आपके पेट की मांसपेशियों को भी आराम मिलेगा, जिससे हिचकी जल्दी ठीक हो सकती है। इस विधि का उपयोग करने से आपको तुरंत राहत मिल सकती है और यह पूरी तरह से प्राकृतिक तरीका है।

भाप लें
भाप लेना भी हिचकी रोकने का एक असरदार तरीका हो सकता है।इसके लिए एक बर्तन में गर्म पानी लें और उसमें 2-3 बूंदें डिल सीड तेल डालें। अब इस पानी से निकलने वाली भाप को अपने मुंह और नाक से अंदर लें। इससे आपकी सांस लेने की प्रक्रिया सुधरेगी और हिचकी कम होगी। यह उपाय आपके श्वसन तंत्र को भी आराम देगा और आपको तुरंत राहत मिलेगी।

चाय बनाएं
आप चाहें तो डिल सीड तेल की चाय भी बना सकते हैं।लाभ के लिए एक कप गर्म पानी में 2-3 बूंदें तेल की डालकर इसे अच्छे से मिलाएं और धीरे-धीरे पिएं। यह चाय आपके शरीर को आराम देगी और हिचकी दूर करेगी। इस चाय का सेवन करने से न केवल हिचकी में राहत मिलेगी, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाएगी और आपको ताजगी का अनुभव होगा।

(आर एन एस )


क्या आप जानते हैं सर्दियों में कितने गिलास पानी पीना चाहिए? कहीं लापरवाही न पड़ जाए भारी

हमारे शरीर का 50 से 70 फीसदी हिस्सा पानी से बना होता है। हालांकि, यह फीसदी व्यक्ति की एज, जेंडर, वेट, और बॉडी टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में लोग कम पानी पीते हैं। ठंडी हवाओं के कारण प्यास नहीं लगती है. आमतौर पर लोगों को लगता है शरीर में पानी की कमी की समस्या सिर्फ गर्मियों के मौसम में होती है, हालांकि, यह बात एकदम गलत है। मौसम चाहे गर्मी का हो या सर्दी का, सभी लोगों के लिए प्रतिदिन जरूरी मात्रा में पानी या तरल पदार्थों का सेवन बेहद जरूरी होता है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी किसी भी मौसम में हो सकती है। इसके कारण कई बार शरीर में कुछ गंभीर समस्याओं व अवस्थाओं का कारण भी बन सकती है।

जानकारों और चिकित्सकों सभी का कहना है तथा कई शोधों में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि शरीर में पानी की कमी होना या डिहाइड्रेशन होना ना सिर्फ कुछ रोगों के होने की आशंका को बढ़ा सकता है बल्कि यह कई बार आम और गंभीर, दोनों प्रकार के रोगों के रिस्क को भी बढ़ा सकता है. इसलिए, हमें ठंड के मौसम खाना खाने से ज्यादा पानी की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी होता है।

सर्दियों में एक व्यक्ति को कितने गिलास पानी पीना चाहिए?
सर्दियों में सुबह से लेकर रात तक पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनाएं। सर्दियों के दौरान प्यास न होने पर भी दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जो पुरुष शारीरिक रूप से एक्टिव होते हैं उन्हें दिन में 10 से 14 गिलास पानी पीना चाहिए। वहीं, महिलाओं को 8 से 12 गिलास तक पानी पीना चाहिए। इसके अलावा आप पानी की जगह जूस, दूध, चाय और नारियल पानी भी पी सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा नहीं होती हैं।

मोटापा एक समस्या है
कम पानी पीने से मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। हम एक दिन में कितना खाना खाते हैं इसके आधार पर हमें उतना ही पानी पीना चाहिए जितना हमारे शरीर को चाहिए. अन्यथा खाया हुआ भोजन पच नहीं पाता है. इससे मोटापा बढ़ता है।

बदबू
कम पानी पीने से गला और मुंह सूखने की समस्याएं हो सकती है. इस कारण मुंह में बैक्टीरिया भी जमा हो जाते हैं और मुंह से दुर्गंध भी आती है. इसके अलावा, जब शरीर निर्जलित होता है, तो पसीना आना और पेशाब आना कम हो जाता है. इससे शरीर से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते और इससे अधिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं।

सिरदर्द
कम पानी पीने से सिरदर्द की समस्या बढ़ जाती है. दरअसल, यह समस्या पानी की कमी के कारण मस्तिष्क कोशिकाओं के अस्थायी रूप से सिकुडऩे के कारण होती है। शरीर में पानी की कमी के कारण पेट में एसिड का निर्माण बढ़ जाता है। इससे पेट में गैस बनने लगती है और कब्ज सहित सीने में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

थकान, शुष्क त्वचा
शरीर को एक्टिव रूप से कार्य करने के लिए पानी आवश्यक होती है। अगर शरीर में पानी की कमी हो तो थोड़ा सा भी काम करने पर आपको थकान महसूस हो सकती है. शरीर में पानी की कमी से त्वचा में रूखापन, काले घेरे, खुजली और झुर्रियां जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

डिहाइड्रेशन के लक्षण
डॉक्टरों का कहना है कि वैसे तो हर उम्र में शरीर में पानी की कमी के लक्षण लगभग एक जैसे ही ही हैं लेकिन उम्र के अनुसार कभी-कभी कुछ लक्षण अलग भी हो सकते हैं। विशेषतौर पर छोटे बच्चों में पानी की कमी होने पर मुंह और जीभ पर खुश्की, रोने पर आंसुओं में कमी तथा कम पेशाब आने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

(आर एन एस )


मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हैं चिंतित, इन आदतों को सुधारें, नहीं तो होगा नुकसान

आजकल सबकी जिंदगी इतनी फास्ट हो गई है कि हम अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। जब तक कुछ बहुत बड़ा नहीं हो जाता, हम सोचते रहते हैं कि सब ठीक है। लेकिन असल में, मानसिक रुप से स्वास्थ्य रहना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक रुप से स्वास्थ्य रहना। अगर हम मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं, तो हमारी बाकी जिंदगी भी ठीक से नहीं चल सकती. तो आइए आज हम बात करते हैं कि कैसे अपनी मानसिक सेहत का ध्यान रखें और क्या आदतें हमारी सेहत को बिगाड़ सकती हैं।

मेंटल हेल्थ की समस्याएं
हम क्या खाते हैं, हमारी दिनचर्या कैसी है, और हम कब सोते हैं, इन सबका असर हमारी मेंटल हेल्थ पर पड़ता है। अगर हम सही से नहीं सोते, हमारे मन में निगेटिव बिचार आते हैं या हम सोचते हैं और साथ मे गलत खानपान रखते हैं.  तो हमारी मानसिक स्थिति बिगड़ सकती है. हमें इन आदतों को पहचानकर सुधारने की कोशिश करनी चाहिए. सही दिनचर्या और अच्छे विचारों से हम अपनी मानसिक सेहत को ठीक रख सकते हैं।

सोशल मीडिया का असर
आजकल के समय में सब लोग मोबाइल पर लगे रहते हैं, खासकर सोशल मीडिया पर. लेकिन क्या आप जानते हैं, यह हमारी मेंटल हेल्थ के लिए सही नहीं है? अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताने से मानसिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। सोशल मीडिया से थोड़ा दूर रहना जरूरी है।

सोच को सकारात्मक रखें
कभी-कभी हम खुद को नकारात्मक तरीके से सोचते हैं, जैसे मैं यह नहीं कर सकता या मैं अच्छा नहीं हूं. ऐसे बिचार हमारी मानसिक स्थिति को और खराब कर सकता है। इसलिए, हमें अपनी सोच को सकारात्मक रखना चाहिए। अच्छे विचारों से हम अपनी मानसिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

नींद का महत्व
क्या आप जानते हैं कि नींद भी हमारी मानसिक सेहत को प्रभावित करती है? अगर हम सही से नहीं सोते, तो हमारी याददाश्त कमजोर हो सकती है और तनाव भी बढ़ सकता है।  इसलिए हमें हर दिन 7 से 9 घंटे की नींद लेनी चाहिए. सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें और एक शांत वातावरण में सोने की कोशिश करें।
मेंटल हेल्थ को ठीक रखना बहुत जरूरी है. इसके लिए हमें अपनी आदतों को सुधारने की जरूरत है, जैसे सही दिनचर्या अपनाना, सोशल मीडिया से थोड़ा दूर रहना और सकारात्मक सोच रखना। इससे हम मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं और खुशहाल जिंदगी जी सकते हैं।

(आर एन एस )


सर्दियों में त्वचा पर होने वाली खुजली को शांत कर सकते हैं ये 5 घरेलू नुस्खे

सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा चलती है, जो हमारी त्वचा को रूखा और शुष्क बना देती है। इसके कारण त्वचा पर खुजली होने लगती है और त्वचा छिलने भी लगती है।इस समस्या से निपटने के लिए त्वचा को महज मॉइस्चराइज करना काफी नहीं होता है। सर्दी के दौरान त्वचा की देखभाल करते हुए खुजली को मिटाने के लिए आपको ये 5 घरेलू नुस्खे अपनाने चाहिए।इनके जरिए आपकी त्वचा अंदरूनी तौर पर मॉइस्चराइज भी हो जाएगी।

ओट्स वाले पानी से नहाएं
आप त्वचा पर होने वाली खुजली को शांत करने के लिए ओट्स वाले पानी से नहा सकते हैं। इस खाद्य पदार्थ में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो त्वचा की समस्याओं को ठीक कर सकते हैं।पानी को गर्म करने के बाद उसमें ओट्स डालें और कुछ देर उबलने दें। जब पानी गुनगुना हो जाए, तो उससे नहा लें।ओट्स के एंटी-ऑक्सीडेंट गुण त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत बना देते हैं, जिसके कारण त्वचा नमी युक्त बन जाती है।

नारियल तेल लगाएं
कई लोग सर्दियों के मौसम में त्वचा को मॉइस्चराइज करने के लिए क्रीम की जगह नारियल तेल का इस्तेमाल करते हैं। इस पदार्थ के जरिए आप त्वचा पर होने वाली खुजली को भी शांत कर सकते हैं।यह एक प्राकृतिक इमोलिएंट होता है, जो शुष्क त्वचा को हाइड्रेशन प्रदान करता है। साथ ही, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं।नहाने के तुरंत बाद नारियल तेल इस्तेमाल करें या उससे त्वचा की मालिश करें।

एलोवेरा जेल भी आएगा काम
एलोवेरा के पौधे से निकलने वाले ताजे जेल को लोग सदियों से त्वचा की देखभाल के लिए उपयोग करते हैं। इसे लगाने से त्वचा की सूजन दूर करने, शुष्कता मिटाने और खुजली को कम करने में मदद मिल सकती है।एलोवेरा जेल को अपनी त्वचा पर लगाएं और उसे अच्छी तरह से अवशोषित होने दें। आप बाजार में मिलने वाले एलोवेरा जेल से बने उत्पाद भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

नहाने के लिए गुनगुने पानी का करें इस्तेमाल
सर्दियों में लोग गर्म पानी से नहाते हैं, जो त्वचा को शुष्क बनाने में योगदान देता है। ऐसे में त्वचा के प्राकृतिक तेलों को बनाए रखने के लिए आपको गर्म पानी के बजाय गुनगुने पानी से नहाना चाहिए।इसके अलावा, नहाने के समय को भी कम करें और उसके लिए केवल 10 से 15 मिनट ही लें। इससे आपकी त्वचा पानी के सुखाने वाले प्रभाव के संपर्क में कम समय तक आएगी, जिससे नमी बनाए रखने में मदद मिलेगी।

साबुन की जगह उपयोग करें सौम्य क्लींजर
सर्दियों के दौरान अधिक खुशबु वाले साबुन से नहाना त्वचा की सुरक्षात्मक परत को प्रभावित कर सकता है और खुजली को बढ़ा सकता है।इसीलिए आपको इस मौसम में साबुन की जगह पर किसी सौम्य क्लींजर का इस्तेमाल करना चाहिए। इन क्लींजर का पीएच स्तर हल्का होता है, जो त्वचा के प्राकृतिक तेलों को बनाए रखने में मदद करता है।ऐसा क्लींजर उपयोग करें, जिसमें कोई रसायन न मौजूद हों और जो त्वचा को नमी प्रदान कर सके।

(आर एन एस )


क्या शुगर-फ्री बिस्कुट का सेवन करना स्वास्थ्य के सच में होता है फायदेमंद?

आजकल बाजार में शुगर-फ्री बिस्कुट का चलन बढ़ता जा रहा है। लोग इन्हें सेहतमंद विकल्प मानकर खरीदते हैं, लेकिन क्या ये वाकई में हमारी सेहत के लिए अच्छे होते हैं?इस लेख में हम जानेंगे कि शुगर-फ्री बिस्कुट के बारे में कौन-कौन सी गलतफहमियां प्रचलित हैं और इनका सच क्या है।शुगर-फ्री का मतलब कैलोरी फ्री नहीं होता और इनमें इस्तेमाल होने वाले अप्राकृतिक स्वीटनर्स भी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

शुगर-फ्री का मतलब कैलोरी फ्री नहीं होता
शुगर-फ्री बिस्कुट का मतलब यह नहीं होता कि उनमें कैलोरी नहीं होती है। अक्सर इनमें शक्कर की जगह मिठास देने वाले माल्टोडेक्सट्रिन या अप्राकृतिक स्वीटनर्स जैसे अन्य तत्व मिलाए जाते हैं, जो कैलोरी युक्त होते हैं।इसलिए, अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं तो केवल शुगर-फ्री लेबल देखकर इनका सेवन करना सही नहीं होगा।इन बिस्कुट में भी कैलोरी होती है, जो आपके वजन घटाने के प्रयासों को प्रभावित कर सकती है।

आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के नुकसान
शुगर-फ्री बिस्कुट में इस्तेमाल होने वाले अप्राकृतिक स्वीटनर्स भी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं।कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि ये स्वीटनर्स हमारे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, जैसे पेट की समस्याएं पैदा करना और चयापचय पर असर डालना।इसके अलावा, कुछ मामलों में ये स्वीटनर्स मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए, इन्हें नियमित रूप से खाने से बचना चाहिए और प्राकृतिक विकल्पों को अहमियत देनी चाहिए।

पोषण की कमी
शुगर-फ्री बिस्कुट में पोषक तत्वों की कमी होती है। इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की मात्रा कम होती है।ये केवल कार्बोहाइड्रेट और वसा का स्रोत बन जाते हैं, जो हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनमें प्रोटीन की भी कमी होती है, जिससे ये संतुलित आहार का हिस्सा नहीं बन पाते।इसलिए, इन्हें सेहतमंद स्नैक मानकर खाना सही नहीं होगा और हमें इनके विकल्प के रूप में अधिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों का चयन करना चाहिए।

प्राकृतिक विकल्पों को अपनाएं
अगर आपको मीठा खाने का मन करता है तो प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना बेहतर होगा। केले, सेब या अंगूर जैसे फल न केवल मिठास देते हैं, बल्कि इनमें फाइबर और विटामिन भी मौजूद होता है।इसके अलावा आप घर पर बने सेहतमंद स्नैक्स भी आजमा सकते हैं, जिनमें चीनी की मात्रा नियंत्रित हो। इस प्रकार हम देख सकते हैं कि शुगर-फ्री बिस्कुट को पूरी तरह से सेहतमंद मान लेना सही नहीं है।

(आर एन एस )


बच्चे ही नहीं बड़ों की जिंदगी भी तबाह कर सकते हैं मार्केट में मिलने वाले एनर्जी ड्रिंक्स, इन बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

आजकल मार्केट में तरह तरह के एनर्जी ड्रिंक्स मिलने लगे हैं। ये एनर्जी ड्रिंक भले ही शरीर को तुरंत एक्टिव मोड में ले आते हों, लेकिन लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। हाई शुगर और हाई कैफीन वाले ये एनर्जी ड्रिंक पिछले कुछ सालों में डायबिटीज का बड़ा कारण बन चुके हैं। हाल ही में कंबोडिया सरकार ने स्कूलों में एनर्जी ड्रिंक्स बेचने पर रोक लगा दी है। जिसकी वजह युवाओं में डायबिटीज, मोटापा और दूसरी बीमारियों के बढऩा को बताया गया है। आइये जानते हैं कि एनर्जी ड्रिंक्स को क्यों इतना खतरनाक माना जाता है। अगर आप एनर्जी ड्रिंक पीते हैं तो इससे शरीर को क्या नुकसान होता है?

न्यूट्रीशियन, वेट लॉस कोच और कीटो डाइटिशियन स्वाति सिंह के अनुसार, एनर्जी ड्रिक्स में शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है और जब आप ये ड्रिक्स पीते हैं तो शरीर इस शुगर को फैट और ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में डिपॉजिट कर देता है। जिससे आपको फैटी लिवर की समस्या हो सकती है आपका ट्राइग्लिसराइड्स हाई हो सकता है। इससे आपको कार्डियक अरेस्ट आ सकता है। हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है। एनर्जी ड्रिंक्स में हाई कैफीन और शुगर होने के कारण इससे हार्ट बीट बढ़ सकती है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। ये सारी चीजें हार्ट के लिए ठीक नहीं है।

एनर्जी ड्रिंक के नुकसान
जब आप ऐसे एनर्जी ड्रिक्स लेते हैं तो इससे शरीर में कैफीन की मात्रा बढ़ती है जो आपको रेस्टलेस बनाता है। इससे एंग्जाइटी लेवल बढ़ जाता है। इससे आपकी नींद भी प्रभावित होती है। कुछ लोगों को नींद नहीं आने, सिर दर्द और माइग्रेन की समस्या होने लगती है। एनर्जी ड्रिंक्स में ग्लोकोज की मात्रा ज्यादा होने के कारण एसिड बढ़ सकता है। अगर आप लंबे समय तक किसी भी एनर्जी ड्रिंक का सेवन करते हैं तो इससे गैस्ट्राइटिस की समस्या हो सकती है। एसिड रिफ्ल्कशन हो सकता है। नॉजिया हो सकता है। इसलिए एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन न करें।

एनर्जी ड्रिंक का किडनी पर असर
एनर्जी ड्रिंक्स के अंदर कैफीन की मात्रा ज्यादा होती है। ज्यादा कैफीन आपके शरीर को डिहाइड्रेट कर देता है। लंबे समय में डिहाइड्रेशन की वजह से आपकी किडनी पर असर आना शुरू हो जाता है। वहीं इसमें शुगर की मात्रा भी ज्यादा होती है जो किडनी को स्ट्रेस में डालती है। दोनों ही चीजें किडनी की सेहत के लिए ठीक नहीं हैं।

बच्चों के लिए क्यों खतरनाक हैं एनर्जी ड्रिंक
अगर बच्चे या युवा इस तरह के एनर्जी ड्रिक्स लेते हैं तो इससे बच्चों के दिमाग के विकास पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। ऐसे बच्चे अपने गुस्से पर कंट्रोल नहीं रख पाते हैं। बच्चों के अंदर व्यवहार से जुड़े बदलाव आने लगते हैं। बच्चों में मेटाबोलिक डिसऑर्डर का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप लगातार ऐसे ड्रिंक्स का सेवन करते हैं तो इससे शरीर की नेचुरल एनर्जी कम होने लगती है। आप बिना इन ड्रिक्स के खुद को थका हुआ और मानसिक तनाव में महसूस करते हैं।

एनर्जी ड्रिक्स पीने से बढ़ता है इन बीमारियों का खतरा
एनर्जी ड्रिंक्स ज्यादा पीने से मेंटल हेल्थ बुरी तरह से प्रभावित होती है। इससे नींद खराब होती है। डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। बच्चों में मोटापा बढऩे लगता है और वो बुरी तरह से बर्बाद हो सकते हैं। एनर्जी ड्रिंक्स में टॉराइन और गुआराना जैसे तत्व पाए जाते हैं जो आपके अंदर मानसिक समस्याएं, टेंशन और घबराहट बढ़ा सकते हैं। टीनएज में बच्चों को इस तरह की ड्रिक्स से दूर रखना चाहिए। ये उनके ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।

(आर एन एस )


सर्दियों के मौसम में इन 5 तरीकों से खाएं अंडे, कोसों दूर भागेंगी बीमारियां

अंडा सर्दियों में खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह प्रोटीन का अच्छा माध्यम है और शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। बहुत से लोग अपनी सुबह की शुरुआत अंडे के साथ करते हैं, क्योंकि यह हमें पूरे दिनभर के लिए ताजगी और एनर्जी देता है. अंडे में कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो हमारी इम्?युनिटी को भी मजबूत करते हैं। तो चलिए, जानते हैं अंडे को खाने के कुछ टेस्टी और आसान तरीके।

एग भुर्जी
एग भुर्जी बनाना बहुत आसान है। इसमें प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और हरी मिर्च डालकर हल्का मसाला बना सकते हैं. इसे रोटी या ब्रेड के साथ खाएं. यह खाने में बहुत टेस्टी और सर्दियों के लिए परफेक्ट कॉम्बिनेशन होता है।

अंडा करी
अंडा करी बना के भी खा सकते हैं जिन्हे अंडा खाना पसंद है उसके लिए अंडा की करी एक अच्छा ऑप्शन है. इसे बनाने के लिए अंडे उबालकर टमाटर की प्यूरी और मसालों के साथ पकाना होता है। यह सर्दियों में खाने में बहुत टेस्टी लगता है और अगर गरमागरम हो तो इसका टेस्ट दोगुना हो जाता है।

अंडा बिरयानी
बिरयानी में उबले अंडे डालने से उसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. अगर आप बिरयानी के शौकीन हैं, तो उबले अंडे डालकर इसे और भी टेस्टी बना सकते हैं. इसे हरी चटनी या रायते के साथ खाएं, मजा आ जाएगा।

उबला हुआ अंडा
अगर आपको मिर्च-मसाले या तला-भुना खाना पसंद नहीं है, तो उबला हुआ अंडा एक बेहतरीन ऑप्शन है. यह सर्दियों में शरीर को गर्मी देता है और वजन को भी कंट्रोल करने में मदद करता है. इसे आप नाश्ते में खा सकते हैं।

ऑमलेट
ऑमलेट एक हेल्दी और जल्दी बनने वाला नाश्ता है. इसे प्याज, टमाटर और हरी धनिया डालकर बना सकते हैं. इसमे प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा मे होता है, जो सर्दियों में शरीर को गर्म रखता है. आप इसमे ब्रड भी लगा के खा सकते हैं।

सर्दियों में अंडे खाने के फायदे
अंडे में प्रोटीन और विटामिन डी होता है, जो हड्डियों को मजबूत करता है और शरीर की गर्मी बनाए रखता है. इसके अलावा, यह मस्तिष्क के लिए भी अच्छा होता है. अगर आप सर्दियों में रोज अंडे खाते हैं, तो आप ठंड से बच सकते हैं और आपका इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत रहेगा। इसलिए, अंडे को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. यह न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

(आर एन एस )


अंकुरित गेहूं का सेवन सेहत के लिए होता है फायदेमंद, इससे बनाएं ये 5 पौष्टिक व्यंजन

अंकुरित गेहूं एक बेहद पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल की भरपूर मात्रा होती है।इसे अपनी डाइट में शामिल करने से न केवल आपकी ऊर्जा बढ़ सकती है, बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत हो सकता है। इस लेख में हम आपको अंकुरित गेहूं से बनने वाले खास व्यंजनों की रेसिपी बताएंगे, जो रोजमर्रा के खाने से अलग और पौष्टिक हैं। इन व्यंजनों को बनाना भी बहुत आसान है।

अंकुरित गेहूं का सलाद
अंकुरित गेहूं का सलाद एक ताजगी भरा और पौष्टिक व्यंजन है। इसे बनाने के लिए आपको चाहिए होगा- 1 कप अंकुरित गेहूं, 1 कटा हुआ टमाटर, 1 कटा हुआ खीरा, 1 कटा हुआ प्याज, नींबू का रस, नमक और काली मिर्च।इसके लिए सभी सब्जियों को काटकर सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिला लें। यह सलाद न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को भी स्वस्थ रखता है।

अंकुरित गेहूं की टिक्की
अंकुरित गेहूं की टिक्की एक बेहतरीन स्नैक हो सकती है। इसे बनाने के लिए आपको चाहिए होगा- 2 कप अंकुरित गेहूं, 2 उबले हुए आलू, अदरक, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, स्वादानुसार नमक और मसाले।इसे बनाने के लिए आलू को मीसें और सभी सामग्रियों को मिलाकर गोल-गोल टिक्कीयां तैयार कर लें।अब इन टिक्कियों को तेल में सुनहरा होने तक सेंके। ये टिक्कीयां प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती हैं, जो आपके स्नैक टाइम को सेहतमंद बना सकती हैं।

अंकुरित गेहूं का सूप 
ठंड के मौसम में अंकुरित गेहूं का गर्मा-गर्म सूप पीने का मजा ही अलग होता है। इसके लिए आपको चाहिए होगा- 1 कप अंकुरित गेहूं, गाजर, बीन्स, मटर आदि जैसी सब्जियां, अदरक लहसुन का पेस्ट और मसाले।सब्जियों को उबालें और उसमें अंकुरित गेहूं मिलाएं। इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट और मसाले मिलाएं। इसे अच्छी तरह पकाएं, ताकि सभी स्वाद मिल जाएं।यह सूप विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो शरीर को गर्माहट और पोषण प्रदान करता है।

अंकुरित गेहूं की खिचड़ी
खिचड़ी तो आपने कई बार खाई होगी, लेकिन इस बार अंकुरित गेहूं की खिचड़ी चखकर देखें। इसके लिए आपको चाहिए होगा- आधा कप चावल, आधा कप मूंग दाल, 1 कप अंकुरित गेहूं, स्वादानुसार नमक और मनचाहे मसाले। सबसे पहले चावल और दाल को पकाएं, फिर उसमें अंकुरित गेहूं डालें और मसाले मिलाएं। यह खिचड़ी पेट के लिए हल्की होती है और पोषण से भरपूर होती है, जिससे पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहता है।

अंकुरित गेहूं का पराठा
पराठे तो सभी पसंद करते हैं, लेकिन इस बार अंकुरित गेहूं का पराठा बनाएं। इसके लिए आपको चाहिए होगा- आटा, उबले हुए आलू, बारीक कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ती, मसाले और अंकुरित गेहूं। आटे में सभी सामग्रियां मिलाकर पराठे बेल लें और घी में सेंक लें। ये पराठे स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इन व्यंजनों को डाइट में शामिल करके आप स्वस्थ रह सकते हैं।

(आर एन एस )


वजन कम करने के लिए खाते हैं ज्यादा फल, तो हो जाएं सावधान, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

यूं तो फल खाना सभी की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। सर्दियों में कई तरह के फल से बाजार गुलजार हो जाते हैं. अधिकांश फलों में शुगर की मात्रा बेहद कम होती है. लेकिन क्या आपको पता है अगर आप ज्यादा मात्रा में फल खाते हैं तो ये आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दरअसल फलों में नेचुरल शुगर पाया जाता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन इसका ज्यादा मात्रा में सेवन किया जाए तो ये स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

ज्यादा फल खाने से क्या होता है नुकसान?
फलों में फ्रुक्टोज पाया जाता है। अगर ये हमारे शरीर में ज्यादा मात्रा में जाता है तो इससे मोटापा, दांतों में इंफेक्शन और पाचन में गड़बड़ी हो सकती है. इसके साथ ही सूजन, दस्त की समस्या भी हो सकती है।

क्या फल खाने से खराब हो सकते हैं दांत?
फलों में नैचुरल एसिड और शुगर पाया जाता है। इससे दांत खराब हो सकते हैं. फलों में पाए जाने वाले नैचुरल शुगर शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। ज्यादा फल उन लोगों के लिए भी नुकसानदायक है जिन्हें डायबिटीज की बीमारी है।

फल खाने से क्या कम होता है वजन ?
अगर आप वजन घटाने के लिए बहुत ज्यादा फल खा रहे हैं तो इससे फायदे की जगह नुकसान होगा. हेल्दी तरीके से वजन कम करने के लिए आपको केवल फल खाने के बजाय संपूर्ण संतुलित पौष्टिक डाइट लेनी चाहिए।

दिनभर में कितना फल खाना चाहिए?
एक्सपर्ट के अनुसार, एक दिन में फलों की केवल 4-5 सर्विंग ही लेनी चाहिए। फलों के साथ-साथ सब्जियां, साबुत अनाज, बीन्स, प्लांट बेस्ड प्रोटन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

(आर एन एस )


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