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क्या आप भी कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से हैं परेशान, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, कुछ ही दिनों में मिलेगी राहत

Category Archives: जीवन शैली

क्या आप भी कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से हैं परेशान, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, कुछ ही दिनों में मिलेगी राहत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। गलत खानपान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लोग अक्सर पेट से जुड़ी परेशानियों का सामना करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि योग इन समस्याओं से निजात दिलाने का एक प्राकृतिक और असरदार तरीका हो सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खास योगासन न सिर्फ कब्ज को दूर करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं। आइए जानते हैं चार ऐसे योगासनों के बारे में, जो रोजाना करने से आपको कुछ ही दिनों में राहत मिल सकती है।

1. पवनमुक्तासन 
पवनमुक्तासन को कब्ज दूर करने का सबसे कारगर योग माना जाता है। ये आसन पेट में जमा गैस को बाहर निकालता है और पाचन को बेहतर बनाता है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएं और हाथों से उन्हें पकड़ लें। सिर को थोड़ा ऊपर उठाएं और नाक को घुटनों की ओर ले जाने की कोशिश करें। इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें और गहरी सांस लें। रोजाना सुबह इसे करने से पेट हल्का महसूस होता है और मल त्याग आसान हो जाता है।

2. वज्रासन 
वज्रासन खाने के बाद भी किया जा सकता है, जो इसे खास बनाता है। ये आसन पाचन अंगों में रक्त संचार बढ़ाता है और कब्ज से राहत देता है। इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठें, एड़ियों को अलग रखें और नितंबों को एड़ियों के बीच टिकाएं। पीठ सीधी रखें और हाथों को जांघों पर रखें। इस स्थिति में 2-3 मिनट तक रहें। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पाचन क्रिया सुधरती है।

3. भुजंगासन
भुजंगासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को साफ करता है। इसे करने के लिए पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और सांस लेते हुए सीने को ऊपर उठाएं। नजर सामने रखें और इस स्थिति में 15-20 सेकंड तक रहें। फिर धीरे से नीचे आएं। ये आसन पेट पर दबाव डालता है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या कम होती है। रोजाना 4-5 बार इसे दोहराएं।

4. बालासन 
बालासन तनाव कम करने के साथ-साथ पाचन अंगों को आराम देता है। इसे करने के लिए घुटनों पर बैठें, फिर आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन पर टिकाएं। हाथों को आगे की ओर बढ़ाएं या शरीर के पास रखें। गहरी सांस लेते हुए 1-2 मिनट तक इस मुद्रा में रहें। ये आसन पेट को हल्का मालिश देता है, जिससे मल त्याग में आसानी होती है।

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क्या आप भी रखना चाहते हैं अपने हार्ट को स्वस्थ, तो अपनी इन आदतों में करें सुधार 

हृदय रोगों के बढ़ते मामले दुनियाभर में चिंता का कारण बने हुए हैं। हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं के चलते हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी हृदय की बीमारियों का प्रमुख कारण है।

ब्लड प्रेशर का अक्सर बढ़ा रहना या धमनियों में प्लाक का निर्माण होने से हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।

धमनियों में प्लाक के निर्माण को मेडिकल की भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस के नाम से जाना जाता है, इसमें धमनियों की दीवारों पर फैट, कोलेस्ट्रॉल या कैल्शियम जमा हो जाते हैं। इस तरह के जमाव के कारण रक्त प्रवाह बाधित हो जाती है। समय रहते अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।

धमनियों में प्लाक बनने के दुष्प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिस तरह से हमारी जीवनशैली में नकारात्मक बदलाव आया है, उसने धमनियों में प्लाक बनने की समस्या को काफी बढ़ा दिया है। धूम्रपान, शराब और शारीरिक निष्क्रियता जैसी आदतें दिल की बीमारियों के जोखिम को और भी बढ़ा देती हैं।

धमनियों में प्लाक बनने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। जो लोग सेचुरेटेड और ट्रांस फैट वाली चीजें (जैसे तली-भुनी और प्रोसेस्ड फूड्स) अधिक खाते हैं उनमें प्लाक बनने का खतरा रहता है। इन सबके साथ अगर आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है तो इससे धमनियों पर दबाव अधिक हो जाता है जिससे धमनियों की दीवारें कमजोर हो जाती हैं और इसके फटने का खतरा हो सकता है।

आपकी भी तो नहीं हैं ऐसी गड़बड़ आदतें?

कुछ गड़बड़ आदतें प्लाक बनने के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोगों को सावधान हो जाना चाहिए। सिगरेट में मौजूद निकोटीन और टार रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और धमनियों को संकीर्ण कर देते हैं। इसी तरह अधिक शराब का सेवन लिवर और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जिससे धमनियों से रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है।

अध्ययनों से पता चलता है अधिक वजन या मोटापे के शिकार लोगों में इंसुलिन प्रतिरोध का जोखिम भी अधिक होता हैजो धमनियों में प्लाक जमा होने के खतरे को बढ़ा देती है।

धमनियों में प्लाक के निर्माण को रोकने के उपाय

अगर हम सभी नियमित रूप से बस इन चार बातों को ध्यान में रखें तो हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
धमनियों में संकुचन की समस्या को रोकने के लिए धूम्रपान बिल्कुल बंद कर दें। हृदय के स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान बेहद खतरनाक हो सकता है।
आहार पर विशेष ध्यान दें। भोजन में हेल्दी फैट वाली चीजें जैसे देसी घी, बादाम, अखरोट, मछली आदि को शामिल करें। तले-भुने चीजों का सेवन कम करें।
फाइबर युक्त आहार जैसे मकई, गेहूं के खाद्य पदार्थ, जई, दाल, सब्जियां और बीन्स को भोजन में शामिल करें।
नियमित रूप से व्यायाम करें। योग और प्राणायाम से काफी लाभ मिल सकता है।

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क्या आपकी उम्र भी है 50 से ज्यादा, तो इन टीकों को जरुर लगवाएं, बीमारियों का खतरा होगा कम 

उम्र बढ़ने के साथ कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कम उम्र से ही सेहत को लेकर सावधान हो जाने की सलाह देते हैं। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है, प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने लगती है, मांसपेशियों और हड्डियों की समस्याएं बढ़ जाती है और आप तमाम प्रकार की बीमारियों के चपेट में आते जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई जैविक परिवर्तन भी होने लगते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 50 की उम्र हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, आंखों से कम दिखने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।

अगर कम उम्र से ही लाइफस्टाइल और आहार में सुधार कर लिया जाए तो ये भविष्य में होने वाली कई बीमारियों से आपको बचाए रखने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ 50 की उम्र के बाद सभी लोगों को कुछ टीके लगवाने की सलाह देते हैं जो आपको अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

50 की उम्र के बाद वैक्सीनेशन

डॉक्टर बताते हैं, 50 की उम्र के बाद शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम करके इन बीमारियों से बचा जा सकता है। समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना भी बहुत जरूरी है, ताकि किसी बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता चल सके।

कुछ वैक्सीन्स भी आपकी सेहत को ठीक रखने में मददगार हो सकती हैं।

क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) व इंडियन चेस्ट सोसाइटी, नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियंस ऑफ इंडिया के मुताबिक फ्लू व निमोनिया बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए दो बड़े खतरे हैं। इन्हें रोकने के लिए इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवाएं। वहीं जोस्टर वायरस से बचाव के लिए शिंगल्स वैक्सीन लगवा सकते हैं। ये टीके आप कब लगवा सकते हैं और क्या आप इसके लिए पात्र हैं या नहीं, इसके बारे में जानने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

इन्फ्लूएंजा और निमोनिया से बचाव के लिए टीकाकरण

इन्फ्लूएंजा अत्यधिक संक्रामक वायरस है। हर साल इसमें म्यूटेशन देखा जाता रहा है, इसलिए बुजुर्गों को हर साल फ्लू के टीके की जरूरत होती है। 50 की उम्र के बाद ये टीकाकरण जरूर कराएं। मौसम बदलने के साथ होने वाली फ्लू की बीमारी से बचाने में ये वैक्सीन मददगार हो सकती है।

निमोनिया के खतरे से बचाव

निमोनिया के मामले वैसे तो सभी उम्र के लोगों में देखे जाते रहे हैं पर उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा और अधिक हो जाता है। यह फेफड़ों के साथ अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए PCV13 टीका उपलब्ध है, जो 13 प्रकार के निमोनिया से बचाव करता है। इस वैक्सीन के दो डोज लगते हैं। न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवाने वाले बुजुगों में निमोनिया का खतरा कम होता है और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत 50 से 70% घट जाती है।

शिंगल्स वैक्सीन

स्किन पर चकत्ते और खुजली से राहत 50 वर्ष व उससे अधिक उम्र वाले शिंगल्स वैक्सीन के दो डोज दो से छह माह के अंतर से लगवा सकते हैं। इससे जोस्टर वायरस के कारण स्किन पर होने वाले दर्दनाक चकत्ते, पीएचएन व अन्य जटिलताओं से सुरक्षा होगी। चूंकि उम्र बढ़ती है तो प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाती है, इससे उम्र दराज लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। ये वैक्सीन संक्रमण की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत को 40 से 70% तक कम कर सकती है।

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क्या आप भी रहते हैं मुंह के छालों से परेशान, तो इन घरेलू नुस्खों की मदद से पा सकते हैं आराम 

गर्मियों में तेज धूप, शरीर में बढ़ी हुई गर्मी, पोषण की कमी या डिहाइड्रेशन के कारण मुंह में छाले होना आम समस्या है। ये न केवल दर्द देते हैं, बल्कि खाने-पीने में भी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। अगर आप भी बार-बार इस समस्या से परेशान रहते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं। ये 3 आसान और असरदार घरेलू नुस्खे आपकी इस तकलीफ को चुटकियों में दूर कर सकते हैं।

1. शहद और इलायची – एक मीठा इलाज
शहद का एंटीबैक्टीरियल गुण और इलायची की ठंडक छालों को तेजी से ठीक करने में मदद करती है।

कैसे करें इस्तेमाल?
थोड़ा सा शहद लें और उसमें इलायची पाउडर मिलाएं।
इस मिश्रण को छालों पर लगाएं और 5-10 मिनट के लिए छोड़ दें।
फिर हल्के गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें।
दिन में 2-3 बार यह उपाय दोहराएं और जल्द राहत पाएं।

2. नारियल तेल – प्रकृति का जादू
नारियल तेल अपनी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज के लिए जाना जाता है। यह छालों को तेजी से भरने में मदद करता है और जलन को कम करता है।

कैसे करें इस्तेमाल?
अपनी उंगली पर थोड़ा सा शुद्ध नारियल तेल लें।
हल्के हाथों से छालों पर लगाएं और इसे लगा रहने दें।
इसे दिन में 2-3 बार करें, जल्द आराम मिलेगा।

3. तुलसी के पत्ते – प्राकृतिक हीलिंग का राज
तुलसी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके औषधीय गुण छालों को भी तेजी से ठीक करने में मदद करते हैं। यह एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होती है।

कैसे करें इस्तेमाल?
4-5 तुलसी के ताजे पत्ते लें और धीरे-धीरे चबाएं।
इसके बाद थोड़ा पानी पी लें।
इसे दिन में 2 बार करने से छाले जल्दी ठीक होंगे।

छालों से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें
पर्याप्त पानी पिएं – डिहाइड्रेशन से बचने के लिए दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
मसालेदार और गरम चीजों से बचें – ज्यादा तीखा या गरम खाना छालों को और बढ़ा सकता है।
पौष्टिक आहार लें – हरी पत्तेदार सब्जियां, दही, केला और विटामिन बी-12 युक्त फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करें।

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क्या आपकी भी थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि करने पर फूलने लगती है सांस, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, फेफड़े होंगे मजबूत 

कुछ कदमों पैदल टहलने पर आपकी सांस फूलने लगती है? या सीढ़ियां चढ़ते उतरते समय आप हांफने लगते हैं? अगर थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि करने पर ही आपकी सांस फूलने लगती है या जल्दी हांफने लगते हैं तो यह फेफड़ों की कमजोरी का संकेत हो सकता है। नियमित रूप से कुछ योगासनों का अभ्यास करके आप अपनी लंग्स कैपेसिटी (फेफड़ों की क्षमता) को बढ़ा सकते हैं और सांस संबंधी दिक्कतों से राहत पा सकते हैं। अगर आप इन योगासनों का नियमित अभ्यास करेंगे तो कुछ ही हफ्तों में आपकी सांस फूलने की समस्या में सुधार देखने को मिलेगा और फेफड़े पहले से ज्यादा मजबूत होंगे।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम के अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है। सांस फूलने की समस्या कम होती है और शरीर ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है। आरामदायक मुद्रा में बैठकर रीढ़ सीधी रखें। फिर दाहिने हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद करें और बाईं नासिका से गहरी सांस लें। अब बाईं नासिका बंद करके दाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह प्रक्रिया दूसरी तरफ से भी दोहराएं। रोज इस प्राणायाम को 5-10 मिनट करें।

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति के अभ्यास के लिए सीधा बैठें और पेट को ढीला छोड़ें। तेजी से नाक से सांस बाहर निकाले और पेट को अंदर करें। यह प्रक्रिया लगातार 50-100 बार करें। कपालभाति प्राणायाम करने से फेफड़ों की सफाई होती है। सांस से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं। शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है।

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क्या आपका बच्चा भी लेता है रात में खर्राटे, तो कहीं ये किसी बीमारी का संकेत तो नहीं, आइए जानते हैं इसके कारण

अगर आपका बच्चा रात में खर्राटे लेता है, तो इसे हल्के में न लें। हालांकि कभी-कभार खर्राटे आना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर ये समस्या लगातार बनी रहती है या खर्राटे बहुत तेज होते हैं, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। बच्चों में खर्राटे लेने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं, कुछ साधारण और अस्थायी होती हैं, जबकि कुछ स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर इशारा करती हैं। आइए जानते हैं कि इसके क्या कारण हो सकते हैं और कब आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है।

बच्चों में खर्राटे लेने के सामान्य कारण
हर खर्राटा समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर खर्राटे बार-बार आ रहे हैं, तो इन सामान्य कारणों को नजरअंदाज न करें:

सर्दी-जुकाम या एलर्जी
नाक बंद होने या बलगम जमा होने की वजह से सांस का मार्ग अवरुद्ध हो सकता है, जिससे खर्राटे आते हैं।

बढ़े हुए ऐडिनॉइड्स और टॉन्सिल्स
अगर टॉन्सिल्स और ऐडिनॉइड्स बड़े हो जाते हैं, तो गले में सांस के रास्ते को संकरा कर सकते हैं, जिससे खर्राटे आ सकते हैं।

ओवरवेट या मोटापा
अधिक वजन के कारण गले और गर्दन के आसपास अतिरिक्त फैट जमा हो सकता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो सकता है और खर्राटे शुरू हो सकते हैं।

स्लीपिंग पोजीशन
अगर बच्चा पीठ के बल सोता है, तो जीभ और ऊपरी तालू पीछे की ओर गिर सकते हैं, जिससे सांस का मार्ग संकरा हो जाता है और खर्राटे आने लगते हैं।

कब सतर्क होने की ज़रूरत है?
अगर आपके बच्चे के खर्राटे के साथ निम्नलिखित लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

खर्राटों के दौरान सांस रुकना
दिनभर सुस्ती और थकावट महसूस करना
ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
रात में पसीना आना
मुंह से सांस लेना या बार-बार जागना
सोते समय सांस फूलना या घुटन महसूस होना

क्या करें?
अगर आपके बच्चे को खर्राटे आ रहे हैं, तो घबराएं नहीं, कुछ आसान बदलाव और सावधानियां इस समस्या को हल कर सकती हैं:

सोने का रूटीन व्यवस्थित करें – हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें।
नाक की सफाई करें – सोने से पहले बच्चे की नाक को साफ करें ताकि सांस का मार्ग खुला रहे।
वजन नियंत्रण में रखें – बच्चे का खानपान संतुलित करें और फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें।
एलर्जी से बचाव करें – बच्चे के सोने की जगह को साफ रखें और धूल या पालतू जानवरों के संपर्क से बचाएं।
डॉक्टर से सलाह लें – अगर समस्या बनी रहती है या गंभीर लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

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हार्ट अटैक के खतरे को करना चाहते हैं कम, तो इन योगासनों को करें अपनी दिनचर्या में शामिल

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, असंतुलित खानपान और तनाव हृदयघात के कारणों में शामिल है। लेकिन सही जीवनशैली, पौष्टिक आहार और नियमित योग से अभ्यास हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। योग न केवल रक्त संचार को बेहतर बनाता है बल्कि तनाव, कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित करने में मदद करता है।

योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि हृदय को स्वस्थ और दीर्घायु बनाए रखने का एक प्राकृतिक तरीका है। अगर आप हार्ट अटैक के खतरे को कम करना चाहते हैं तो कुछ योगासनों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। आइए जानते हैं हृदय को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए कुछ प्रभावी योगासन।

ताड़ासन

ताड़ासन के नियमित अभ्यास से शरीर संतुलन में रहता है और रक्त परिसंचरण में सुधार होता है। इस आसन का अभ्यास रक्त संचार में सुधार, हृदय को मजबूत करने और मांसपेशियों को लचीला बनाने में सहायक है।

कैसे करें अभ्यास

ताड़ासन के अभ्यास के लिए पैरों को जोड़कर खड़े हो जाएं। अब हाथों को ऊपर उठाएं और उंगलियों को आपस में फंसा लें। धीरे-धीरे पूरे शरीर को ऊपर खींचें और गहरी सांस लें। कुछ सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें, फिर आराम से वापस आएं।

भुजंगासन

यह हृदय को सक्रिय करता है और रक्त संचार को सुचारू बनाता है। भुजंगासन हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करता है। छाती और फेफड़ों को खोलता है और रक्त प्रवाह को सुधारता है।

कैसे करें अभ्यास

इस आसन के अभ्यास के लिए पेट के बल लेट जाएं और हाथों को कंधों के पास रखें। धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे की ओर झुकाएं। गहरी सांस लें और इस स्थिति में 15-30 सेकंड तक रहें। फिर पुरानी स्थिति में वापस आ जाएं।

वज्रासन

भोजन के बाद वज्रासन के अभ्यास से पाचन तंत्र और रक्त प्रवाह बेहतर होता है। इस आसन का नियमित अभ्यास कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है और उच्च रक्तचाप को कम करता है।

वज्रासन के अभ्यास का तरीका

आसन के अभ्यास के लिए घुटनों के बल बैठें और एड़ियों पर शरीर का भार रखें। रीढ़ सीधी रखते हुए हाथों को घुटनों पर रखें। धीरे-धीरे गहरी सांस लें और कुछ मिनटों तक इस मुद्रा में बैठें।

सेतुबंधासन

सेतुबंधासन हृदय की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है और तनाव को कम करता है। इससे हृदय मजबूत बनता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इस आसन से चिंता और तनाव कम होती है।

कैसे करें अभ्यास

पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ लें। फिर पैरों को फर्श पर टिकाएं और हाथों को शरीर के पास रखें। धीरे-धीरे कूल्हों और पीठ को ऊपर उठाएं। कुछ सेकंड तक इस स्थिति में रहें और फिर वापस आएं।

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क्या आपको भी रहती है भूख न लगने की समस्या, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, मिलेगा फायदा 

अक्सर लोगों को भूख न लगने की शिकायत रहती हैं। भूख न लगना या कम लगना एक आम समस्या हो सकती है। इसके कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं जैसे पाचन तंत्र की गड़बड़ी, तनाव, गलत खानपान या लाइफस्टाइल की वजह से भूख न लगना। लेमानसिक तनाव व चिंता भी भूख लगने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। किन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना गंभीर समस्या का कारण बन सकता है। भूख न लगने पर आप ठीक से कुछ खाते नहीं, इससे कमजोरी हो सकती है। शरीर में पौष्टिकता की कमी भी होने लगती है। वजन कम होने लगता है और कई स्वास्थ्य विकारों की संभावना रहती है।

अगर आपको ठीक से भूख नहीं लगती या खाने की इच्छा कम होती है, तो योग इसका प्राकृतिक समाधान हो सकता है। कुछ विशेष योगासन पाचन तंत्र को सक्रिय कर भूख बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं भूख-प्यास बढ़ाने वाले कुछ असरदार योगासन और उनके फायदे।

वज्रासन

भूख बढ़ाने के लिए वज्रासन का अभ्यास भी असरदार है।
खाना खाने के बाद इसका अभ्यास करने से पाचन तेज होता है।
वज्रासन गैस, एसिडिटी और अपच को दूर करता है।

वज्रासन का अभ्यास कैसे करें?

घुटनों को मोड़कर पैरों के बल बैठ जाएं।
रीढ़ को सीधा रखें और हाथ घुटनों पर रखें।
इस मुद्रा में कम से कम 5-10 मिनट तक बैठें।

पवनमुक्तासन

इस आसन के अभ्यास से पाचन तंत्र को मजबूत रहता है।
गैस, कब्ज और बदहजमी की समस्या को दूर होती है।
पवनमुक्तासन भूख बढ़ाने में मदद करता है।

अभ्यास का सही तरीका

पवनमुक्तासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को सीधा रखें।
दाएं पैर को मोड़ें और घुटने को छाती की ओर लाएं।
दोनों हाथों से घुटने को पकड़ें और सिर को ऊपर उठाकर घुटने से मिलाएं।
20-30 सेकंड होल्ड करें और फिर दूसरी टांग से दोहराएं।

भुजंगासन

भुजंगासन के नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
ये आसन लीवर और आंतों को सक्रिय करता है।
भूख न लगने की समस्या को दूर करता है।

भुजंगासन के अभ्यास का तरीका

पेट के बल लेटकर हाथों को कंधों के नीचे रखें।
फिर सांस अंदर लेते हुए शरीर के ऊपरी भाग को उठाएं।
सिर को ऊपर उठाकर आसमान की ओर देखें।
इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें और फिर सामान्य अवस्था में लौट आएं।

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क्या आपको भी हो रही है बार-बार एसिडिटी की समस्या, तो अपनी खानपान की आदतों में करें ये बदलाव, मिलेगी राहत

अगर आपको बार-बार एसिडिटी हो रही है और इससे राहत नहीं मिल रही है, तो अपनी खानपान की आदतों में कुछ अहम बदलाव करके इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। एसिडिटी आमतौर पर गलत खानपान, तनाव और अनियमित जीवनशैली के कारण होती है। यहां कुछ असरदार टिप्स दिए गए हैं, जो आपकी फूड हैबिट्स को सुधारकर एसिडिटी की समस्या को कम करने में मदद करेंगे।

खानपान की आदतों में करें ये बदलाव

खाने का समय तय करें

रोजाना एक ही समय पर भोजन करें।
लंबे समय तक भूखे न रहें।
दिन में छोटे-छोटे मील्स लें (हर 2-3 घंटे में हल्का-फुल्का खाएं)।

2. भारी और तला-भुना खाना न खाएं

ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और ऑयली फूड एसिडिटी को बढ़ा सकता है।

इसके बजाय हल्का, उबला हुआ और कम मसाले वाला खाना खाएं।

3. कैफीन और कोल्ड ड्रिंक्स से बचें

चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा जैसी चीजों से परहेज करें।

इनके बजाय हर्बल टी या गुनगुना पानी पिएं।

4. खाने के तुरंत बाद न लेटें

भोजन के बाद कम से कम 30-40 मिनट तक सीधे बैठें।

लेटने से पेट का एसिड ऊपर आ सकता है, जिससे एसिडिटी बढ़ती है।

5. फाइबर युक्त आहार को अपनाएं

हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और सलाद का सेवन करें।

फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और एसिडिटी से राहत देता है।

6. अल्कलाइन फूड्स को डाइट में शामिल करें

केला, खीरा, तरबूज, नारियल पानी और पपीता जैसे फल एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं।

ये पेट के एसिड को बैलेंस करते हैं और पाचन को आसान बनाते हैं।

7. पानी की मात्रा बढ़ाएं

दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।

पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर एसिडिटी को कम करता है।

8. अदरक और तुलसी का सेवन करें

अदरक और तुलसी के पत्ते चबाने से एसिडिटी से राहत मिलती है।

अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो पाचन तंत्र को शांत करते हैं।

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क्या आप भी हैं बढ़ते वजन से परेशान, तो आइये जानते हैं वेट लॉस करने के सही उपाय

बढ़ता वजन मौजूदा समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में मोटापा या अधिक वजन की समस्या देखी जा रही है। अगर आपका वजन कंट्रोल में नहीं है या फिर आप इसे कंट्रोल करने के लिए उपाय नहीं कर रहे हैं तो इससे भविष्य में कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के होने का खतरा बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन कम करना सिर्फ आपके लुक के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही जानकारी की मदद से वजन कम करना संभव है। वेट लॉस से संबंधित मिथकों पर विश्वास करने के बजाय वैज्ञानिक तथ्यों को अपनाएं और हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखें।

वजन घटाना क्यों जरूरी है?

अधिक वजन या मोटापा सिर्फ बाहरी रूप से नहीं, बल्कि सेहत पर भी गहरा असर डालता है। यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। अधिक वजन के कारण कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है जिससे हृदय रोगों का जोखिम हो सकता है। मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाकर डायबिटीज की जटिलताओं को भी बढ़ा देती है।

जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें जोड़ों की समस्याएं, स्लीप एपनिया और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कई प्रकार की दिक्कतें भी अधिक देखी जाती रही हैं।

वजन कम करने के लिए आहार और दिनचर्या को ठीक करना जरूरी है, इसके साथ ही जरूरी है कि आपको वेट लॉस से संबंधित सही जानकारी हो। इसको लेकर कई अफवाहों पर अब भी लोग भरोसा कर लेते हैं।

सिर्फ डायटिंग से वजन कम होता है?

वेट लॉस के लिए कुछ प्रकार की डायटिंग आपके लिए मददगार हो सकती है, लेकिन केवल इसी से वजन नहीं घटाया जा सकता है। जीवनशैली में बदलाव, जैसे कि प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूर रहना, मीठे पेय पदार्थों का सीमित सेवन करना महत्वपूर्ण है। शोध बताते हैं कि देर रात खाने से वजन बढ़ सकता है, इसलिए सफलापूर्वक वजन घटाने के लिए आहार और जीवनशैली दोनों में बदलाव जरूरी है।

आपके लिए कौन सा डायटिंग प्लान सही है इसको जानने के लिए डॉक्टर से जरूर मिलें।

वेट लॉस के लिए ज्यादा से ज्यादा समय जिम में बिताना चाहिए

वेट लॉस के लिए शारीरिक गतिविधि और व्यायाम जरूरी है पर वो भी नियंत्रित रूप में। कार्डियो के साथ-साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग व्यायाम मसल्स बनाकर मेटाबॉलिज्म बढ़ाते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करें। उन अभ्यास पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो फैट बर्न करने में मदद करती हैं। डाइट और लाइफस्टाइल में सुधार किए बिना सिर्फ जिम से ज्यादा फायदा नहीं होगा।

ज्यादा पसीना आने से वजन जल्दी घटता है।

पसीना सिर्फ पानी की कमी को दिखाता है, फैट लॉस नहीं। असली वजन घटाने के लिए कैलोरी डेफिसिट जरूरी है। आहार में लो फैट और लो कैलोरी वाली चीजों को शामिल करिए। हेल्दी फैट (जैसे एवोकाडो, नट्स, ऑलिव ऑयल) शरीर के लिए जरूरी होते हैं और वजन घटाने में मदद कर सकते हैं।

(साभार)


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