Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

लो बीपी में ज्यादा नमक खाना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

Category Archives: फिटनेस

लो बीपी में ज्यादा नमक खाना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) होने पर अक्सर सबसे पहले नमक खाने या नमक वाला पानी पीने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इससे ब्लड प्रेशर तेजी से सामान्य हो सकता है। हालांकि, यह उपाय हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। कई बार बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा नमक खाना फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि लो बीपी में नमक कब लाभदायक होता है और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए।

क्या लो बीपी में नमक खाना सही है?

नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब शरीर में सोडियम या तरल पदार्थों की कमी हो जाती है तो ब्लड प्रेशर गिर सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर जरूरत के अनुसार नमक और तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन हर बार लो बीपी की वजह सोडियम की कमी नहीं होती, इसलिए बिना कारण जाने नमक का सेवन बढ़ाना उचित नहीं माना जाता।

किन परिस्थितियों में मिल सकता है फायदा?

यदि लो ब्लड प्रेशर डिहाइड्रेशन, अधिक पसीना आने, उल्टी-दस्त या शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी के कारण हुआ है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नमक और पर्याप्त पानी लेना लाभकारी हो सकता है। इसके साथ ओआरएस या अन्य इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय भी कुछ मामलों में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इसका निर्णय व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।

जरूरत से ज्यादा नमक क्यों है नुकसानदायक?

अधिक मात्रा में नमक खाने से शरीर पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। लगातार ज्यादा सोडियम लेने से:

ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है।
किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
शरीर में सूजन और पानी जमा होने की समस्या हो सकती है।
हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

इसी वजह से सिर्फ लो बीपी के डर से रोजाना अतिरिक्त नमक खाना स्वास्थ्य के लिए सही विकल्प नहीं है।

लो ब्लड प्रेशर होने पर क्या करें?
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें।
पौष्टिक और संतुलित आहार लें।
अचानक बैठने या लेटने की स्थिति से खड़े न हों।
बार-बार चक्कर आना, बेहोशी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

किन लोगों को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी?

जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी, हृदय रोग या शरीर में सूजन की समस्या है, उन्हें नमक की मात्रा बढ़ाने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में बिना सलाह के नमक का सेवन बढ़ाना नुकसान पहुंचा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा उपलब्ध कराई गई सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

(साभार)


डायबिटीज का बढ़ता खतरा: मिठाई ही नहीं, ये आदतें भी बना सकती हैं मरीज

डायबिटीज का खतरा केवल मिठाई से नहीं, बल्कि खराब लाइफस्टाइल, मोटापा, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता से भी बढ़ता है। विशेषज्ञों ने बचाव के लिए संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम पर जोर दिया है।

शुगर यानी डायबिटीज आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और कामकाजी लोगों में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं और आने वाले वर्षों में मरीजों की संख्या में और बड़ा इजाफा होने की आशंका है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर डायबिटीज किन कारणों से होती है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के अनुसार, दुनिया में करीब 589 मिलियन (58.9 करोड़) वयस्क डायबिटीज से प्रभावित हैं। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर 853 मिलियन (85.3 करोड़) के पार पहुंच सकती है। चिंता की बात यह भी है कि बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद अपनी स्थिति से अनजान रहते हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं हो पाता और गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

क्या केवल चीनी खाने से होती है डायबिटीज?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि सिर्फ चीनी या मिठाई खाने से डायबिटीज हो जाती है। वास्तव में डायबिटीज एक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। इसके कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने लगता है।

हालांकि, जरूरत से ज्यादा चीनी और मीठे पेय पदार्थों का सेवन वजन बढ़ाने का कारण बन सकता है। बढ़ता वजन और मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देते हैं, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। यानी चीनी अप्रत्यक्ष रूप से जोखिम बढ़ा सकती है, लेकिन यह बीमारी का एकमात्र कारण नहीं है।

लाइफस्टाइल भी निभाती है अहम भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित भोजन, मोटापा, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना भी डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का अधिक सेवन भी ब्लड शुगर को प्रभावित करता है।

किन खाद्य पदार्थों से बढ़ सकता है खतरा?

डॉक्टरों का कहना है कि केवल मिठाइयों से ही नहीं, बल्कि सफेद ब्रेड, मैदा, केक, बिस्कुट, पैकेज्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक, तले हुए खाद्य पदार्थ और अत्यधिक प्रोसेस्ड स्नैक्स का बार-बार सेवन भी नुकसानदायक हो सकता है। इनमें मौजूद अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अस्वास्थ्यकर फैट शरीर के वजन और ब्लड शुगर दोनों पर नकारात्मक असर डालते हैं।

तनाव और कम नींद भी बन सकते हैं वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा हो सकता है। इससे कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो इंसुलिन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा तनाव के दौरान लोग अक्सर अनहेल्दी फूड ज्यादा खाते हैं और शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं, जिससे डायबिटीज का खतरा और बढ़ जाता है।

पेट की चर्बी बढ़ना भी है चेतावनी

डॉक्टरों के मुताबिक, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी टाइप-2 डायबिटीज का बड़ा जोखिम कारक है। मोटापे के कारण शरीर में सूजन बढ़ती है और इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं कर पाता। ऐसे में नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।

डायबिटीज से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मीठे पेय, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाए रखें। रोजाना शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं, संतुलित भोजन करें, पर्याप्त पानी पिएं और कम से कम 150 मिनट प्रति सप्ताह मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम करें। साथ ही 7-8 घंटे की अच्छी नींद और तनाव को नियंत्रित रखना भी डायबिटीज के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

(साभार)


सुबह उठते ही होता है सिरदर्द? तो इसे हल्के में न लें, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

सुबह नींद खुलते ही सिर में तेज दर्द या भारीपन महसूस होना कई लोगों की आम समस्या है। अक्सर लोग इसे थकान या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि यह परेशानी लगातार बनी रहे तो यह शरीर में छिपी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मॉर्निंग हेडेक डिहाइड्रेशन, नींद की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, माइग्रेन या स्लीप एपनिया जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में समय रहते इसकी वजह जानना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

पानी की कमी भी बन सकती है वजह

रातभर सोने के दौरान शरीर को कई घंटों तक पानी नहीं मिलता, जिससे हल्का डिहाइड्रेशन हो सकता है। शरीर में पानी की कमी होने पर मस्तिष्क पर असर पड़ता है और सुबह उठते ही सिरदर्द महसूस हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और सुबह उठकर एक-दो गिलास पानी पीने की आदत फायदेमंद मानी जाती है।

अधूरी नींद बढ़ाती है परेशानी

लगातार कम सोना या बार-बार नींद टूटना भी सुबह सिरदर्द का बड़ा कारण हो सकता है। पर्याप्त नींद न मिलने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और तनाव से जुड़े हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जिससे सिरदर्द की शिकायत बढ़ सकती है। विशेषज्ञ रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने की सलाह देते हैं।

स्लीप एपनिया को न करें नजरअंदाज

अगर सोते समय सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है, तेज खर्राटे आते हैं या दिनभर अत्यधिक नींद महसूस होती है, तो यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिसके कारण सुबह उठते ही सिरदर्द और थकान महसूस हो सकती है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

माइग्रेन भी हो सकता है कारण

माइग्रेन में सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द होता है, जो कई घंटों तक बना रह सकता है। कई मरीजों में इसका दर्द सुबह उठते ही शुरू हो जाता है। इसके साथ मतली, उल्टी और तेज रोशनी या आवाज से परेशानी भी हो सकती है। बार-बार ऐसी समस्या होने पर न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर का संकेत

अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर भी सुबह सिरदर्द की वजह बन सकता है। यदि सिरदर्द के साथ चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना या सीने में दर्द जैसी शिकायत हो, तो इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नियमित ब्लड प्रेशर की जांच इस जोखिम को कम करने में मदद करती है।

शराब और कैफीन का ज्यादा सेवन

रात में अधिक शराब पीने या जरूरत से ज्यादा कैफीन लेने से भी अगली सुबह सिरदर्द हो सकता है। वहीं, अचानक कैफीन छोड़ने पर भी यह समस्या देखने को मिलती है। इसलिए कैफीन का सीमित सेवन करें, शराब से बचें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह पर आधारित है। यदि सुबह का सिरदर्द बार-बार हो रहा है या इसके साथ अन्य गंभीर लक्षण भी दिखाई दें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

(साभार)


सिर्फ हेल्दी खाना नहीं, सही समय पर खाना भी है जरूरी, जानिए पूरे दिन का परफेक्ट डाइट शेड्यूल

आजकल लोग हेल्दी डाइट पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन भोजन का सही समय अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को सिर्फ पौष्टिक भोजन ही नहीं, बल्कि सही समय पर भोजन मिलना भी उतना ही जरूरी है। अनियमित समय पर खाना खाने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है और मोटापा, एसिडिटी, डायबिटीज व नींद से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में अगर आप खुद को दिनभर फिट और ऊर्जावान रखना चाहते हैं तो अपने खाने का एक तय शेड्यूल बनाना बेहद जरूरी है।

सेहतमंद रहने के लिए कब खाएं क्या? जानिए पूरे दिन का सही डाइट टाइम

सुबह का नाश्ता (7:00 से 9:00 बजे)

रातभर के लंबे अंतराल के बाद शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए सुबह उठने के एक से दो घंटे के भीतर नाश्ता कर लेना चाहिए। नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर, फल, दूध, अंडा, ओट्स या दलिया जैसी चीजें शामिल करना फायदेमंद माना जाता है।

मिड मॉर्निंग स्नैक (10:30 से 11:30 बजे)

अगर दोपहर के भोजन में अभी समय है तो बीच में हल्का और पौष्टिक स्नैक लेना बेहतर रहता है। इस समय मौसमी फल, नारियल पानी, छाछ या थोड़े से ड्राई फ्रूट्स शरीर को ऊर्जा देने के साथ भूख भी नियंत्रित रखते हैं।

दोपहर का भोजन (12:30 से 2:00 बजे)

दोपहर का खाना दिन का सबसे संतुलित भोजन होना चाहिए। इसमें दाल, हरी सब्जियां, रोटी, चावल, सलाद और दही जैसी चीजें शामिल करें। कोशिश करें कि रोजाना लंच एक निश्चित समय पर ही करें, ताकि पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम कर सके।

शाम का हेल्दी स्नैक (4:00 से 5:30 बजे)

शाम के समय बहुत ज्यादा तली-भुनी चीजें खाने से बचें। इसकी जगह ग्रीन टी, स्प्राउट्स, भुना चना, मखाने या फल जैसे हल्के विकल्प चुनें। इससे रात के खाने तक ऊर्जा बनी रहती है और ओवरईटिंग की संभावना भी कम होती है।

रात का खाना (7:00 से 8:30 बजे)

विशेषज्ञों के मुताबिक रात का भोजन हल्का और जल्दी कर लेना चाहिए। सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले डिनर करने से खाना आसानी से पच जाता है और नींद भी बेहतर आती है। रात में ज्यादा तला-भुना और भारी भोजन करने से बचना चाहिए।

देर से खाना खाने के क्या नुकसान हो सकते हैं?
पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
गैस और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है।
वजन बढ़ने का खतरा रहता है।
ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है।
नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और सुबह थकान महसूस हो सकती है।
समय पर भोजन करने के फायदे
पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है।
शरीर को पूरे दिन पर्याप्त ऊर्जा मिलती है।
वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
हार्मोन और मेटाबॉलिज्म संतुलित रहते हैं।
हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है।
रोजाना तय समय पर खाना खाने की डालें आदत

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए केवल पौष्टिक भोजन चुनना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही समय पर खाना भी उतना ही आवश्यक है। नियमित समय पर भोजन करने से शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) संतुलित रहती है, पाचन बेहतर होता है और कई बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। यदि आप लंबे समय तक फिट और एक्टिव रहना चाहते हैं तो अपने खाने का समय तय करें और उसी का नियमित रूप से पालन करें।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी विशेष बीमारी, दवा या डाइट संबंधी सलाह के लिए डॉक्टर या प्रमाणित डायटीशियन से परामर्श अवश्य लें।

(साभार)


क्या आपकी भी सीढ़ियां चढ़ते ही फूलने लगती है सांस? तो जान लीजिये इसके पीछे के कारण

क्या कुछ ही सीढ़ियां चढ़ने के बाद आपकी सांसें तेज चलने लगती हैं और थकावट महसूस होने लगती है? अक्सर लोग इसे सामान्य कमजोरी या बढ़ती उम्र का असर मानकर टाल देते हैं। लेकिन यदि थोड़ी सी शारीरिक मेहनत पर आपकी सांस बार-बार फूल रही है, तो यह शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अलर्ट हो सकता है। समय रहते इसके कारणों को समझना और विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी है।

सीढ़ियां चढ़ते समय आखिर क्यों फूलती है सांस?
सीढ़ियां चढ़ना एक मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) है। जब आप सीढ़ियां चढ़ते हैं, तो शरीर की मांसपेशियों को काम करने के लिए सामान्य से अधिक ऑक्सीजन और ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

दिल और फेफड़ों का तालमेल: इस अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए दिल तेजी से खून पंप करता है और फेफड़े अधिक ऑक्सीजन लेने के लिए तेजी से काम करते हैं।

सामान्य स्थिति: स्वस्थ व्यक्ति में कुछ मिनट विश्राम करने के बाद सांसें स्वाभाविक रूप से सामान्य हो जाती हैं।

असामान्य स्थिति: यदि दिल, फेफड़ों या रक्त संचार (Blood Circulation) में कोई रुकावट या समस्या हो, तो थोड़ी सी भी मेहनत पर सांस तेजी से फूलने लगती है।

सांस फूलने के मुख्य कारण
सांस फूलने की समस्या के पीछे सामान्य से लेकर गंभीर चिकित्सीय कारण हो सकते हैं:

सामान्य कारण:

शारीरिक सक्रियता की कमी (Sedentary Lifestyle) और मोटापा।

तेजी से सीढ़ियां चढ़ना या अत्यधिक तनाव/घबराहट।

धूम्रपान की आदत और बढ़ती उम्र।

चिकित्सीय (Medical) कारण:

फेफड़ों की बीमारियां: अस्थमा (Asthma) या सीओपीडी (COPD)।

हृदय संबंधी समस्याएं: दिल की कार्यक्षमता में कमी या आर्टरी ब्लॉक।

एनीमिया (Anemia): शरीर में हीमोग्लोबिन या खून की कमी।

थायरॉयड: थायरॉयड हार्मोन का असंतुलन।

कब हो जाएं तुरंत अलर्ट? (इमर्जेंसी के संकेत)

यदि सांस फूलने के साथ-साथ आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हों, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

सीने में दर्द, भारीपन या जकड़न महसूस होना।

चक्कर आना, सिर घूमना या बेहोशी जैसी स्थिति बनना।

पर्याप्त आराम (Rest) करने के बाद भी सांस सामान्य न होना।

हाथ, पैर या होठों का रंग नीला या पीला पड़ना।

बचाव और ध्यान रखने योग्य सावधानियां
धीरे-धीरे शुरुआत करें: सीढ़ियां चढ़ते समय हड़बड़ी न करें, गति सामान्य रखें।

शारीरिक सक्रियता बढ़ाएं: रोजाना वॉक, हल्का व्यायाम और प्राणायाम (Breathing Exercises) को रूटीन में शामिल करें।

जीवनशैली में सुधार: वजन नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें और धूम्रपान से दूरी बनाएं।

दवाइयों का ध्यान रखें: यदि आप पहले से हृदय रोग या अस्थमा के मरीज हैं, तो अपनी दवाएं नियमित रूप से लें।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में स्वयं उपचार करने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दैनिक आदतों में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियां और तेजी से बढ़ सकती हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, आनुवंशिक कारणों के अलावा हमारी रोजमर्रा की कई गलत आदतें दिल को नुकसान पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। घंटों बैठे रहना, जंक फूड का अधिक सेवन, धूम्रपान, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे-धीरे हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कम उम्र से ही हार्ट हेल्थ पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में सबसे अधिक मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं। भारत में भी बदलती जीवनशैली, मोटापा, तनाव और डायबिटीज जैसी समस्याओं ने हृदय रोगों का खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

बढ़ रहा है हृदय रोगों का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमा होने लगता है या ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा रहता है, तो हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार ये समस्याएं लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती हैं।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक अध्ययन में भी सामने आया है कि भारत के अधिकांश वयस्कों में कोलेस्ट्रॉल या रक्त में फैट का कम से कम एक स्तर सामान्य सीमा से बाहर पाया गया, जो भविष्य में हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

किन आदतों से बढ़ता है खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सामान्य दिखने वाली आदतें धीरे-धीरे दिल को कमजोर कर सकती हैं।

लंबे समय तक बैठे रहना: लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करने से शरीर की कैलोरी कम खर्च होती है, जिससे मोटापा, हाई ब्लड शुगर और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। इससे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन: पिज्जा, बर्गर, पैकेट वाले स्नैक्स और तले-भुने खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट अधिक होता है। इनका नियमित सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को बढ़ा सकता है।

तंबाकू और धूम्रपान: सिगरेट या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

व्यायाम की कमी: नियमित शारीरिक गतिविधि न करने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की या मध्यम एक्सरसाइज दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

लगातार तनाव: लंबे समय तक मानसिक तनाव रहने से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पर्याप्त नींद न लेना: रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद न मिलने पर हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

नियमित जांच भी है जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं अक्सर बिना किसी लक्षण के विकसित होती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्टों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)


बारिश में भीगने से पहले जान लें ये बातें, स्किन और बालों को हो सकता है नुकसान

मानसून की फुहारें गर्मी से राहत तो देती हैं, लेकिन बिना सावधानी के बारिश में भीगना आपकी त्वचा और बालों की सेहत पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर शुरुआती बारिश का पानी वातावरण में मौजूद धूल, धुआं और अन्य प्रदूषकों को अपने साथ लेकर आता है। ऐसे में यदि भीगने के बाद सही देखभाल न की जाए, तो स्किन एलर्जी, फंगल इंफेक्शन और बालों से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।

बारिश का पानी त्वचा को कैसे प्रभावित करता है?

1. एलर्जी और खुजली की समस्या
पहली बारिश का पानी पूरी तरह साफ नहीं होता। इसमें मौजूद धूल, केमिकल्स और प्रदूषक संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में खुजली, लालपन और जलन जैसी परेशानियां पैदा कर सकते हैं।

2. फंगल इंफेक्शन का बढ़ता खतरा
मानसून में वातावरण में नमी अधिक रहती है। यदि भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े पहने रहें, तो त्वचा पर फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दाद, रैशेज और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. पिंपल्स और ऑयली स्किन
इस मौसम में त्वचा अधिक तैलीय हो सकती है। यदि चेहरे पर बारिश का पानी सूख जाए और उसे साफ न किया जाए, तो रोमछिद्र बंद होने लगते हैं, जिससे मुंहासे और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ सकती है।

4. त्वचा की सुरक्षा परत को नुकसान
बारिश के पानी में मौजूद प्रदूषक त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा पर असर डाल सकते हैं, जिससे त्वचा रूखी और बेजान महसूस होने लगती है।

बालों पर बारिश का क्या असर पड़ता है?

1. बालों की चमक और नमी कम होना
बारिश का पानी बालों के प्राकृतिक तेल को प्रभावित कर सकता है, जिससे बाल रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं।

2. हेयर फॉल की समस्या
बारिश में भीगने के बाद यदि बालों को अच्छी तरह साफ और सुखाया न जाए, तो स्कैल्प पर गंदगी जमा हो सकती है। इससे बाल कमजोर होकर टूटने और झड़ने लगते हैं।

3. डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन
लंबे समय तक गीले बाल रहने से स्कैल्प में फंगस और बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो डैंड्रफ और खुजली का कारण बनते हैं।

4. बालों का उलझना और टूटना
बारिश के पानी और नमी के कारण बालों की बाहरी परत प्रभावित होती है, जिससे वे अधिक उलझने और टूटने लगते हैं।

बारिश में भीगने के बाद अपनाएं ये उपाय
घर पहुंचते ही साफ पानी से चेहरा और बाल धो लें।
माइल्ड शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करें।
त्वचा को अच्छी तरह सुखाकर मॉइस्चराइजर लगाएं।
गीले बालों में कंघी करने से बचें।
भीगे कपड़े तुरंत बदल लें।
शरीर को सूखा रखें ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।
पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें।
किन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को पहले से एलर्जी, एक्जिमा, सोरायसिस, बार-बार फंगल इंफेक्शन या बाल झड़ने की समस्या रहती है, उन्हें बारिश में भीगने से बचना चाहिए। यदि भीगने के बाद त्वचा पर लगातार खुजली, रैशेज, फफोले या बालों के झड़ने की समस्या बढ़ जाए, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

(साभार)


नहाते समय सबसे पहले शरीर के किस हिस्से पर डालना चाहिए पानी? जानें सही तरीका

नहाना सिर्फ शरीर की सफाई का तरीका नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आदत भी माना जाता है। आयुर्वेद में स्नान को दैनिक दिनचर्या (दिनचर्या) का अहम हिस्सा बताया गया है और इसके सही तरीके पर भी विशेष जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नहाने का क्रम और पानी का तापमान शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि स्नान की शुरुआत शरीर के किस हिस्से से करनी चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार कैसे करें स्नान की शुरुआत?

आयुर्वेद में सलाह दी जाती है कि स्नान करते समय सबसे पहले पैरों पर पानी डालना चाहिए। माना जाता है कि इससे शरीर धीरे-धीरे पानी के तापमान के अनुसार खुद को ढाल लेता है। इसके बाद घुटनों, हाथों, शरीर और अंत में सिर पर पानी डालना अधिक संतुलित तरीका माना जाता है।

पहले सिर पर पानी डालना क्यों सही नहीं माना जाता?

कई लोगों की आदत होती है कि वे सीधे सिर पर पानी डालकर नहाना शुरू कर देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ऐसा करने से शरीर को अचानक तापमान में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को माइग्रेन, साइनस, हाई या लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें इस आदत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और मौसम पर भी निर्भर करता है।

धीरे-धीरे पानी डालने के क्या हो सकते हैं फायदे?

पैरों से स्नान शुरू करने पर शरीर को पानी के तापमान के साथ तालमेल बैठाने का समय मिलता है। इससे अचानक ठंडे या गर्म पानी के संपर्क में आने से होने वाली असहजता कम हो सकती है। यह तरीका शरीर को आरामदायक महसूस कराने में भी मददगार माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार स्नान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

सुबह के समय स्नान करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है।
बहुत अधिक गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी कम कर सकता है, जबकि अत्यधिक ठंडा पानी हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए मौसम और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार पानी का चुनाव करें।
स्नान से पहले हल्की तेल मालिश (अभ्यंग) करने से त्वचा को पोषण और शरीर को आराम मिल सकता है।
लंबे समय तक पानी में रहने से त्वचा रूखी हो सकती है, इसलिए सीमित समय में स्नान करना बेहतर माना जाता है।
नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं, मॉइस्चराइजर लगाएं और हमेशा साफ व सूखे तौलिए का इस्तेमाल करें।

नोट: यह लेख आयुर्वेदिक मान्यताओं और उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्टों पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या विशेष चिकित्सीय स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।

(साभार)


बारिश में बढ़ जाता है स्टमक फ्लू का खतरा! जानिए कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय

 #####  बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में स्टमक फ्लू (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) और फूड प्वाइजनिंग के मामले तेजी से बढ़ते हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अनुसार, बारिश के दौरान दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण होने वाली जलजनित बीमारियां (Waterborne Diseases) देश में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हैं।

ऐसे में केवल साफ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि खानपान और रसोई की स्वच्छता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।


क्या है स्टमक फ्लू?

स्टमक फ्लू, जिसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Gastroenteritis) भी कहा जाता है, पेट और आंतों का संक्रमण है। यह मुख्य रूप से नोरोवायरस (Norovirus), बैक्टीरिया या दूषित भोजन एवं पानी के कारण होता है।

समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी डिहाइड्रेशन (Dehydration), लो ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है।


बारिश में स्टमक फ्लू क्यों बढ़ता है?

1. बैक्टीरिया और वायरस तेजी से बढ़ते हैं

  • बारिश में नमी और उमस अधिक होती है।
  • यह मौसम वायरस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल होता है।
  • दूषित भोजन और पानी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।

2. दूषित पानी का सेवन

  • बारिश में जल स्रोत आसानी से दूषित हो जाते हैं।
  • बिना उबाला या बिना फिल्टर किया पानी पीना संक्रमण का खतरा बढ़ाता है।

3. सड़क किनारे मिलने वाला खाना

  • खुला रखा हुआ भोजन, चाट, गोलगप्पे, कटे फल और जूस जल्दी संक्रमित हो सकते हैं।
  • बारिश में इन्हें खाने से फूड प्वाइजनिंग और स्टमक फ्लू का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

4. रसोई की सफाई में लापरवाही

  • गंदे चॉपिंग बोर्ड, चाकू, किचन प्लेटफॉर्म और बर्तन भी संक्रमण फैला सकते हैं।
  • कच्चे और पके हुए भोजन को अलग-अलग रखना जरूरी है।

5. अंकुरित अनाज का गलत सेवन

  • बारिश में अंकुरित अनाज पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।
  • इन्हें कच्चा खाने की बजाय हल्का उबालकर या पकाकर खाना बेहतर होता है।

स्टमक फ्लू के प्रमुख लक्षण

  • पेट में मरोड़ और तेज ऐंठन
  • बार-बार दस्त (डायरिया)
  • उल्टी या जी मिचलाना
  • हल्का या तेज बुखार
  • सिर दर्द
  • कमजोरी और थकान
  • डिहाइड्रेशन
  • चक्कर आना
  • मांसपेशियों में ऐंठन

बारिश में कैसे करें बचाव?

1. केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं

  • उबला हुआ या फिल्टर किया पानी ही पिएं।
  • बाहर का पानी पीने से बचें।

2. फल और सब्जियां अच्छी तरह धोएं

  • खाने से पहले साफ पानी से धोएं।
  • चाहें तो पानी में थोड़ा विनेगर मिलाकर कुछ मिनट भिगो सकते हैं।

3. हाथ धोना न भूलें

  • खाना बनाने और खाने से पहले हाथ धोएं।
  • शौचालय जाने, बाहर से आने और पालतू जानवरों को छूने के बाद भी हाथ जरूर साफ करें।

4. रसोई को साफ रखें

  • चॉपिंग बोर्ड, चाकू और बर्तनों को अच्छी तरह धोएं।
  • कच्चे और पके भोजन के लिए अलग-अलग बर्तन रखें।

5. बासी खाना खाने से बचें

  • लंबे समय तक बाहर रखा भोजन न खाएं।
  • फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करके खाने से बचें।

6. स्ट्रीट फूड से दूरी रखें

  • बारिश में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं।

7. पर्याप्त पानी पिएं

  • यदि दस्त या उल्टी हो रही हो तो ORS, नारियल पानी और पर्याप्त तरल पदार्थ लें।

स्टमक फ्लू और फूड प्वाइजनिंग में अंतर

स्टमक फ्लू फूड प्वाइजनिंग
वायरस या बैक्टीरिया से संक्रमण दूषित भोजन के सेवन से
लक्षण धीरे-धीरे भी उभर सकते हैं लक्षण अक्सर कुछ घंटों में शुरू हो जाते हैं
व्यक्ति से व्यक्ति में भी फैल सकता है आमतौर पर संक्रमित भोजन तक सीमित

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

  • लगातार 24 घंटे से ज्यादा उल्टी या दस्त
  • मल में खून आना
  • तेज बुखार
  • पेशाब कम आना
  • अत्यधिक कमजोरी
  • बार-बार चक्कर आना
  • बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में गंभीर लक्षण

निष्कर्ष

बारिश के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी आपको स्टमक फ्लू, फूड प्वाइजनिंग और अन्य जलजनित बीमारियों से बचा सकती है। साफ पानी, स्वच्छ भोजन, हाथों की सफाई और रसोई की स्वच्छता अपनाकर आप खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।


मुंह के छालों से हैं परेशान? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, मिलेगी राहत

मुंह के छाले देखने में भले ही छोटे हों, लेकिन इनकी वजह से खाना, पीना और बोलना तक मुश्किल हो सकता है। कई बार पोषक तत्वों की कमी, तनाव या मसालेदार भोजन इसकी वजह बनते हैं। हालांकि, सही देखभाल और कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर दर्द से राहत पाई जा सकती है और छालों को जल्दी ठीक होने में मदद मिल सकती है।

मुंह के छाले एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या हैं, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। ये आमतौर पर जीभ, होंठों के अंदर, मसूड़ों या गालों की भीतरी परत पर छोटे सफेद या पीले घाव के रूप में दिखाई देते हैं। छाले होने पर भोजन करना, पानी पीना और बातचीत करना भी असहज महसूस हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी, अत्यधिक तनाव, हार्मोनल बदलाव, मसालेदार भोजन, मुंह के अंदर चोट लगना या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी स्थितियां छालों का कारण बन सकती हैं। अधिकांश मामलों में ये 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन इस दौरान उचित देखभाल जरूरी होती है।

छाले होने पर क्या करें?
मसालेदार, खट्टे और बहुत गर्म भोजन से कुछ दिनों तक दूरी बनाएं।
दिन में 3 से 4 बार गुनगुने नमक वाले पानी से कुल्ला करें।
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
मुलायम, ठंडा और आसानी से चबाया जाने वाला भोजन लें।
मुंह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करें।
यदि दर्द अधिक हो तो डॉक्टर की सलाह पर ओरल जेल या दवा का इस्तेमाल करें।

घरेलू उपाय जो दे सकते हैं राहत

1. नमक वाले पानी से कुल्ला
गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करने से मुंह साफ रहता है और संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

2. शहद का इस्तेमाल
शहद में मौजूद प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण छालों को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। दिन में दो से तीन बार हल्की मात्रा में शहद लगाया जा सकता है।

3. नारियल तेल
नारियल तेल सूजन कम करने और घाव भरने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

4. बेकिंग सोडा से कुल्ला
पानी में थोड़ा-सा बेकिंग सोडा मिलाकर कुल्ला करने से मुंह का pH संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।

5. ठंडी चीजों का सेवन
बर्फ का छोटा टुकड़ा या ठंडा पानी दर्द और जलन से अस्थायी राहत दिला सकता है।

इन चीजों से करें परहेज
अत्यधिक मसालेदार और तीखा भोजन
अधिक खट्टे फल और जूस
धूम्रपान और तंबाकू
शराब का सेवन
बहुत गर्म चाय, कॉफी या अन्य पेय

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि छाले दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, बार-बार निकलें, तेज बुखार के साथ हों, खाना या पानी निगलने में परेशानी हो या छाले बहुत बड़े और अत्यधिक दर्दनाक हों, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

(साभार)


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp