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रेलटेल के शेयरों में 6% का उछाल, ₹290 के पार पहुंचा भाव

Category Archives: बिजनेस

रेलटेल के शेयरों में 6% का उछाल, ₹290 के पार पहुंचा भाव

रेलटेल को मिला ₹166.80 करोड़ का बड़ा वर्क ऑर्डर, शेयरों ने पकड़ी रफ्तार

नई दिल्ली। सरकारी रेलवे टेलीकॉम कंपनी रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयरों में 19 अगस्त को अचानक तेज खरीदारी देखने को मिली। कारोबार शुरू होते ही स्टॉक करीब 6 फीसदी से अधिक चढ़ गया और 297 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। कंपनी को मिले करोड़ों रुपये के नए वर्क ऑर्डर को शेयरों में आई इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

रेलटेल के शेयर 282.65 रुपये पर खुले थे, जिसके बाद शुरुआती कारोबार में इनमें तेजी आई और भाव 297 रुपये के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया। खास बात यह है कि पिछले करीब तीन महीनों से शेयर पर दबाव बना हुआ था, ऐसे में एक बड़े ऑर्डर की खबर से निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ती दिखाई दी।

EPFO से मिला 166.80 करोड़ रुपये का ऑर्डर

रेलटेल को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से टैक्स सहित करीब 166.80 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी को ‘इंफ्रास्ट्रक्चर-एज-ए-सर्विस’ (IaaS) उपलब्ध कराने से जुड़े मौजूदा वर्क ऑर्डर को एक साल के लिए बढ़ाया गया है। इस प्रोजेक्ट को 9 फरवरी 2027 तक पूरा किया जाना है।

इससे पहले 12 अगस्त को कंपनी को दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी से करीब 63 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई थी। लगातार मिल रहे ऑर्डर्स को कंपनी के कारोबार के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

दो साल से शेयर पर बना हुआ है दबाव

रेलटेल के शेयरों ने बीते कुछ समय में निवेशकों को खास रिटर्न नहीं दिया है। साल 2025 में स्टॉक करीब 15 फीसदी गिरा, जबकि 2026 में अब तक इसमें 10 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई है।

शेयर का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 413.10 रुपये और निचला स्तर 244.95 रुपये रहा है। मौजूदा स्तर पर स्टॉक अपने 52-हफ्ते के हाई से करीब 32.91 फीसदी नीचे और लो से लगभग 13.15 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है।

कंपनी के कारोबार में भी हुई बढ़ोतरी

जून 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान रेलटेल का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 66 करोड़ रुपये रहा। वहीं कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की समान तिमाही के 743.8 करोड़ रुपये के मुकाबले 20.1 फीसदी बढ़कर 893.2 करोड़ रुपये पहुंच गया।

रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया भारत सरकार की नवरत्न कंपनी है और रेलवे के अलावा टेलीकॉम एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में काम करती है। कंपनी ब्रॉडबैंड, वीपीएन, टेलीकॉम और मल्टीमीडिया नेटवर्क जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है। रेलटेल का नेटवर्क देशभर के करीब 6,000 रेलवे स्टेशनों तक फैला हुआ है और यह प्रमुख वाणिज्यिक केंद्रों को भी कवर करता है।


ई-कार एक्सपोर्ट में भारत की बड़ी छलांग, पहली तिमाही में विदेश भेजे 10,802 वाहन

भारत से इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात 18 गुना बढ़ा, यूरोप बना सबसे बड़ा बाजार

नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग अब घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजार में भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश से इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान भारत ने करीब 36.9 करोड़ डॉलर मूल्य की इलेक्ट्रिक कारें विदेश भेजीं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 18 गुना ज्यादा है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत से कुल 10,802 इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात हुआ। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 1,309 वाहनों का था। यूरोपीय देश भारतीय इलेक्ट्रिक कारों के लिए प्रमुख बाजार बनकर सामने आए हैं।

स्पेन सबसे बड़ा खरीदार

भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की विदेशी मांग में स्पेन सबसे आगे रहा। पहली तिमाही में स्पेन को करीब 4,000 इलेक्ट्रिक वाहन निर्यात किए गए, जिनकी कीमत लगभग 14.64 करोड़ डॉलर रही। वहीं ब्रिटेन को 2,646 इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति की गई।

यह आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता यूरोपीय बाजार में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

अघोषित विदेशी संपत्ति बताने का मौका

वहीं, सरकार ने अघोषित विदेशी संपत्ति और आय रखने वाले पात्र करदाताओं के लिए भी एक नई व्यवस्था लागू की है। आयकर विभाग की विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना 16 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के मुताबिक, पात्र करदाता 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति और आय की जानकारी दे सकते हैं। इसके लिए घोषित राशि पर 30 फीसदी टैक्स और उतनी ही राशि का जुर्माना लगाया जाएगा।

60 फीसदी तक हो सकती है कुल देनदारी

योजना के तहत टैक्स और जुर्माना दोनों को मिलाकर कुल देनदारी 60 फीसदी तक पहुंच सकती है। विदेशी संपत्ति का बाजार मूल्य 31 मार्च 2026 की स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति के पास 60 लाख रुपये की अघोषित विदेशी संपत्ति और 20 लाख रुपये की अघोषित विदेशी आय है, तो कुल घोषित राशि 80 लाख रुपये मानी जाएगी। इस पर 30 फीसदी टैक्स और 30 फीसदी जुर्माने को मिलाकर कुल 48 लाख रुपये की देनदारी बन सकती है।

किन लोगों को मिल सकता है लाभ?

यह व्यवस्था खास तौर पर उन पात्र करदाताओं के लिए लाई गई है, जिन्होंने पहले अपनी विदेशी संपत्ति या विदेश से होने वाली आय की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी थी। इसके दायरे में पात्रता के अनुसार छात्र, आईटी प्रोफेशनल और नौकरीपेशा एनआरआई जैसे करदाता भी आ सकते हैं।

योजना में विदेशी संपत्ति की घोषित राशि को दोबारा आय में शामिल नहीं किया जाएगा और उस पर काला धन कानून लागू नहीं होने की बात कही गई है। संपत्ति की राशि और पात्रता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 1 करोड़ रुपये और 5 करोड़ रुपये तक की संपत्तियों से जुड़ी श्रेणियां शामिल हैं।


सोने-चांदी के दाम में फिर उछाल, सोना 1.55 लाख के पार, चांदी भी 2.40 लाख के करीब

जानिए आज क्या है ताजा भाव

नई दिल्ली। भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है। सोमवार को कारोबार के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन दिन खत्म होते-होते कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई। मंगलवार, 11 अगस्त को भी घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सोना और चांदी मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए।

इंटरनेशनल मार्केट में भी बढ़े Gold-Silver के भाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे कॉमेक्स पर सोने का भाव लगभग 1.22 फीसदी बढ़कर 4,473.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

इसी तरह चांदी की कीमत में भी बढ़त देखी गई। कॉमेक्स पर चांदी करीब 1.02 फीसदी की तेजी के साथ 65.940 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती नजर आई।

MCX पर सोने ने पकड़ी रफ्तार

घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी मंगलवार को सोने और चांदी दोनों में तेजी रही। कारोबार के दौरान सोने की कीमत में करीब 1,997 रुपये की बढ़त दर्ज की गई और यह 1,55,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

वहीं चांदी की कीमत में करीब 2,708 रुपये का उछाल आया। इसके बाद MCX पर चांदी 2,39,575 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखाई दी।

आज कितने रुपये है सोने का भाव?

11 अगस्त को भारतीय बाजार में अलग-अलग कैरेट के सोने के भाव भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। उपलब्ध बाजार भाव के मुताबिक, 24 कैरेट सोना करीब 1,55,210 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है।

वहीं 22 कैरेट सोने का भाव करीब 1,42,276 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना करीब 1,16,408 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है।

चांदी भी 2.40 लाख रुपये के करीब

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमत में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है। भारतीय बाजार में चांदी का भाव करीब 2,40,340 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

इस तरह मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने-चांदी की कीमतें मजबूत रुख के साथ कारोबार करती नजर आ रही हैं। हालांकि, शहर, ज्वेलर और टैक्स के आधार पर खुदरा कीमतों में कुछ अंतर हो सकता है।


सोने की कीमत में फिर उछाल, दिल्ली में 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंचा भाव

चांदी की कीमत स्थिर

नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। राजधानी दिल्ली में सोने के भाव में 200 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत बढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। सोने के दाम में यह लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी है। वहीं, चांदी की कीमत में शुक्रवार को कोई बदलाव नहीं हुआ।

1.54 लाख रुपये पहुंचा सोने का भाव

स्थानीय बाजार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 200 रुपये महंगा होकर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को इसका भाव 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर, चांदी 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर स्थिर रही। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी के भाव में जोरदार तेजी देखने को मिली थी।

कमजोर डॉलर से सोने को मिला सहारा

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मजबूती का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, नरम कच्चे तेल की कीमतें और कीमती धातुओं की लगातार मांग ने सोने को सपोर्ट दिया है। इसके अलावा निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर भी बनी हुई है, जिनसे आगे फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख गौरव गर्ग के अनुसार, सोना लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त बनाए हुए है और जनवरी के बाद अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। घटती महंगाई की उम्मीद और सर्राफा बाजार में बनी मांग भी कीमतों को सहारा दे रही है।

विदेशी बाजारों में भी चमकी पीली धातु

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली। हाजिर सोना करीब 2 फीसदी चढ़कर 4,325.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमत 4 फीसदी से अधिक बढ़कर करीब 64.17 डॉलर प्रति औंस हो गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों कीमती धातुएं जनवरी के बाद अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रही हैं। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और कच्चे तेल की नरम कीमतों ने इस तेजी को और बल दिया है।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर बाजार की नजर

बाजार की नजर अब अमेरिका की गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर है। इस रिपोर्ट से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर संबंधी फैसलों को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर सोने की मांग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। जुलाई में वैश्विक गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों में 23.5 टन की आवक दर्ज की गई, जो लगातार दो महीनों के बहिर्वाह के बाद हुई है।


तांबा-एल्युमीनियम की कीमतों में आई उछाल, घरेलू उपकरणों और EV की कीमतें बढ़ने के आसार

TV, AC, फ्रिज और कारें 8% तक हो सकती हैं महंगी

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। तांबा, एल्युमीनियम, जिंक और अन्य औद्योगिक धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर जल्द ही टीवी, फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल जैसे उत्पादों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। उद्योग जगत का अनुमान है कि कई घरेलू उपकरण 5 से 8 फीसदी तक महंगे हो सकते हैं।

वैश्विक बाजार में औद्योगिक धातुओं की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ने लगा है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में तांबे की कीमत तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही भारत में भी तांबे का भाव बढ़कर 1304.90 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जबकि एक महीने पहले इसकी कीमत 1187.85 रुपये प्रति किलोग्राम थी। एल्युमीनियम, जिंक, टिन और अन्य धातुओं के दामों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इस तेजी की सबसे बड़ी वजह कांगो द्वारा कॉपर और कोबाल्ट कंसंट्रेट के निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से माल ढुलाई प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। वहीं, चीन और अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य हाई-टेक उद्योगों की बढ़ती मांग ने भी तांबे समेत कई धातुओं की कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है।

औद्योगिक धातुओं की महंगाई का असर अब उपभोक्ता बाजार पर भी दिखाई देने की संभावना है। टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में तांबा और एल्युमीनियम का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। वहीं, कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों में भी इन धातुओं की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने से त्योहारी सीजन के दौरान इन उत्पादों की कीमतों में 5 से 8 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि एयर कंडीशनर के कंप्रेसर और कंडेंसर, वॉशिंग मशीन की मोटर, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, वायरिंग सिस्टम और स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में तांबे का कोई सस्ता विकल्प उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कच्चे माल की बढ़ी लागत का बोझ कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं।

प्रमुख धातुओं की मौजूदा कीमतें (रुपये प्रति किलोग्राम):

तांबा: 1304.90 रुपये (करीब 9.85% की बढ़ोतरी)
एल्युमीनियम: 282.57 रुपये (5.08% की बढ़ोतरी)
जिंक: 329.38 रुपये (6.82% की बढ़ोतरी)
टिन: 4879.24 रुपये (10.16% की बढ़ोतरी)
लेड: 164.75 रुपये (0.82% की बढ़ोतरी)

यदि धातुओं की कीमतों में यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को घरेलू उपकरणों से लेकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तक के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।


एलआईसी के ओएफएस को जबरदस्त रिस्पॉन्स, सरकार को मिले 31,552 करोड़ रुपये

दो दिन में पूरी हुई एलआईसी की शेयर बिक्री

नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) को निवेशकों का शानदार समर्थन मिला है। सरकार ने इस प्रक्रिया के तहत ग्रीन शू ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया, जिससे दो दिनों के भीतर शेयर बिक्री सफलतापूर्वक पूरी हो गई। इस कदम के साथ एलआईसी में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई, जो नियामकीय तय समयसीमा से पहले ही हासिल कर ली गई। इस ओएफएस के जरिए 82 करोड़ से अधिक शेयर आवंटित किए गए, जिससे सरकार को करीब 31,552 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

क्या होता है ओएफएस?

ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके जरिए किसी सूचीबद्ध कंपनी के मौजूदा बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेच सकते हैं। एलआईसी के मामले में यह बिक्री भारत सरकार द्वारा की गई है। इसमें कंपनी ने कोई नए शेयर जारी नहीं किए हैं, इसलिए इस सौदे से मिलने वाली पूरी राशि सरकार के खाते में जाएगी, जबकि एलआईसी की शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं होगा।

सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने का उद्देश्य

इससे पहले एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 96.5 प्रतिशत थी और आम निवेशकों के पास केवल 3.5 प्रतिशत शेयर थे। ओएफएस के जरिए सरकार ने अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलआईसी को 16 मई 2027 तक कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया था, जिसे कंपनी ने तय समय से पहले ही पूरा कर लिया।

शेयर कीमतों पर क्यों पड़ा असर?

सरकार ने ओएफएस के लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया, जो घोषणा से पहले एलआईसी के बंद भाव 428.50 रुपये से लगभग 10.9 प्रतिशत कम था। कम कीमत पर शेयर उपलब्ध होने की वजह से निवेशकों का रुझान ओएफएस की ओर बढ़ा और खुले बाजार में खरीदारी धीमी पड़ गई। इसके अलावा, बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर भी अल्पकालिक दबाव देखने को मिला।

वित्तीय प्रदर्शन रहा मजबूत

एलआईसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने परिचालन प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कंपनी के नए व्यवसाय का मूल्य (वीएनबी) 41.6 प्रतिशत बढ़कर 14,179 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि वीएनबी मार्जिन 17.6 प्रतिशत से बढ़कर 21.2 प्रतिशत हो गया। वहीं कंपनी का शुद्ध लाभ 19.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 57,419 करोड़ रुपये रहा, जो उसके मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत है।

 


त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का झटका, चीनी-चावल के बढ़े दाम

नई दिल्ली।  त्योहारी सीजन शुरू होते ही आम लोगों पर महंगाई की मार और तेज हो गई है। चीनी और चावल जैसी रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कमजोर मानसून, वैश्विक बाजार की अनिश्चितता और जमाखोरी को कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

देशभर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में चीनी की थोक कीमतों में पांच फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। औसत थोक भाव बढ़कर 4,593 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वहीं, खुदरा बाजार में चीनी का औसत मूल्य 47.11 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलो हो गया है। पिछले एक साल में भी चीनी की कीमतों में करीब 7.64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

चावल की कीमतों में भी लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। देश में चावल का औसत खुदरा मूल्य एक महीने पहले 44.13 रुपये प्रति किलो था, जो अब बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। खासकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में चावल के दाम 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर परिवारों के मासिक राशन खर्च पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर मानसून, अल-नीनो का प्रभाव और कई क्षेत्रों में कम वर्षा के कारण फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, कुछ स्थानों पर जमाखोरी की वजह से खुले बाजार में आपूर्ति कम हो गई है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना है।

एक नीति अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण चावल उत्पादन में बड़ी गिरावट आती है और कई देश बड़े पैमाने पर भंडारण शुरू कर देते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत समेत कई देशों के उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है।

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का कम होना और गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होना भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले त्योहारों में मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

इधर, वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज में तांबे का तीन महीने का वायदा भाव 13,842 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। चिली में बाढ़, बर्फबारी और खदानों में उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ डाटा सेंटर और बिजली ढांचे की बढ़ती मांग ने कीमतों को और ऊपर पहुंचा दिया है। इसके चलते आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन और घरेलू उपकरण भी महंगे हो सकते हैं।


वैश्विक तनाव के बीच भी बढ़ा भारत का चावल निर्यात, पहली छमाही में 5% की बढ़ोतरी

चावल के साथ मक्का और गेहूं के निर्यात में भी उछाल

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत के चावल निर्यात में मजबूती देखने को मिली है। साल 2026 की पहली छमाही में देश का कुल चावल निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में करीब पांच फीसदी बढ़ा है। खासतौर पर गैर-बासमती चावल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग ने निर्यात को नई रफ्तार दी है, जबकि बासमती चावल के निर्यात में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

साल 2026 के पहले छह महीनों में भारत ने कुल 12.27 मिलियन मीट्रिक टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 11.68 मिलियन मीट्रिक टन की तुलना में लगभग पांच फीसदी अधिक है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बावजूद भारत ने चावल निर्यात में अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है और वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी 40 फीसदी से अधिक मानी जाती है। भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धी कीमतों और पर्याप्त उपलब्धता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

बासमती चावल के निर्यात में आई गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में बासमती चावल का निर्यात करीब 5.5 फीसदी घटकर 3.36 मिलियन मीट्रिक टन रह गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सहित कुछ खाड़ी देशों में व्यापार प्रभावित होने से इसका असर बासमती निर्यात पर पड़ा।

हालांकि, गैर-बासमती चावल के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका निर्यात 9.6 फीसदी बढ़कर 8.9 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया। अफ्रीकी देशों से बढ़ती मांग ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई।

भारत को क्यों मिला फायदा?

व्यापार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में चावल का पर्याप्त भंडार होने के कारण इसकी कीमतें अन्य प्रमुख निर्यातक देशों जैसे थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं। यही वजह है कि कई देशों ने भारतीय चावल की खरीद बढ़ाई है।

भारत मुख्य रूप से बांग्लादेश, बेनिन, आइवरी कोस्ट, गिनी और कैमरून जैसे देशों को गैर-बासमती चावल निर्यात करता है, जबकि प्रीमियम बासमती चावल की प्रमुख मांग सऊदी अरब, इराक, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आती है।

मक्का और गेहूं के निर्यात में भी बढ़ोतरी

चावल के अलावा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। पहले छह महीनों में मक्का का निर्यात 400 फीसदी बढ़कर 1.42 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया। रिकॉर्ड उत्पादन और घरेलू बाजार में कम कीमतों के कारण वियतनाम, बांग्लादेश और मलेशिया जैसे देशों से इसकी मांग बढ़ी।

वहीं, गेहूं का निर्यात भी पिछले वर्ष के मुकाबले कई गुना बढ़कर 1,61,187 टन तक पहुंच गया। नेपाल द्वारा भारतीय गेहूं की खरीद शुरू किए जाने और निर्यात संबंधी प्रतिबंधों में राहत मिलने से इस क्षेत्र को भी मजबूती मिली।

वैश्विक बाजार में बनी रहेगी भारत की मजबूत पकड़

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मौसम संबंधी चुनौतियां और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां जरूर असर डाल सकती हैं, लेकिन पर्याप्त उत्पादन और मजबूत निर्यात क्षमता के चलते भारत वैश्विक चावल बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने में सक्षम रहेगा। गैर-बासमती चावल की लगातार बढ़ती मांग भारतीय कृषि निर्यात को और मजबूती दे सकती है।


सोने-चांदी की कीमतों में फिर आई तेजी, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत रही मजबूत

नई दिल्ली-  पिछले पूरे सप्ताह सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। जहां सप्ताह के शुरुआती दिनों में तेजी रही, वहीं आखिरी कारोबारी दिनों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, नए कारोबारी सप्ताह के पहले दिन 27 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने-चांदी के दामों में फिर से रिकवरी और उछाल दर्ज किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार (Comex) का हाल

ग्लोबल मार्केट (Comex) में हफ्ते की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। सुबह 9 बजे के आंकड़ों के मुताबिक:

सोना: 0.56% की तेजी के साथ 4,093.00 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

चांदी: 1.31% बढ़कर 59.675 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है।

घरेलू बाजार (MCX) पर बढ़त

भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर भी कीमती धातुओं में उछाल देखने को मिला:

सोना (Gold Rate): MCX पर सोना 678 रुपये (0.67%) की छलांग लगाकर ₹1,43,784 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता नजर आया।

चांदी (Silver Rate): चांदी में भी मजबूती दिखी और यह 1.09% चढ़कर लगभग ₹2,24,550 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती पाई गई।

देश के प्रमुख शहरों में आज के भाव (प्रति 10 ग्राम / प्रति किलो)

शहर              24K सोना (रु.)          22K सोना (रु.)            18K सोना (रु.)                    चांदी (रु./किग्रा)
नई दिल्ली          ₹1,43,270                   ₹1,31,331                        ₹1,07,020                              ₹2,22,580
मुंबई                 ₹1,44,840                   ₹1,32,770                         ₹1,08,630                             ₹2,22,310
पटना                ₹1,44,760                   ₹1,32,578                         ₹1,07,655                              ₹2,23,850
जयपुर              ₹1,43,410                    ₹1,32,126                         ₹1,08,558                              ₹2,24,060
कानपुर            ₹1,42,517                     ₹1,31,181                          ₹1,07,110                               ₹2,22,920


सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का मुनाफा 13% बढ़ा, पहली तिमाही में 1,324 करोड़ रुपये का लाभ

एनपीए घटा, मुनाफा बढ़ा; सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नतीजों ने किया प्रभावित

नई दिल्ली। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक ने इस दौरान मुनाफे में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की है। बेहतर ब्याज आय, घटते एनपीए और कम प्रावधान के चलते बैंक का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा, जिससे उसकी बैलेंस शीट पहले की तुलना में और अधिक सुदृढ़ दिखाई दे रही है।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से जारी वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 को समाप्त तिमाही में बैंक का शुद्ध लाभ बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 1,169 करोड़ रुपये था। इस तरह बैंक के मुनाफे में करीब 13 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।

आय और ब्याज कमाई में सुधार

बैंक की कुल आय में भी इस तिमाही के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। अप्रैल-जून 2026 में बैंक की कुल आय 10,678 करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले यह 10,360 करोड़ रुपये थी। वहीं, कर्ज पर मिलने वाली ब्याज आय बढ़कर 9,691 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 8,589 करोड़ रुपये थी। इससे स्पष्ट है कि बैंक के ऋण कारोबार में मजबूती बनी हुई है।

परिचालन लाभ में हल्की गिरावट

हालांकि बैंक के परिचालन लाभ में मामूली कमी दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में परिचालन लाभ 2,186 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2,304 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद बैंक ने लागत नियंत्रण और प्रावधान में कमी के जरिए शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हासिल की।

एनपीए में सुधार से मिली बड़ी राहत

बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया है। जून 2026 के अंत तक ग्रॉस एनपीए घटकर 2.60 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 3.13 प्रतिशत था। वहीं, नेट एनपीए 0.49 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। खराब ऋणों में कमी आने से बैंक को प्रावधान घटाने में मदद मिली। इस दौरान प्रावधान 468 करोड़ रुपये से घटकर 346 करोड़ रुपये रह गया, जिससे मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ा।

पूंजी स्थिति हुई और मजबूत

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio) भी मजबूत हुआ है। जून 2026 तिमाही के अंत तक यह बढ़कर 18.28 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 17.66 प्रतिशत था। इससे बैंक की वित्तीय क्षमता और भविष्य में कारोबार विस्तार की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

सकारात्मक संकेत

पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया लगातार अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत कर रहा है। मुनाफे में बढ़ोतरी, बेहतर ब्याज आय, घटते एनपीए और मजबूत पूंजी आधार बैंक के प्रदर्शन के सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि परिचालन लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कुल मिलाकर बैंक का वित्तीय प्रदर्शन निवेशकों और बाजार के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।


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