Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

पौड़ी में सीता सर्किट के विकास की तैयारी तेज, पहले चरण के लिए 78 लाख रुपये मंजूर

पौड़ी में सीता सर्किट के विकास की तैयारी तेज, पहले चरण के लिए 78 लाख रुपये मंजूर

पौड़ी में सीता सर्किट के विकास की तैयारी तेज, पहले चरण के लिए 78 लाख रुपये मंजूर

पौड़ी। उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री घोषणा के तहत जिले में सीता सर्किट के समग्र विकास की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने शुक्रवार को संबंधित विभागों, कार्यदायी संस्था, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय हितधारकों के साथ बैठक कर सर्किट से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में सितोनस्यूं पट्टी के विदाकुटी मंदिर, फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर, वाल्मीकि मंदिर और देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर समेत अन्य प्रमुख स्थलों के विकास पर मंथन किया गया। सीता सर्किट के प्रथम चरण के लिए 78 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। इस राशि से धार्मिक स्थलों के विकास के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि सीता सर्किट का विकास पौड़ी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

प्रथम चरण के तहत मंदिर परिसरों में रामायण से जुड़े प्रसंगों पर आधारित म्यूरल, वॉल म्यूरल और स्कल्पचर लगाए जाएंगे। इसके अलावा दिशा-सूचक साइनेज, वाटर एटीएम, मंदिरों की मरम्मत, रंग-रोगन और अन्य आवश्यक यात्री सुविधाओं का विकास किया जाएगा। देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में पहले चरण में साइनेज लगाए जाएंगे, जबकि पार्किंग की व्यवस्था दूसरे चरण में प्रस्तावित है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी धार्मिक स्थलों से जुड़ी पौराणिक और ऐतिहासिक जानकारियों को प्रमाणिक एवं आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाए। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसरों का विकास वहां के प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। अनावश्यक निर्माण और अत्यधिक सजावट से बचते हुए श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने मंदिरों की वास्तविक तस्वीरों के आधार पर डिजाइन तैयार करने, परिक्रमा पथ विकसित करने और परिसर को खुला, स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने पर जोर दिया। सोलर पैनल भी इस तरह लगाने को कहा गया कि मंदिर परिसर की सुंदरता प्रभावित न हो।

साइट प्लान में अपेक्षित थ्री-डी डिजाइन और वॉक-थ्रू उपलब्ध नहीं होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने बेहतर डिजाइन के लिए एक से अधिक आर्किटेक्ट से थ्री-डी डिजाइन और वॉक-थ्रू तैयार कराने तथा उनमें से बेहतर विकल्प का चयन कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बैठक में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर से जुड़े भूमि मामलों की भी समीक्षा हुई। भूसमाधि स्थल के लिए भूमि दान करने पर सहमति बनने की जानकारी दी गई, जबकि धर्मशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। मंदिर के बाईं ओर म्यूरल के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी। वहीं, कोटसाड़ा स्थित वाल्मीकि मंदिर के साइट प्लान की समीक्षा करते हुए संयुक्त मजिस्ट्रेट को मौके पर जाकर भूमि की स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया।

जिलाधिकारी ने संबंधित मंदिरों की भूमि का सर्वे कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों को मानचित्र लेकर गांवों में मौके पर जाकर भूमि का सत्यापन करने और साइट प्लान में उसकी स्थिति स्पष्ट करते हुए सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।

दूसरे चरण के लिए भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर तक संपर्क मार्ग, सड़क निर्माण के लिए आवश्यक मुआवजा, देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में पार्किंग, सीता माता मंदिर में धर्मशाला और विभिन्न मंदिर परिसरों के लिए आवश्यक भूमि समेत अन्य आधारभूत सुविधाओं को शामिल किया जाएगा। जिलाधिकारी ने भूमि संबंधी सहमति और मुआवजे के आकलन से जुड़े मामलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में संबंधित गांवों के ग्राम प्रधानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी सुझाव लिए गए। इस दौरान जिला पर्यटन विकास अधिकारी कमल किशोर जोशी, एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. सर्वेश उनियाल, जीएमवीएन के अरुण चमोली सहित संबंधित अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp