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अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, तेल टैंकरों पर हमले के बाद बढ़ा टकराव

Category Archives: अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, तेल टैंकरों पर हमले के बाद बढ़ा टकराव

ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें 

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच के बीच एक बार फिर सीधा टकराव देखने को मिला। अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ा दी है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले दो दिनों के दौरान अमेरिकी नौसैनिक पोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, दोनों हमलों को अमेरिकी युद्धपोत ने सफलतापूर्वक झेल लिया और गश्त जारी रखी। हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने की जानकारी नहीं है।

पांच ईरानी तेल टैंकरों को बनाया निशाना

अमेरिकी कार्रवाई के तहत पांच ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया। इनमें किविक, चार्मिनार, होराइजन-1 और रिस्को टैंकर गल्फ ऑफ ओमान में मौजूद थे, जबकि पांचवां टैंकर डेर्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खर्ग द्वीप के नजदीक था।

अमेरिका की ओर से की गई इस कार्रवाई को ईरानी हमलों का जवाब माना जा रहा है। इससे पहले भी अमेरिकी सेना ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन अमेरिका का सहयोगी है और वहां अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी भी है।

जॉर्डन की सेना के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागी गई 20 मिसाइलों में से 18 को हवा में ही नष्ट कर दिया। बाकी दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

IRGC ने दावा किया कि उसने अल-अजराक एयर बेस के उस हिस्से को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी एफ-35, एफ-16 और एफ-15 लड़ाकू विमानों के रखरखाव, तैयारी और तैनाती से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों के लिए बने एक शेल्टर को भी निशाना बनाने का दावा किया है।

कुवैत और बहरीन को भी ईरान की चेतावनी

तनाव सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कुवैत और बहरीन के पास मौजूद तेल टैंकरों को तत्काल वहां से हटने की चेतावनी दी है। ईरान का आरोप है कि दोनों देश अमेरिकी सेना को सैन्य ठिकाने उपलब्ध करा रहे हैं और अमेरिकी अभियानों में सहयोग कर रहे हैं।

इस चेतावनी ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री यातायात और तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना संघर्ष का सबसे संवेदनशील मोर्चा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे अहम क्षेत्र बन गया है। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा इस समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर दबाव बढ़ाए जाने से ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा है। दूसरी ओर, ईरान समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए अपनी शर्तें लागू करना चाहता है। इसी वजह से इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 99.46 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

अगर संघर्ष और लंबा खिंचता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल परिवहन प्रभावित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इससे दुनिया के कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

ईरान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा अमेरिका

अमेरिकी प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान पर दबाव बढ़ाया है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान के विमानन क्षेत्र से जुड़े नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इन प्रतिबंधों के दायरे में दो दर्जन से अधिक वाणिज्यिक और निजी एयरलाइंस के साथ विदेशी कार्गो सेवाएं देने वाली कंपनियां शामिल हैं।

अमेरिका का उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क और उसके सहयोगी कारोबारी साझेदारों से और अलग-थलग करना बताया जा रहा है।

अमेरिका की चेतावनी- हर हमले का दिया जाएगा जवाब

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिशों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अमेरिकी नौसैनिक पोतों पर हमले की कोशिश जारी रखता है तो उसे हर बार इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

इससे पहले शनिवार को भी अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। अमेरिका ने दावा किया था कि ईरानी बलों ने उसके विमानवाहक पोत और विध्वंसक जहाज पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की थी।

क्या और बढ़ सकता है संघर्ष?

ईरान पहले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास जहाजों के लिए नया ‘बहिष्करण क्षेत्र’ घोषित करने की बात कह चुका है। ऐसे में यदि दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बड़े सैन्य टकराव से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ईरान मामलों के विशेषज्ञ डैनी सिट्रिनोविच ने भी चेतावनी दी है कि लगातार जवाबी हमले अमेरिका और ईरान को ऐसी स्थिति में पहुंचा सकते हैं, जहां तनाव को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाए। उनके मुताबिक, होर्मुज संकट का आसान सैन्य समाधान नहीं है और वहां बढ़ता तनाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।


लैंडिंग के बाद बेकाबू हुआ अमेजन का कार्गो विमान, कई गाड़ियों को मारी टक्कर, 5 लोगों की मौत

कई लोग घायल

मियामी। अमेरिका के मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा विमान हादसा हो गया। अमेजन का कार्गो विमान लैंडिंग के बाद रनवे से बाहर निकल गया और कई वाहनों से जा टकराया। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में कम से कम पांच लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक, यह हादसा स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 2 बजे हुआ। विमान प्यूर्टो रिको के सैन जुआन से उड़ान भरकर मियामी पहुंचा था। रनवे से बाहर निकलने के बाद विमान सड़क के किनारे जा पहुंचा, जहां उसने कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया।

हादसे के तुरंत बाद घटनास्थल पर काले धुएं का गुबार दिखाई देने लगा। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के साथ फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, विमान के कॉकपिट में पायलट और को-पायलट फंस गए थे। कुछ लोग कारों के भीतर भी फंसे मिले, जबकि एक व्यक्ति वाहन के नीचे दब गया था।

अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में कौन विमान में सवार था और कौन उन वाहनों में मौजूद था, जिन्हें विमान ने टक्कर मारी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। हादसे में तीन लोगों की हालत गंभीर बताई गई है, जबकि दो अन्य घायलों को भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

दुर्घटना के बाद विमान से ईंधन का रिसाव होने लगा, जिसके चलते दमकलकर्मियों को काफी देर तक स्थिति संभालने में जुटना पड़ा। सुरक्षा कारणों से मियामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कई घंटों तक उड़ानों का संचालन प्रभावित रहा। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट FlightAware के मुताबिक, दोपहर के बाद एयरपोर्ट पर करीब 250 उड़ानों में देरी हुई।

हादसे के बाद विमान सड़क के किनारे जाकर रुका। मौके की तस्वीरों में विमान का अगला हिस्सा जमीन पर और उसका अधिकांश ढांचा दिखाई दिया। विमान में आग लगने के बावजूद उसका बड़ा हिस्सा सुरक्षित रहा।

बताया जा रहा है कि हादसे में शामिल बोइंग 767 करीब 32 साल पुराना था। इसे शुरुआत में यात्री विमान के तौर पर तैयार किया गया था और कई एयरलाइंस के लिए उड़ान भरने के बाद वर्ष 2015 में इसे कार्गो विमान में परिवर्तित किया गया था। इस उड़ान का संचालन नॉर्थ कैरोलिना स्थित कार्गो कंपनी 21 Air ने किया था।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) ने जांच शुरू करने का फैसला किया है। बोर्ड की टीम मियामी पहुंचकर दुर्घटना के कारणों की जांच करेगी। टीम का नेतृत्व NTSB की अध्यक्ष जेनिफर होमेंडी करेंगी।

वहीं, अमेजन ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा है कि कंपनी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगी। कंपनी ने मृतकों के परिवारों और हादसे से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

हादसे के प्रत्यक्षदर्शी जैक्सन ली ने बताया कि वह अपने चार साथियों के साथ दुकान से बाहर आए तो एयरपोर्ट की बाड़ के पास से धुआं उठता दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि इलाके में विमानों का उड़ान भरना और उतरना रोजमर्रा की बात है, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कोई विमान इतनी नजदीक आकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है।


डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक

वॉशिंगटन। अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को सीमित करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश को एक बार फिर अदालत से झटका लगा है। मैरीलैंड की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के नए कार्यकारी आदेश पर रोक लगाते हुए प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी की है। यह फैसला अप्रवासी परिवारों और अधिकार संगठनों की ओर से दायर क्लास-एक्शन मुकदमे की सुनवाई के दौरान आया।

फेडरल जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि संबंधित श्रेणियों में आने वाले बच्चे जन्म के समय अमेरिकी नागरिक माने जाते हैं। अदालत के इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की नीति को फिलहाल बड़ा झटका लगा है। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

क्या है अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का प्रावधान?

अमेरिकी कानून के तहत देश की धरती पर जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। इस व्यवस्था का संवैधानिक आधार वर्ष 1868 में लागू हुए अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से जुड़ा है।

राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की वकालत करते रहे हैं। इससे पहले भी उनके प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए अमेरिका में अवैध या अस्थायी आव्रजन स्थिति में रहने वाले लोगों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता सीमित करने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट ने जून में उस प्रयास को झटका दिया था।

नए आदेश में किन मामलों पर था जोर?

ट्रंप प्रशासन ने अगस्त में जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। इस बार आदेश का दायरा पहले की तुलना में सीमित रखा गया। इसमें कुछ विशेष परिस्थितियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता दिए जाने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी।

आदेश में ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया था, जिनमें बच्चे के माता-पिता का संबंध विदेशी दूतावासों या संगठनों से हो अथवा उन्हें अमेरिका का ‘विदेशी दुश्मन’ माना जाए। इसके अलावा आदेश में ‘बर्थ टूरिज्म’ का मुद्दा भी शामिल किया गया था। बर्थ टूरिज्म का मतलब उन मामलों से है, जब कोई व्यक्ति अमेरिका में बच्चे को जन्म देने और उसके जरिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से गैर-आप्रवासी वीजा पर प्रवेश करता है।

परिवारों ने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया?

कार्यकारी आदेश को चुनौती देने वाले परिवारों और अधिकार संगठनों का कहना था कि इससे अमेरिका में रहने वाले कई परिवारों के बीच अपने बच्चों की नागरिकता को लेकर भय और अनिश्चितता पैदा हो सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि कुछ परिवारों के बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में भी नागरिकता से वंचित किया जा सकता है, जिनका अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की किसी सुनियोजित कोशिश से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति को ‘विदेशी दुश्मन’ मानने के लिए प्रशासन व्यापक मानदंड अपना सकता है, जिससे गलत जानकारी या अनुमान के आधार पर भी कार्रवाई का खतरा पैदा हो सकता है।

जज ने प्रशासन की दलील क्यों नहीं मानी?

ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आदेश को रोकने की मांग फिलहाल जल्दबाजी होगी। प्रशासन के वकीलों का कहना था कि संबंधित संघीय एजेंसियां भविष्य में जारी होने वाली आधिकारिक गाइडलाइन के आधार पर नियमों को लागू करेंगी।

जज बोर्डमैन ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि गाइडलाइन बाद में चाहे जिस रूप में जारी हो, मौजूदा कार्यकारी आदेश संघीय एजेंसियों को बच्चों की कई व्यापक श्रेणियों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेज जारी करने से रोकने का निर्देश देता है।

अदालत के इस फैसले के बाद जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर अमेरिका में कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।


शादी की खुशियां बदलीं मातम में, अमेरिकी हवाई हमले में 5 की मौत

50 से अधिक लोग घायल

तेहरान। ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह उस वक्त चीख-पुकार में बदल गया, जब वहां अमेरिकी हवाई हमला हुआ। हमले की चपेट में आने से कम से कम पांच लोगों की मौत की खबर है, जिनमें चार साल का एक बच्चा भी शामिल बताया जा रहा है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया के अनुसार, घटना में 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। यह हमला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक स्थित तटीय क्षेत्र में हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

नागरिकों की मौत पर ईरान ने जताया आक्रोश

घटना के बाद ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नागरिकों को निशाना बनाए जाने वाली घटनाओं को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने मिनाब में एक स्कूल पर हुए पिछले हवाई हमले का भी जिक्र किया। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, उस हमले में एक बालिका विद्यालय में करीब 160 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, मिनाब हमले को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया था कि यह घटना पुराने लक्ष्य संबंधी आंकड़ों के इस्तेमाल से जुड़ी हो सकती है।

पहले से तनावपूर्ण माहौल में बढ़ी चिंता

सिरिक में शादी समारोह को निशाना बनाए जाने की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को दोनों देशों के बीच हाल के हफ्तों का सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष देखने को मिला। अमेरिका ने आने वाले समय में और व्यापक सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। ऐसे में आम नागरिकों की मौत ने युद्ध के बढ़ते मानवीय नुकसान को लेकर चिंता और गहरी कर दी है।

चाबहार और केशम समेत कई ठिकानों पर हमले

अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। चाबहार और केशम द्वीप भी अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में बताए गए हैं। भारतीय समयानुसार रात करीब साढ़े नौ बजे शुरू हुए इन हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।

अमेरिकी सेना के अनुसार, हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, समुद्री संसाधनों से जुड़े ठिकाने और संचार प्रतिष्ठान शामिल थे। इसके अलावा समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता से संबंधित सुविधाओं को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।


रूस के ताबड़तोड़ ड्रोन-मिसाइल हमले से दहला यूक्रेन, 12 लोगों की मौत

मृतकों में भारतीय नागरिक भी शामिल

कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर बड़े हवाई हमले ने तबाही मचा दी है। रूस की ओर से यूक्रेन के कई हिस्सों में रातभर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक भारतीय नागरिक के भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मंगलवार को हमले की जानकारी साझा करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि हमलों में बड़ी संख्या में जेट ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। कई आवासीय इमारतों और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। राजधानी कीव और आसपास के क्षेत्रों में करीब 350 राहतकर्मी स्थिति को संभालने में जुटे हैं।

बोरिस्पिल में आवासीय इमारत को नुकसान

यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, बोरिस्पिल में रूस के हमले से पांच मंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हो गई। यहां से करीब 50 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हमले में शहर में चार लोगों की मौत हुई, जबकि 13 लोग घायल हुए हैं।

ओडेसा और आसपास के इलाकों में भी पिछली शाम से ड्रोन और निर्देशित हवाई बमों से हमले जारी रहने की बात कही गई है। इन हमलों के कारण बड़ी संख्या में परिवारों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था को जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सीमा चौकी और निर्यात ढांचा भी निशाने पर

जेलेंस्की ने दावा किया कि रोमानिया सीमा के पास स्थित एक सीमा चौकी को भी जानबूझकर निशाना बनाया गया। इसके अलावा निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है।

कीव में एक रेलवे डिपो पर हुए हमले में सात लोगों की मौत का दावा किया गया है। इसके अलावा खेरसॉन, दोनेत्स्क, जापोरिज्जिया, खारकीव, चेर्निहीव, जाइटोमिर, सूमी और द्नीप्रो समेत कई क्षेत्रों में भी हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।

रूस पर नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रूस पर नागरिक आबादी को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से हमले करने का आरोप लगाया। जेलेंस्की ने कहा कि रूस अपने हमलों की योजना इस तरह तैयार करता है कि लोगों की जान को अधिकतम नुकसान पहुंचे। उन्होंने यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से और सहायता देने की अपील की।

जेलेंस्की के मुताबिक, रूस के हमलों में होने वाली जनहानि को कम करने के लिए यूक्रेन को लगातार सैन्य और हवाई रक्षा सहायता की जरूरत है। उन्होंने उन देशों और सहयोगियों का आभार जताया, जो यूक्रेन की रक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

पुतिन पर लगाया और युद्ध बढ़ाने का आरोप

इससे पहले जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्ध को आगे बढ़ाने की इच्छा रखने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि यूक्रेन और उसके सहयोगियों से मिलने वाली खुफिया जानकारी तथा रूस की गतिविधियों से संकेत मिलता है कि रूसी नेतृत्व युद्ध समाप्त करने के बजाय इसे आगे बढ़ाना चाहता है।

जेलेंस्की ने यह भी कहा था कि रूस के भीतर बड़ी संख्या में लोग संपर्क रेखा पर युद्ध रोकने के पक्ष में हो सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद रूसी नेतृत्व की ओर से युद्ध जारी रखने के संकेत मिल रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति के दूतों से भी हुई बातचीत

जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बातचीत की थी। इस दौरान संभावित अमेरिकी राष्ट्रपति यात्रा की तारीखों सहित युद्ध की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई।

जेलेंस्की ने अमेरिकी प्रतिनिधियों को युद्ध के मोर्चे की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने दावा किया कि रूस को सीमित बढ़त ही हासिल हुई है और इसके लिए उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी है।


नेपाल में बाढ़ का कहर: 626 लोगों की मौत, 2 हजार से ज्यादा लापता, भारत ने भेजी राहत सामग्री

84 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले गए

काठमांडू। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में उफान के बाद कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 626 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,482 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए भारत ने राहत और बचाव अभियान में नेपाल की सहायता के लिए तत्काल कदम उठाए हैं।

भारतीय वायुसेना ने आपदा प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए मानवीय राहत अभियान शुरू किया है। वायुसेना का C-130J विमान करीब 10 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा है। इसमें दवाइयां, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। आने वाले समय में राहत अभियान को और विस्तार देने की तैयारी है। इसके लिए C-17 ग्लोबमास्टर समेत अतिरिक्त C-130 विमानों के इस्तेमाल की योजना बनाई गई है।

मेडिकल और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची

नेपाल में राहत एवं बचाव कार्यों में स्थानीय प्रशासन की सहायता के लिए भारत ने 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भेजी है। टीम में चिकित्सा कर्मियों के साथ टनल रेस्क्यू से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हैं। नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजी गई यह टीम उन इलाकों में काम करेगी, जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

नेपाल सरकार फिलहाल अपने सुरक्षा बलों को प्रभावित क्षेत्रों में अधिक से अधिक तैनात करने पर जोर दे रही है। अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों की जानकारी होने के कारण सुरक्षा बल राहत अभियान में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, जटिल परिस्थितियों में विशेषज्ञ तकनीकी सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

परिवहन व्यवस्था बहाल करने के लिए बेली ब्रिज की जरूरत

बाढ़ के कारण कई स्थानों पर सड़क और परिवहन व्यवस्था बाधित हुई है। प्रभावित क्षेत्रों को दोबारा जोड़ने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज उपलब्ध कराने में सहयोग मांगा है। इन पुलों को कम समय में तैयार किया जा सकता है और दुर्गम क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल परिवहन बहाल करने के लिए किया जा सकता है।

84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया

आपदा के बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में फंसे कम से कम 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें त्रिशूली-1 परियोजना से जुड़े 63 कर्मचारी और तमिलनाडु से आए 21 तीर्थयात्री शामिल हैं।

इन 21 तीर्थयात्रियों को शुक्रवार को नेपाल के प्रभावित क्षेत्र से निकालकर काठमांडू लाया गया, जिसके बाद वे दिल्ली पहुंच गए। इसके अलावा 149 भारतीय नागरिक तिब्बत से नेपाल की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि करीब 400 अन्य भारतीय चीन की सीमा की ओर सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे पहले यह आंकड़ा 290 बताया गया था। इसके अलावा भारतीय मूल के करीब 100 ऐसे लोगों से भी संपर्क स्थापित नहीं हो सका है, जिनके पास दूसरे देशों की नागरिकता है।

विदेश मंत्रालय लगातार नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। शुक्रवार शाम तक नेपाल में किसी भारतीय नागरिक की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।


नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ से भारी तबाही, 165 लोगों की मौत

सैकड़ों लोग अब भी लापता

काठमांडू। नेपाल-चीन सीमा के रासुवागढ़ी और तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ और मलबे की चपेट में आए क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक अब तक 165 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि मृतकों की पहचान का काम चल रहा है।

अधिकारियों के अनुसार नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में करीब 1,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। आपदा के बाद दुर्गम पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। राहत दल प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान भी पहुंचा रहे हैं।

बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा

नेपाल पुलिस ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। तलाशी अभियान दोबारा शुरू होने के बाद प्रभावित इलाकों से और शव मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह हादसा उस पर्वतीय क्षेत्र में हुआ है, जो ल्हासा को काठमांडू से जोड़ता है और जहां बड़ी संख्या में पर्यटक, ट्रेकर्स और तीर्थयात्री आवाजाही करते हैं।

नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक लापता विदेशी नागरिकों में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों के नागरिक शामिल हैं। वहीं, चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के अनुसार तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

वीडियो में दिखी बाढ़ की भयावह तस्वीर

आपदा के बाद सामने आए सत्यापित वीडियो में सीमा क्षेत्र में पानी और मलबे का तेज बहाव दिखाई दे रहा है। बाढ़ का वेग इतना अधिक था कि कई लोग और वाहन इसकी चपेट में आ गए। नेपाल के प्रभावित इलाकों में कई घर, सड़कें और बिजली से जुड़ी परियोजनाएं भी बाढ़ के पानी और मलबे में बह गईं।

बाढ़ से बचने वाले लोगों ने तबाही का भयावह मंजर बताया। एक बुजुर्ग survivor ने बताया कि अचानक उनकी ओर मलबे का तेज बहाव आने लगा। उन्होंने अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की और उसे छत तक ले जाने का प्रयास किया, लेकिन वह मलबे की धारा में बह गई। कई घंटे बाद हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उसने पेड़ को पकड़कर किसी तरह अपनी जान बचाई। उसके सामने वह मकान देखते ही देखते मलबे में समा गया, जहां वह काम करता था।

ग्लेशियर टूटने से बाढ़ की आशंका

नेपाली अधिकारियों की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि क्षेत्र में ग्लेशियर के निचले हिस्से के टूटने या ढहने से अचानक बड़े पैमाने पर पानी और मलबे का बहाव पैदा हुआ। शुरुआती तौर पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक दर्ज की गई भूकंपीय गतिविधि संभवतः ग्लेशियर की चट्टानों और बर्फ के ढहने से पैदा हुई थी।

इस बीच चीन के अधिकारियों ने ग्यिरोंग क्षेत्र में एक झील से जुड़े संभावित खतरे को भी चिह्नित किया है। यह झील नेपाल-तिब्बत सीमा क्रॉसिंग के ऊपरी हिस्से में स्थित है। अधिकारियों को आशंका है कि वहां जलस्तर या भू-स्खलन से जुड़ी नई स्थिति पैदा होने पर राहत और बचाव कार्य और मुश्किल हो सकते हैं। प्रभावित इलाकों में टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।


अलास्का में बड़ा विमान हादसा, 8 लोगों की मौत

रडार साइट के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ चार्टर प्लेन

वाशिंगटन। अमेरिका के अलास्का में एक दर्दनाक विमान हादसे में 8 लोगों की जान चली गई। दो इंजन वाले एक चार्टर विमान ने एंकोरेज से केप न्यूएनहैम के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन पश्चिमी अलास्का में एक दूरदराज रडार साइट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की जानकारी सामने आने के बाद बचाव और जांच एजेंसियां मौके पर पहुंचीं।

विमान में सवार थे 8 लोग

अधिकारियों के मुताबिक, विमान में दो पायलट और छह यात्री सवार थे। हादसे के बाद सभी आठ लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। विमान दुर्घटना की जानकारी अमेरिकी सेना और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की ओर से दी गई है।

रडार साइट के पास हुआ हादसा

बताया गया कि दो इंजन वाला सेसना चार्टर विमान एंकोरेज से केप न्यूएनहैम की ओर जा रहा था। इसी दौरान पश्चिमी अलास्का में स्थित एक दूरस्थ रडार साइट के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह इलाका काफी दुर्गम है, जिससे राहत और बचाव अभियान में भी चुनौती सामने आई।

जांच एजेंसियां मौके पर पहुंचीं

NTSB के अलास्का कार्यालय के अध्यक्ष क्लिंट जॉनसन के अनुसार, विमान हादसे के बाद NTSB, अलास्का स्टेट ट्रूपर्स और बचाव समन्वय केंद्र की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।

सैन्य क्षेत्र से जुड़ा था गंतव्य

चार्टर विमान गुडन्यूज बे से करीब 40 मील दक्षिण में स्थित केप न्यूएनहैम की ओर जा रहा था। केप न्यूएनहैम में अमेरिकी वायु सेना की एक हवाई पट्टी है, जो लंबी दूरी के रडार स्टेशन तक पहुंच उपलब्ध कराती है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ हादसे से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी जारी की जाएगी।


कीव पर रूसी मिसाइल हमले में छह लोगों की मौत, 33 घायल

कीव। यूक्रेन की राजधानी कीव में रूसी मिसाइल हमलों ने भारी तबाही मचाई है। रातभर कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है, जबकि 33 लोग घायल बताए जा रहे हैं। गुरुवार सुबह तक राजधानी में हवाई हमले का अलर्ट जारी रहा।

यूक्रेन की आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, हमले से कीव के कई हिस्से प्रभावित हुए। डार्नीत्स्की, स्वियातोशिन्स्की और सोलोमियांस्की जिलों में करीब 12 स्थानों पर नुकसान की सूचना है। प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय इमारतों के अलावा एक चिकित्सा केंद्र और शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं।

सोलोमियांस्की जिले में नौ मंजिला एक रिहायशी इमारत की ऊपरी दो मंजिलें हमले में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इमारत के अन्य हिस्सों में भी आग लग गई। इसके अलावा दो अन्य आवासीय इमारतों और एक स्कूल के आश्रय स्थल में लोगों के फंसे होने की सूचना मिली।

आपातकालीन बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने कीव की हवाई सुरक्षा व्यवस्था को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले तेज किए हैं। यूक्रेन के पास आने वाली मिसाइलों को रोकने वाली सीमित संख्या में प्रणालियां हैं। वहीं, अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के लिए जरूरी मिसाइलों की उपलब्धता भी सीमित बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूक्रेन को पैट्रियट वायु रक्षा प्रणालियों के उत्पादन के लिए लाइसेंस देने की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में इस फैसले को बदल दिया गया।

दूसरी ओर, यूक्रेन ने भी रूस के भीतर मौजूद सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों पर लंबी दूरी के हमले तेज कर दिए हैं। यूक्रेन का उद्देश्य रूस की उन क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनके जरिए मॉस्को यूक्रेनी शहरों पर लगातार हमले कर रहा है।

दोनों देशों के बीच हमलों में बढ़ोतरी के बीच कीव में ताजा रूसी हमले ने नागरिक इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी रखे हुए हैं।


भूकंप से कांपा कोलंबिया, कई इमारतें ढही, 200 से ज्यादा लोगों की मौत

हजारों लोग लापता 

बोगोटा। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। 7.4 तीव्रता के झटकों से कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त और कुछ भवन ढह गए। शुरुआती रिपोर्टों में 250 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 3 हजार लोगों के लापता होने की खबर है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।

बोगोटा समेत कई इलाकों में महसूस हुए झटके

भूकंप के तेज झटकों के बाद लोग दहशत में अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। राजधानी बोगोटा के अलावा देश के कई हिस्सों में इसका असर महसूस किया गया। पड़ोसी देशों इक्वाडोर और वेनेजुएला तक भी भूकंप के झटके महसूस किए जाने की जानकारी सामने आई है।

7.4 रही भूकंप की तीव्रता

कोलंबिया की नेशनल यूनिट फॉर डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट (UNGRD) के अनुसार, भूकंप का केंद्र सैन होजे डेल पाल्मर के पास बताया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक भूकंप जमीन के काफी नीचे आया, जिसके कारण दूर-दराज के क्षेत्रों में भी तेज झटके महसूस किए गए।

क्विबडो में भारी नुकसान

चोको प्रांत की राजधानी क्विबडो में कई इमारतों को नुकसान पहुंचने की सूचना है। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में कई लोग घायल हुए हैं और प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। चोको की गवर्नर नूबिया कोर्डोबा ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स की आशंका जताई है।

मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका

भूकंप के कारण कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मलबे में बड़ी संख्या में लोगों के दबे होने की आशंका के चलते बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टर और अन्य संसाधनों की मदद भी ली जा रही है।

काली और पेरेइरा में भी नुकसान

करीब 20 लाख की आबादी वाले काली शहर में कई इमारतों के ढहने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका है। वहीं, पेरेइरा शहर में भी बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की खबर है।

प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज कर रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और आफ्टरशॉक्स को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।


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