Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक

डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक

वॉशिंगटन। अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता को सीमित करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश को एक बार फिर अदालत से झटका लगा है। मैरीलैंड की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के नए कार्यकारी आदेश पर रोक लगाते हुए प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी की है। यह फैसला अप्रवासी परिवारों और अधिकार संगठनों की ओर से दायर क्लास-एक्शन मुकदमे की सुनवाई के दौरान आया।

फेडरल जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि संबंधित श्रेणियों में आने वाले बच्चे जन्म के समय अमेरिकी नागरिक माने जाते हैं। अदालत के इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की नीति को फिलहाल बड़ा झटका लगा है। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

क्या है अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता का प्रावधान?

अमेरिकी कानून के तहत देश की धरती पर जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चों को जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती है। हालांकि, कानून में कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। इस व्यवस्था का संवैधानिक आधार वर्ष 1868 में लागू हुए अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन से जुड़ा है।

राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की वकालत करते रहे हैं। इससे पहले भी उनके प्रशासन ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए अमेरिका में अवैध या अस्थायी आव्रजन स्थिति में रहने वाले लोगों के यहां जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता सीमित करने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट ने जून में उस प्रयास को झटका दिया था।

नए आदेश में किन मामलों पर था जोर?

ट्रंप प्रशासन ने अगस्त में जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। इस बार आदेश का दायरा पहले की तुलना में सीमित रखा गया। इसमें कुछ विशेष परिस्थितियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः नागरिकता दिए जाने पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी।

आदेश में ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया था, जिनमें बच्चे के माता-पिता का संबंध विदेशी दूतावासों या संगठनों से हो अथवा उन्हें अमेरिका का ‘विदेशी दुश्मन’ माना जाए। इसके अलावा आदेश में ‘बर्थ टूरिज्म’ का मुद्दा भी शामिल किया गया था। बर्थ टूरिज्म का मतलब उन मामलों से है, जब कोई व्यक्ति अमेरिका में बच्चे को जन्म देने और उसके जरिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के उद्देश्य से गैर-आप्रवासी वीजा पर प्रवेश करता है।

परिवारों ने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया?

कार्यकारी आदेश को चुनौती देने वाले परिवारों और अधिकार संगठनों का कहना था कि इससे अमेरिका में रहने वाले कई परिवारों के बीच अपने बच्चों की नागरिकता को लेकर भय और अनिश्चितता पैदा हो सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि कुछ परिवारों के बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में भी नागरिकता से वंचित किया जा सकता है, जिनका अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की किसी सुनियोजित कोशिश से सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसी व्यक्ति को ‘विदेशी दुश्मन’ मानने के लिए प्रशासन व्यापक मानदंड अपना सकता है, जिससे गलत जानकारी या अनुमान के आधार पर भी कार्रवाई का खतरा पैदा हो सकता है।

जज ने प्रशासन की दलील क्यों नहीं मानी?

ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आदेश को रोकने की मांग फिलहाल जल्दबाजी होगी। प्रशासन के वकीलों का कहना था कि संबंधित संघीय एजेंसियां भविष्य में जारी होने वाली आधिकारिक गाइडलाइन के आधार पर नियमों को लागू करेंगी।

जज बोर्डमैन ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि गाइडलाइन बाद में चाहे जिस रूप में जारी हो, मौजूदा कार्यकारी आदेश संघीय एजेंसियों को बच्चों की कई व्यापक श्रेणियों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेज जारी करने से रोकने का निर्देश देता है।

अदालत के इस फैसले के बाद जन्मसिद्ध नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर अमेरिका में कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp