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सीएम धामी ने किया हरिद्वार के बुग्गावाला में ‘मशरूम ग्राम’ का शुभारंभ, किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल

Category Archives: उत्तराखंड

सीएम धामी ने किया हरिद्वार के बुग्गावाला में ‘मशरूम ग्राम’ का शुभारंभ, किसानों की आय बढ़ाने की नई पहल

कम भूमि और कम जल में अधिक लाभ देने वाला उद्यम है मशरूम उत्पादन: मुख्यमंत्री

‘ मशरूम ग्राम’ से युवाओं, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा रोजगार

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में ठोस प्रयास

उत्तराखंड में कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत सब्सिडी और तीन लाख तक ब्याजमुक्त ऋण

पॉलीहाउस, बागवानी, मिलेट और सुगंध फसलों से किसानों को मिल रही नई पहचान

कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प के साथ सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध

हरिद्वार- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार जनपद के बुग्गावाला में एमबी फूड्स द्वारा विकसित ‘मशरूम ग्राम’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने एमबी फूड्स की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मशरूम उत्पादन कम भूमि, कम जल और कम समय में अधिक लाभ देने वाला प्रभावी उद्यम है, जिससे किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को स्वरोज़गार के नए अवसर प्राप्त होंगे तथा स्वयं सहायता समूहों को भी आर्थिक मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मशरूम ग्राम’ मॉडल राज्य के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा और कृषि आधारित उद्यमिता को नई दिशा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत देशभर के 11 करोड़ किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिसमें उत्तराखंड के लगभग 9 लाख किसान भी लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान मानधन योजना, मिलेट मिशन, बागवानी विकास मिशन, कृषि यंत्र सब्सिडी, बूंद-बूंद सिंचाई योजना और डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाएं किसानों को सशक्त बना रही हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पाँच लाख रुपये करना किसानों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी किसानों के उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। फार्म मशीनरी बैंक योजना के अंतर्गत कृषि उपकरणों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी, तीन लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण तथा नहरों से मुफ्त सिंचाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पॉलीहाउस निर्माण हेतु 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत अब तक लगभग 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं खरीद पर प्रति क्विंटल 20 रुपये का बोनस, गन्ने के दामों में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी योजनाएं राज्य में कृषि और बागवानी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही हैं। इसके साथ ही ‘महक क्रांति’ के माध्यम से सुगंध फसलों की खेती को बढ़ावा देकर हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से राज्य के स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी प्रयासों से उत्तराखंड कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित होगी।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने बुग्गावाला और हरिद्वार क्षेत्र के नागरिकों से सरकार के प्रयासों में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से ही देवभूमि उत्तराखंड को कृषि सहित सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री  गणेश जोशी, विधायक  प्रदीप बत्रा,जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित सभी जनपद स्तरीय अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय जनता उपस्थित थी |


खेलों से अनुशासन, स्वास्थ्य और तनावमुक्त जीवन: मुख्यमंत्री धामी

अन्तर्विभागीय बैडमिंटन प्रतियोगिता आगे भी निरंतर आयोजित होती रहेगी: मुख्यमंत्री

देवभूमि को ‘खेल भूमि’ बनाने की दिशा में उत्तराखंड तेज़ी से आगे बढ़ रहा है

अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं से राज्य बन रहा खेल महाशक्ति

देहरादून- मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शासकीय कार्यों की व्यस्तता के बीच कार्मिको द्वारा खेल गतिविधियों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि खेल जीवन में अनुशासन लाने के साथ-साथ तनाव को दूर करता है और शरीर को स्वस्थ रखता है। उन्होंने कहा कि निरोगी रहना मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है और खेल इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि अन्तर्विभागीय बैडमिंटन प्रतियोगिता भविष्य में भी अनवरत रूप से आगे बढ़ती रहेगी और कर्मचारियों-अधिकारियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी।

इन विचारों के साथ मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल, परेड ग्राउंड, देहरादून में उत्तराखण्ड सचिवालय बैडमिंटन क्लब द्वारा आयोजित 10वीं अन्तर्विभागीय बैडमिंटन प्रतियोगिता–2025 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं बैडमिंटन खेलकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन भी किया। प्रतियोगिता में राज्य के 42 विभागों के कर्मचारी एवं अधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड हर क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण बनकर उभर रहा है। राज्य परिवर्तन की ओर अग्रसर है और नवाचारों, ऐतिहासिक निर्णयों तथा जनहितकारी नीतियों के माध्यम से विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हाल ही में उत्तराखंड में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन किया गया, जिससे राज्य में खेल अवसंरचना और सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में खेलों को प्रोत्साहित कर राज्य को ‘खेल भूमि’ के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

बैडमिंटन क्लब के अध्यक्ष  हीरा सिंह बसेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं का तेजी से विकास हो रहा है। खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उत्तराखंड एक उभरती हुई खेल महाशक्ति के रूप में पहचान बना रहा है।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, बैडमिंटन क्लब के अध्यक्ष  हीरा सिंह बसेड़ा, प्रमोद कुमार,  भूपेंद्र बसेड़ा, जे.पी. मैखुरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं खिलाड़ी उपस्थित रहे।


मुख्यमंत्री धामी से देहरादून के महापौर की मुलाकात, नगर विकास के मुद्दों पर हुई चर्चा

देहरादून- मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में देहरादून के महापौर  सौरभ थपलियाल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर देहरादून नगर के समग्र विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, शहरी अवसंरचना, स्वच्छता, यातायात व्यवस्था तथा जनहित से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। महापौर ने नगर की वर्तमान आवश्यकताओं और भावी विकास को ध्यान में रखते हुए प्रमुख मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए एवं देहरादून नगर के विकास को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताते हुए प्रस्तुत मांगों को शीघ्र पूरा करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं के विस्तार और शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए राज्य सरकार नगर निगम के साथ समन्वय बनाकर प्रभावी कदम उठाएगी, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।


देहरादून में विशेष गहन पुनरीक्षण की समीक्षा, डीएम ने मैपिंग कार्य तेज करने के दिए निर्देश

देहरादून-  जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में जनपद देहरादून में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम के अंतर्गत विधानसभावार चल रही मैपिंग कार्यों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद की समस्त विधानसभाओं में चल रहे मैपिंग कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में तीव्र गति से पूर्ण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 31 दिसंबर 2025 तक प्रत्येक विधानसभा में न्यूनतम 50 प्रतिशत से अधिक मैपिंग लक्ष्य अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाए, जिससे मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य समयबद्ध एवं त्रुटिरहित रूप से संपन्न हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी एवं अद्यतन बनाना है। इसके लिए सभी विभागीय अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO/ARO) तथा फील्ड स्टाफ को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मैपिंग कार्य की दैनिक समीक्षा सुनिश्चित करें तथा किसी भी समस्या या बाधा की जानकारी समय रहते जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराएं।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप जिलाधिकारी हरिगिरि, निदेशक ग्रामीण विकास अभिकरण विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पी.सी. त्रिपाठी, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डयाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त जनपद के सभी सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ARO) ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।


नई फिल्मों की रिलीज के बीच ‘धुरंधर’ की रफ्तार कायम, 500 करोड़ क्लब के करीब

Dhurandhar 500 Crore Soon: सिनेमाघरों में इस समय बॉक्स ऑफिस की जंग दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। जहां रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ लगातार दूसरे हफ्ते भी दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है, वहीं इस शुक्रवार कई नई फिल्मों ने भी बड़े पर्दे पर दस्तक दी है। इनमें जेम्स कैमरून की बहुप्रतीक्षित ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ और संजय मिश्रा स्टारर ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ शामिल हैं। सवाल यही है कि क्या इन नई रिलीज का असर ‘धुरंधर’ की कमाई पर पड़ा है या नहीं।

हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक जेम्स कैमरून एक बार फिर अपनी चर्चित फ्रेंचाइजी के साथ लौटे हैं। ‘अवतार’ सीरीज की तीसरी फिल्म ‘अवतार: फायर एंड ऐश’ ने रिलीज के पहले ही दिन भारत में 20 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है। फिल्म को अंग्रेजी वर्जन में सबसे ज्यादा दर्शक मिले, जहां से करीब 9 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। हिंदी संस्करण ने 5.5 करोड़, तेलुगु ने 2.85 करोड़ और तमिल ने 2.60 करोड़ रुपए जोड़े। कन्नड़ और मलयालम में फिल्म की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर रही।

दूसरी ओर, रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर मजबूती से टिकी हुई है। रिलीज के 15वें दिन यानी दूसरे शुक्रवार को भी फिल्म ने 22.50 करोड़ रुपए की शानदार कमाई की। इसके साथ ही फिल्म का कुल कलेक्शन 483 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है और अब यह 500 करोड़ क्लब में एंट्री की ओर तेजी से बढ़ रही है।

इस शुक्रवार रिलीज हुई संजय मिश्रा और महिमा चौधरी की ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ को बड़े मुकाबले के चलते सीमित स्क्रीन ही मिल पाए। नतीजतन फिल्म पहले दिन सिर्फ 6 लाख रुपए ही कमा सकी। आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई में बढ़ोतरी होती है या नहीं, यह देखना दिलचस्प रहेगा।

वहीं कपिल शर्मा की ‘किस किसको प्यार करूं 2’ की रफ्तार बॉक्स ऑफिस पर काफी धीमी पड़ गई है। फिल्म ने आठवें दिन महज 22 लाख रुपए का कलेक्शन किया, जिसके बाद इसका कुल कारोबार 11.07 करोड़ रुपए तक ही सिमट गया है।

तेलुगु सुपरस्टार नंदमुरी बालकृष्ण की ‘अखंडा 2’ ने शुरुआत में जोरदार प्रदर्शन किया था। पहले हफ्ते में 76.75 करोड़ रुपए कमाने के बाद फिल्म ने दूसरे हफ्ते की शुरुआत भी करोड़ों में की है। शुक्रवार को फिल्म ने 1.77 करोड़ रुपए की कमाई की, जिससे इसकी कुल आय 78.52 करोड़ रुपए हो गई है।

कुल मिलाकर, जहां ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर अब भी दबदबा बनाए हुए है, वहीं नई रिलीज फिल्मों के लिए राह आसान नजर नहीं आ रही।


एमडीडीए की पहल से शहर विकास को नई दिशा, देहरादून कैंट क्षेत्र में पार्कों का सौंदर्यीकरण पूर्णएमडीडीए के जनहितकारी विकास कार्यों की विधायक सविता कपूर ने खुलकर प्रशंसा की, हरित सार्वजनिक स्थलों के विकास की पहल को बताया सराहनीय देहरादून- मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण) ने शहर विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक पार्कों के सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग कार्यों को पूरा किया है। इस पहल का उद्देश्य शहरी हरित क्षेत्रों का विस्तार, नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना और पर्यावरण–अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है। एमडीडीए द्वारा योजनाबद्ध ढंग से किए गए इन कार्यों से आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुंदर वातावरण मिला है, जिससे शहर की जीवन–शैली और सौंदर्य दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा। कैंट विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर कराए गए कार्यों का लोकार्पण आज विधायक देहरादून कैंट सविता कपूर द्वारा विधिवत रूप से किया गया। यह कार्यक्रम क्षेत्र में हरित वातावरण को बढ़ावा देने तथा नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र में साईंलोक कॉलोनी (जीएमएस रोड) में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹20.68 लाख), इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी (जीएमएस रोड) में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹28.94 लाख) तथा माया एन्क्लेव में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹20.84 लाख) का लोकार्पण किया गया। परियोजनाओं के अंतर्गत हरियाली का विस्तार, आकर्षक लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था, पैदल पथ, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं। विधायक सविता कपूर का बयान विधायक सविता कपूर ने कहा कि शहरी विकास का वास्तविक स्वरूप तभी साकार होता है जब नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध हों। पार्क किसी भी शहर के “ग्रीन लंग्स” होते हैं, जो पर्यावरण संतुलन के साथ–साथ सामाजिक जीवन को भी समृद्ध करते हैं। देहरादून कैंट क्षेत्र में एमडीडीए द्वारा कराए गए सौंदर्यीकरण कार्यों से बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को टहलने, योग, खेल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान मिला है। यह पहल स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जुड़ाव तीनों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी क्षेत्र में नागरिक–केन्द्रित विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और एमडीडीए के साथ समन्वय कर ऐसे ही कार्य निरंतर आगे बढ़ाए जाएंगे। विधायक सविता कपूर ने एमडीडीए के अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भविष्य में भी कैंट विधानसभा क्षेत्र में इसी प्रकार जनहित से जुड़े विकास कार्य निरंतर किए जाएंगे। उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि एमडीडीए शहर विकास को समग्र दृष्टि से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे के साथ–साथ सार्वजनिक स्थानों का उन्नयन भी शामिल है। पार्कों का सौंदर्यीकरण नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और समयबद्ध तरीके से पूरे किए गए हैं। आने वाले समय में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हरित और सार्वजनिक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। पार्कों में विकसित सुविधाएं स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। एमडीडीए आगे भी शहरी सौंदर्यीकरण और जन–सुविधाओं के विस्तार के लिए चरणबद्ध योजनाओं पर कार्य करता रहेगा। कार्यक्रम में एमडीडीए के मुख्य अभियंता हरिचन्द्र सिंह राणा सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। उपस्थित जनसमूह ने एमडीडीए क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों के लिए एमडीडीए के प्रयासों की सराहना की।

एमडीडीए के जनहितकारी विकास कार्यों की विधायक सविता कपूर ने खुलकर प्रशंसा की, हरित सार्वजनिक स्थलों के विकास की पहल को बताया सराहनीय

देहरादून- मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण) ने शहर विकास की अवधारणा को मजबूत करते हुए देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक पार्कों के सौंदर्यीकरण और लैंडस्केपिंग कार्यों को पूरा किया है। इस पहल का उद्देश्य शहरी हरित क्षेत्रों का विस्तार, नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराना और पर्यावरण–अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है। एमडीडीए द्वारा योजनाबद्ध ढंग से किए गए इन कार्यों से आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुंदर वातावरण मिला है, जिससे शहर की जीवन–शैली और सौंदर्य दोनों में सकारात्मक बदलाव आएगा।

कैंट विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर कराए गए कार्यों का लोकार्पण आज विधायक देहरादून कैंट सविता कपूर द्वारा विधिवत रूप से किया गया। यह कार्यक्रम क्षेत्र में हरित वातावरण को बढ़ावा देने तथा नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र में साईंलोक कॉलोनी (जीएमएस रोड) में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹20.68 लाख), इन्द्रप्रस्थ कॉलोनी (जीएमएस रोड) में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹28.94 लाख) तथा माया एन्क्लेव में पार्क सौंदर्यीकरण कार्य (लागत ₹20.84 लाख) का लोकार्पण किया गया। परियोजनाओं के अंतर्गत हरियाली का विस्तार, आकर्षक लैंडस्केपिंग, बैठने की व्यवस्था, पैदल पथ, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और बच्चों के लिए सुरक्षित खेल सुविधाएं विकसित की गई हैं।

विधायक सविता कपूर का बयान
विधायक सविता कपूर ने कहा कि शहरी विकास का वास्तविक स्वरूप तभी साकार होता है जब नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित सार्वजनिक स्थल उपलब्ध हों। पार्क किसी भी शहर के “ग्रीन लंग्स” होते हैं, जो पर्यावरण संतुलन के साथ–साथ सामाजिक जीवन को भी समृद्ध करते हैं। देहरादून कैंट क्षेत्र में एमडीडीए द्वारा कराए गए सौंदर्यीकरण कार्यों से बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को टहलने, योग, खेल और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान मिला है। यह पहल स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जुड़ाव तीनों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी क्षेत्र में नागरिक–केन्द्रित विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और एमडीडीए के साथ समन्वय कर ऐसे ही कार्य निरंतर आगे बढ़ाए जाएंगे। विधायक सविता कपूर ने एमडीडीए के अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भविष्य में भी कैंट विधानसभा क्षेत्र में इसी प्रकार जनहित से जुड़े विकास कार्य निरंतर किए जाएंगे।

उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी का बयान
उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी ने कहा कि एमडीडीए शहर विकास को समग्र दृष्टि से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें बुनियादी ढांचे के साथ–साथ सार्वजनिक स्थानों का उन्नयन भी शामिल है। पार्कों का सौंदर्यीकरण नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सभी कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और समयबद्ध तरीके से पूरे किए गए हैं। आने वाले समय में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हरित और सार्वजनिक सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।

सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया का बयान
सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। पार्कों में विकसित सुविधाएं स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। एमडीडीए आगे भी शहरी सौंदर्यीकरण और जन–सुविधाओं के विस्तार के लिए चरणबद्ध योजनाओं पर कार्य करता रहेगा।

कार्यक्रम में एमडीडीए के मुख्य अभियंता हरिचन्द्र सिंह राणा सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। उपस्थित जनसमूह ने एमडीडीए क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों के लिए एमडीडीए के प्रयासों की सराहना की।


उत्तराखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों को लेकर संसद में उठा सवाल, डॉ. नरेश बंसल ने मांगी परियोजनाओं की स्थिति

नई दिल्ली/देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने संसद में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति, दिल्ली–देहरादून एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे, अन्य एनएच परियोजनाओं तथा आपदा में क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

डॉ. बंसल ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री से पूछा कि उत्तराखंड में दिल्ली–देहरादून बारहमासी सड़क सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कब तक पूरा होगा, निर्माण के दौरान चट्टान कटान व ढलान उपचार के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, विभिन्न एनएच पर क्षतिग्रस्त पुलों के पुनर्निर्माण की समयसीमा क्या है, तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कितने गांवों को जोड़ा जा चुका है।

अप्रैल 2028 तक पूरे होंगे अधिकांश एनएच प्रोजेक्ट

जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी ने बताया कि दिल्ली–देहरादून एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे से जुड़ी परियोजनाओं की पैकेज-वार स्थिति अनुलग्नक में दी गई है। उत्तराखंड में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रहे कार्यों को अप्रैल 2028 तक पूरा करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार उत्खनन, चट्टान कटाई और ढलान स्थिरीकरण कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए प्राधिकरण इंजीनियर और स्वतंत्र इंजीनियरों द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है।

पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा-रोधी सड़क अवसंरचना पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पहाड़ी राज्यों में आपदा-प्रतिरोधी राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें भूस्खलन प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक सुधारात्मक उपाय, सड़क निर्माण से पहले ढलान स्थिरीकरण, तथा नवंबर 2025 तक एक व्यापक नीति परिपत्र को अंतिम रूप देना शामिल है।

इसके अलावा उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश के लिए विशेष भूस्खलन प्रबंधन उपायों को लेकर टीएचडीसीआईएल, डीजीआरई, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और राष्ट्रीय शैल यांत्रिकी संस्थान के साथ समझौता ज्ञापन किए गए हैं।

क्षतिग्रस्त पुलों की स्थिति

देहरादून–पांवटा साहिब:
एनएच-72 पर प्रेमनगर के पास स्थित क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर बाईपास का निर्माण किया जा रहा है, जिसका कार्य काफी हद तक पूरा हो चुका है। पुल मरम्मत के लिए लगभग 17 करोड़ रुपये का प्रस्ताव एनएचआई को भेजा गया है।

देहरादून–हरिद्वार:
पुराना दो लेन जाखन पुल 2025 के मानसून में क्षतिग्रस्त हुआ था। फिलहाल यातायात नए पुल से संचालित हो रहा है। नए पुल का निर्माण जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

देहरादून–मसूरी:
आर्य ब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद अस्थायी वैली ब्रिज लगाया गया है। यहां 60 मीटर स्पैन का नया पुल प्रस्तावित है, जिसे जून 2026 तक पूरा किया जाएगा।

देहरादून–सहारनपुर:
इस मार्ग पर किसी भी पुल को नुकसान नहीं पहुंचा है।

पीएमजीएसवाई के तहत 1860 बस्तियों को मिली सड़क सुविधा

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-1) के तहत उत्तराखंड में कुल 1864 पात्र बस्तियों को स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 1860 बस्तियों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्रदान की जा चुकी है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।


राज्य विश्वविद्यालयों को मिला समर्थ पोर्टल का सम्पूर्ण नियंत्रण

विभागीय मंत्री डॉ. रावत के निर्देश पर शासन ने की त्वरित कार्यवाही

विश्वविद्यालय स्तर से संचालित होंगी प्रवेश एवं परीक्षा सहित अन्य गतिविधियां

देहरादून- भारत सरकार द्वारा तैयार उच्च शिक्षा के एकीकृत समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को पूर्ण रूप से सौंप दिया गया है। इस संबंध में शासन द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। अब राज्य विश्वविद्यालय अपने-अपने स्तर पर छात्र-छात्राओं के प्रवेश, परीक्षा व अन्य शैक्षिक गतिविधियां सम्पादित कर सकेंगे। जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव को सौंपी गई है।

सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देशों के उपंरात समर्थ पोर्टल के संचालन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से राज्य विश्वविद्यालयों कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, टिहरी तथा सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को सौंप दी गई है। अब राज्य विश्वविद्यालय सम्बद्ध राजकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय परिसरों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश एवं परीक्षा से लेकर विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां अपने स्तर से संचालित कर सकेंगे। अभी तक समर्थ पोर्टल का संचालन शासन स्तर पर राज्य समर्थ टीम (एनईपी-पीएमयू) के द्वारा किया जा रहा था लेकिन इससे छात्र-छात्राओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालय के द्वारा समर्थ पोर्टल के सभी मॉडयूल के संचालन को समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। पोर्टल संबंधी संचालन की सारी जिम्मेदारी संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव की होगी, जो किसी भी प्रकार से अन्य को हस्तगत नहीं की जायेगी। प्रत्येक माह पोर्टल की समीक्षा की जायेगी जिसकी रिपोर्ट शासन को आवश्यक रूप से सौंपी जायेगी। छात्र-छात्राओं के प्रवेश हेतु पोर्टल खोलने से पहले विश्वविद्यालय सात दिन पहले इसकी सूचना अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करेगा साथ ही सामाचार पत्रों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यामों के जरिये इसका प्रचार-प्रसार भी करेगा। इसके अलावा इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में समर्थ पोर्टल का ही प्रयोग किया जायेगा। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पूर्व से संचालित समस्त ईआरपी/पोर्टल का डाटा 31 मार्च 2026 तक समर्थ पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जायेगा इसके उपरांत समर्थ पोर्टल के अतिरिक्त किसी भी दशा में कोई भी ईआरपी/पोर्टल का संचालन नहीं की जायेगी और न ही इस संबंध में कोई भुगतान किया जायेगा।

शासन स्तर से जारी आदेश के तहत सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों को अपना एकेडमिक कैलेण्डर तैयार कर उसे आगामी 31 मई 2026 तक अपनी कार्यपरिषद से अनिवार्य रूप से अनुमोदित कराना होगा तदोपरांत आगामी सत्र के प्रवेश, परीक्षा एवं अन्य प्रक्रियाएं सम्पादित की जायेगी। विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक सेमेस्टर में प्रवेश के उपरांत छात्र-छात्राओं की कक्षाओं का संचालन 90 दिवस तथा 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जायेगी, जिसका डाटा समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ करना अनिवार्य होगा। जबकि निजी विश्वविद्यालयों में समर्थ मॉड्यूल लागू होने तक छात्रों की उपस्थिति संबंधित ईआरपी पर अपलोड़ की जायेगी, जिसकी जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जायेगी। छात्रों की उपस्थिति व कक्षाओं के संचालन मानक पूर्ण न होने की दशा में छात्रों को किसी भी दशा में परीक्षा में बैठने की अनुमति कतई भी नहीं दी जायेगी। उक्त आदेशों को सुनिश्चित करने के लिये संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, संबंधित संस्थान के प्राचार्य/निदेशक एवं उच्च शिक्षा निदेशक जिम्मेदार होंगे।

बयान
समर्थ पोर्टल के संचालन का अधिकार राज्य विश्वविद्यालयों को दे दिया गया है। जिसका लाभ छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थानों में एकेडमिक कैलेण्डर लागू कर प्रत्येक सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं की 75 फीसदी उपस्थिति व 90 दिवस कक्षाओं का संचालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जायेगा। जिसका रिकार्ड समर्थ पोर्टल पर अपलोड़ किया जायेगा। – डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड ।


सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उठाया मानव–पशु संघर्ष का मुद्दा

दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक

ट्रेनों से हाथियों की मौत पर सांसद त्रिवेन्द्र रावत की चिंता, रेल–वन समन्वय मजबूत करने की मांग

देहरादून/ नई दिल्ली। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में दिल्ली में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य, हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हिस्सा लिया।

बैठक के दौरान सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड सहित हिमालयी क्षेत्रों में “मानव–पशु संघर्ष” को एक गंभीर एवं ज्वलंत मुद्दा बताते हुए कहा कि जंगली पशुओं का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ता पलायन चिंता का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उन मूल कारणों की पहचान की जाए, जिनके चलते मानव–पशु संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं, ताकि स्थायी और व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित किए जा सकें।

सांसद रावत ने हरिद्वार क्षेत्र में ट्रेनों से हाथियों की मृत्यु की घटनाओं पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए रेल–वन समन्वय, चेतावनी तंत्र, गति नियंत्रण एवं संरचनात्मक उपायों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने लच्छीवाला में एलिफैंट कॉरिडोर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए प्रभावी संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह किया।

इस दौरान मानव–पशु संघर्ष की चुनौती से निपटने हेतु समन्वित नीति, स्थानीय सहभागिता और तकनीकी हस्तक्षेप पर व्यापक विचार–विमर्श किया गया।

बैठक में समिति के अन्य सदस्यगण एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए प्रवासी पंचायतों का राज्यभर में आयोजन किया जाए- मुख्यमंत्री

ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कर रही है ठोस प्रयास

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग, उत्तराखण्ड की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार–पाँच वर्षों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेने पर पात्र लाभार्थियों को अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।

प्रवासी पंचायतों और वेडिंग डेस्टिनेशन विकास पर विशेष बल

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाए, जिनमें देश एवं विदेश में कार्यरत प्रवासियों को आमंत्रित किया जाए। उन्हें राज्य सरकार की रिवर्स पलायन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाए और उनके सुझाव भी प्राप्त किए जाएँ।

मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों से अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देने के साथ ही पलायन रोकने और रिवर्स पलायन से जुड़े नवाचारों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। इन स्थलों में सभी मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए लघु उद्योगों के संवर्धन पर भी बल दिया गया।

रिवर्स पलायन की दिशा में उत्साहजनक परिणाम

ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ॰ एस.एस. नेगी ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अब रिवर्स पलायन का रुझान देखने को मिल रहा है। अब तक लगभग 6282 व्यक्ति वापस अपने गाँवों में लौटे हैं। इनमें देश के भीतर और विदेशों से लौटे लोग भी शामिल हैं। अधिकतर लोग पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बैठक में आयोग के सदस्यों ने रिवर्स पलायन को और गति देने के लिए कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, सी. रविशंकर, अपर सचिव श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ॰ मेहरबान सिंह बिष्ट, चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, संतोष बडोनी, सुरेश जोशी, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य अनिल सिंह शाही, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत उपस्थित रहे।


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