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क्या आप भी अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर सुनते हैं गाने, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकते हैं बहरे 

Category Archives: जीवन शैली

क्या आप भी अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर सुनते हैं गाने, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकते हैं बहरे 

क्या आप भी फोन पर घंटों बात करते रहते हैं? अक्सर ईयरफोन-हेडफोन लगाकर गाने सुनते रहते हैं? अगर हां, तो तुरंत इन आदतों में सुधार कर लें वरना बहुत जल्दी आपके सुनने की शक्ति छिन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार अलर्ट करते रहे हैं कि कम उम्र के लोगों में कान की बीमारी या कम सुनाई देने की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। तेज आवाज में गाना सुनने और घंटों फोन कॉल पर बात करने की आदत युवाओं को बहरा बना सकती है।

100 करोड़ से अधिक लोगों में बहरेपन का खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी पहले ही अलर्ट कर चुका है कि 12 से 35 वर्ष की आयु के एक बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों में सुनने की क्षमता कम होने या बहरेपन का जोखिम हो सकता है। इसके लिए मुख्यरूप से लंबे समय तक ईयरबड्स से तेज आवाज में संगीत सुनने और शोरगुल वाली जगहों पर रहना एक बड़ा कारण माना जा रहा है। तेज आवाज वाले ये उपकरण आंतरिक कान को क्षति पहुंचाते हैं। सभी लोगों को इन उपकरणों का इस्तेमाल बड़ी सावधानी से करना चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

दिल्ली-एनसीआर के एक अस्पताल से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक 18 से 30 वर्ष की उम्र करीब 1400 मरीज हर महीने अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इन्हें कम सुनाई देने, कानों में सीटी की आवाज आने जैसी दिक्कतें होती हैं।

ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स ) के ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हुकम सिंह बताते हैं, ईयरफोन, हेडफोन के अलावा अन्य गाने सुनने के उपकरणों से तेज ध्वनि में संगीत कानों पर नकारात्मक असर डाल रही है। फोन पर लगातार बात करने की आदत भी खतरनाक है। इन आदतों के कारण लोगों को कान बहने, कम सुनाई देने और अजीब तरीके की आवाजें गूंजने की समस्या हो रही है।

तेज आवाज कानों के लिए ठीक नहीं

अध्ययनों से पता चलता है कि ईयरबड्स या हेडफोन के साथ पर्सनल म्यूजिक प्लेयर का इस्तेमाल करने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोग लगातार 85 (डेसिबल) से ज्यादा आवाज में इसे प्रयोग में लाते हैं। इतनी तीव्रता वाली आवाज को कानों के आंतरिक हिस्से के लिए काफी हानिकारक पाया गया है। युवा आबादी में फोन पर बहुत बात करना या ईयरबड्स जैसे उपकरणों का बढ़ता इस्तेमाल 40 की उम्र तक सुनने की क्षमता को कम कमजोर करने वाली स्थिति हो सकती है।

अध्ययन में क्या पता चला?

बीएमजे पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 50,000 से अधिक लोगों का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि वीडियो गेम्स के दौरान होने वाली आवाज तय सीमा से कहीं अधिक होती है।

सामान्य लोगों के लिए 25-30 डेसीबल ध्वनि को पर्याप्त माना जाता है, जबकि 80-90 डेसीबल ध्वनि श्रवण शक्ति को स्थायी हानि पहुंचाने वाली हो सकती है। विश्लेषण के दौरान पाया गया कि वीडियो गेमिंग के समय अधिकतर लोगों का ध्वनि स्तर 85 और 90 डेसीबल के आसपास रहा, जो कानों की सहनशक्ति से कहीं अधिक है। इससे बहरेपन का जोखिम हो सकता है।

(साभार)


यदि आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिनके गर्मी में फट रहे होंठ, तो इन चीजों का इस्तेमाल करके इस परेशानी से पाए राहत 

सर्दियों में होंठ फटना तो बेहद आम बात है, लेकिन जब गर्मी में भी होंठ फटते हैं, तो ये चिंता का विषय हो जाता है। लेकिन आज के समय में तेज धूप, प्रदूषण और अन्य परेशानियों की वजह से ज्यादातर लोग होंठों के फटने से परेशान हैं।

यदि आप भी उन्हीं लोगों में से हैं, जिनके होंठ गर्मी में फट रहे हैं तो कुछ चीजों का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से राहत पा सकते हैं। यहां हम आपको इन्हीं चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि आप भी इस परेशानी से आतान तरीके से राहत पा सकें।

नारियल का तेल

यदि आपके होंठ फटना बंद नहीं हो रहे हैं तो आप नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें पाए जाने वाले तत्व आपके होंठों को सूखने से बचाते हैं। इसका इस्तेमाल करना काफी आसान है। इस्तेमाल के लिए केवल रात के समय में होंठों पर नारियल का तेल लगाएं और ऐसे ही सो जाएं।

शहद

शहद के इस्तेमाल से आपको फटे हुए होंठों से राहत मिलेगी। इसके इस्तेमाल के लिए होंठों पर शहद की पतली सी लेयर लगाएं। 10 से 15 मिनट तक इसे ऐसे ही होंठों पर लगा रहने दें और फिर हल्के हाथ से पोंछ लें। हल्के हाथ से पोंछने के बाद होंठों पर मॉइश्चराइजर लगाएं और सो जाएं।

एलोवेरा

एलोवेरा का पौधा तो लगभग हर घर में होता है। ऐसे में आप इसके इस्तेमाल से भी अपने फटे हुए होंठों को सही कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल के लिए रात के समय एलोवेरा जेल को होंठों पर लगाएं और फिर कुछ ही दिनों में इसका असर देखें।

गुलाब जल

गर्मी के मौसम में घर-घर में गुलाब रख रखा रहता है। ऐसे में आप इसके इस्तेमाल से भी फटे होंठों को ठीक कर सकते हैं। इसके लिए कॉटन बॉल पर डालकर होंठों पर हल्के से लगाएं। ये नुस्खा आपके होंठों को हाइड्रेट रखने में मदद करेगा।

ग्लिसरीन

इस मौसम में भी ग्लिसरीन आपके होंठों की हालत सुधारने में मदद करेगा। ग्लिसरीन को थोड़ा सा शहद के साथ मिलाकर होंठों पर लगाएं और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। फिर इसे पोंछ लें। इससे भी आपको फायदा दिखेगा।

घी

गर्मियों में आप घी को मॉइस्चराइजर के रूप में भी यूज कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से होंठ कोमल और नर्म बन जाते है। घी होंठों को नमी प्रदान करता है। इसको आप रात में लगाकर सो सकते हैं।

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क्या आप भी हैं फैटी लिवर की समस्या से परेशान, तो आइये जानते हैं इसके कारण और बचाव के उपाय

लाइफस्टाइल और आहार की गड़बड़ी ने समय के साथ कई बीमारियों के खतरे को बढ़ा दिया है। युवाओं में लिवर की बढ़ती बीमारियां भी इसी का एक उदाहरण हैं। भारत में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। फैटी लिवर तब होता है जब लिवर में वसा जमा होने लग जाती है, इससे लिवर के लिए ठीक तरीके से अपना काम कर पाना कठिन हो जाता है। कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अभी तक माना जाता था कि जो लोग शराब पीते हैं उनमें इस रोग का खतरा अधिक होता है पर शराब न पीने वालों में भी ये बीमारी बढ़ रही है। इस तरह के फैटी लिवर को नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है।

गड़बड़ लाइफस्टाइल और खान-पान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारतीय समाज में अधिकतर लोग अस्वास्थ्यकर आहार और जीवनशैली का शिकार देखे जा रहे हैं। जंक और पैक्ड फूड, अधिक चीनी और वसा से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ा है। पिज्जा, बर्गर, स्नैक्स और मीठे पदार्थों (जैसे कोल्ड ड्रिंक, मिठाइयां) अधिक खाने का कारण है कि फैटी लिवर की समस्या में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

इसके अलावा ज्यादा समय कंप्यूटर, मोबाइल और टीवी पर बिताना और व्यायाम या शारीरिक गतिविधि कम होने से भी आप इस रोग का शिकार हो सकते हैं।

फैटी लिवर की पहचान कैसे करें?

फैटी लिवर की समस्या अक्सर बिना लक्षणों के होती है हालांकि जैसे-जैसे ये बढ़ती जाती है, इसके संकेत नजर आने लगते हैं।

फैटी लिवर की समस्या के कारण लिवर के कार्य करने की क्षमता प्रभावित होने से लगती है जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में आप रोजमर्रा के कामों में थकावट महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा लिवर में सूजन होने या फैट जमने के कारण पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है। इस तरह की समस्याओं को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

बार-बार पीलिया तो नहीं हो रहा?

लिवर में फैट की मात्रा बढ़ने के कारण लिवर ठीक से विषाक्त पदार्थों को साफ नहीं कर पाता, जिससे बिलीरुबिन का स्तर बढ़ता है। इसके कारण त्वचा व आंखें पीली हो जाती हैं। अगर आपको बार-बार पीलिया की समस्या होती रहती है तो इसे गंभीरता से लें और समय रहते उपचार प्राप्त करें। फैटी लिवर का ये मुख्य लक्षण है।

त्वचा पर चकत्ते या खुजली बने रहना भी ठीक नहीं

फैटी लिवर की स्थिति में शरीर में विषाक्त पदार्थों की वृद्धि होने का जोखिम रहता है। ये त्वचा में खुजली या लाल चकत्ते बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है। कुछ लोगों को इसके कारण पेशाब के रंग में गहरापन भी नजर आ सकता है। लिवर की खराबी से शरीर में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे हाथ और पैरों में सूजन भी हो सकती है।

फैटी लिवर से बचाव के उपाय

लाइफस्टाइल और खान-पान को ठीक रखकर आप इस समस्या से बचाव कर सकते हैं। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें।
फलों और सब्जियों का अधिक सेवन करें, क्योंकि ये शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं और लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
चीनी और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से बचें। अत्यधिक चीनी और ट्रांस फैट से लिवर पर दबाव पड़ता है।
नियमित व्यायाम जैसे रनिंग-वॉकिंग, साइकिलिंग या तैराकी से शरीर में वसा की मात्रा कम होती है और लिवर को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।
सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम जरूर करें।
5-10% वजन घटाने से लिवर की फैट में सुधार देखा जा सकता है।
यदि आप शराब पीते हैं, तो इसे तुरंत छोड़ दें। शराब का सेवन फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ाता है।

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क्या आपका भी है कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई, तो कंट्रोल करने के लिए इन योगासनों का करें अभ्यास

जब खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है तो इसे हाई कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। इससे दिल का दौरा या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल भले ही शरीर के लिए आवश्यक है लेकिन इसकी अधिक मात्रा हानिकारक हो सकती है। अस्वस्थ आहार, शारीरिक सक्रियता की कमी, अधिक वजन, धूम्रपान, मधुमेह, उच्च रक्तचाप समेत कई कारणों से हाई कोलेस्ट्रॉल की शिकायत हो सकती है।

वहीं इस समस्या से हृदय पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण दिल के दौरे का खतरा रहता है। हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए प्राकृतिक तरीकों में योग असरदार है। कुछ योगासनों के नियमित अभ्यास से हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर को काबू किया जा सकता है और हृदय रोग के जोखिम से बचा जा सकता है।

सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार 12 आसनों की श्रृंखला है, जिसके नियमित अभ्यास से कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिलती है। कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी सूर्य नमस्कार असरदार है।

पश्चिमोत्तासन

पश्चिमोत्तासन एक तरह का स्ट्रेचिंग आसन है जो पाचन को सुधारने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है। जिन लोगों को लिवर की समस्याएं हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह से पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करना चाहिए। इससे लिवर से जुड़ी समस्याओं के लक्षण कम हो सकते हैं।

सर्वांगासन

सर्वांगासन को फुल बाॅडी आसन कह सकते हैं। इसके अभ्यास से पाचन में सुधार होता है और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है। इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों से कमर को सहारा दें। पूरे शरीर का भार कंधों पर रखें और ठुड्डी को छाती से लगाएं। 30 सेकंड से 1 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।

भुजंगासन

इस आसन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने के साथ ही स्पाइन को स्ट्रेच करने में मदद मिलती है। भुजंगासन का अभ्यास पूरे शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। अभ्यास के लिए पेट के बल लेटें और हथेलियों को कंधों के पास रखें। सांस लेते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाएं और गर्दन ऊपर करें। इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रुकें और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं।

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क्या आप भी सोने से पहले चलाते हैं स्मार्टफोन, तो हो जाएं सावधान, नहीं तो सेहत को हो सकता है नुकसान

तकनीकी के इस दौर में स्मार्टफोन और कंप्यूटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल स्वाभाविक रूप से तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी लत आपके स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। एक नए अध्ययन में पता चला है कि सोने से पहले एक घंटा स्मार्टफोन, टीवी और कंप्यूटर में बिताने से अनिद्रा का जोखिम लगभग 60 फीसदी बढ़ सकता है। नॉर्वे में 18-28 वर्ष की आयु के 45 हजार से अधिक छात्रों पर किए गए अध्ययन में यह भी पता चलता है कि इससे नींद का समय भी लगभग आधे घंटे कम हो सकता है।

फ्रंटियर्स इन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुख्य लेखक और नॉर्वेजियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के गुन्नहिल्ड जॉनसन हेटलैंड ने कहा, चाहे आप सोशल मीडिया पर समय बिताएं या फिर रील्स या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर, उससे फर्क नहीं पड़ता। फर्क सोते समय स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी में रहने वाली कुल अवधि यानी स्क्रीन टाइम से पड़ता है।

हेटलैंड ने कहा, यूं तो छात्रों में नींद की समस्याएं बहुत आम हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं बिस्तर पर जाने के बाद एक घंटे तक स्क्रीन में बिताने से अनिद्रा के लक्षणों की 59 फीसदी अधिक संभावना है और नींद की अवधि भी 24 मिनट कम हो सकती है।

स्क्रीन टाइम का असर
स्क्रीन टाइम का मतलब है कि आप स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टीवी, या टैबलेट जैसे स्क्रीन वाले डिवाइस का उपयोग करने में कितना समय बिताते हैं। अध्ययन के मुताबिक, स्क्रीन टाइम जितना अधिक होता है, नींद उतनी अधिक प्रभावित होती है।
अध्ययनकर्ताओं ने सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या अन्य किसी उपकरण का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है।

बिस्तर पर मोबाइल चलाने के दुष्प्रभाव
नींद में खलल पड़ता है
नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है
नीद की गुणवत्ता खराब हो जाती है
शरीर की आंतरिक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम प्रभावित भी होती है। यह घड़ी निर्धारित करती है कि आप कब सबसे अधिक सतर्क रहते हैं और कब सोने के लिए तैयार होते हैं।

सलाह
किताब पढ़ें…सोने से एक घंटे पहले मोबाइल को खुद से दूर रखें।
ब्लूलाइट फिल्टर ऑन करें।
रात को किताब पढ़ें या ध्यान करें।

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क्या आप भी करते हैं नमक का अधिक सेवन, तो जान लीजिये इससे होने वाले नुकसान

दुनियाभर में जिस तरह से क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है उसे देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपनी लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखने की सलाह देते हैं। जिन चीजों के सेवन को सबसे नुकसानदायक माना जाता रहा है, उनमें नमक और चीनी प्रमुख हैं। ज्यादा चीनी खाने से डायबिटीज और मोटापे का खतरा रहता है वहीं नमक की अधिकता ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।

नमक खाने के बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादा सोडियम या खाने का नमक ब्लड प्रेशर जरूर बढ़ाता है पर इसे पूरी तरह से छोड़ देना भी ठीक नहीं है। ज्यादा नमक खाना हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है, जिससे किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचाता है हालांकि अगर आप नमक खाना बिल्कुल बंद कर देते हैं तो इससे हाइपोटेंशन (लो ब्लड प्रेशर), मांसपेशियों की कमजोरी और हृदय की समस्याएं हो सकती हैं।

ज्यादा नमक खाना सेहत के लिए ठीक नहीं

नमक (सोडियम) का सेवन शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी अधिकता या अत्यधिक कमी दोनों ही स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञ कहते हैं प्रतिदिन 5 ग्राम से अधिक मात्रा में नमक खाने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग की आशंका 23% अधिक होती है। इतना ही नहीं इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।

किडनी और हड्डियों पर असर

अधिक मात्रा में नमक का सेवन किडनी पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ाता है, जिससे किडनी फेलियर का जोखिम बढ़ सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, ज्यादा सोडियम किडनी में पथरी बनने की समस्या को भी बढ़ाता है।

ये आदत हड्डियों की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है। ज्यादा नमक खाने से कैल्शियम की कमी हो सकती है जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन के अनुसार, ज्यादा नमक खाने से पेशाब के माध्यम से कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ जाता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा हो सकता है।

नमक खाना बंद कर देना भी ठीक नहीं

ज्यादा नमक खाने के तो कई नुकसान हैं पर अगर आप इसका सेवन बिल्कुल कम कर देते हैं तो इससे भी शरीर पर नकारात्मक असर हो सकता है। हमारे शरीर को संयमित मात्रा में सोडियम की आवश्यकता होती है। इसकी कमी से ब्लड प्रेशर लो हो सकता है, जिससे चक्कर आना, बेहोशी और कमजोरी महसूस जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।

हाई सोडियम की तरह लो सोडियम भी हृदय स्वास्थ्य के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर आप लंबे समय तक बहुत कम मात्रा में नमक खाने लगते हैं तो इससे हाइपोटेंशन (लो बीपी) और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

संयमित मात्रा में करें सेवन

नमक की कमी से शरीर में सोडियम का स्तर असंतुलित होने लगता है, जिससे भ्रम, मस्तिष्क की सूजन और कोमा जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वस्थ रहने के लिए दिन में 5 ग्राम तक (1 बड़ा चम्मच) नमक खा सकते हैं। बच्चों के लिए ये मात्रा आधी है। प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड (चिप्स, नमकीन) में भी छिपा नमक होता है इसलिए इनसे बचें। संतुलित मात्रा में नमक का सेवन करके शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।

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क्या आप भी रहते हैं कमर दर्द से परेशान, तो इन योगासनों को करें अपनी दिनचर्या में शामिल, मिलेगा आराम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कमर दर्द एक आम समस्या बन गई है। लंबे समय तक बैठना, गलत पोश्चर और तनाव इसकी बड़ी वजहें हैं। अगर आप भी कमर दर्द से परेशान हैं, तो दवाओं से पहले योग को आजमाएं। योग न सिर्फ दर्द से राहत देता है, बल्कि रीढ़ को मजबूत और लचीला भी बनाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, रोजाना कुछ खास योगासनों का अभ्यास कमर दर्द को कम करने में कारगर है। आइए जानते हैं उन योगासनों के बारे में जो आपकी कमर को स्वस्थ रख सकते हैं।

1. शलभासन
शलभासन कमर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में बेहद प्रभावी है। इसे करने के लिए पेट के बल लेट जाएं, हथेलियां नीचे रखें और सांस लेते हुए पैरों को पीछे की ओर उठाएं। सिर और छाती को भी थोड़ा ऊपर उठाएं। 20-30 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें, फिर धीरे से नीचे आएं। ये आसन रीढ़ को लचीलापन देता है और निचली कमर के दर्द को कम करता है।

2. भुजंगासन
भुजंगासन कमर दर्द के लिए सबसे लोकप्रिय योगासनों में से एक है। पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों के नीचे रखें। सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं और नजर सामने रखें। 15-20 सेकंड तक रुकें, फिर धीरे से नीचे आएं। ये आसन रीढ़ को खींचता है, पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है और कमर दर्द से राहत देता है। इसे रोजाना 4-5 बार करें।

3. बालासन
बालासन कमर को आराम देने और तनाव कम करने के लिए शानदार है। घुटनों के बल बैठें, सांस छोड़ते हुए आगे झुकें और माथा जमीन पर टिकाएं। हाथों को आगे या पीछे रख सकते हैं। 30 सेकंड तक इस मुद्रा में रहें। ये आसन रीढ़ को रिलैक्स करता है और कमर दर्द से राहत देता है।

ध्यार रखें कि ये तीनों आसन नियमित तौर पर करें, साथ ही सुबह खाली पेट योग करना अच्छा होता है। प्रतिदिन पांच मिनट ये योगासन करने से आपको जल्द फायदा दिखेगा। कमर दर्द की समस्या से तो छुटकारा मिलेगा ही, कई और शारीरिक परेशानियों से निजात मिल सकता है।

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क्या आप भी करते हैं अपने चेहरे पर इन चीजों का इस्तेमाल, तो जान लीजिये इससे होने वाले नुकसान

गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है, ऐसे में हर किसी को इस मौसम में अपनी त्वचा का ध्यान रखना चाहिए। यदि गर्मी के मौसम में त्वचा का ध्यान न रखा जाए तो मई-जून में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी के चलते लोग अभी से अपनी त्वचा का ध्यान रखने लगते हैं।

ध्यान रखने के चक्कर में वो कई बार ये चेक करना भूल जाते हैं कि उन्हें क्या सूट करेगा, क्या नहीं। इसी के चलते हम आपको यहां पर कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे, जिनका इस्तेमाल आपको गर्मी के मौसम में कभी भी नहीं करना चाहिए। यदि आप इस मौसम में ये चीजें चेहरे पर लगाएंगे तो हो सकता है कि आपका चेहरा खराब हो जाए।

नींबू का रस

यदि आप नींबू का रस चेहरे पर लगा रहे हैं तो हमेशा ही इस बात का रखें कि नींबू के रस में पाए जाना वाला एसिड त्वचा को ड्राई कर देता है। ऐसे में जब आप इस भीषण गर्मी में नींबू का रस लगाकर बाहर जाएंगे तो आपको चेहरे पर जलन या एलर्जी की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए इसका उपयोग जितना हो सके न ही करें।

हल्दी

जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है, उन्हें तो गर्मी के मौसम में हल्दी के इस्तेमाल से बचना ही चाहिए। हल्दी के उपयोग से कई बार त्वचा पर सूजन तक आ जाती है। इतना ही नहीं, कई बार इसके इस्तेमाल से ही आपकी त्वचा पीली पड़ सकती है। इसलिए हल्दी से भी दूरी बनाकर रखें।

टी ट्री ऑयल

आजकल अक्सर फेसपैक से लेकर फेस वॉश तक में ये पाया जाता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, लेकिन यह संवेदनशील त्वचा पर जलन पैदा कर सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल कभी भी सीधे त्वचा पर न करें। इसे हमेशा पानी या किसी अन्य तेल के साथ मिलाकर प्रयोग करें।

दही

गर्मी के मौसम में त्वचा पर दही काफी फायदा पहुंचाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही दही अगर ज्यादा समय के लिए त्वचा पर लगाया जाए तो आपकी त्वचा को डैमेज कर सकता है। इसलिए भले ही ये आपको सूट कर रहा है, लेकिन फिर भी इसका इस्तेमाल कम से कम ही करें।

चंदन का पेस्ट

वैसे तो गर्मी के इस मौसम में चंदन का पेस्ट त्वचा को काफी फायदा पहुंचाता है लेकिन यदि इसका इस्तेमाल ज्यादा समय के लिए किया जाए तो इससे त्वचा पर रिएक्शन हो सकता है। इसलिए या तो इसके इस्तेमाल से दूर रहें, लेकिन यदि आप इस्तेमाल कर रहे हैं तो समय का खास ध्यान रखें।

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क्या आप भी कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं से हैं परेशान, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, कुछ ही दिनों में मिलेगी राहत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब्ज और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। गलत खानपान, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लोग अक्सर पेट से जुड़ी परेशानियों का सामना करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि योग इन समस्याओं से निजात दिलाने का एक प्राकृतिक और असरदार तरीका हो सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खास योगासन न सिर्फ कब्ज को दूर करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं। आइए जानते हैं चार ऐसे योगासनों के बारे में, जो रोजाना करने से आपको कुछ ही दिनों में राहत मिल सकती है।

1. पवनमुक्तासन 
पवनमुक्तासन को कब्ज दूर करने का सबसे कारगर योग माना जाता है। ये आसन पेट में जमा गैस को बाहर निकालता है और पाचन को बेहतर बनाता है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़कर छाती की ओर लाएं और हाथों से उन्हें पकड़ लें। सिर को थोड़ा ऊपर उठाएं और नाक को घुटनों की ओर ले जाने की कोशिश करें। इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें और गहरी सांस लें। रोजाना सुबह इसे करने से पेट हल्का महसूस होता है और मल त्याग आसान हो जाता है।

2. वज्रासन 
वज्रासन खाने के बाद भी किया जा सकता है, जो इसे खास बनाता है। ये आसन पाचन अंगों में रक्त संचार बढ़ाता है और कब्ज से राहत देता है। इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठें, एड़ियों को अलग रखें और नितंबों को एड़ियों के बीच टिकाएं। पीठ सीधी रखें और हाथों को जांघों पर रखें। इस स्थिति में 2-3 मिनट तक रहें। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पाचन क्रिया सुधरती है।

3. भुजंगासन
भुजंगासन पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को साफ करता है। इसे करने के लिए पेट के बल लेट जाएं। हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और सांस लेते हुए सीने को ऊपर उठाएं। नजर सामने रखें और इस स्थिति में 15-20 सेकंड तक रहें। फिर धीरे से नीचे आएं। ये आसन पेट पर दबाव डालता है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या कम होती है। रोजाना 4-5 बार इसे दोहराएं।

4. बालासन 
बालासन तनाव कम करने के साथ-साथ पाचन अंगों को आराम देता है। इसे करने के लिए घुटनों पर बैठें, फिर आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन पर टिकाएं। हाथों को आगे की ओर बढ़ाएं या शरीर के पास रखें। गहरी सांस लेते हुए 1-2 मिनट तक इस मुद्रा में रहें। ये आसन पेट को हल्का मालिश देता है, जिससे मल त्याग में आसानी होती है।

(साभार)


क्या आप भी रखना चाहते हैं अपने हार्ट को स्वस्थ, तो अपनी इन आदतों में करें सुधार 

हृदय रोगों के बढ़ते मामले दुनियाभर में चिंता का कारण बने हुए हैं। हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं के चलते हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी हृदय की बीमारियों का प्रमुख कारण है।

ब्लड प्रेशर का अक्सर बढ़ा रहना या धमनियों में प्लाक का निर्माण होने से हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।

धमनियों में प्लाक के निर्माण को मेडिकल की भाषा में एथेरोस्क्लेरोसिस के नाम से जाना जाता है, इसमें धमनियों की दीवारों पर फैट, कोलेस्ट्रॉल या कैल्शियम जमा हो जाते हैं। इस तरह के जमाव के कारण रक्त प्रवाह बाधित हो जाती है। समय रहते अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।

धमनियों में प्लाक बनने के दुष्प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिस तरह से हमारी जीवनशैली में नकारात्मक बदलाव आया है, उसने धमनियों में प्लाक बनने की समस्या को काफी बढ़ा दिया है। धूम्रपान, शराब और शारीरिक निष्क्रियता जैसी आदतें दिल की बीमारियों के जोखिम को और भी बढ़ा देती हैं।

धमनियों में प्लाक बनने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। जो लोग सेचुरेटेड और ट्रांस फैट वाली चीजें (जैसे तली-भुनी और प्रोसेस्ड फूड्स) अधिक खाते हैं उनमें प्लाक बनने का खतरा रहता है। इन सबके साथ अगर आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है तो इससे धमनियों पर दबाव अधिक हो जाता है जिससे धमनियों की दीवारें कमजोर हो जाती हैं और इसके फटने का खतरा हो सकता है।

आपकी भी तो नहीं हैं ऐसी गड़बड़ आदतें?

कुछ गड़बड़ आदतें प्लाक बनने के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोगों को सावधान हो जाना चाहिए। सिगरेट में मौजूद निकोटीन और टार रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और धमनियों को संकीर्ण कर देते हैं। इसी तरह अधिक शराब का सेवन लिवर और हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है जिससे धमनियों से रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है।

अध्ययनों से पता चलता है अधिक वजन या मोटापे के शिकार लोगों में इंसुलिन प्रतिरोध का जोखिम भी अधिक होता हैजो धमनियों में प्लाक जमा होने के खतरे को बढ़ा देती है।

धमनियों में प्लाक के निर्माण को रोकने के उपाय

अगर हम सभी नियमित रूप से बस इन चार बातों को ध्यान में रखें तो हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
धमनियों में संकुचन की समस्या को रोकने के लिए धूम्रपान बिल्कुल बंद कर दें। हृदय के स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान बेहद खतरनाक हो सकता है।
आहार पर विशेष ध्यान दें। भोजन में हेल्दी फैट वाली चीजें जैसे देसी घी, बादाम, अखरोट, मछली आदि को शामिल करें। तले-भुने चीजों का सेवन कम करें।
फाइबर युक्त आहार जैसे मकई, गेहूं के खाद्य पदार्थ, जई, दाल, सब्जियां और बीन्स को भोजन में शामिल करें।
नियमित रूप से व्यायाम करें। योग और प्राणायाम से काफी लाभ मिल सकता है।

(साभार)


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