Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

क्या आपको भी है फैटी लिवर की समस्या- तो सिर्फ खराब डाइट ही नहीं, ये आदतें भी हो सकती हैं जिम्मेदार

Category Archives: जीवन शैली

क्या आपको भी है फैटी लिवर की समस्या- तो सिर्फ खराब डाइट ही नहीं, ये आदतें भी हो सकती हैं जिम्मेदार

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फैटी लिवर एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। लोग अक्सर मान लेते हैं कि इसका कारण केवल असंतुलित खानपान है, जबकि हकीकत यह है कि कई अन्य जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी इस रोग का खतरा बढ़ाती हैं।

अगर लिवर में वसा की मात्रा 5–10% तक पहुंच जाए, तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर लिवर रोग में बदल सकता है। इसलिए खानपान के साथ-साथ इन कारणों पर भी नज़र रखना जरूरी है—

1. शारीरिक निष्क्रियता और नींद की कमी
लंबे समय तक बैठे रहना, व्यायाम न करना और खराब नींद की आदतें लिवर में फैट जमा होने का कारण बन सकती हैं। इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

2. तनाव और दवाओं का अधिक सेवन
लगातार तनाव से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो लिवर के कार्य को बाधित करता है। वहीं, कुछ दवाओं का लंबे समय तक या अधिक मात्रा में सेवन भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

3. तेजी से वजन कम करना
कम समय में ज्यादा वजन घटाना भी लिवर के लिए हानिकारक हो सकता है। इस दौरान फैट मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया बिगड़ जाती है और लिवर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

बचाव के उपाय
फैटी लिवर से बचने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन बेहद जरूरी है। अगर आपको फैटी लिवर के लक्षण महसूस हों, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। समय पर उपचार और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है।

(साभार)


तनाव और रिश्तों की खटास को करें दूर, योग से पाएं भावनात्मक मजबूती

आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में करियर, नौकरी का दबाव और व्यस्त दिनचर्या इस कदर हावी हो चुके हैं कि रिश्तों के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया है। कई लोग अपने पार्टनर से अलग शहरों या देशों में रह रहे हैं, जबकि एक ही घर में रहने वाले लोग भी काम के बोझ के कारण एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते। नतीजा यह होता है कि एक साथी को अनदेखा महसूस होता है और वह भावनात्मक रूप से अकेलापन महसूस करने लगता है।

रिश्तों में दूरी कभी-कभी इतनी गहरी हो जाती है कि व्यक्ति अंदर से टूटने लगता है। ऐसे समय में योग न सिर्फ मानसिक संतुलन लौटाने में मदद करता है, बल्कि आत्म-स्वीकृति, आत्म-प्रेम और भावनात्मक मजबूती भी देता है। अगर आप भी पार्टनर से दूरी या अकेलेपन के कारण तनाव महसूस कर रहे हैं, तो कुछ आसान योगासन आपकी मानसिक सेहत को बेहतर बना सकते हैं।

पार्टनर से दूरी के भावनात्मक लक्षण

लगातार बेचैनी या घबराहट

खालीपन और अकेलेपन की भावना

मूड स्विंग या अनचाहा रोना

आत्मग्लानि या आत्म-संकोच

ध्यान की कमी और थकान

नींद में गड़बड़ी (बहुत कम या बहुत ज्यादा नींद)

इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ सकता है, इसलिए इन्हें समय रहते संभालना जरूरी है।

अकेलेपन और तनाव से राहत देने वाले योगासन

1. शवासन – यह रिलैक्सेशन पोज़ शरीर और दिमाग दोनों को शांत करता है। इससे थकान, अनिद्रा, सिरदर्द और तनाव में राहत मिलती है।

2. अनुलोम-विलोम प्राणायाम – गहरी सांसों का यह अभ्यास ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है, मानसिक स्थिरता देता है और चिंता को कम करता है।

3. बालासन – एक आरामदायक पोज़ जो तनाव, चिंता, पीठ दर्द और पाचन की समस्या में मदद करता है। यह डर और असुरक्षा की भावना को भी शांत करता है।

4. सेतुबंधासन – यह आसन हॉर्मोन बैलेंस करता है, मूड बेहतर बनाता है और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है।

5. ध्यान (मेडिटेशन) – रोज़ाना 10-15 मिनट ध्यान करने से एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है और ओवरथिंकिंग पर काबू पाया जा सकता है।

अगर आप अपने रिश्ते को तुरंत सुधार नहीं पा रहे हैं, तो पहले खुद को संभालना ज़रूरी है। योग और ध्यान न सिर्फ आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएंगे, बल्कि आपको फिर से एक मजबूत और संतुलित जीवन की ओर ले जाएंगे।

(साभार)


महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा ज्यादा क्यों? जानिए कारण और बचाव

पहले आर्थराइटिस (Arthritis) को केवल उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता था, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है। सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न, सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में दर्द, या उंगलियों में सूजन—अगर आप इन लक्षणों को नज़रअंदाज कर रहे हैं, तो यह आर्थराइटिस के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।

शोध बताते हैं कि महिलाओं में आर्थराइटिस का खतरा पुरुषों की तुलना में कहीं अधिक है। यह केवल उम्र या कैल्शियम की कमी का नतीजा नहीं है, बल्कि हार्मोनल बदलाव, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल भी इसका बड़ा कारण बन सकते हैं।

महिलाओं में खतरा क्यों ज्यादा?

हार्मोनल बदलाव: अमेरिकन कॉलेज ऑफ रूमेटोलॉजी के अनुसार, एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों और जोड़ों की सुरक्षा करता है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर गिरने से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है।

ऑटोइम्यून डिजीज का असर: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, रुमेटाइड आर्थराइटिस महिलाओं में पुरुषों से 2-3 गुना ज्यादा पाया जाता है।

गर्भावस्था और वजन: गर्भावस्था के दौरान बढ़ा वजन और पेल्विक हड्डियों पर दबाव आगे चलकर घुटनों और कूल्हों को प्रभावित कर सकता है।

जोखिम क्यों बढ़ रहा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 40 की उम्र के बाद 60% महिलाओं में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षण दिखने लगते हैं। भारत में 70% महिलाएं विटामिन डी की कमी से जूझ रही हैं, जो जोड़ों की सेहत को और बिगाड़ देती है।

किन्हें ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?

मेनोपॉज के बाद की महिलाएं

गर्भवती या हाल ही में मां बनी महिलाएं

जिनके परिवार में आर्थराइटिस का इतिहास है

मोटापा या अधिक वजन वाली महिलाएं

आर्थराइटिस से बचाव के आसान उपाय

पौष्टिक आहार लें: दूध, दही, पनीर, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड (मछली, अखरोट, अलसी के बीज) और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स (हल्दी, अदरक, लहसुन) का सेवन करें।

नियमित व्यायाम करें: योग, वॉकिंग, साइकिलिंग और तैराकी जोड़ों की लचीलापन बनाए रखते हैं।

वजन नियंत्रित रखें: अधिक वजन घुटनों पर दबाव डालता है, इसे कम करना जरूरी है।

हड्डियों की जांच कराएं: मेनोपॉज के बाद नियमित रूप से डॉक्टर से हड्डियों और जोड़ों की सेहत की जांच कराएं।

थोड़ी सी सतर्कता और सही जीवनशैली अपनाकर महिलाएं न केवल आर्थराइटिस के खतरे को कम कर सकती हैं, बल्कि लंबे समय तक जोड़ों को मजबूत और स्वस्थ भी रख सकती हैं।

(साभार)


हाथ-पैर और आंखों के ये बदलाव बता सकते हैं बढ़ता कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल की समस्या अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। ब्लड टेस्ट में बार-बार कोलेस्ट्रॉल लेवल का बढ़ना हृदय रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित जांच और समय रहते सतर्कता ही इस खतरे से बचा सकती है।

गलत खानपान, फास्ट फूड, व्यायाम की कमी, अधिक वजन और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से हार्ट की बीमारी रही है या जो लंबे समय तक बैठे-बैठे काम करते हैं, उनमें खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल के संकेत केवल आंतरिक नहीं होते, बल्कि शरीर के कुछ बाहरी बदलाव भी इसकी ओर इशारा कर सकते हैं। हाथ-पैरों या घुटनों के पास पीले रंग के सख्त उभार (टेंडन जैंथोमाटा) इसका एक मुख्य लक्षण हैं। यह त्वचा के नीचे कोलेस्ट्रॉल का जमाव होता है, जो समय के साथ बड़ा और संवेदनशील हो सकता है। इसी तरह आंखों के आसपास पीले उभार या आइरिस के चारों ओर सफेद-भूरे घेरों (कॉर्नियल आर्कस) पर भी ध्यान देना जरूरी है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि 20 साल की उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण दिख सकते हैं, हालांकि 40 के बाद खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में अपने जोखिम कारकों और पारिवारिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टर की सलाह पर नियमित ब्लड टेस्ट कराना और समय रहते कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।


बिना दवा के कंट्रोल करें थायराइड, बस इन 5 योगासनों का करें अभ्यास, मिलेगा फायदा

थायराइड गर्दन में स्थित एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करती है। आज के समय में इसकी समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा देखने को मिल रही है। वजन बढ़ना, थकान, गले में सूजन, तनाव और हार्मोनल असंतुलन इसके आम लक्षण हैं।

अच्छी खबर यह है कि कुछ आसान योगासन नियमित रूप से करने से थायराइड को प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। योग न केवल इस ग्रंथि को सक्रिय करता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम कर हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है। यहां पांच ऐसे असरदार योगासन बताए जा रहे हैं, जो थायराइड मरीजों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हैं—

1. सर्वांगासन
थायराइड ग्रंथि को सक्रिय कर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह आसन मेटाबॉलिज्म को सुधारता है। पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और कमर को हाथों से सपोर्ट दें। पूरा शरीर कंधों पर टिकाएं। हाई ब्लड प्रेशर या गर्दन की समस्या होने पर पहले डॉक्टर से सलाह लें।

2. मत्स्यासन
गले की मांसपेशियों को स्ट्रेच कर थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है। पद्मासन में बैठकर पीछे की ओर झुकें, पीठ के बल लेटें और कोहनियों को जमीन पर टिकाएं। सिर को पीछे की ओर उठाकर गहरी सांस लें और छोड़ें।

3. भुजंगासन
गले और छाती को खोलता है तथा ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है। पेट के बल लेटें, हथेलियों को कंधों के पास रखें और सांस लेते हुए ऊपरी शरीर को उठाएं। 20–30 सेकंड तक रुकें। यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है और गर्दन-पीठ का तनाव कम करता है।

4. उष्ट्रासन
गले को पीछे की ओर स्ट्रेच कर थायराइड को सक्रिय करता है। घुटनों के बल बैठकर हाथों को पीछे ले जाकर एड़ियों को पकड़ें, फिर पेट को आगे की ओर निकालें और कुछ देर इस स्थिति में रहें।

5. भ्रामरी प्राणायाम
तनाव को कम करने और हार्मोनल संतुलन सुधारने में मदद करता है। आंखें बंद करें, गहरी सांस लें, दोनों कानों को अंगूठों से बंद करें और मधुमक्खी जैसी ध्वनि निकालें।

(साभार)


मानसून में क्यों झड़ते हैं बाल? जानिये इसके कारण और समाधान

मानसून की फुहारें जहां गर्मी से राहत देती हैं, वहीं बालों के लिए यह मौसम एक नई चुनौती बनकर सामने आता है। हवा में मौजूद अधिक नमी और लगातार गीलापन बालों को कमजोर बनाता है, जिससे बाल झड़ने, टूटने और संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप इस मौसम में अपने बालों की देखभाल के लिए कुछ खास उपाय अपनाएं।

1. बारिश में भीगने के बाद साफ पानी से धोना है जरूरी
बारिश का पानी अक्सर प्रदूषण, धूल और रसायनों से भरा होता है, जो बालों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। बारिश में भीगने के तुरंत बाद बालों को साफ पानी से धोकर सुखा लेना चाहिए, ताकि डैंड्रफ और स्कैल्प संक्रमण से बचा जा सके।

2. हल्के तेल से करें मसाज, हेवी ऑयल से बचें
नमी भरे इस मौसम में भारी तेल लगाने से बाल और भी चिपचिपे हो सकते हैं। नारियल, बादाम या आर्गन ऑयल जैसे हल्के तेलों से हल्की मसाज सप्ताह में एक या दो बार करना फायदेमंद होता है। ध्यान रखें कि तेल को अधिक देर तक न छोड़ें, वरना स्कैल्प में गंदगी जम सकती है।

3. सल्फेट-मुक्त शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करें
सल्फेट वाले शैंपू बालों के प्राकृतिक तेल को हटा देते हैं, जिससे बाल रूखे और कमजोर हो जाते हैं। मानसून में सौम्य और सल्फेट-फ्री शैंपू से बाल धोएं और हर बार कंडीशनर जरूर लगाएं ताकि बालों में नमी बनी रहे।

4. गीले बालों में न करें कंघी, साझा न करें तौलिया
गीले बाल सबसे कमजोर होते हैं, ऐसे में उनमें कंघी करने से वे टूट सकते हैं। बाल सुखाने के लिए तौलिया को हल्के हाथों से इस्तेमाल करें। तौलिया और कंघी को किसी के साथ साझा न करें, इससे फंगल इंफेक्शन का खतरा रहता है।

5. ड्रायर का उपयोग सीमित करें, और करें ‘कूल मोड’ पर
हीट स्टाइलिंग टूल्स बालों की नमी छीनकर उन्हें और ज्यादा डैमेज कर सकते हैं। अगर ड्रायर का उपयोग करना हो तो हमेशा ‘कूल मोड’ चुनें और अत्यधिक गर्मी से बचें।

6. खुले बालों से बचें, बनाएं सुरक्षात्मक हेयर स्टाइल
मानसून में खुले बाल गंदगी और नमी को जल्दी आकर्षित करते हैं। इस मौसम में चोटी, बन या जूड़ा जैसी स्टाइल से बालों को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह बालों के उलझने और टूटने से भी बचाते हैं।

7. हफ्ते में एक बार हेयर मास्क जरूर लगाएं
त्वचा विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार मीणा के अनुसार, मानसून में बालों को खास हाइड्रेशन और पोषण की जरूरत होती है। सप्ताह में एक-दो बार डीप कंडीशनिंग या हेयर मास्क लगाने से बालों की जड़ों को मजबूती मिलती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार भी जरूरी है।

निष्कर्ष:
मानसून में बालों की देखभाल थोड़ी मेहनत जरूर मांगती है, लेकिन सही उपायों और थोड़ी सावधानी से आप इस मौसम में भी अपने बालों को मजबूत, स्वस्थ और चमकदार बनाए रख सकते हैं।

(साभार)


सिर्फ थकान ही नहीं, 170 से ज्यादा बीमारियों की जड़ बन सकती है नींद की अनियमितता

एक नई वैश्विक रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अच्छी नींद न लेना सिर्फ थकान या चिड़चिड़ेपन तक सीमित नहीं, बल्कि यह 170 से अधिक बीमारियों की जड़ बन सकती है। चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी और आर्मी मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा 88,000 से ज्यादा लोगों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि नींद की अनियमितता से दिल, दिमाग, लिवर, और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नींद केवल विश्राम का माध्यम नहीं, बल्कि एक बुनियादी जरूरत है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद न लेने पर शरीर के हर सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है, जो लंबे समय में गंभीर रोगों को जन्म दे सकता है।

शोध में नींद से जुड़ी छह आदतों की जांच
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने नींद की अवधि, नींद आने का समय, नींद का चक्र, नींद की गहराई, गुणवत्ता और रात में बार-बार जागने जैसी आदतों का विश्लेषण किया। निष्कर्षों के अनुसार, जो लोग हर दिन अलग-अलग समय पर सोते-जागते हैं, उनमें बीमारियों का जोखिम स्थायी रूप से बढ़ जाता है।

रात 12:30 बजे के बाद सोने वालों में लिवर सिरोसिस का खतरा 2.6 गुना अधिक देखा गया।

पार्किंसन रोग का जोखिम 2.8 गुना और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 1.6 गुना बढ़ा।

दिल और दिमाग को भी झेलनी पड़ती है मार
रिपोर्ट में बताया गया कि खराब नींद हृदय और मस्तिष्क की सेहत पर भी गहरा असर डालती है।

अनिद्रा और स्लीप एपनिया जैसी स्थितियाँ हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाती हैं।

नींद की कमी से उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, और सूजन की समस्याएं सामने आती हैं।

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के एक अन्य अध्ययन में पुष्टि की गई कि अनियमित नींद सीधे तौर पर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से जुड़ी होती है।

याददाश्त और मानसिक सेहत पर भी असर
नींद की कमी का असर मानसिक क्षमताओं पर भी पड़ता है। लगातार कम नींद लेने वालों में याददाश्त कमजोर होने, निर्णय क्षमता में गिरावट और ध्यान भटकने की समस्या देखी जाती है। दीर्घकालिक तौर पर इससे अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

नींद की अनदेखी से क्या-क्या हो सकता है नुकसान?
विशेषज्ञों के अनुसार, सभी उम्र के लोगों के लिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। अनियमित नींद के कारण:

शरीर में स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ का स्तर बढ़ता है और मेलाटोनिन का स्तर बिगड़ता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है।

भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन बढ़ता है, जबकि भूख को नियंत्रित करने वाला हार्मोन लेप्टिन घटता है, जिससे वजन बढ़ सकता है।

(साभार)


क्या आप भी बरसात के मौसम में होने वाली छोटी-छोटी बातों को भूल जाते हैं, जानें कैसे रखे खुद को सुरक्षित

सपना बिष्ट

बारिश में बरती जाने वाली सावधानियां नजर छोटी आती है पर काम बड़ी आती हैं। बारिश का मौसम आते ही जहां मौसम सुहाना हो जाता है, पहाड़ो की वादियां में एक अलग ही छटा देखने को मिलती हैं। वहीं कई सारी घटनाओं को भी बुलावा देता है बरसात का मौसम, खासकर पहाड़ी इलाके हमेशा से ही भयावह रूप देखने को मजबूर रहे हैं। भूस्खलन हो या पथरों का गिरना या फिसलन भरे रास्ते या बोछारों के बीच सामने आती गाड़ी का न दिखना। शहरों के हाल भी इससे जुदा नही हैं।

बारिश का मौसम सुहाना होने के साथ लाता है कई परेशानियां, तो आइए जानते हैं क्या सावधानियां बरती जा सकती है-

1.  हमेशा जब भी घर से बाहर निकले वेदर फाॅरकाॅस्ट जरूर देखे।
2.  बारिश के मौसम में जब तक जरूरी न हो घर पर ही रहे, अगर बाहर निकले भी तो रास्तों पर गाड़ी आराम से चलाए।
3.  रोड़ो के किनारों में जाने की कोशिश न करे, नाली के पानी का बहाव उपर तक आने से दिखाई नहीं पड़ता तो सावधानी हटने से दुघर्टना होने की संभावना बढ़ जाती हैं।
4.  खंभों पर झुलती खुली तार की लाईनों से दूरी बनाए रखे, करंट का खतरा बना रहता हैं।
5. बारिश के मौसम में पानी जमा न होने दे, इससे डेंगु के मच्छरों का खतरा बढ़ जाता हैं।
6. अपने साथ हमेशा रेनकोट रखे, एक जोड़ी कपड़े रखना भी न भूले।
7. घर का खाना ही खाए, बाहर का  स्ट्रीट फूड़ खाने से थोड़ा बचना चाहिए।

गुनगुना या गर्म पानी ही पीए, बरसात के मौसम में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता हैं कहते है न इलाज से बेहतर रोकथाम हैं। तो खुद को चुस्त दुरूस्त और तंदुरूस्त रखने के लिए अपने शरीर का ध्यान रखें। मन चंचल है उसकों समझाए, क्या करना उचित हैं और क्या नहीं। खुद को सुरक्षित रखना आसान हैं बस आपका एक सही कदम आपको बरसातीय खतरों से बचा सकता हैं।


बार-बार होती है एसिडिटी? जानें इसके कारण और कारगर घरेलू इलाज

भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और खराब खानपान के चलते आज एसिडिटी एक आम समस्या बन चुकी है। सीने में जलन, खट्टी डकारें और पेट फूलने जैसी परेशानियां कई लोगों के लिए रोज़मर्रा की बात हो गई हैं। यह समस्या तब होती है जब पेट का अम्ल (एसिड) भोजन नली में लौट आता है, जिससे जलन और बेचैनी महसूस होती है। मेडिकल भाषा में इसे गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिज़ीज (GERD) कहा जाता है। अच्छी बात यह है कि कुछ घरेलू उपायों से इस परेशानी को शुरूआती स्तर पर आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

एसिडिटी के प्रमुख कारण:
एसिडिटी आमतौर पर पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की अत्यधिक मात्रा बनने से होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

मसालेदार और तला-भुना भोजन

देर रात खाना और तुरंत लेटना

धूम्रपान और शराब का सेवन

अत्यधिक चाय/कॉफी पीना

तनाव और नींद की कमी

इन आदतों में सुधार कर एसिडिटी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

घरेलू उपाय जो तुरंत राहत दें:

सौंफ:
पाचन शक्ति बढ़ाने वाली सौंफ में ऐसे तत्व होते हैं जो गैस, सूजन और जलन को कम करने में मदद करते हैं। आप एक चम्मच सौंफ चबा सकते हैं या सौंफ का पानी (उबला हुआ पानी + सौंफ) पी सकते हैं।

ठंडा दूध:
दूध में मौजूद कैल्शियम अतिरिक्त एसिड को निष्क्रिय करता है। बिना चीनी का ठंडा दूध पीने से जलन में राहत मिलती है। हालांकि यह उपाय कभी-कभी ही कारगर होता है; बार-बार एसिडिटी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

केला:
फाइबर से भरपूर केला पेट को शांत करता है और कब्ज जैसी दिक्कतों को भी कम करता है। एसिडिटी महसूस होने पर एक पका हुआ केला खाना लाभकारी होता है।

जीरे का पानी:
जीरा पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है और गैस को बाहर निकालने में मदद करता है। एक चम्मच जीरे को एक गिलास पानी में उबालें और ठंडा करके पी लें।

निष्कर्ष:
ये घरेलू उपाय सामान्य और शुरुआती एसिडिटी के लक्षणों में राहत देने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यदि एसिडिटी बार-बार हो रही है या लक्षण गंभीर हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें और चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें। खानपान और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव आपकी पाचन से जुड़ी समस्याओं को दूर रख सकते हैं।

(साभार)


बिना सिगरेट पीए भी फेफड़े हो सकते हैं खराब, जानें छिपे खतरे

आमतौर पर फेफड़ों की बीमारियों को धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सिगरेट छुए भी आपके फेफड़े खतरे में हो सकते हैं। खासकर 30 की उम्र से पहले ही अब युवाओं में भी फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

लखनऊ स्थित एक अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रवि प्रकाश सिंह के अनुसार, सिर्फ तंबाकू से दूरी ही फेफड़ों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रदूषित हवा, घरेलू धुआं, अगरबत्ती, किचन गैस का धुआं, यहां तक कि रूम फ्रेशनर और सेंटेड कैंडल्स भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण से हर साल करीब 70 लाख लोगों की जान जाती है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण जैसे PM2.5 और NO₂ सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, लैंसेट के अध्ययन में पाया गया कि लकड़ी या गोबर से खाना बनाने वाले घरों में रहने वालों को सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

CDC के मुताबिक, पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं में सांस लेने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा 20–30% तक बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग नियमित रूप से श्वसन व्यायाम करें, प्रदूषण से बचें और साफ-सुथरे वातावरण में रहें ताकि फेफड़ों की कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।


Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp