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बढ़ता स्क्रीन टाईम-बढ़ती चिंताए और हल क्या? जाने कैसे करे स्किप, स्क्रीन टाईम

बढ़ता स्क्रीन टाईम-बढ़ती चिंताए और हल क्या? जाने कैसे करे स्किप, स्क्रीन टाईम

बढ़ता स्क्रीन टाईम-बढ़ती चिंताए और हल क्या? जाने कैसे करे स्किप, स्क्रीन टाईम

सपना बिष्ट 

रोजाना की जरूरतों के बीच अपने शरीर के लिए निकाले समय

आजकल हर काम के लिए हम मोबाइल की तरफ देखते हैं, देखे भी क्यों न हमारे सभी कामों को झटपट करने की क्षमता है उसके पास। हमारा सारा समय फोन के पास बैठे बैठें गुजर जाता हैं। नौकरी करने वाले लोगों को कम्प्यूटर का ज्ञान होना जरूरी हैं क्योंकि आजकल हर काम उसीमें होता हैं। स्क्रीन टाईम का बढ़ना जहां एक ऐसी बात है जो बहुत मामूली लगती हो पर इसके परिणाम सेहत की दृष्टि से बहुत गंभीर हो सकते हैं। तो ऐसा क्या किया जाए, जिससे असर को कम किया जा सकता हो ।

अपनाए ये तरीके जो आपके जीवन में महत्तवपूर्ण बदलाव ला सकतें हैं

1. ‘20 20 20 का नियम’ 20 मिनट में 20 सैकेंड़ के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें।
2. नियमित ब्रेक लेना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हर घंटे में पांच से 10 मिनट का आखों को दिया गया आराम, आपको अच्छा महसूस करवाएगा।
3. आखों को हाइड्रेट रखें, आखें हमारे शरीर के सबसे सेंसिटिव अंगों मे से एक हैं। जिसको आराम देना बेहद जरूरी है। आखों को नम रखने के लिए खूब पानी पिए और कृत्रिम यानी नकली आसू का भी आप उपयोग कर सकते हैं।
4. ब्लू लाइट वाले फिल्टर का इस्तमाल करे, हो सके तो स्क्रीन प्रोटेक्टर जरूर लगाए साथ ही ब्लू लाइट को कम करने वाले सॉफ्टवेयर का उपयोग करें।
5. स्क्रीन देखते देखते आखें ड्राई होना आम बात है। इसलिए काम करते वक्त पलके झपकाते रहे, इससे आखों को नमी मिलेगी और ड्राईनेस की वजह से होने वाली जलन भी कम होगी।

स्क्रीन देखने से क्या होता है

स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आसानी से फैल जाती है और इसमें ज़्यादा ऊर्जा होती है। अगर हम लंबे समय तक इसके संपर्क में रहते हैं, तो इससे आंखों की सबसे अंदर की परत (रेटिना) को नुकसान हो सकता है और उम्र बढ़ने पर आंखों की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।
जब हम स्क्रीन पर लगातार नजरें घुमाते हैं, तो आंखों को बार-बार फोकस करना पड़ता है। इससे आंखों की मांसपेशियों में थकान होने लगती है। इसके अलावा, स्क्रीन देखते समय हम कम पलकें झपकाते हैं क्योंकि हमें ज़्यादा ध्यान से देखना पड़ता है। इससे आंखें सूखने और थकने लगती हैं।

अपने शरीर का ध्यान रखना काम के साथ साथ आपकी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए, जिससे आपके जीवन मेें रोगों से दूरी बने रहे और आप एक बेहतर जीवन जी सके।

                                                                                                                                                             


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