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वन खंड की जमीन,अवैध निर्माण और सरमायदार…?

वन खंड की जमीन,अवैध निर्माण और सरमायदार…?

वन खंड की जमीन,अवैध निर्माण और सरमायदार…?

सतीश मुखिया

मथुरा: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास हेतु प्रयासरत है लेकिन कार्यपालिका में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी ही उनके इन प्रयासों को बट्टा लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं।मथुरा भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली रही है और इन दिनों ब्रिज में 07 दिवसीय मुड़िया पूर्णिमा मेला की धूम है।

देश-विदेश से भक्तजन श्री गिरराज महाराज( गोवर्धन बाबा) की 21 किलोमीटर परिक्रमा लगाने हेतु आ रहे हैं और जिला प्रशासन व्यवस्थाओं को संभालने में व्यस्त है। इसी का फायदा उठाते हुए कुछ सरमायदार और पूंजी पति लोग खसरा संख्या :19 और 22 ,सराय आजमाबाद में वन खंड की इन जमीनों पर धड़ल्ले से अवैध भवनों का निर्माण खुले आम कर रहे हैं। यह जमीन उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग में वन खंड के रूप में दर्ज हैं और इन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण भारतीय न्याय संहिता के अनुसार दंडनीय अपराध है लेकिन इन पूंजी पतियों द्वारा सिस्टम और व्यवस्था में कट्टर ईमानदार कर्मचारियों से जुगाड़ बनाकर इन जमीनों के ऊपर यह बिना डरे और बेखौफ होकर धड़ल्ले से ऊंचे ऊंचे भवनों का निर्माण कर रहे हैं। जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को भारी मात्रा में राजस्व की हानि हो रही है। मथुरा वृंदावन में जब से बिल्डरों की नजर इस पवित्र धरती पर पड़ी है शहर और देहात क्षेत्र की जमीनों की कीमतों में भारी वृद्धि हो गई है।

नगर निगम मथुरा वृंदावन की सीमा बढ़ने के बाद इसमें लगभग 18 से 20 अन्य गांव शामिल किए गए जिसमें ग्राम पंचायत की खाली पड़ी हुई बेस कीमती मथुरा शहर में शामिल हो गई। जिस पर भू माफिया और उनके गुर्गे अपनी निगाह लगाकर बैठे हुए हैं। इन जमीनों के पट्टे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2010 में खारिज/ निलंबित कर दिए गए और जिन लोगों का इन जमीनों पर कब्जा है उनसे इन जमीनों को पीपी एक्ट के तहत खाली कराने हेतु निर्देश दे दिए गए लेकिन भारतीय सिस्टम के आगे सब फेल हैं और जिन लोगों के पट्टे खारिज हुए वह आज भी इन जमीनों के ऊपर अपना कब्जा जमा कर बैठे हुए हैं और निर्माण की रोक के बावजूद यह लोग बिना किसी रोक टोक के अवैध निर्माण कर रहे हैं, अगर कोई गरीब व्यक्ति घर बनाता है तब उसको विभिन्न विभागों से कई तरह की परमिशन लेनी पड़ती है लेकिन हम देख सकते हैं कि कैसे बिना कोई परमिशन लिए वार्ड संख्या: 12 राधेश्याम कॉलोनी में निर्माण चल रहा है। क्या इनके द्वारा मथुरा विकास प्राधिकरण सहित अन्य विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल किया गया है, अब सवाल यह उठता है जब इन जमीनों के पट्टे खारिज कर दिए गए तब सरकार के द्वारा इन पट्टे को वापस क्यों नहीं लिया गया जांच का विषय यह भी है क्या यह लोग इन पट्टे के वास्तविक हकदार थे क्योंकि सरकार द्वारा यह स्पष्ट है कि गरीब तबके के दलित,वंचित ,भूमिहीन, कारीगर मजदूर ,खेतिहर ,असामी जो कि उस गांव का निवासी है उसी को पट्टा आवंटित किया जाएगा , सामान्य वर्ग के व्यक्ति को नहीं लेकिन भारत देश में कुछ चले ना चले जुगाड़ अवश्य चलता है इसी का फायदा उठाकर इन पूंजी पति लोगों के द्वारा अपने परिवार के लोगों के नाम से उस समय के वर्चस्व वाले लोगों से फर्जी पट्टे करवा लिए।

नगर निगम मथुरा वृंदावन के अंदर सरकारी जमीनों पर अवैध बिल्डिंगों का निर्माण होना कोई नई बात नहीं है, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या : 02 पर राधा वैली के बराबर में बिना कुरा बंटवारे के( रेलवे लाइन के बराबर) में मन्नत रेजिडेंशियल के निर्माण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अस्थाई रूप से रोक लगाई गई है लेकिन सूत्रों ने बताया कि यहां पर आज भी चोरी छुपे कार्य करवाया जा रहा है।जब कार्यपालिका ही न्यायपालिका की बात को नहीं मानेगी तब आम आदमी से क्या उम्मीद की जा सकती है अगर एक गरीब व्यक्ति कुछ गलत करता है तब प्रशासन उस पर हावी हो जाता है।अब यह देखना लाजमी होगा कि नगर निगम मथुरा वृंदावन और मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण इन अवैध बिल्डिंगों के निर्माण पर क्या विभागीय कार्यवाही करते हैं या मौन साथ कर आत्मसमर्पण कर देते हैं।


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