Drop Us An Email Any Enquiry Drop Us An Emailshailesh.lekhwar2000@gmail.com
Call Us For Consultation Call Us For Consultation +91 9818666272

मुख्यमंत्री धामी ने पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री धामी ने पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री धामी ने पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों को किया सम्मानित

विजय जड़धारी और प्रताप सिंह पोखरियाल को मिला पर्यावरण सम्मान

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया। सरकारी श्रेणी में रुद्रपुर नगर निगम को सुंदरलाल बहुगुणा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार-2025 प्रदान किया गया। पुरस्कार उप नगर आयुक्त शिप्रा जोशी ने प्राप्त किया। गैर-सरकारी श्रेणी में विजय जड़धारी और प्रताप सिंह पोखरियाल को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जागरूकता पोस्टर का विमोचन किया और इको टूरिज्म कॉर्पोरेशन द्वारा तैयार पोर्टल का लोकार्पण किया। उन्होंने उपस्थित स्कूली बच्चों को कपड़े के थैले वितरित किए और प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक वन प्रभाग में इस वर्ष कम से कम 1,000 फलदार वृक्ष लगाए जाएं, ताकि वन्य जीवों को पर्याप्त आहार मिल सके। उन्होंने प्रदेशवासियों और यात्रियों से अपील की कि वन्य जीवों को ऐसी वस्तुएं न खिलाएं जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हों। साथ ही जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य अवसरों पर पौधारोपण करने का आह्वान भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता से समृद्ध राज्य है। यहाँ के घने जंगल, पवित्र नदियाँ और हिमालयी ग्लेशियर हमारी विशिष्ट पहचान हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन रहा है। सोलर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, नमामि गंगे और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसी योजनाएं पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

राज्य सरकार हरेला पर्व को प्रकृति संरक्षण के महापर्व के रूप में बड़े स्तर पर मना रही है। नौले, धारे और वर्षा आधारित नदियों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते एक वर्ष में प्रदेश में 6,500 से अधिक जल स्रोतों का संरक्षण और उपचार किया गया है। लगभग 3.12 मिलियन घन मीटर वर्षा जल का संचयन भी हुआ है। चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक व पर्यटन अवसरों पर प्रदेश में आने वाले वाहनों में कूड़ेदान रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय खेलों को ‘ग्रीन गेम्स’ की थीम पर आयोजित किया गया। इसमें सभी मेडल और पुरस्कार ई-वेस्ट सामग्री से तथा खेल किट रीसाइकल्ड सामग्री से तैयार की गई थी।

कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड पर्यावरण के प्रति संवेदनशील राज्य है और देश के शीर्ष पांच कार्बन अवशोषक राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में जन सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है और यात्रियों को भी इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग और उसके विकल्पों पर कार्य किया जा रहा है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से राज्य में ग्रॉस एनवायरमेंट प्रोडक्ट का कांसेप्ट लागू किया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य स्तर पर पर्यावरण पुरस्कारों की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जल संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, शासन, पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News in hindi

Call Us On  Whatsapp